यूपी के आजमगढ़ से भाजपा के सांसद एवं भोजपुरी अभिनेता दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ ने 12 अगस्त को राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव से मुलाकात की। इस मुलाकात की फोटो उन्होंने सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए लालू प्रसाद यादव को भोजपुरिया समाज का अभिभावक बताया।
निरहुआ ने लालू प्रसाद के पांव छूकर आशीर्वाद लेते हुए फोटो ट्विटर पर शेयर की है। जिसमें वो लालू यादव के पैर छूते नजर आ रहे हैं। भाजपा सांसद ने अपने पोस्ट में लिखा- ‘भोजपुरिया समाज के अभिभावक राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव जी का आशीर्वाद लेवे के साथ ही उहा के स्वास्थ्य लाभ के जानकारी भईल ह। लालू जी के किडनी ट्रांसप्लांट के बाद हमनी के ई पहिला मुलाकात रहल ह। हमनी भोजपुरी के लोकर खूब चर्चा कइली।
आज भोजपुरिया समाज के अभिभावक, राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री लालू प्रसाद यादव जी के आशिर्वाद लेवे के साथ ही उहा के स्वास्थ्य लाभ के जानकारी भईल ह। मा0 लालू जी के किडनी ट्रांसप्लांट के बाद हमनी के ई पहिला मुलाकात रहल ह। हमनी भोजपुरी के लेकर खूब चर्चा कइली।
वहीं, दिनेश लाल यादव की लालू से मुलाकात के बाद राजनीतिक कयास भी लगाए जा रहे हैं। ये कयास लगाया जा रहा है कि निरहुआ अपना मूड तो नहीं बदल देंगे? लोग तरह-तरह की प्रतिक्रिया दे रहे हैं। एक यूजर ने लिखा- पलटी मरबे का.. तो दूसरे ने पूछा क्या हवा का रुख समझ गए हो। यूजर्स निरहुआ से यह भी पूछ रहे हैं कि अहीर रेजीमेंट का क्या हुआ? ज्यादातर यूजर्स इस पर सवाल उठा रहे हैं कि निरहुआ ने लालू प्रसाद को भोजपुरिया समाज का अभिभावक क्यों कहा?
हालांकि दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ की लालू यादव से की गई इस मुलाकात की तारीफ करने वाले भी कम नहीं हैं। एक यूजर ने लिखा, यही हमारी गौरवशाली संस्कृति हैं का दर्शन हैं, जहां हम कर्म युद्ध में एक दूसरे को पराजित करने के लिए पुरजोर प्रयत्न करते हैं, तो दूसरी तरफ कर्मयुद्ध के बहार समाजिक स्तर पर उनसे आशीर्वाद भी लेते हैं। जिसको कहते है मतभेद रखना, मनभेद नहीं।
सरकार द्वारा पर्याप्त सुरक्षा की मांग की अनदेखी करने पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) यानी सत्ताधारी दल के एक विधायक लोबिन हेम्ब्रम ने तीर और कमार से लैस एक धनुर्धारी गार्ड को अपनी सुरक्षा में तैनात किया है.
धनुष धारी गार्ड लेकर चलने का उनका वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.
अपनी ही सरकार से हैं नाराज
दरसल विधायक लोबिन हेम्ब्रम हेमंत सरकार के गठन के बाद से ही लगातार अपने सरकार से ही नाराज चल रहे हैं और अपनी ही सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं चूकते हैं. कभी आरोप लगाते हैं कि सरकार को आदिवासियों के हितों का ध्यान नहीं है, तो कभी अवैध खनन के मुद्दे पर अपने ही सत्ता के खिलाफ सदन से लेकर सड़क तक आवाज बुलंद करते रहे हैं.
