सीमा हैदर जब से पाकिस्तान से भारत आई हैं, सीमा पार प्यार की कई सच्ची तो कई झूठी कहानियां भी सामने आईं हैं. इस बात पर मुहर लगी कि प्यार में सीमा ही क्या कोई भी सीमा लांघ सकती है. इसकी शुरुआत होती है सोशल मीडिया, गेम ऐप से.
सीमा पबजी खेलते-खेलते भारत पहुंची, तो अंजू फेसबुक लवर से शादी करने पाकिस्तान पहुंच गई. इन सबके बीच खबर आई कि एक नाबालिग अपने इंस्टाग्राम लवर से मिलने पाकिस्तान जाना चाहती थी.
जयपुर एयरपोर्ट से नाबालिग को हिरासत में लिया गया है. पता चला कि है वह लाहौर अपने लवर से मिलने जाना चाहती थी. एयरपोर्ट पर टिकट काउंटर पहुंची नाबालिग ने जब पाकिस्तान का टिकट मांगा तो सब हैरान रह गए. लड़की की उम्र कम देख टिकट मास्टर और सिक्योरिटी गार्ड को मजाक लगा, लेकिन पूछताछ में जो बातें उसने बताईं, वह पाकिस्तान के ब्रेनवॉश अभियान को उजागर करता है.
पाकिस्तान जाना चाहती थी फौजी की बेटी
17 साल की लड़की को पाकिस्तानी लड़के ने बताया कि एयरपोर्ट पर किस तरह बात करनी है. पूछताछ में क्या किन बातों का ध्यान रखना है. इसकी ट्रेनिंग पाकिस्तानी लड़के ने उसे दी थी. उसने सुरक्षा गार्ड को बताया कि वह एक पाकिस्तानी है. लड़की ने बताया कि वह इस्लामाबाद से तीन साल पहले भारत आई थी. अपनी बुआ के साथ आई और उसी के घर रह रही थी. अब बुआ से उसका झगड़ा हो गया है, ऐसे में वह पाकिस्तान वापस जाना चाहती है. सुरक्षा गार्ड लड़की की बातें सुनकर दंग रह गए. छानबीन में पता चला कि वह राजस्थान के सीकर जिले के श्रीमाधोपुर की रहने वाली है. उसके फौजी की बेटी होने का दावा किया जा रहा है.
और भी लड़कियों से पाकिस्तानी लड़के की दोस्ती
लड़की का मोबाइल फोन देखने पर पता चला कि वह लाहौर के एक लड़के के कॉन्टेक्ट में थी. उसने बताया कि एक साल से वह पाकिस्तानी लड़के से बात कर रही है. लड़की की और भी कई दोस्त उसी लड़के के कॉन्टेक्ट में है. असलम लाहोरी नाम के लड़के ने ही उसका ब्रेनवॉश किया. एयरपोर्ट पर किस तरह बात करनी है, इसकी ट्रेनिंग दी. अब लड़की का मोबाइल जब्त कर लिया गया है और मामले की आगे की जांच की जा रही है. यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि और भी कोई लड़की उसके कॉन्टेक्ट में है.
अगर आप गेमिंग या फोटोग्राफी वाला स्मार्टफोन लेने की चाह में है तो आपको infinix Note 30 5G का स्मार्टफोन खरीदने को मिल रहा है, जिसका कैमरा 108MP का है। इस मोबाइल को फ्लिपकार्ट की सेल में लगाया गया है।
जिसे आप बैंक ऑफर और भी कई ऑफर्स के जरिए इसे सस्ते दाम में खरीद सकते है। चलिए, आपको इसके ऑफर्स के बारे में बताएं।
Infinix Note 30 5G Features
Infinix के इस स्मार्टफोन में 6.78 इंच का Full HD+ डिस्प्ले मिलता है। जो 120Hz रिफ्रेश रेट सपोर्ट में मौजूद है। इसके साथ ही यह 240Hz टच सैंपलिंग रेट में उपलब्ध है। इसके अलावा, प्रोसेसर के लिए इसमें MediaTek Dimensity 6080 का चिपसेट दिया गया है। वहीं इसमें 8GB तक की RAM और 256GB का स्टोरेज मिलता है। जिसे माइक्रोएसडी कार्ड के जरिए बढ़ाया जा सकता है। यह Android 13 के आधार पर काम करता है।
कैमरा क्वालिटी की बात करें तो यह ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप में आता है, जिसका प्राइमरी कैमरा 108MP का है, इसके जरिए आप बेहतरीन फोटोज क्लिक कर सकते है। इसके साथ ही इसमें दो अन्य कैमरे भी मौजूद मिल रहे है। वहीं सेल्फी और वीडियो के लिए इस फोन में 16MP कैमरा दिया गया है।
पावर के लिए इसमें 5000mAh की दमदार बैटरी दी गई है, जो 45W के फास्ट चार्जिंग सपोर्ट में है। सिक्योरिटी के लिए इसमें बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन सिस्टम भी है।
Infinix Note 30 5G Price in India
इस हैंडसेट को आज दूसरी बार सेल में लगाया गया है। क्योंकि ये पिछले महीने ही लॉन्च हुआ था। जिसे फ्लिपकार्ट पर आज दोपहर 12 बजे सेल शुरू हो जाएगी। इस फोन को 14,999 रुपये की शुरुआती कीमत पर खरीदा जा सकता है। इसकी खास बात ये है अगर आप इसकी खरीदारी के लिए Axis बैंक कार्ड का यूज करते हैं तो आपको 1,000 रुपये का डिस्काउंट दिया जाएगा। ये मोबाइल तीन कलर Interstellar Blue, Magic Black और Sunset Gold वेरिएंट में उपलब्ध हैं।
बैंक में खाता रखने वाले ग्राहकों के लिए बड़ी खबर है. आज का दिन बैंक कर्मचारियों और ग्राहकों दोने के लिए काफी बड़ा है. आज बैंक में होने वाली छुट्टियों और समय पर फैसला लिया जाएगा.
