एक नई सोच, एक नई धारा

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झारखंड: “अपराधियों के समानांतर सरकार और लोकतंत्र विरोधी नीयत”, आदित्य साहू ने हेमंत सरकार को घेरा

जमशेदपुर: झारखंड बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद आदित्य साहू ने राज्य की हेमंत सोरेन सरकार पर तीखा प्रहार किया है। बुधवार (18 फरवरी 2026) को साकची (जमशेदपुर) स्थित एक होटल में आयोजित प्रेस-वार्ता के दौरान उन्होंने नगर निकाय चुनावों में हो रही देरी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए। साहू ने आरोप लगाया कि सरकार अपराधियों के साये में चुनाव कराकर लोकतंत्र की हत्या करना चाहती है।

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“हार के डर से ईवीएम और दलीय आधार से भाग रही सरकार”

​आदित्य साहू ने कहा कि पिछले तीन वर्षों से सरकार ने जानबूझकर निकाय चुनावों को लटकाए रखा। अब जब भाजपा कार्यकर्ताओं के आंदोलन के दबाव में चुनाव हो रहे हैं, तो सरकार नियमों के साथ खेल रही है।

  • बदलाव का विरोध: साहू ने आरोप लगाया कि 2018 में दलीय आधार और ईवीएम (EVM) से चुनाव हुए थे, लेकिन इस बार सरकार बैलेट पेपर पर चुनाव कराकर राज्य को 26 साल पीछे ले जा रही है।
  • विकास का दावा: उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि 6 साल में कोई विकास न होने के कारण सरकार को हार का डर सता रहा है, इसलिए वह दलीय आधार से भाग रही है।

अपराध और धमकियों का बोलबाला

​बीजेपी अध्यक्ष ने राज्य की कानून-व्यवस्था को ‘टूलकिट’ बताते हुए कई गंभीर आरोप लगाए:

  1. कड़िया मुंडा को धमकी: उन्होंने पूर्व लोकसभा उपाध्यक्ष कड़िया मुंडा को फोन पर मिली धमकी का जिक्र करते हुए पूछा कि जब 8 बार के सांसद सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता का क्या होगा?
  2. बीजेपी प्रत्याशियों को निशाना: चक्रधरपुर में भाजपा प्रत्याशी विजय सिंह गागराई को मिली जान से मारने की धमकी और पोस्टरबाजी का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि अपराधियों की समानांतर सरकार चल रही है।
  3. अपहरण और दबाव: जमशेदपुर के उद्योगपति पुत्र कैरव गांधी के अपहरण मामले का जिक्र करते हुए साहू ने कहा कि अगर बीजेपी सड़कों पर नहीं उतरती, तो पुलिस प्रशासन निष्क्रिय ही रहता।

“प्रशासन टूलकिट न बने, हम कोर्ट तक जाएंगे”

​साहू ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि सरकारें आती-जाती हैं, लेकिन अधिकारियों को निष्पक्ष होना चाहिए। पक्षपात करने वाले अधिकारियों के खिलाफ भाजपा न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगी। उन्होंने चुनाव आयोग से प्रत्येक बूथ पर CCTV कैमरे और केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की अपनी मांग दोहराई।

चुनावी हुंकार: आदित्य साहू ने दावा किया कि एनडीए समर्थित प्रत्याशी सभी 48 सीटों पर जीत दर्ज करेंगे। उन्होंने इसे सिर्फ एक निकाय चुनाव नहीं, बल्कि झारखंड की ‘युवा, महिला और आदिवासी विरोधी’ सरकार के खिलाफ जनादेश बताया।

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कोल्हान में चुनाव का विरोध: 21 से 23 फरवरी तक ‘बंद’ का आह्वान, आदिवासी छात्र एकता ने फूंका बिगुल

