एक नई सोच, एक नई धारा

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लैंड स्कैम: पूर्व DC छवि की जमानत अर्जी पर हुई सुनवाई, ED ने दाखिल किया जवाब

लैंड स्कैम के आरोपी रांची के पूर्व DC छवि रंजन की जमानत याचिका पर रांची प्रीवेन्शन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट की स्पेशल कोर्ट में सुनवाई हुई. सस्पेंड हो चुके आइएएस छवि रंजन के अधिवक्ता अभिषेक चौधरी और अभिषेक सिंह में अपनी बहस के दौरान अदालत को बताया कि उन्हें सिर्फ मौखिक बयान के आधार पर आरोपी बनाया गया है.

इसलिए छवि रंजन को जमानत दी जानी चाहिए. वहीं ED की ओर से उपस्थित विशेष लोक अभियोजक शिव कुमार ऊर्फ काका जी ने अपनी बहस में कहा कि लैंड स्कैम के प्रमुख अभियुक्त छवि रंजन ही हैं, इसलिए इन्हें बेल नहीं दी जानी चाहिए. वहीं ईडी की ओर से जवाब भी दाखिल किया गया. इसके बाद कोर्ट ने छवि रंजन की जमानत पर अगली सुनवाई के लिए 5 अगस्त की तारीख तय की है.

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बता दें कि रांची के बड़गाईं अंचल के बरियातु स्थित सेना के कब्जे वाली जमीन की खरीद बिक्री से जुड़े इस केस में ED रांची के पूर्व उपायुक्त आइएएस छवि रंजन, बड़गाईं अंचल के राजस्व उप निरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद, सेना के कब्जे वाली जमीन का फर्जी रैयत प्रदीप बागची, जमीन कारोबारी अफसर अली, इम्तियाज खान, तल्हा खान, फैयाज खान व मोहम्मद सद्दाम, अमित अग्रवाल और दिलीप घोष के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है. वहीं IAS छवि रंजन पिछले 85 दिनों से जेल में बंद हैं.

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शिक्षा की बेहतरी के लिए गंभीर नहीं झारखंड सरकार, बोलीं केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी

केंद्रीय शिक्षा राज्यमंत्री अन्नपूर्णा देवी ने झारखंड सरकार पर गंभीर आरोप लगाये हैं. कोडरमा की बीजेपी सांसद और केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने प्रभात खबर संवाद में कहा कि झारखंड सरकार शिक्षा की बेहतरी के लिए गंभीर नहीं है.

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उन्होंने कहा कि शिक्षा के लिए जो पैसे केंद्र से भेजे जाते हैं, उसका राज्य सरकार बेहतर इस्तेमाल नहीं करती. उन्होंने कहा कि अक्टूबर में जब समीक्षा बैठक हुई थी, तो झारखंड के अधिकारियों ने बताया कि राज्य में शिक्षकों के 80 हजार पद रिक्त पड़े हैं. लेकिन, बाद में राज्य के तत्कालीन शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने इसे सिरे से खारिज कर दिया. इससे पता चलता है कि राज्य सरकार शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए गंभीर नहीं है. केंद्र सरकार के खिलाफ झूठा प्रचार करती है.

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माकपा नेता की हत्या : भाजपा ने झारखंड विधानसभा के बाहर प्रदर्शन कर सोरेन के इस्तीफे की मांग की

रांची 28 जुलाई झारखंड में विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शुक्रवार को मानसून सत्र के पहले दिन विधानसभा के मुख्य द्वार के बाहर प्रदर्शन किया और राज्य में एक माकपा नेता की हत्या की सीबीआई जांच कराने एवं कथित तौर पर बिगड़ती कानून व्यवस्था की स्थिति पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस्तीफे की मांग की।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने दावा किया कि झारखंड में कानून-व्यवस्था की स्थिति ”बद से बदतर” हो गई है। उन्होंने कहा, ‘पुलिस का काम अपराधियों को पकड़ना है, लेकिन सरकार इसे अपने उद्देश्यों के लिए एक औजार के तौर पर इस्तेमाल कर रही है।’

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प्रदर्शन में शामिल नेताओं और समर्थकों ने सोरेन के इस्तीफे तथा हत्या की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच की मांग करते हुए तख्तियां लहराईं।

सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है।

भाजपा के एक अन्य नेता अमर बाउरी ने दावा किया कि ज्यादातर अपराध जमीन पर कब्जे के लिए हो रहे हैं और ये सोरेन के संरक्षण में किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘हम मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग करते हैं।’

भाजपा के मुख्य सचेतक बिरंची नारायण ने कहा कि पहले महिलाओं के खिलाफ अपराध के कारण संथाल परगना क्षेत्र नागरिकों के लिए असुरक्षित था लेकिन ”अब राजधानी रांची भी सुरक्षित नहीं है।”

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) नेता सुभाष मुंडा की बुधवार को यहां दलदली चौक स्थित उनके कार्यालय में गोली मारकर हत्या कर दी गई।

नारायण ने मांग की कि यह मामला सीबीआई को सौंपा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आजसू नेता अजय मुंडा को भी एक दिन पहले ही गोली मार दी गई थी और उनकी हालत गंभीर बनी हुई है।

कांग्रेस के नेता एवं मंत्री बन्ना गुप्ता ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि पुलिस अपना काम कुशलता से कर रही है। उन्होंने कहा, ”विपक्ष बिना किसी वजह के, हंगामा कर रहा है।”

सुभाष मुंडा हत्या मामले में अब तक हुई जांच के बारे में पूछे जाने पर रांची के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक किशोर कौशल ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘मामले में जांच की जा रही है और हम जल्द ही निष्कर्ष पर पहुंचेंगे। कई लोगों से पूछताछ की जा रही है।’

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खत्म हुआ इंतजार! लो आ गई नई इलेक्ट्रिक ‘बुलेट’Gasoline… जानें खासियत

गई नई इलेक्ट्रिक बुलेट! ऑटो जगत में आज का दौर बड़े बदलाव का है, जिसमें चाहे कार हो, बाइक हो या फिर साइकिल ही क्यों न हो, सब इलेक्ट्रिफाइड हो रहा है. ये हमारी प्रकृति के साथ-साथ तमाम तरह से हमारे लिए भी फायदेमंद है.