जी हां… अब से बैंक में 2 दिन की छुट्टी रहा करेगी. इसके साथ ही काम करने का समय भी बदल सकता है. इस पर आज मीटिंग हो रहा है,जिसमें फैसला लिया जाएगा. इंडियन बैंकिंग एसोसिएशन (IBA) की तरफ से यह बैठक की जा रही है.
क्या है सकता है फैसला? IBA बैंक कर्मचारियों को बड़ी खुशखबी दे सकता है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बैंक कर्मचारियों के वीकली ऑफ में बदलाव किया जा सकता है. इस समय बैंक में काम करने वालों को सिर्फ रविवार की छुट्टी मिलती है. इसके अलावा दूसरे और चौथे शनिवार को भी छुट्टी होती है, लेकिन आज होने वाली मीटिंग में हफ्ते में 5 दिन काम करने पर फैसला हो सकता है.
बढ़ जाएंगे काम करने के घंटे रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक एम्प्लॉइज और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) ने दो दिन के वीकली ऑफ (Two Day’s Weekly Off) पर अपनी रजामंदी दे दी है. 5 दिन काम करने वाला प्रस्ताव लागू होता है तो सभी कर्मचारियों को दैनिक काम करने वाले घंटों में 40 मिनट का इजाफा कर दिया जाएगा.
हर शनिवार को मिला करेगी छुट्टी यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक एम्प्लॉइज और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) की बैठक के बाद बैंक कर्मचारियों को हर हफ्ते 2 दिन की छुट्टी मिला करेगी. यानी पहले और तीसरे शनिवार को भी कर्मचारियों को छुट्टी मिल जाएगी.
लंबे समय से चल रही है मांग IBA ने जानकारी देते हुए बताया था कि बैंक कर्मचारियों की छुट्टियों को लेकर सक्रियता से विचार किया जा रहा है और हो सकता है कि इस नई व्यवस्था को लागू करने में अब और देरी नहीं होगी. हालांकि, इस संबंध में फैसला आना अभी बाकी है.
अभी क्या है नियम? अगर अभी वर्तमान नियमों की बात की जाए तो इस समय पर बैंकों में दूसरे और चौथे शनिवार को छुट्टी रहती है. इसके अलावा तीसरे और पहले शनिवार को कर्मचारियों को काम करना होता है. फिलहाल अब कर्मचारी 2 दिन के साप्ताहिक अवकाश की मांग कर रहे हैं, जिसकी वजह से यह फैसला लिया गया है.
LIC में हो रहा 5 दिन काम आपको बता दें एलआईसी में 5 दिन कार्य दिवस प्रणाली को लागू कर दिया गया है. अगर अगस्त महीने में छुट्टियों की लिस्ट की बात की जाए तो अगले महीने करीब बैंकों में 14 दिनों की छुट्टियां रहेंगी, लेकिन इस दौरान आप ऑनलाइन बैंकिंग सुविधाओं का फायदा ले सकते हैं.
झारखंड के पलामू में मुहर्रम जुलूस के दौरान राष्ट्रध्वज के साथ छेड़छाड़ का मामला सामने आया है. शुक्रवार को एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ जिसके बाद पुलिस ने इसकी जांच शुरू कर दी.
मामला जिला मुख्यालय मेदिनीनगर से सटे चैनपुर थाना क्षेत्र के कल्याणपुर-कंकारी का है.
जानकारी के मुताबीक, नौवी के जुलूस के दौरान ऐसा कुछ देखने को मिला है. दरअसल, शुक्रवार पूर्वाहन में कल्याणपुर-कंकारी में मुहर्रम पर नौवी का जुलूस निकाला गया था. जुलूस में कई प्रोसेशन शामिल थे. डीजे बजाए जा रहे थे. जुलूस के दौरान राष्ट्रध्वज भी लहराया जा रहा था, लेकिन उसके साथ छेड़छाड़ कर दी गई थी.
राष्ट्रध्वज के रंग तो संबंधित थे, लेकिन उजले रंग की पट्टी के बीच होने वाले अशोक चक्र को हटा दिया गया था. उसकी जगह उर्दू के कुछ शब्द लिखे गए थे और नीचे में तलवार का निशान बना दिया गया था.