सुरक्षा हटाने से नाराज
आज तक से फोन पर बात करते हुए विधायक लोबिन हेम्ब्रम ने बताया कि उनके सही और जनहित के मुद्दे उठाने से सरकार नाराज हो गई और श्रावणी मेला से पहले उनकी सुरक्षा को हटा दिया गया. उन्होंने कहा, ‘हाउस गार्ड भी हटा लिया गया था. लिहाजा विधानसभा के मानसून सत्र में ये मामला उन्होंनो सदन में उठाया था. पहले मैंने डीजीपी को पत्र लिखा था जिसका कोई लाभ नहीं हुआ. सदन में बात उठने के बाद स्पीकर ने संसदीय कार्य मंत्री से इस बात का सज्ञान लेने के लिए कहा था.’
सदन में लोबिन ने कहा था कि अगर राज्य सरकार सुरक्षा नही दे सकती तो वह केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र लिख लिखेंगे और 15दिनों में सुरक्षा नही देने पर वो केंद्र से सुरक्षा की मांग करेंगे.हालांकि सदन में बात उठी तब उन्हें एक पिस्तौलधारी और 2 एके 47 वाले गार्ड दिए गए. लोबीन ने बताया कि वह लगातार माइनिंग माफिया के खिलाफ आवाज बुलंद करते हैं, ऐसे में उनकी जान पर खतरा है इसलिए उन्हें पर्याप्त सुरक्षा दी जानी चाहिए थी जो अभी भी नही दी गई है.
लोबिन बोले- धनुर्धारी गार्ड रखने को हुआ मजबूर
लोबिन ने कहा कि ऐसे में वो अब तीर धनुष धारी सुरक्षा गार्ड रखने को मजबूर हुए हैं क्योंकि धुनुर्धारी गार्ड रखने के लिए किसी लाइसेंस की भी जरूरत नही है.लोबिन ,साहिबगंज जिले के बोरिओ विधान सभा क्षेत्र से सत्तारूढ़ झामुमो के विधायक हैं. लोबिन के बगावती तेवर के बाद सरकार ने जैसे ही उनकी सुरक्षा घटाई तो हेंब्रम ने पारंपरिक तीर धनुष वाले गार्ड रख लिए. बुधवार को प्रतिकारात्मक तौर पर लेकर वो इस गार्ड को लेकर घूमते रहे, जो चर्चा का विषय बना हुआ है.
आज़ादी का अमृत महोत्सव के तत्वावधान में भारत सरकार की’हर घर तिरंगा’पहल के एक हिस्से के रूप में,लोगों को भारत की आज़ादी के76साल पूरे होने के उपलक्ष्य में 13अगस्त से 15 अगस्त 2023 तक तिरंगे को घर लाने और इसे फहराने के लिए प्रोत्साहित किया गया.
एनटीपीसी कोयला खनन मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों की गरिमामय उपस्थिति में क्षेत्रीय कार्यकारी निदेशक (कोयला खनन) एमवीआर रेड्डी द्वारा “हर घर तिरंगा’ पहल को हरी झंडी दिखाई गई.
एनटीपीसी कोयला खनन मुख्यालय ने अपने कर्मचारी कल्याण संघ के सहयोग से “हर घर तिरंगा” पहल के तहत भारतीय स्वतंत्रता का जश्न मनाने के लिए कर्मचारियों और सहयोगियों को तिरंगे झंडे वितरित किए.
इस पहल के पीछे का विचार भारत की आजादी के लिए हमारे स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा किए गए योगदान को याद करने और भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के बारे में जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए लोगों के दिलों में देशभक्ति की भावना जगाना है.
विश्व आदिवासी दिवस पर राज्य सरकार द्वारा भगवान बिरसा मुंडा स्मृति पार्क में आयोजित समारोह भले ही कई यादें छोड़ गया हो, लेकिन इसकी तैयारी के फेर में पार्क की पूरी तस्वीर ही बिगाड़ कर रख दी गयी है.
इसे देखकर हर आम और खास का का दिल टूट जा रहा है. जिस पार्क को शहर की शान बनाकर पेश किया गया था, उसे यूं ही बर्बाद कर दिया गया. इसके निर्माण में केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से 142.31 करोड़ की राशि खर्च की गयी थी. पर यह कोशिश सिर्फ दो दिन में किनारे कर दी गयी. पंडाल निर्माण के लिए जगह-जगह लगाये गये पेड़-पौधे उखाड़कर फेंक दिये गये हैं.