जमशेदपुर/कोल्हान: झारखंड के कोल्हान प्रमंडल में नगर निकाय चुनाव (Municipal Elections) को लेकर विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। राज्य सरकार द्वारा अनुसूचित क्षेत्रों (Scheduled Areas) में चुनाव कराने के निर्णय के खिलाफ आदिवासी छात्र एकता की केंद्रीय कमेटी ने 21, 22 और 23 फरवरी 2026 को पूरे प्रमंडल में शांतिपूर्ण ‘बंद’ का आह्वान किया है। संगठन का दावा है कि यह चुनाव संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन है।

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विरोध की मुख्य वजह: संवैधानिक पेच

​संगठन ने पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक ज्ञापन सौंपा है। विरोध का मुख्य आधार संविधान का अनुच्छेद 244(1) और भाग IX ए (Part IX A) है।

  • संगठन का तर्क: भारतीय संविधान के मुताबिक, नगर पालिकाओं से संबंधित भाग IX ए के प्रावधान पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों पर स्वतः लागू नहीं होते।
  • MESA कानून का अभाव: जैसे ग्रामीण क्षेत्रों के लिए ‘पेसा’ (PESA 1996) कानून है, वैसे ही शहरी निकायों के लिए संसद द्वारा कोई विशेष नगरपालिका विस्तार अधिनियम (MESA) अब तक नहीं बनाया गया है।
  • अधिनियम का उल्लंघन: झारखंड नगरपालिका अधिनियम 2011 के तहत इन क्षेत्रों में चुनाव कराना आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा के लिए बने पारंपरिक कानूनों के खिलाफ माना जा रहा है।

क्या रहेगा बंद और क्या खुला?

​आगामी तीन दिवसीय बंद को लेकर प्रमंडल में हलचल तेज है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि:

  1. चक्का जाम: प्रमुख मार्गों पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित रहने की संभावना है।
  2. आवश्यक सेवाएं: एम्बुलेंस, दवा दुकान, दूध की आपूर्ति और फायर ब्रिगेड जैसी आपातकालीन सेवाओं को बंद से मुक्त रखा गया है।
  3. आम जनजीवन: शांतिपूर्ण बंद की अपील के बावजूद, स्थानीय प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अलर्ट मोड पर है।

चुनावी गणित: 23 फरवरी को है वोटिंग

​एक तरफ जहां विरोध हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ राज्य निर्वाचन आयोग ने तैयारियां पूरी कर ली हैं।

  • वोटिंग तिथि: 23 फरवरी 2026 (48 नगर निकायों में)।
  • मतगणना: 27 फरवरी 2026।
  • मैदान में दिग्गज: रांची, धनबाद और जमशेदपुर जैसे बड़े नगर निगमों में प्रत्याशियों ने प्रचार में पूरी ताकत झोंक दी है।
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विक्रम शर्मा हत्याकांड: दुमका जेल में रची गई थी ‘गुरु’ के अंत की साजिश, अखिलेश सिंह के गुर्गों पर कसता शिकंजा

देहरादून/जमशेदपुर: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में हुए सनसनीखेज विक्रम शर्मा हत्याकांड की जांच अब सीधे झारखंड की दुमका जेल तक जा पहुंची है। दून पुलिस की जांच में यह साफ हो गया है कि इस पूरे हत्याकांड का मास्टरमाइंड कोई और नहीं, बल्कि विक्रम शर्मा का ही ‘शागिर्द’ रहा कुख्यात गैंगस्टर अखिलेश सिंह है।

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वर्चस्व और रुपयों के विवाद में ‘गुरु’ की हत्या

​पुलिस सूत्रों के मुताबिक, अखिलेश सिंह और विक्रम शर्मा के बीच वर्चस्व और रंगदारी के पैसों के बंटवारे को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। कभी अखिलेश के मार्गदर्शक रहे विक्रम शर्मा ने हाल के वर्षों में देहरादून में अपना बड़ा रियल एस्टेट और खनन कारोबार फैला लिया था। अखिलेश को शक था कि विक्रम उसकी गैर-मौजूदगी में गैंग के वित्तीय संसाधनों पर कब्ज़ा कर रहा है।