आस पास के लोगों ने जब तिरंगे में बदलाव देखा तो उसकी तस्वीरें ले ली और उसे सोशल मीडिया पर वायरल किया. हालांकि, तबतक इसकी सूचना पुलिस को मिल गई थी. सहायक पुलिस अधीक्षक ऋषभ गर्ग ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि चैनपुर थाना क्षेत्र के कल्याणपुर में पूर्वाहन के समय मुहर्रम जुलूस के दौरान ऐसी सूचना मिली थी. पुलिस टीम भेजकर जांच करायी गई लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली. फोटो से पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है. वीडियो फोटो मिलने पर मामले में शामिल लोगों को चिन्हित कर सुसंगत धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने कहा कि राष्ट्रध्वज के साथ छेड़छाड़ कानून जुर्म है.
सैमसंग ने हाल में ही अपने फोल्डिंग फोन्स के साथ नई टैबलेट सीरीज भी लॉन्च की है. कंपनी ने Samsung Galaxy Tab S9 सीरीज को लॉन्च किया है, जिसमें तीन टैबलेट शामिल हैं. तीनों ही टैबलेट Galaxy Unpacked Event में पेश किए हैं.
नए टैबलेट्स के लॉन्च के बाद कंपनी ने पुराने वर्जन यानी Galaxy Tab S8 की कीमतों में कटौती की है.
कंपनी ने टैबलेट के 128GB स्टोरेज वाले Wi-Fi वेरिएंट की कीमत कम की है. अगर आप एक नया टैबलेट खरीदने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो इस पर विचार कर सकते हैं. आइए जानते हैं इस टैबलेट की नई कीमत और दूसरे डिटेल्स.
Galaxy Tab S8 की कीमत
सैमसंग ने इस टैबलेट के 128GB स्टोरेज वाले Wi-Fi वेरिएंट को 58,999 रुपये में लॉन्च किया था. इसकी कीमतों में कंपनी ने 8 हजार रुपये की कटौती की है. कटौती के बाद इस टैबलेट की कीमत 50,999 रुपये हो गई है. डिवाइस तीन कलर ऑप्शन- ग्रेफाइट, सिल्वर और पिंक गोल्ड में आता है.
Samsung इस डिवाइस पर कुछ आकर्षक ऑफर भी दे रही है. कंज्यूमर्स को 6000 रुपये का डिस्काउंट HDFC बैंक क्रेडिट कार्ड पर मिल रहा है. इसके अलावा यूजर्स को नो-कॉस्ट EMI का भी ऑप्शन मिलता है.
क्या हैं स्पेसिफिकेशन्स?
Samsung Galaxy Tab S8 में 11-inch का WQXGA डिस्प्ले मिलता है, जो 2560X1600 पिक्सल रेज्योलूशन वाला है. ये डिवाइस Android 12 पर काम करता है. ये टैबलेट Qualcomm Snapdragon चिपसेट पर काम करता है. इसमें डुअल रियर कैमरा सेटअप मिलता है, जिसका मेन लेंस 13MP का है.
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वहीं सेकेंडरी लेंस 6MP का अल्ट्रा वाइड एंगल कैमरा है. फ्रंट में कंपनी ने 12MP का सेल्फी कैमरा दिया है. टैबलेट को पावर देने के लिए 8000mAh की बैटरी दी गई है. सैमसंग ने Galaxy Tab S9 सीरीज में तीन- Galaxy Tab S9, Galaxy Tab S9 Plus और Galaxy Tab S9 Ultra को लॉन्च किया है, जिसकी कीमत 85,999 रुपये से शुरू होती है.
देश में इलेक्ट्रिक वाहनों का लगातार बोला वाला बोलबाला बढ़ता ही जा रहा है। इलेक्ट्रिक बाइक और स्कूटर के अलावा काफी संख्या में लोग इलेक्ट्रिक गाड़ियां खरीदने लगे हैं। इस वजह से अब कंपनियां नई-नई इलेक्ट्रिक गाड़ियां उतारने में लगी हुई है।
हालांकि अभी पेट्रोल और डीजल कारों की तुलना में इलेक्ट्रिक गाड़ियां ज्यादा महंगी है। ऐसे में अगर आपका बजट कम है और कम पैसों से एक अच्छे इलेक्ट्रिक कार खरीदना चाहते हैं तो मार्केट में आपको कई इलेक्ट्रिक कारों के विकल्प मिल जाएंगे। इलेक्ट्रिक कार खरीदने पर आप सरकार से मिलने वाली सब्सिडी के भी हकदार हो सकते हैं। दिल्ली में इलेक्ट्रिक कारों की खरीद पर एक से डेढ़ लाख की सब्सिडी खाते में ट्रांसफर कर दी जाती है। हम आपको बताते हैं कि कौन सी कार है सस्ती इलेक्ट्रिक कार है जो एकदम सस्ती है जो आपके बजट में फिट बैठती हैं।
टाटा टियागो
ईवी टाटा टियागो विदेश की सबसे सस्ती इलेक्ट्रिक कारो में से एक है। इसकी एक्स शोरूम कीमत 8.69 लाख रुपये से 11.99 लाख के बीच टाटा टियागो टियागो कंपनी चार वेरिएंट में बेच रही है। वह इसमें 19.2kWh और 24kWh की दो बैटरी पर एक ऑप्शन मिलते हैं। जिनकी रोज 250 किलोमीटर , और 315 किलोमीटर है। टिआगो ईवी का इलेक्ट्रिक मोटर 14 बीएचपी पावर और 114 एनएम टॉर्क जेनरेट करता है।