भारी-भारी लोहे के एंगल को ले जाने के लिए पूरे पार्क में जगह जगह हाइड्रा को घुमाया गया. जिससे टाइल्स उखड़ गये हैं और पार्क के हरी-हरी घास वाले मैदान पूरी तरह सूख गये. पार्क में जगह-जगह चक्का फंसने से बड़े-बड़े गड्ढे हो गये हैं. बताते चलें कि इससे पहले भी प्रभात खबर ने पार्क में उखाड़े जा रहे पेड़ पौधों की तस्वीर पेश की थी, लेकिन उस समय प्रशासन ने इस बात से इनकार करते हुए पेड़ पौधों के सुरक्षित रखने का दावा किया था. लेकिन शनिवार को पार्क की अलग बिगड़ी तस्वीर देखने को मिली. इधर उखाड़े गये पौधे एक सप्ताह में सूख चले हैं. ऐसा लगता है कि हमारे शहर की खूबसूरती को किसी की नजर लग गयी है. अब हम सबको फिर से इस पार्क की अस्तित्व रक्षा के लिए आगे आना होगा.
पार्क में शहीदों की जीवनी प्रदर्शित करने की है व्यवस्था
राजधानी रांची में स्थित पुराने जेल परिसर का संरक्षण और जीर्णोद्धार करते हुए इस परिसर को भगवान बिरसा मुंडा स्मृति उद्यान सह संग्रहालय के रूप में कुल 142.31 करोड़ की लागत से विकसित किया गया था. जिसमें 117.31 करोड़ रुपये झारखंड सरकार और 25 करोड़ रुपये जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से दी गयी थी. इस परिसर का कुल क्षेत्रफल लगभग 30 एकड़ है, जिसके लगभग 25 एकड़ भाग में भगवान बिरसा मुंडा स्मृति उद्यान का विकास एवं निर्माण किया गया है, वहीं शेष लगभग पांच एकड़ में स्थित भगवान बिरसा मुंडा जेल का संरक्षण एवं जीर्णोद्धार कार्य करते हुए इसे संग्रहालय के रूप में विकसित किया गया है. इसका उदघाटन 15 नवंबर 2021 को किया गया था. भगवान बिरसा मुंडा स्मृति उद्यान सह संग्रहालय के अंतर्गत परिसर में विशेष आकर्षक साज-सज्जा, बागवानी, म्यूजिकल फाउंटेन, फूड कोर्ट, चिल्ड्रेन पार्क, इंफिनिटी पुल, पार्किंग तथा अन्य सामुदायिक सुविधाओं का निर्माण किया गया है. वहीं संग्रहालय में बिरसा मुंडा एवं झारखंड के अन्य वीर शहीदों की जीवनी एवं भारत देश की आजादी के लिए किये गये संघर्ष की कहानी दिखायी गयी है.
धरती आबा की भव्य प्रतिमा स्थापित की गयी
जेल परिसर के बाहर भगवान बिरसा मुंडा की 25 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा स्थापित की गयी है. इस पूरे परिसर में लेजर और लाइट शो, चित्रपट एवं म्यूजिकल फाउंटेन के माध्यम से वीर स्वतंत्रता सेनानियों की जीवनी एवं संघर्षों को प्रदर्शित करने की व्यवस्था की गयी है.
चिल्ड्रेन गेमिंग जोन के झूले उखाड़े गये
समारोह समाप्ति के 24 घंटे से अधिक गुजर गये हैं, लेकिन अब भी यहां का पूरा पंडाल नहीं खुला है. मजदूर पंडाल खोलने में व्यस्त हैं. बड़े-बड़े वाहनों से खोले गये सामान को लोड कर ले जाया जा रहा है. पूरे मैदान में जगह-जगह पंडाल निर्माण के कार्य में लगे लोहे के उपकरण बिखरे पड़े हैं.