जांच में हुए चौंकाने वाले खुलासे

  • स्थानीय मददगारों की पहचान: पुलिस ने उन संदिग्धों की पहचान कर ली है जिन्होंने शूटर्स को देहरादून में पनाह दी, हथियार मुहैया कराए और जिम के आसपास की रेकी की।
  • दुमका जेल कनेक्शन: जांच में मिले सुराग बताते हैं कि हत्या की पूरी पटकथा दुमका जेल की सलाखों के पीछे लिखी गई। शूटर्स को झारखंड से विशेष रूप से इस काम के लिए भेजा गया था।
  • फरार शूटर्स की तलाश: हालांकि साजिशकर्ता पुलिस की रडार पर हैं, लेकिन मुख्य शूटर अब भी फरार हैं। पुलिस और एसटीएफ (STF) की तीन टीमें झारखंड से लेकर नेपाल सीमा तक उनकी तलाश में छापेमारी कर रही हैं।

रेकी के बाद मारी गई थी गोली

​हमलावरों को विक्रम शर्मा की दिनचर्या की पूरी जानकारी थी। वारदात के दिन, जब विक्रम जिम से बाहर निकल रहे थे, तभी घात लगाए हमलावरों ने उन पर करीब से गोलियां चलाईं। पुलिस को मौके से 9mm पिस्टल के खोखे मिले थे, जो पेशेवर अपराधियों की संलिप्तता की ओर इशारा करते हैं।

पुलिस का बयान: “जांच के दौरान अखिलेश सिंह की भूमिका मुख्य सूत्रधार के रूप में उभरी है। हम जल्द ही कुछ बड़ी गिरफ्तारियां करेंगे और इस साजिश का आधिकारिक खुलासा करेंगे।” – आधिकारिक सूत्र, देहरादून पुलिस

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खौफनाक: झारखंड में अंधविश्वास की आग में जला परिवार, मां-बेटे को पेट्रोल डालकर जिंदा फूंका

कुमारडुंगी (पश्चिमी सिंहभूम): झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले से मानवता को शर्मसार कर देने वाली एक घटना सामने आई है। यहाँ ‘डायन-बिसाही’ के शक में एक हंसते-खेलते परिवार को बेरहमी से उजाड़ दिया गया। कुमारडुंगी थाना क्षेत्र के कुदासाई कलाईया गांव में बुधवार (18 फरवरी 2026) को उपद्रवियों ने एक महिला और उसके मासूम बच्चे पर पेट्रोल छिड़ककर उन्हें जिंदा जला दिया।

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घटना का विवरण

​जानकारी के अनुसार, आरोपियों ने इस नृशंस कांड को बुधवार की तड़के अंजाम दिया। हमले के दौरान घर में आग लगा दी गई, जिससे मां और उसके मासूम बच्चे की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। वहीं, महिला का पति कोल्हान सिंकू इस हमले में गंभीर रूप से झुलस गया है, जिसका उपचार जारी है।

पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारियां

​घटना की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। जगन्नाथपुर के SDPO रफाएल मुर्मू ने बताया कि पुलिस को सुबह 6:10 बजे इसकी जानकारी मिली। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर तुरंत गठित टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की।

  • बरामदगी: पुलिस ने घटनास्थल से पेट्रोल से भरा एक प्लास्टिक का डिब्बा बरामद किया है।
  • दर्ज मामला: पीड़ित कोल्हान सिंकू के बयान पर कांड संख्या 06/2026 दर्ज की गई है।
  • गिरफ्तारी: पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी रसिका उर्फ चेचे बिरुवा समेत जेना बिरुवा, सोना बिरुवा और डेलका सिंकू को गिरफ्तार कर लिया है।