सिट्रोन ईसी3
सिट्रोन ईसी3 आपकी काफी सस्ती कीमत में मिल जाती है। इसकी कीमत 11.50 लाख रुपये से 12.76 लाख रुपये है। सिट्रोन ईसी3 में 29 पॉइंट 2 के w.h. का बैटरी पैक मिलता है जो फुल चार्ज पर 320 किलोमीटर की सर्टिफाइड रेंज दे सकता है। इस कार का इलेक्ट्रिक मोटर 57 बीएचपी की पावर और 143 एमएम का टॉर्क जनरेट करता है ।
टाटा टीगोर ईवी
टाटा टीगोर ईवी देश की सबसे अफोर्डेबल इलेक्ट्रिक सेडान है। इसकी की शोरूम कीमत ईवी 12.49 लाख रूपये से 13 पॉइंट 75 लाख रुपए के बीच में लगा। इलेक्ट्रिक मोटर 74 बीएचपी की पावर और 117 nm का टॉर्क जनरेट करता है। इस कार में 26 kWh के लिथियम बैटरी पर का इस्तेमाल किया गया है।
दिल्ली से लेकर बिहार और गुजरात से लेकर महाराष्ट्र तक लोग लाल आंखें लिए घूम रहे हैं. इन सभी राज्यों में इस बार मॉनसून जल्दी आया है और मानो देर तक टिके रहने के इरादे से आया है.
जगह जगह भरा हुआ पानी और वातावरण में हर वक्त उमस और नमी वायरस और बैक्टीरिया के फैलने के लिए सबसे अच्छा मौका होते हैं. तो इस बार आई फ्लू ने लोगों की आंखों में लाल डोरे डाल दिए हैं. मेडिकल भाषा में आंखे लाल होने की इस बीमारी को कन्जक्टिवाइटिस कहते हैं कुछ लोग इसे पिंक आई या आई फ्लू भी कहते हैं.
आई फ्लू से दिल्ली बेहाल
बाढ़ के पानी से आंखों के पानी तक, इस बार मॉनसून ने ऐसी तबाही मचाई है कि लाल आंखों की बीमारी कन्जक्टिवाइटिस बुरी तरह से फैल गई है. दिल्ली के एम्स की ओपीडी में रोजाना आई फ्लू की शिकायत वाले 100 मरीज़ आ रहे हैं. प्राइवेट आई अस्पतालों में भी 40 से 50 मरीज़ रोज कन्जक्टिवाइटिस से परेशान होकर पहुंच रहे हैं.
दिल्ली के एक प्राइवेट आई हॉस्पिटल में पिछले साल जुलाई में कंन्जक्टिवाइटिस के 600 मामले आए थे. इस बार अभी तक जुलाई में ही 1200 से ज्यादा मरीज इलाज के लिए पहुंच चुके हैं. शार्प साईट सेंटर के निदेशक डॉ समीर सूद के मुताबिक कन्जक्टिवाइटिस आंखों के सफेद हिस्से में इरिटेशन से शुरु होता है. मॉनसून, उमस, नमी और पानी वाला वातावरण इस आई फ्लू को तेज़ी से फैलने में मदद करता है. वैसे तो इस बीमारी का मरीज पांच से सात दिन में रिकवर हो जाता है लेकिन ये वक्त बहुत परेशानी भरा हो सकता है. लेकिन मरीज अपनी मर्जी से इलाज ना करें. इसकी बड़ी वजह ये है कि आई फ्लू होने की तीन बड़ी वजहे हैं और वजहों के हिसाब से ही इलाज हो सकता है.
लक्षण
आंखों में जलन हो. पानी आने लगे. आंखों में दर्द हो और वो लाल हो जाएं तो समझ लीजिए कि आपको इंफेक्शन हो चुका है. ये इंफेक्शन एक से दूसरे मरीज में बहुत तेज़ी से फैलता है – इसलिए आपको इससे बचने की बहुत ज़रुरत है. एलर्जी , वायरल इंफेक्शन या बैक्टीरियल इंफेक्शन जैसी बीमारी हो, उसी के हिसाब से आई ड्रॉप्स दी जाती हैं. जिस मरीज को एंटीबायोटिक दवाओं की जरुरत हो उन्हें दवाएं भी दी जाती हैं.
कैसे करें बचाव?
कोरोनावायरस की तरह ही इस बीमारी में भी मरीज के लिए आईसोलेशन ज़रुरी है जिससे ये दूसरों को ना फैले. नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ अनुराग वाही के मुताबिक मरीज को काला चश्मा पहनना चाहिए. इससे दो फायदे हो सकते हैं. पहला फायदा ये कि मरीज बार बार अपनी आंखों को हाथ लगाने से बचेगा. दूसरा फायदा ये होगा कि ऐसे मरीज फोटो सेंसिटिव होते हैं जिसकी वजह से उन्हें तेज रोशनी से परेशानी हो सकती है. तो काला चश्मा तेज़ रोशनी से भी बचाएगा. साफ पानी से आंखों को धोते रहें और हाथों को बार-बार साबुन या सैनिटाइज़र से साफ करें. अपनी पर्सनल चीजें जैसे तौलिया, तकिया, रुमाल, चश्मा वगैरह किसी से शेयर ना करें. बार-बार चीजों को ना छुएं – जैसे दरवाजे का हैंडल, टेबल वगैरह – आपके हाथों से इंफेक्शन किसी भी सरफेस पर रह सकता है और वहां से दूसरे तक इंफेक्शन पहुंच सकता है.