बिखरे पड़े हैं पंडाल में लगे लोहे के उपकरण
बिरसा मुंडा स्मृति पार्क के पूर्वी कोने पर बच्चों के मनोरंजन के लिए चिल्ड्रेन जोन बनाया गया था. लेकिन पंडाल निर्माण के कार्य में बाधा आने के कारण इन सारे झूलों को उखाड़कर दीवार के किनारे रख दिया गया है. अब पंडाल खोलने का काम पूरा होने के बाद ही इन्हें फिर से इंस्टॉल करने की कार्रवाई की जायेगी.
प्लास्टिक के गिलास मैदान में अब भी बिखरे पड़े हैं
समारोह के समाप्त हुए 24 घंटा से अधिक भले हो गये हैं. लेकिन अब भी इस पार्क में चाय-नाश्ते के समय उपयोग किये गये प्लास्टिक के जूठे गिलास बिखरे पड़े हैं. हवा के झोंके से ये गिलास यहां-वहां उड़ रहे हैं.
29 एकड़ में फैले इस हरे भरे मैदान को पानी से पटाने के लिए हर मैदान में जगह-जगह स्प्रिंकलर लगाये गये थे. जिन्हें उखाड़कर रख दिया गया है. इतना नहीं लोहे की रेलिंग को भी उखाड़कर मैदान में लेटा दिया गया है. वहीं दूसरी और क्रेन व हाइड्रा के चलने के कारण जगह-जगह पाथवे पर भी गड्ढा हो गया है.
झारखंड के बुंडू में एक स्कूल की छात्राएं मांगों को लेकर सड़क पर उतरी गईं. उन्होंने हाईवे जाम करके स्कूल प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया. छात्राओं ने आरोप लगाया कि स्कूल में शिक्षक नहीं हैं.
इस वजह से पढ़ाई नहीं हो पा रही है.
जानकारी के मुताबिक, मामला राजधानी रांची से सटे बुंडू का है. यहां दक्षीणी छोटानागपुर प्रमंडलीय आवासीय विद्यालय की छात्राओं को अपनी पढ़ाई छोड़कर सड़क पर उतरने पर मजबूर होना पड़ा. छात्राओं ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ प्रदर्शन कर कई गंभीर आरोप लगाए.
स्कूल में पीने का पानी तक नहीं- छात्राएं
छात्राओं ने बताया कि स्कूल में शिक्षक नहीं हैं इस वजह से पढ़ाई नहीं हो पा रही है. पिछले चार दिन से स्कूल में पीने का पानी तक नहीं है. उन्हें खाना नहीं मिल रहा है और अन्य सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं. स्कूल का निरीक्षण करने के लिए कभी कोई अधिकारी भी नहीं आता है, जिन्हें अपनी परेशानी बता सकें. छात्राओं ने कहा कि लगता है कि उन्हें किसी अनाथ आश्रम में रखा गया है.
व्यवस्था दीजिए या तो गोली मार दीजिए
अपनी परेशानियों से तंग आकर छात्राएं सड़क पर बैठकर प्रदर्शन करने को मजबूर हो गईं. उन्होंने शिक्षा विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. इस दौरान कहा कि हमें व्यवस्था दीजिए या तो गोली मार दीजिए.
एसडीओ ने छाक्षाओं को दिया आश्वशन
स्कूली छात्राओं द्वारा हाईवे पर विरोध प्रदर्शन की सूचना मिलते ही एसडीओ अजय कुमार मौके पर पहुंचे. उन्होंने छात्राओं की समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुना और वापस स्कूल भेजा दिया. इस दौरान एसडीओ ने सभी स्कूली लड़कियों को आश्वत किया कि जो भी बुनियादी समस्याएं हैं, उन्हें जल्द से जल्द सुधारा जाएगा.
झारखंड रखंड पुलिस के एक कुशल ऑफिसर को महकमे ने असमय खो दिया. डीएसपी अजीत कुमार के असमय निधन से पुलिस महकमा शोक में है. शनिवार देर रात दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया.