वैज्ञानिक साक्ष्य और जांच

​मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) की टीम ने भी गांव पहुंचकर वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस का कहना है कि फरार अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है।

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सावधान! Blinkit से सब्जी नहीं ‘मौत’ बरस रही है: मर्डर मिस्ट्री ने खोला ऑनलाइन हथियारों के कारोबार का राज

नई दिल्ली (डेस्क): झटपट डिलीवरी के लिए घर-घर में मशहूर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म Blinkit अब एक बेहद संगीन और आपराधिक मामले के केंद्र में आ गया है। जिस ऐप का इस्तेमाल लोग रसोई का राशन और दूध मंगाने के लिए करते हैं, वहां से प्रतिबंधित बटनदार चाकू (स्विच ब्लेड) बेचे जाने का चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। दिल्ली पुलिस ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए कंपनी के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है।

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मर्डर मिस्ट्री से खुला ‘ऑनलाइन हथियारों’ का राज

​इस पूरे मामले की शुरुआत पश्चिमी दिल्ली के ख्याला इलाके में हुई दो जघन्य हत्याओं से हुई। जब पुलिस ने कत्ल के आरोपियों को दबोचा और उनसे हथियार के स्रोत के बारे में पूछताछ की, तो उनके जवाब ने अधिकारियों के होश उड़ा दिए। आरोपियों ने कबूल किया कि हत्या में इस्तेमाल किए गए घातक बटनदार चाकू उन्होंने किसी अपराधी से नहीं, बल्कि Blinkit ऐप से ऑर्डर करके मंगाए थे।

दिल्ली पुलिस का ‘स्टिंग ऑपरेशन’: जब पुलिस बनी ग्राहक

​शुरुआत में पुलिस को आरोपियों के दावे पर यकीन नहीं हुआ, लेकिन हकीकत जानने के लिए दिल्ली पुलिस ने एक जाल बिछाया:

  • ​पुलिस टीम ने खुद एक साधारण ग्राहक बनकर Blinkit ऐप से बटनदार चाकू का ऑर्डर दिया।
  • ​महज कुछ ही मिनटों में जब ऑर्डर की डिलीवरी हुई, तो पुलिस के सामने कड़वी सच्चाई आ गई।
  • कानूनी पक्ष: भारत में ‘स्विच ब्लेड’ या बटन वाले चाकुओं की बिक्री और उन्हें पास रखना आर्म्स एक्ट के तहत प्रतिबंधित है, क्योंकि इनका इस्तेमाल अक्सर आपराधिक गतिविधियों में किया जाता है।

डार्क स्टोर्स पर छापेमारी: बरामद हुआ हथियारों का जखीरा

​पुष्टि होते ही दिल्ली पुलिस ने एक्शन मोड में आते हुए शहर के कई Blinkit डार्क स्टोर्स (गोदामों) पर छापेमारी की। इस तलाशी अभियान के दौरान दर्जनों की संख्या में अवैध बटनदार चाकू बरामद किए गए हैं।

कंपनी पर कानूनी शिकंजा: मैनेजमेंट को नोटिस

​पुलिस ने अब कंपनी के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। जांच अधिकारी अब निम्नलिखित बिंदुओं पर तफ्तीश कर रहे हैं:

  1. ​यह अवैध कारोबार कब से चल रहा था?
  2. ​अब तक कितने लोगों ने इन हथियारों को घर बैठे मंगवाया है?
  3. ​क्या कंपनी के वेंडर वेरिफिकेशन में कोई बड़ी चूक हुई है?