जिन्हें ये बीमारी नहीं हुई उन लोगों को भी भीड़ में जाने से बचना चाहिए. पब्लिक प्लेस या भीड़ वाली जगह पर ज़ीरो पावर का साधारण चश्मा या सनग्लासिस लगा लेने चाहिए. ताकि आप खुद बार बार आंखों को हाथ ना लगाएं. बच्चों को ये बीमारी हो तो उन्हें स्कूल नहीं भेजना चाहिए. मरीज की आंखों में देखने से ये बीमारी नहीं फैलती. वैसे ये बीमारी 5-7 दिन में ठीक हो जाती है लेकिन कुछ मरीजों में आंखों के सफेद हिस्से से बढ़कर इंफेक्शन आंखों की पुतली तक पहुंच सकता है, ऐसे मामले खतरनाक हो सकते हैं.
एक अगस्त तक कहीं-कहीं झारखंड के इन इलाकों में बारिश का अनुमान, अलर्ट जारी. झारखंड में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो सकता है. एक अगस्त तक कहीं-कहीं भारी बारिश का अनुमान मौसम केंद्र ने लगाया है.
इसे लेकर मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है.
झारखंड मौसम पूर्वानुमान
एक अगस्त तक कहीं-कहीं झारखंड के इन इलाकों में बारिश का अनुमान, अलर्ट जारी
झारखंड में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो सकता है. एक अगस्त तक कहीं-कहीं भारी बारिश का अनुमान मौसम केंद्र ने लगाया है. 29 जुलाई को राज्य के उत्तर-पश्चिमी इलाके (पलामू प्रमंडल) में कहीं-कहीं मध्यम से भारी बारिश हो सकती है. 30 जुलाई को राज्य के पश्चिमी तथा मध्य हिस्सों में कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है. 31 जुलाई को राज्य के पूर्वी तथा मध्य हिस्सों में कहीं-कहीं तेज बारिश का अनुमान है. एक अगस्त को राज्य के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में कहीं-कहीं बारिश हो सकती है. मौसम केंद्र ने इसको लेकर येलो अलर्ट जारी किया है. विशेषज्ञों का अनुमान है कि ऐसा होने पर बारिश की कमी कुछ हद तक हो सकती है.
गुरुवार को हुई बैठक में झारखंड बीजेपी विधायक दल के नेता पर फैसला नहीं हो पाया. पार्टी के ऑबजर्वर सह केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने सभी विधायकों से वन-टू-वन बातचीत की और अपनी रिपोर्ट लेकर दिल्ली दरबार चले गए. ऐसे में एक बार फिर झारखंड को नेता प्रतिपक्ष नहीं मिल पाया. नेता प्रतिपक्ष के सवाल पर बाबूलाल मरांडी ने क्या कहा, इस रिपोर्ट में…
रांची: इस बात पर फिर मुहर लग गयी है कि भाजपा किसी मैटर पर कब और क्या फैसला लेगी, इसकी जानकारी भाजपा के अच्छे-अच्छे नेताओं तक को नहीं होती. इसकी झलक 27 जुलाई की शाम देखने को मिली. विधानसभा के मानसून सत्र से पहले इस बात की जोरशोर से चर्चा थी कि प्रदेश भाजपा अपने किसी नये नेता का नाम विधायक दल के नेता के रूप में घोषित कर देगी. इस रेस में सीपी सिंह, अनंत ओझा और बिरंची नारायण के नाम की चर्चा जोर शोर से चल रही थी. सभी की अलग-अलग वजहों से दावेदारी भी दिख रही थी. कोई अनुभव में आगे था तो कोई कास्ट सिस्टम के लिहाज से फिट बैठ रहा था.
इसी बीच इस रेस में झामुमो से भाजपा में आए जेपी पटेल के नाम की भी चर्चा शुरू होने से एक अलग माहौल बन चुका था. ऐसा इसलिए क्योंकि कुछ दिन पहले ही जेपी पटेल की राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष से दिल्ली में मुलाकात हुई थी. इस मुलाकात के बाद रांची पहुंचे जेपी पटेल का चेहरा खिला-खिला दिख रहा था.इधर, 27 जुलाई की शाम हुई बैठक के दौरान मानसून सत्र को लेकर सदन के भीतर पार्टी के रूख पर रणनीति भी बनी. इसके बाद विधायक दल के नेता को लेकर बात शुरू हुई. बैठक में पार्टी के ऑबजर्वर सह केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे के अलावा झारखंड संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह, झारखंड प्रभारी लक्ष्मीकांत वाजपेयी, प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी और क्षेत्रीय संगठन महामंत्री नागेंद्र त्रिपाठी मौजूद थे. कुछ देर तक मंथन के बाद सभी नेता कमरे से बाहर निकल आए. इसके बाद ऑबजर्वर अश्विनी चौबे ने अकेले में एक-एक करके विधायकों को बुलाना शुरू किया.