रांचीः झारखंड पुलिस को एक बड़ा सदमा लगा है.
2013 बैच के डीएसपी अजीत कुमार सिन्हा की शनिवार देर रात आकस्मिक मृत्यु हो गई है. उनके असमय निधन से पुलिस महकमे में शोक की लहर है.
लीवर की बीमारी से जूझ रहे थे डीएसपीः अजीत कुमार सिन्हा लीवर की समस्या से ग्रसित थे. उनका इलाज रांची और हैदराबाद में भी चला. लेकिन तबीयत खराब होने के कारण दो दिनों से ड्यूटी भी नहीं जा रहे थे. शनिवार की रात उनके सीने में दर्द उठा था. जानकारी मिलने पर उनके परिजन आनन फानन में सदर अस्पताल लेकर पहुंचे. लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. उनकी असमय मृत्यु से झारखंड पुलिस के लोग सदमे में है. जानकारी के मुताबिक खानपान के बाबत डीएसपी अजीत को किसी तरह की बुरी आदत नहीं थी. कार्डियक अरेस्ट की वजह से मृत्यु की संभावना जताई जा रही है.
बता दें कि अजीत कुमार सिन्हा झारखंड पुलिस अकादमी हजारीबाग में सेवा दे रहे थे. इसके पहले वे पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास की सुरक्षा में भी शामिल रह चुके हैं. वह रांची में भी सेवा दे चुके हैं. उनके बारे में कहा जाता है कि अजीत कुमार सिन्हा बहुत ही नम्र और अच्छे व्यवहार के कारण आम लोगों के बीच बहुत चर्चित थे. अजीत कुमार सिन्हा तीन भाई हैं, बड़े भाई अंतु कुमार सिन्हा कॉमर्स के शिक्षक हैं. वहीं छोटे भाई अनंत कुमार धनबाद में नौकरी करते हैं. अजीत कुमार सिन्हा के पिता राजेंद्र प्रसाद अधिवक्ता हैं और मां गृहिणी, उनकी दो बहनों की शादी हो चुकी है. अजीत कुमार सिन्हा का 6 साल का बेटा है जिसका नाम आरंभ है.
देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है और रांची के स्वतंत्रता सेनानियों के नामों का शिलापट्ट कबाड़ में है। जी हां, यह हकीकत है। हमारे अधिकारी जिस ऊंची कुर्सी पर बैठे हैं, उन्हें यह कुर्सी इन्हीं स्वतंत्रता सेनानियों की बदौलत मिली है, लेकिन हमारे अंदर उनके प्रति थोड़ी भी सम्मान-आदर नहीं है।
स्वतंत्रता सेनानियों के नामों की दुर्गति देखकर आंसू आ जाएंगे। अपर बाजार के नगर निगम परिसर में ये शिलापट्ट कबाड़ में पड़े हैं। कोई भी शिलापट्ट अब पूर्ण नहीं है। कहीं न कहीं से खंडित हो चुका है और खोदे गए नाम भी अब बहुत मुश्किल से ही पढ़े जा रहे हैं।
ज्ञात हो कि देश की आजादी के जब 25 साल हुए थे तो स्वतंत्रता सेनानियों को ताम्रपत्र दिया गया था। उसी समय हर शहर में स्वतंत्रता सेनानियों के नामों के शिलापट्ट बने थे और उन्हें यथा स्थान स्थापित किया गया था ताकि शहर अपने नायकों के बारे में जान सके। पर, अधिकारियों की उदासीनता के कारण इन्हें कबाड़ ही नसीब हुआ है।
दो शिलापट्ट पर संविधान की प्रस्तावना