​Blinkit के मैनेजमेंट को भी नोटिस भेजकर जवाब तलब किया जा रहा है। जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में कंपनी के शीर्ष अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

तीसरी धारा न्यूज़ डेस्क

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नगर निकाय व्यवस्था: “जागरूक नागरिक ही मजबूत शहर की नींव”, अंकित सिन्हा ने वार्ड पार्षद और मेयर के अधिकारों पर रखी बेबाक राय

जमशेदपुर | 16 फरवरी 2026 शहर में स्थानीय निकाय चुनावों और नगर प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर सरगर्मी तेज है। इसी बीच सामाजिक कार्यकर्ता अंकित सिन्हा ने वार्ड पार्षदों और मेयर के अधिकारों व कर्तव्यों पर प्रकाश डालते हुए जनता के बीच जागरूकता की कमी पर चिंता व्यक्त की है।

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अधिकारों का गणित: कौन क्या करता है?

​अंकित सिन्हा ने स्पष्ट किया कि अक्सर आम जनता अपनी समस्याओं को लेकर भ्रमित रहती है कि किसे जिम्मेदार ठहराया जाए। उन्होंने कार्यप्रणाली को दो मुख्य स्तरों पर समझाया:

  • वार्ड पार्षद की भूमिका: अपने सीमित क्षेत्र (वार्ड) की बुनियादी समस्याओं जैसे सड़क, नाली, पेयजल, स्ट्रीट लाइट और साफ-सफाई के लिए सीधे जिम्मेदार होते हैं। वे जनता और अधिकारियों के बीच एक सेतु का कार्य करते हैं।
  • मेयर की जिम्मेदारी: मेयर पूरे शहर का नेतृत्व करते हैं। नगर निगम की बैठकों की अध्यक्षता करना, शहर का बजट पास करना और बड़ी विकास योजनाओं की रूपरेखा तैयार करना उनकी मुख्य भूमिका है।

“भ्रम से विकास में आती है बाधा”

​प्रेस को संबोधित करते हुए सिन्हा ने कहा, “जब तक जनता को यह नहीं पता होगा कि उनके प्रतिनिधि के अधिकार क्या हैं, तब तक जवाबदेही तय करना मुश्किल है। बिना जानकारी के विकास कार्यों को लेकर हमेशा भ्रम बना रहेगा।” उन्होंने जोर देकर कहा कि एक जागरूक नागरिक ही प्रशासन को पारदर्शी बना सकता है।

“जागरूक नागरिक ही मजबूत नगर की नींव होते हैं। अधिकारों की स्पष्ट जानकारी ही पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देगी।” — अंकित सिन्हा

जल्द शुरू होगा जागरूकता अभियान

​अंकित सिन्हा ने संकेत दिया है कि वे जल्द ही जमशेदपुर के विभिन्न क्षेत्रों में जन-जागरूकता अभियान चलाने की योजना बना रहे हैं। इस अभियान का उद्देश्य लोगों को नगर प्रशासन की जटिल संरचना को सरल भाषा में समझाना और उन्हें उनके अधिकारों के प्रति सचेत करना है।

​स्थानीय नागरिकों ने इस पहल का स्वागत किया है। लोगों का मानना है कि इस तरह के प्रयासों से न केवल भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी, बल्कि वार्ड स्तर पर अटके हुए कार्यों में भी तेजी आएगी।

तीसरी धारा न्यूज़ डेस्क

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सरायकेला: उपद्रवियों ने फूंका कचरा चुनने वाली महिला का आशियाना, मंगलम सिटी सर्विस रोड पर मची अफरा-तफरी

सरायकेला (रिपोर्टर): सरायकेला-खरसावां जिले के मंगलम सिटी सर्विस रोड के समीप बुधवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक झोपड़ी में अचानक भीषण आग लग गई। इस आगजनी में कचरा चुनकर अपना गुजर-बसर करने वाली एक गरीब महिला का आशियाना जलकर पूरी तरह राख हो गया।

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पानी लेने गई थी पीड़िता, पीछे से धधक उठी झोपड़ी