उन्होंने सभी विधायकों से प्रायोरिटी के आधार पर तीन नाम मांगे. खास बात है कि वह मुंहजबानी तीन नाम पूछ रहे थे और उसे नोट डाउन कर रहे थे. किसी से भी लिखित में नाम नहीं मांगे गये. इधर बंद कमरे के बाहर हलचल बढ़ी हुई थी. रेस में शामिल भाजपा के वरिष्ठ नेता सीपी सिंह, अनंत ओझा, बिरंची नारायण के अलावा अचानक चर्चा में आए जेपी पटेल घोषणा की राह ताक रहे थे. जाहिर है वक्त के साथ नेताओं की धड़कन भी तेज हो रही होगी. लेकिन देर रात तक कोई नतीजा नहीं निकला. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक ऑबजर्वर अश्विनी चौबे बस यही कहकर निकल गये कि वह अपनी रिपोर्ट केंद्रीय नेतृत्व को देंगे. इसपर केंद्रीय नेतृत्व ही आगे कोई फैसला लेगा.
इस बीच जेपी पटेल के नाम की चर्चा शुरू होने पर पार्टी के पुराने नेताओं में नाराजगी भी देखने को मिली. लेकिन कोई खुलकर जाहिर नहीं कर पा रहा था. अब फिर वही सवाल आ खड़ा हुआ है कि आखिर झारखंड भाजपा विधायक दल का नेता कौन होगा. इस सवाल पर एक तरह से बाबूलाल मरांडी ने विराम लगा दिया है. विधानसभा के मानसूत्र सत्र के पहले दिन प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि यह फैसला तो स्पीकर को लेना है. पार्टी तो नेता के नाम का चयन कर स्पीकर को जानकारी दे चुकी है. उनके इस कथन का मतलब समझा जा सकता है. भाजपा के सूत्रों का कहना है कि अगर एक-दो दिन के भीतर नाम की घोषणा नहीं हुई तो संभव है कि पूरा सत्र भी बगैर नेता प्रतिपक्ष के ही न निकल जाए. यह भी चर्चा है कि बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में कमेटी के गठन पर फाइनल मुहर लगने के दौरान ही नेता प्रतिपक्ष के नाम की घोषणा हो सकती है.
दरअसल, बाबूलाल मरांडी के प्रदेश अध्यक्ष की कमान मिलने के साथ ही यह साफ हो गया था कि किसी दूसरे को विधायक दल का नेता बनाया जाएगा. क्योंकि सदन के भीतर बाबूलाल मरांडी को विधायक दल की मान्यता नहीं मिली हुई. पहली बार झारखंड विधानसभा के इतिहास में सदन की कार्यवाही पिछले साढ़े तीन वर्षों से बगैर नेता प्रतिपक्ष के ही चल रही है. बाबूलाल मरांडी दलबदल का मामला फेस कर रहे हैं. उनके खिलाफ स्पीकर ट्रिब्यूनल का फैसला लंबित है. यह मामला हाईकोर्ट में भी पीआईएल के जरिए आ चुका है. लेकिन नतीजा नहीं निकल पाया है. फिलहाल कागजी तौर पर बाबूलाल मरांडी ही भाजपा विधायक दल के नेता हैं. अब देखना है कि पार्टी इस सस्पेंस को कब और कैसे खत्म करती है.
गर्मी में नदियों का सूखना तो आम बात है, लेकिन आप यह जानकर हैरान हो जाएंगे कि झारखंड में कई ऐसी नदियां हैं, जो बरसात में भी सूखी पड़ी हैं. सावन में जो नदियां उफान पर रहती थीं, वह आज पक्षियों के प्यास बुझाने के लायक भी नहीं बची है.
सावन और मानसून के दौरान भी लोगों को पानी के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
पहले कभी नहीं हुआ ऐसा
गर्मी के वक्त नदियों का पानी घटने के कारण उनमें प्रवाह कम होने की प्रवृत्ति देखी जाती थी, लेकिन बरसात के दिनों में ऐसा कभी नहीं देखा गया था. वह भी खासतौर पर तब, जब सावन का महीना हो और नदियां सूखी पड़ी हो, ऐसा कभी नहीं हुआ. झारखंड की नदियों का इस कदर सूख जाना, आने वाले वर्षों में खतरे का संकेत है. झारखंड की प्रमुख नदियां भी अब नाले में तब्दील हो रही है. प्रकृति प्रेमी की ओर से भी नदियों का बचाने का आवाहन किया जा रहा है.