यहां करीब चार फीट के दो शिलापट्ट है। ऊपर का शिखर टूट गया है। वह जमीन पर पड़ा है। सबसे ऊपर तीन पंक्तियों में लिखा गया है-भारत की आजादी के 25 वर्ष पूरे होने पर राष्ट्र की ओर से भारत सरकार द्वारा स्थापित। 15 अगस्त 1972 ई से 14 अगस्त 1973 ई। उसके नीचे मोटे अक्षरों में भारत के संविधान की प्रस्तावना। उसके बाद-हम भारत के लोग-फिर न्याय, स्वतंत्रता, समात, बंधुता की जानकारी दी गई।
तीन शिलापट्ट पर स्वतंत्रता सेनानियों के नाम
यहां तीन शिलापट्ट हैं। ये भी खंडित हैं। एक शिलापट्ट पर तीन लोगों के नाम हैं-इनमें महादेव साहु, सोभा भगत और जोहन मिश्र का नाम है। ये सभी रांची जिले के प्रखंड चान्हों के हैं। ऊपर लिखा हुआ है। दूसरे शिलापट्ट पर सिर्फ एक नाम है-रामरक्षा ब्रह्मचारी का। एक तीसरा शिलापट्ट है, जिस पर पांच लोगों का नाम अंकित किया है।
इस पर भी किसी प्रखंड का नाम है, शायद बुंडू, पर स्पष्ट नहीं है। यहां स्वतंत्रता सेनानियों के तीन नाम भी पढ़ना मुश्किल है। दो नामों में हैं-शनिचरवा उरांव, नान्दी साहू।
बाकी तीन नाम भी भगत हैं। यानी ये टाना भगत हैं, जिन्होंने 1942 की क्रांति में बढ़-चढ़कर भाग लिया था। यह दसियों साल से यहीं पड़ा है। गर्मी-बरसात झेलता और मिटता हुआ। कुछ दिनों बाद ये बचे नाम भी मिट जाएंगे।
हमें इसकी जानकारी नहीं है। देखते हैं। उन्हें सही जगह स्थापित करने का प्रयास करते हैं। ये हमारे लिए गौरव की बात है।
में सरकारी स्कूलों के शिक्षकों का फर्जीवाड़ा सामने आया है. करीब एक हजार शिक्षकों ने एप में छेड़छाड़ कर फर्जी तरीके से अटेंडेंस बनाया है. शिक्षा विभाग ने जांच कर कार्रवाई के आदेश दिए हैं.
रांची: झारखंड के सरकारी स्कूलों के शिक्षक ऑनलाइन अटेंडेंस बनाने के सिस्टम में सेंध लगा रहे हैं. ऐसे करीब 1,000 शिक्षक हैं, जो बगैर स्कूल गए अटेंडेंस बना रहे हैं. इसके लिए वे कभी फर्जी जीपीएस लोकेशन क्रिएट कर लेते हैं तो कभी डेट और टाइम की सेटिंग चेंज कर बैक डेट की हाजिरी भी बना लेते हैं.
सरकार को महीनों बाद गुरुओं के इस फर्जीवाड़े का पता चला है. उनके खिलाफ कार्रवाई की तैयारी चल रही है. विभाग की जांच में ऐसे 992 शिक्षक चिन्हित किए गए हैं, जो फर्जी लोकेशन से हाजिरी बनाकर ऑनलाइन अटेंडेंस ऐप की आंखों में धूल झोंक रहे हैं. शिक्षा विभाग को इनकी गतिविधियों पर शक हुआ है, इसके बाद अब मामले की जांच के निर्देश दिये गये हैं.
दरअसल, ये शिक्षक लगभग दो महीने से अपने लोकेशन से इधर-उधर हुए बिना अपनी हाजिरी बना रहे हैं. ऐसे शिक्षकों को विभाग ने चिन्हित कर लिया है. शिक्षा सचिव ने इसे लेकर विभिन्न जिलों को निर्देश दिया है. जिलों को भेजे गये पत्र में कहा गया है कि विभिन्न स्रोतों से प्राप्त जानकारी और राज्य स्तर पर की गयी समीक्षा में पाया गया है कि जीपीएस और समय तथा तिथि में बदलाव कर उपस्थिति दर्ज करायी जा रही है.