​पीड़िता मोनिका गोप ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि वह और उसके पति कुछ देर के लिए पीने का पानी लाने गए थे। इसी बीच अज्ञात उपद्रवियों ने उनकी झोपड़ी को आग के हवाले कर दिया। जब तक वे वापस लौटे, आग इतनी विकराल हो चुकी थी कि घर के भीतर रखा सारा सामान, जमा पूंजी और गृहस्थी का सामान जलकर खाक हो चुका था।

फायर ब्रिगेड की मशक्कत और स्थानीय लोगों की तत्परता

​घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय निवासियों ने तुरंत फायर ब्रिगेड को सूचित किया। दमकल की टीम ने मौके पर पहुंचकर काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया और इसे आसपास फैलने से रोका। हालांकि, जब तक आग बुझाई गई, मोनिका का घर पूरी तरह नष्ट हो चुका था।

साजिश की आशंका: असामाजिक तत्वों पर निशाना

​स्थानीय लोगों का कहना है कि इस क्षेत्र में आगजनी की ऐसी घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि:

  • ​कुछ असामाजिक तत्व जानबूझकर इस तरह की वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।
  • ​क्षेत्र में असुरक्षा का माहौल व्याप्त है।
  • ​बेसहारा लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।

न्याय और मुआवजे की गुहार

​सर्वस्व खो चुकी मोनिका गोप और उनके परिवार ने जिला प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने मांग की है कि:

  1. ​अज्ञात दोषियों की पहचान कर उन पर सख्त कार्रवाई की जाए।
  2. ​पीड़ित परिवार को हुए नुकसान का उचित मुआवजा दिया जाए ताकि वे फिर से सिर छिपाने की जगह बना सकें।

तीसरी धारा न्यूज़ डेस्क

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जमशेदपुर: “मकान मालिक और भाड़ेदार की है ये जंग”, कांग्रेस नेता जितेन्द्र सिंह का बन्ना गुप्ता पर तीखा हमला

जमशेदपुर (रिपोर्ट: सुब्रतो सिंह): जमशेदपुर के मानगो में सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। कांग्रेस नेता जितेन्द्र सिंह ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैं। जितेन्द्र सिंह ने इसे ‘असली कांग्रेसी’ बनाम ‘नकली कांग्रेसी’ की लड़ाई करार दिया है।

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“हार के डर से मुस्लिम जनता को कर रहे गुमराह”

​जितेन्द्र सिंह ने दावा किया कि बन्ना गुप्ता अपनी पत्नी की संभावित हार से डरे हुए हैं। उन्होंने कहा, “बन्ना गुप्ता को अपनी पत्नी की हार का डर सता रहा है। इसी बौखलाहट में वे अपने प्यादों के जरिए मेरे निष्कासन की चिट्ठी का प्रोपगेंडा फैला रहे हैं ताकि मुस्लिम मतदाताओं को गुमराह किया जा सके।”

मकान मालिक बनाम भाड़ेदार

​प्रेस वार्ता के दौरान जितेन्द्र सिंह ने एक दिलचस्प उपमा देते हुए कहा कि यह लड़ाई ‘मकान मालिक’ और ‘भाड़ेदार’ की है।

​”मैं कांग्रेस का पुराना वफादार यानी ‘मकान मालिक’ हूं और बन्ना गुप्ता सिर्फ एक ‘भाड़ेदार’ हैं। आज एक भाड़ेदार, मकान मालिक को ही बेदखल करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन चुनाव के बाद स्थिति बदल जाएगी और बन्ना गुप्ता को पार्टी छोड़कर भागना पड़ेगा।”

“मानगो को आतंक से मिलेगी मुक्ति”

​जितेन्द्र सिंह ने इस चुनाव को बन्ना गुप्ता के राजनीतिक ‘विसर्जन’ का चुनाव बताया। उन्होंने हुंकार भरते हुए कहा:

  • ​यह चुनाव मानगो की जनता को बन्ना गुप्ता के ‘आतंक’ से मुक्ति दिलाएगा।
  • ​कांग्रेस मेरी पैतृक पार्टी है, मैं किसी फर्जी चिट्ठी से डरने वाला नहीं हूं।
  • ​मैं अपनी पूरी ताकत से चुनाव लड़ूंगा और जीत हासिल करूंगा।
  • ​इस मामले को कांग्रेस के ‘दिल्ली दरबार’ (हाईकमान) तक ले जाया जाएगा।

​जितेन्द्र सिंह ने अंत में विश्वास जताते हुए कहा कि मानगो की जनता ने अपना मन बना लिया है और 23 फरवरी को ‘वोट की चोट’ से इसका करारा जवाब दिया जाएगा।

तीसरी धारा न्यूज़ डेस्क

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जुगसलाई नगर परिषद चुनाव: कांग्रेस ने कसी कमर, 22 वार्डों के लिए पर्यवेक्षकों की फौज तैनात; जीत का बनाया ‘मास्टर प्लान’

जमशेदपुर:

आगामी जुगसलाई नगर परिषद चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इसी क्रम में कांग्रेस पार्टी ने अपने समर्थित उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने के लिए संगठनात्मक स्तर पर बड़ा कदम उठाया है। जिला कांग्रेस कमेटी ने वार्ड संख्या 1 से 22 तक के लिए वरिष्ठ नेताओं को पर्यवेक्षक (Observer) के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ सौंपी हैं।

डोर-टू-डोर अभियान और चुनाव प्रबंधन पर जोर

​जिला कांग्रेस अध्यक्ष परविंदर सिंह के अनुसार, इन पर्यवेक्षकों का मुख्य कार्य न केवल चुनाव प्रबंधन संभालना होगा, बल्कि जमीनी स्तर पर ‘डोर-टू-डोर’ (घर-घर) संपर्क अभियान चलाकर मतदाताओं को पार्टी की विचारधारा और विकास कार्यों से जोड़ना भी होगा।

अनुभवी नेताओं की लंबी सूची

​पार्टी ने अनुभव और युवा ऊर्जा का संतुलन बनाते हुए निम्नलिखित नेताओं को मैदान में उतारा है:

  • प्रमुख नाम: रविन्द्र कुमार झा, कमलेश कुमार पाण्डेय, अमरजीत नाथ मिश्र, रामलाल प्रसाद, सुनील प्रसाद, अशोक सिंह, संजय यादव, रईस रिजवी छब्बन और राकेश साहू।
  • महिला नेतृत्व: अपर्णा गुहा, गीता सिंह, नलिनी सिन्हा, सीमा मोहंती, नमिता सिंह और ज्योति मिश्रा।
  • युवा एवं अन्य वरिष्ठ नेता: सत्यम सिंह, मो शब्बीर (लालबाबू), धर्मेन्द्र सोनकर, नवनीत मिश्र, शेखर कुमार, राजेश चौधरी, राजा ओझा, अंकुश बनर्जी, मनीष चन्द्रबंशी, राहुल गोस्वामी, नीरज साहू, बिजय पाण्डेय और संतोष कुमार सिन्हा।

क्षेत्रीय और विभागीय सहयोग

​पार्टी ने यह भी स्पष्ट किया है कि पर्यवेक्षकों के साथ-साथ कांग्रेस के सभी विभागों के चेयरमैन और अन्य सक्रिय सदस्य जैसे इरशाद हैदर, राजू गद्दी, अजय मंडल, राजेन्द्र सिंह, रमन खान, राजनारायण यादव, रंजन सिंह, जोगी मिश्र, मो नौशाद, मो आलम, शाहनवाज खान, अबुबकर सिद्दिकी, मो आबिद, रमेश पाण्डेय, संजय कुमार झा, शमशेर आलम, सोमेन मंडल, सैयद जबिह उल्लाह, जयराम हॉसदा, सौरभ चटर्जी, सुरज मुण्डा और पी दामोदर पार्टी समर्थित उम्मीदवारों को हर संभव सहयोग प्रदान करेंगे।