क्यों बरसात में भी सूखी पड़ी हैं झारखंड की नदियां
मानसून की बेरूखी और नदियों की स्थिति ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. मानसून के दौरान भी अच्छी बारिश नहीं होने और सावन के महीने में बारिश की वजाय तीखी धूप रहने से नदियों की स्थिति भयावह है. इसके अलावा भी कई कारक हैं, जो नदियों के सूखने की वजह बड़ी है. आइए जानते हैं कि आखिर क्या कारण है कि बरसात में भी नदियों में पानी नहीं है-
खेती के तरीके में बदलाव
बताया जाता है कि पिछले कुछ सालों में खेती के तरीके में काफी बदलाव आया है. जिसके कारण राज्य में पहले भू-जल लगभग 60 से 70 फीट पर था, लेकिन अब उन इलाकों में 200 फीट से भी अधिक गहरा बोरिंग करना पड़ रहा है. भू-जल स्तर कम होने की वजह से नदियों का जलचक्र भी प्रभावित हुआ है. यहां जितनी बारिश हो रही है वह भूमिगत जल को रिचार्ज करने के लिए पर्याप्त नहीं है.
नदियों से बालू का अंधाधुंध खनन
नदियों से अंधाधुंध बालू निकाला जा रहा है. इस वजह से नदी का प्राकृतिक प्रवाह अवरुद्ध हो गया. इसके अलावा भूमिगत जलस्तर कम हो रहा है. पर्यावरणविद् प्रोफेसर विमल किशोर सिंह ने बताया है कि भू-जल का दोहन बढ़ता ही जा रहा है और इसे रिचार्ज करने की व्यवस्था नहीं हो रही है. प्रशासन को इस तरफ भी प्रयास करना चाहिए. पौधरोपण और स्टॉपडेम बनाकर नदी को जीवित रखने के प्रयास करने की आवश्यकता है.
बालू ने नदी की वाटर कैपेसिटी को किया कम
विशेषज्ञों के अनुसार, झारखंड में नदियों से अवैज्ञानिक तरीके से बालू का खनन किया गया है. नदियों से बेहिसाब बालू के उठाव को कारण नदी में वाटर कैपेसिटी को कम हौो गई है. बालू के उठाव से नदियों के अधिकांश भागों में मिट्टी निकल आयी है और बालू नहीं रहने से वाटर रीचार्ज की क्षमता घट गयी. पानी की कमी से नदी के जलीय जीव-जंतु भी नष्ट हो गये हैं. साथ नदी का प्राकृतिक संतुलन भी बिगड़ा है.झमरिया नदी ठाकुर गंगटी
नदी की क्षमता घटने से नष्ट होंगे अन्य जलस्रोत
जल संसाधन विभाग के शोध के अनुसार, साल भर में होने वाली कुल बारिश का कम से कम 31 प्रतिशत पानी धरती के भीतर जमा होना चाहिए, तभी संबंधित क्षेत्र की नदियों, जल स्रोतों आदि में पर्याप्त पानी रहेगा. वहीं बारिश नहीं होने के कारण नदी के नीचे भी पानी सूख रहे हैं. मानसून में भी अगर नदियों में निरंतर पानी का बहाव नहीं रहा, तो आसपास के तालाब, कुआं सहित अन्य जलस्रोत धीरे-धीरे नष्ट हो जायेंगे. विशेषज्ञों के अनुसार, नदियों में बालू की वजह से बारिश के बाद जलस्तर लंबे समय तक बना रहता है, जिससे आसपास के जलस्रोत को भी पानी मिलता है. नदियों के सूखने से सिंचाई, पेयजल व अन्य जलापूर्ति का भी काम प्रभावित होने लगा है.अजय नदी
झारखंड की प्रमुख नदियों में पतली धार
झारखंड की प्रमुख नदियां जैसे- स्वर्णरेखा, दामोदर, मयुराक्षी, कोयल नदी, अजय नदी, डढ़वा नदी, पतरो नदी, चांदन नदी, मोतिहारा, सिद्धेश्वरी, पुसारो सहित आदि जो पानी के मामले में समृद्ध माना जाता है, लेकिन अब यह नदियां भी सूख रही है. बड़ी-बड़ी नदियों में भी केवल पतली धार दिख रही है. वह भी बारिश होने के चंद घंटे बाद या दूसरे दिन तक दिखती है, नहीं तो रेत ही रेत या मिट्टी ही नजर आती है. जलस्तर कम रहने की वजह से पेयजलापूर्ति की योजनाओं में भी कई बार दिक्कतें आ चुकी हैं. अजय नदी के नवाडीह घाट से इस मानसून में भी चैनल काटकर जलापूर्ति हो रही है. बरसात के मौसम में नदी का जलश्रोत कम रहने से किसानों के साथ साथ ग्रामीणों को भी चिंता सताने लगी है.बड़ी बड़ी नदियों में भी पानी की पतली धार
देवघर, दुमका, गोड्डा, जामताड़ा और अन्य जिलों की जिन नदियों का ऊपरी सतह का जलस्तर हमेशा दो से तीन फीट पूरे नदी में रहता था और पानी का बहाव भी रहता था. चांदन नदी में एक बूंद पानी तक नहीं है. अजय नदी में तो इस बरसात में पानी के अभाव में बड़े-बड़े घास उग आये हैं.
गोड्डा जिले में छोटी-बड़ी 12 नदियां हैं. प्राय: सभी नदियां बरसाती है. सावन के मौसम में जुलाई महीने में गोड्डा की नदियां उफान पर रहा करती थी लेकिन इस साल मानसून के बेरूखी के कारण नदियों में पक्षियों के प्यास बुझाने लायक ही पानी है.