यह दंडनीय अपराध है. सभी जिलों को ऐसे शिक्षकों की सूची दी गयी है. इनकी जांच करने का भी निर्देश दिया गया है. डीइओ और डीएसई को स्वयं या अपने अधीनस्थ पदाधिकारी से मामले की जांच कराने को कहा गया है. शिक्षक के दोषी पाये जाने पर कार्रवाई कर जानकारी देने का भी निर्देश दिया गया है.
गौरतलब है कि सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को ई-विद्यावाहिनी ऐप के जरिये ऑनलाइन उपस्थिति बनाना अनिवार्य है. इसके लिए एक जीपीएस सिस्टम लगा है, जिसके तहत स्कूल के 100 मीटर के दायरे में रहकर हाजिरी बनानी है. लेकिन, शिक्षक दूसरी जगहों से भी उपस्थिति बना रहे हैं.
गलत ढंग से उपस्थिति बनाने वाले सबसे अधिक 214 शिक्षक पलामू जिले के हैं. शिक्षा विभाग के विश्लेषण में इसका खुलासा हुआ है कि शिक्षक लोकेशन चेंजर ऐप के सहयोग से लोकेशन बदलकर हाजिरी बना रहे हैं. इससे स्कूल से 100 मीटर से अधिक दूरी होने पर भी शिक्षकों की हाजिरी बन जा रही है.
धनबाद में आठ लेन सड़क के निर्माण का श्रेय लेने के लिए झामुमो और भाजपा में होड़ मची है। सड़क का निर्माण अभी पूरा भी नहीं हुआ है लेकिन उससे पहले ही टुंडी विधायक मथुरा महतो ने इसका नामकरण स्वतंत्रता सेनानी तिलका मांझी के नाम पर कर दिया।
दूसरी ओर भाजपा नेता और पूर्व मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल ने कहा कि तिलका मांझी के नाम पर आठ लेन सड़क का नाम रखने से उन्हें कोई एतराज नहीं है, लेकिन झामुमो नेता अपनी सरकार में एक सड़क बनवा कर उसका नाम रखते तो अच्छा लगता।
कतरास के काको मोड़ से धनबाद गोल बिल्डिंग तक झारखंड की पहली आठ लेन सड़क का नाम बाबा तिलका मांझी के नाम पर रखते हुए बोर्ड का उदघाटन शुक्रवार को टुंडी विधायक सह सत्तारूढ़ दल के सचेतक मथुरा प्रसाद महतो ने किया। मौके पर विधायक मथुरा ने आठ लेन सड़क के नामकरण की घोषणा करते हुए कहा कि अब बाबा तिलका मांझी के नाम से यह सड़क जानी जाएगी। इस सड़क में कोई भी काम होगा तो अब बाबा तिलका मांझी के नाम से होगा। इससे पूर्व विधायक ने बाबा तिलका मांझी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।
मौके पर झामुमो नेता अमितेश सहाय, झारखंड आवास बोर्ड के सदस्य पवन महतो, राजेन्द्र प्रसाद राजा, कंचन महतो, प्रखंड बीस सूत्री अध्यक्ष विकास तिवारी, प्रेमा पांडे, नवल किशोर केवट, बसंत महतो, विनय तिवारी, प्रफुल्ल मंडल, परवेज इकबाल, नरेश मंडल, साधु मंडल, गोपाल महतो, धर्मेंद्र सिंह, दिलीप महतो, नंदलाल रवानी, सुरेश महतो, शिबू मांझी, सूरज चौहान, शंकर रजवार, प्रभु दयाल महतो, नुनूचंद्र महतो, भरत महतो, राजू तिवारी, राजेश महतो आदि थे।
कैबिनेट ही बदल सकता है सड़क का नाम चंद्रशेखर
पूर्व मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल ने कहा कि आठ लेन सड़क का नाम रघुवर दास की सरकार में कैबिनेट ने स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर रखने का निर्णय लिया था। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानी तिलका मांझी के नाम पर सड़क का नाम रखने से उन्हें कोई एतराज नहीं है। वह भी झारखंड के एक वीर योद्धा थे, लेकिन कैबिनेट के निर्णय को कैबिनेट बदल सकता है। विधायक मथुरा महतो अभी सरकार में शामिल हैं, उन्हें चाहिए कि कैबिनेट से इसका नाम तिलका मांझी के नाम पर करा दें। पूर्व मेयर ने झामुमो नेताओं पर पलटवार करते हुए कहा कि रघुवर दास की सरकार द्वारा बनाई गई सड़क का नाम रखकर झामुमो नेता इसका श्रेय लेने का प्रयास कर रहे हैं।
झारखंड में मुर्दों का इलाज हो जाता है, मुर्दे राशन खा जाते हैं और तो और गूंगे गाना गाते हैं और लंगड़े यानी दिव्यांग साइकिल चला लेते हैं. आप समझ सकते हैं कि कैसे यहां फर्जीवाड़ा और भ्रष्टचार का खुला खेल होता है.