कांग्रेस की रणनीति के मुख्य बिंदु:

रणनीतिउद्देश्य
समन्वय समितिवार्ड स्तर पर उम्मीदवारों और संगठन के बीच बेहतर तालमेल।
पर्यवेक्षक प्रणालीचुनाव प्रबंधन में पारदर्शिता और अनुशासन बनाए रखना।
संपर्क अभियानवार्ड 1 से 22 तक हर मतदाता तक पहुंच सुनिश्चित करना।

राजनीतिक गलियारों की चर्चा: कांग्रेस द्वारा इतनी बड़ी संख्या में पर्यवेक्षकों की तैनाती यह दर्शाती है कि पार्टी जुगसलाई नगर परिषद चुनाव को विधानसभा चुनाव के लिटमस टेस्ट के रूप में देख रही है।

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जुगसलाई नगर परिषद चुनाव 2026: चुनावी रंजिश में हमला? प्रत्याशी इन्दु देवी के प्रचार वाहन पर हमला, पोस्टर-बैनर फाड़े; समर्थकों में आक्रोश

जमशेदपुर (जुगसलाई):

जैसे-जैसे 23 फरवरी की तारीख नजदीक आ रही है, जुगसलाई नगर परिषद चुनाव का सियासी पारा अब खतरनाक मोड़ लेने लगा है। मंगलवार को जुगसलाई में उस वक्त सनसनी फैल गई, जब अध्यक्ष पद की प्रबल दावेदार श्रीमती इन्दु देवी के चुनाव प्रचार वाहन को असामाजिक तत्वों ने निशाना बनाया। इस घटना के बाद क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है।

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क्या है पूरी घटना?

​जानकारी के अनुसार, इन्दु देवी का प्रचार वाहन रोजाना की तरह वार्डों में घूमकर मतदाताओं को जागरूक कर रहा था। इसी दौरान, कुछ अज्ञात उपद्रवियों ने वाहन को रोककर उस पर लगे मुख्य बैनर और पोस्टरों को बेरहमी से फाड़ दिया। बताया जा रहा है कि हमलावर सुनियोजित तरीके से आए थे और वारदात को अंजाम देने के तुरंत बाद मौके से फरार हो गए।

समर्थकों का फूटा गुस्सा, निष्पक्ष जांच की मांग

​घटना की खबर फैलते ही इन्दु देवी के समर्थक बड़ी संख्या में जमा हो गए और इस कृत्य की कड़ी निंदा की। समर्थकों का आरोप है कि उनकी प्रत्याशी की बढ़ती लोकप्रियता से घबराकर विपक्षी खेमे के कुछ लोग अब ओछी हरकतों और हिंसा पर उतर आए हैं।

  • मांग: समर्थकों ने स्थानीय प्रशासन और चुनाव आयोग से मांग की है कि दोषियों को चिन्हित कर तुरंत गिरफ्तार किया जाए।
  • आरोप: यह न केवल एक गाड़ी पर हमला है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और चुनाव की शुचिता पर प्रहार है।

प्रशासनिक सतर्कता पर सवाल

​23 फरवरी को होने वाले मतदान को लेकर शहर में पहले से ही सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने का दावा किया जा रहा है। ऐसे में दिनदहाड़े एक प्रत्याशी के प्रचार वाहन पर हमला होना, पुलिस की गश्त और खुफिया तंत्र पर सवालिया निशान खड़ा करता है। जुगसलाई की जनता अब यह देख रही है कि क्या पुलिस इन असामाजिक तत्वों पर नकेल कस पाएगी?

विशेष टिप्पणी: जुगसलाई में चुनावी प्रतिस्पर्धा अब वैचारिक न होकर व्यक्तिगत टकराव की ओर बढ़ती दिख रही है। प्रशासन को चाहिए कि वह संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ाए ताकि मतदाता बिना किसी डर के मतदान कर सकें।

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