गेरुआ नदी बसंतराय से होकर महागमा होते हुए कहलगांव में गंगा की सहायक नदी के रूप में मिलती है. इस नदी से झारखंड और बिहार के किसानों को खेती में सिंचाई की सुविधा मिलती थी, आज इस नदी में भी नाम मात्र का ही पानी है.
सुंदर नदी की बात करें तो पथरगामा व बसंतराय से बहकर गेरुआ नदी में मिलती है. यह नदी भी पानी के लिए तरस रहा है.
मेहरमा प्रखंड की ढोलिया नदी राजमहल पहाड़ियों से निकलकर ठाकुर गंगटी व मेहरमा होते हुए गेरुआ नदी में जाकर मिलती है. यह नदी जिले की सबसे गहरी नदी के रूप में जाना जाता है. इस नदी में भी नाम मात्र का ही पानी है.
नदियों में उग आए घास
ठाकुर गंगटी की झमरिया नदी भी बरसात में आक्रामक स्थिति में रहने वाली नदी की तरह है, मगर अभी नदी में पानी का बहाव गर्मी के मौसम की तरह ही दिख रहा है.
वहीं बसंतराय प्रखंड के अलावा महागामा में बहने वाली ऐंचा नदी आज मैदानी भूभाग में तब्दील है. कुल मिलाकर देखा जाये तो गोड्डा जिले की 12 नदियों में एकाध को छोड़ दें तो शेष सभी नदियां सूख गयी हैं.
अमूमन दुमका जिले में जुलाई महीने में सभी छोटी बड़ी नदियों का जलस्तर बढ़ा हुआ रहता है. इधर एक पखवारे से भी ज्यादा समय तक भारी बारिश नहीं होने से नदियों का जलस्तर घट गया है.
रानीश्वर के इलाके में पटवन का एक बड़ा साधन नदी है. उससे संबंधित नहर है. नदी का जलश्रोत कम रहने से नदी से पंप लगाकर भी किसान खेती नहीं कर पा रहे है.
सिद्धेश्वरी नदी के भरोसे नदी किनारे दर्जनों गांवों के लोग निर्भर है. सिंचाई के लिए पानी का उपयोग करने के साथ साथ मवेशियों को पानी पिलाने, स्नान करने तथा कपड़ा साफ करने का काम आता है. ग्रामीणों को यह चिंता सता रही है कि बरसात के मौसम में नदी की यही स्थिति है तो ठंड व गर्मी के दिनों पानी के लिए हाहाकार मच जायेगा.
देवघर में महेशपुर प्रखंड के प्रमुख नदी बांसलोई नदी और पगला नदी सूख गयी है. प्रखंड की दो प्रमुख नदियां बांसलोई नदी और पगला नदी है. इन दिनों बांसलोई नदी नाले का रूप ले चुकी है. नदी में घना घास और पौधा उग चुका है. बांसलोई और पगला नदी में जगह-जगह जलजमाव भी हो गया है.
बांसलोई नदी
मानसून की बेरूखी के कारण नदियां जलविहीन
बरसात में भी नदियों के सूखे रहने का सबसे बड़ा कारण है झारखंड में मानसून का कमजोर होना. मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, झारखंड में अब भी 49 प्रतिशत कम बारिश हुई है. जबकि, झारखंड में मानसून आये करीब एक माह हो गया है. इसके बावजूद अब सामान्य से आधा के करीब ही बारिश हो पायी है. एक जून से 28 जुलाई तक 245.8 मिमी बारिश हुई है. जबकि, इस समय सामान्य बारिश रिकॉर्ड 478.3 मिमी है.
अब तक चतरा में सबसे कम और साहिबगंज में सबसे अधिक बारिश
झारखंड के 24 जिलों में चतरा जिला में सबसे कम बारिश हुई है. यहां अब भी 79 प्रतिशत बारिश कम हुई है. उसके बाद जामताड़ा है, जहां 70 फीसदी कम बारिश हुई है. फिर गिडिडीह और धनबाद जहां 68 फीसदी कम बारिश हुई है. फिर लोहरदगा, जहां 64 प्रतिशत और लातेहार जहां अब तक 62 प्रतिशत कम बारिश हुई. इसी तरह राज्य के लगभग सभी जिलों में बारिश का प्रतिशत काफी कम है. जबकि, सबसे अधिक बारिश साहिबगंज में हुई है. हालांकि, वह भी सामान्य से कम ही है. साहिबगंज में सामान्य से 9 प्रतिशत कम बारिश हुई है. आज को भी कई जगहों पर रुक-रुक कर बारिश हुई है. उम्मीद की जा रही है कि झारखंड में मानसून के दोबारा सक्रिय होने के बाद बारिश की कमी दूर हो जाएगी और राज्य की नदियों में भी पानी जमा हो पाएगा. हालांकि, नदियों के सूखने के पीछे जो मानवीय कारक हैं, जैसे अंधाधुध खनन, बालू का अवैज्ञानिक तरीके से उठाव, खेती की तकनीक में बदलाव उसे हम मानव को ही सुधारना होगा.