ताजा मामला स्वास्थ्य विभाग से आया है, जहां सीएजी के रिपोर्ट के मुताबिक 2020-21में कुल 250 मुर्दों का इलाज आयुष्मान भारत स्कीम के तहत करके 30 लाख से ज्यादा रुपयों का भुगतान भी अस्पतालों को कर दिया गया.
मुर्दों का हुआ इलाज
यह फर्जीवाड़ा ऐसे समय में हुआ है जब अक्सर सुनने को मिलता है कि गरीब अस्पतालों के चक्कर काटते रहते हैं और कोई ना कोई बहाना बनाकर कई बार उनका इलाज आयुष्मान स्कीम के तहत करने से मना कर दिया जाता है. लेकिन सीएजी रिपोर्ट चौंकाने वाली है, अस्पतालो ने 323 क्लेम में 250 मरीजों की मौत दिखाई फिर उनका इलाज करके भुगतान भी ले लिया. मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में खलबली मची हुई है.
स्वास्थ्य मंत्री का अजब बयान
स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता इस विषय पर करवाई करने की बात कह रहे हैं. जब उनसे कहा गया की आपके विभाग में कभी मर चुके डॉक्टर का ट्रांसफर कर दिया जाता है, तो कभी मुर्दों का इलाज हो जाता है और आप विषय की हल्के में ले रहे हैं? इस पर बन्ना गुप्ता ने जवाब दिया, ‘हमारा वजन 80 से 82किलो है और हम न तो हल्के हैं और न ही करवाई हल्की होगी और न ही मामले को हल्के में लिया गया है. कमज़ोर मंत्री समझते हैं क्या हमको?’ उन्होंने कहा कि दोषियों पर भारी करवाई होगी.
पहले भी आ चुके हैं हैरान करने वाले मामले
हालांकि अजब झारखंड की गजब दास्तान समय समय पर आती रही है तो वो सुर्खियां बन जाती है. इसके पहले भी राज्य के गढ़वा समेत कई जिलों से ऐसे मामले आ चुके हैं जहां व्यक्ति की मौत हो चुकी है उनके नाम को राशन कार्ड से कटवाया नहीं जाता हैं. उनके नाम से बेरोक टोक 2021में राशन उठाने का मामला सामने आया था. हालांकि उस पर खाद्य आपूर्ति मंत्री रामेश्वर ओरण ने करवाई की थी हजारों राशन कार्ड भी कैंसल किए थे.
उसी तरह से धनबाद से एक मामला 2021-22में सामने आया था. यहां जो गाना गा सकते हैं उन्हें गूंगो का फर्जी सर्टिफिकेट बनाकर दे दिया गया और बोलने वालों ने इस सर्टिफिकेट के जरिए दिव्यांग योजनाओं का लाभ लिया. इसी तरह जो कार और साइकिल चला सकते थे उन्होंने चलने में असमर्थता का सर्टिफिकेट बनवाया हुआ था. ये सब इसलिए ताकि लाभ और मिलने वाले दिव्यांग पेंशन को डकारा जा सके.