ऐसे में इस इलेक्ट्रिकफिकेशन के दौर में हम सभी को इंतजार है, हमारी फेवरेट बाइक बुलेटे के इलेक्ट्रिफाइड होने का, जिसे लेकर कंपनी खुद भी अपने इराजे जाहिर कर चुकी है, हालांकि अभी इसबर काम जारी है. मगर क्या हो अगर आपको मालूम चले कि बुलेट का इलेक्ट्रिक सेगमेंट पहले भी भारतीय ऑटो बजार में मौजूद है? जी हां… बेंगलुरू एक बेस्ड बाइक कस्टम्स कंपनी ने दिलचस्प इलेक्ट्रिक बुलेट तैयार की गई है, जिसका नाम है ‘Gasoline’.

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दरअसल इस फर्म का नाम है बुलेटियर कस्टम्स, जो पिछले करीब 16 साल से रॉयल एनफील्ड की बाइक्स को कस्टमाइजेशन मॉडिफिकेशन का काम कर रहे हैं. ये फर्म खासतौर पर रॉयल एनफील्ड की बाइक्स पर अपने अनोखे क्रिएटिव अंदाज में न सिर्फ कलाकारी करती है, बल्कि उसे एडवांस फीचर्स के साथ लैस कर एक बेहतीन गाड़ी बनाती है. इसी के मद्देनजर हाल ही में इस फर्म ने 1984 मॉडल रॉयल एनफील्ड बुलेट को अनोखे लुक्स फीचर्स के साथ तैयार किया है, फर्म ने इसे एक नया इलेक्ट्रिक कलेवर दिया है, जो न सिर्फ देखेने में शानदार है, बल्कि परफॉर्मेंस के मामले में भी उम्दा होने का दावा किया जा रहा है. तो चलिए इसके बारे में जानें…

ऐसी है नई इलेक्ट्रिक बुलेट…

हासिल जानकारी के मुताबिक ये नई इलेक्ट्रिक बुलेट, डिजाइन परफॉर्मेंस दोनों ही मामलों में ओरिजनल बुलेट से काफी ज्यादा अलग है. अगर पहले डिजाइन की बात करें, तो इस बाइक में 3 इंच लंबे चेचिस के साथ, नए लुक्स का फ्यूल टैंक दिया गया है. वहीं इसे बिल्कुल ठीक नीचे एक बड़े इंजन जैसा दिखने वाला कवर भी तैयार किया गया है, जिसके अंदर बैटरी लगाई गई है. इसमें अलग-अलग ड्राइविंग मोड्स मौजूद हैं, साथ ही बाइक की मोटर को पावरफुल बनाने के लिए नाइट्रो बूस्ट सिस्टम भी है.

वहीं अगर इसकी रेंज परफॉर्मेंस की बात करें, तो इसमें मुख्यत: तो मोड दिए गए हैं, पहला रेगुलर मोड, जिसमें बाइक करीब 90 किमी चल सकती है. दूसरा इकोनॉमी मोड, जिसमें बाइक 100 किमी से ज्यादा चल सकती है. इसमें मुंबई बेस्ड गोगो ए1 फर्म से 5kW की क्षमता का BLDC हब मोटर दिया गया है.

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टी20 वर्ल्ड कप 2024 के लिए क्वालीफाई कर चुकी हैं ये 15 टीमें, यहां देखें पूरी लिस्ट

आईसीसी मेंस टी20 वर्ल्ड कप का 9वां एडिशन अगले साल वेस्टइंडीज और अमेरिका में खेला जाना है। इस वर्ल्ड कप में कुल 20 टीमों ने हिस्सा लेना है जिसमें से 15 टीमें क्वालीफाई कर चुकी है, वहीं 5 टीमों की जगह अभी भी खाली है।

टी20 वर्ल्ड कप 2024 आगाज जून में होगा। टी20 वर्ल्ड कप 2022 की टॉप-8 टीमों समेत, आईसीसी रैंकिंग के टॉप-10 में मौजूद दो टीमों ने डायरेक्ट क्वालीफाई किया, वहीं मेजबान होने के नाते वेस्टइंडीज और अमेरिका को भी सीधा टिकट मिला। इसके अलावा क्वालीफायर्स राउंड खेलकर 3 और टीमों ने इस लिस्ट में अपनी जगह बनाई है।

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इन 12 टीमों के अलावा अभी तक आयरलैंड, स्कॉटलैंड और पपुआ न्यू गिनी ने टी20 वर्ल्ड कप 2024 के लिए क्वालीफाई कर लिया है।

अब अन्य 5 टीमों का फैसला अमेरिका क्वालीफायर, एशिया क्वालीफायर और अफ्रीका क्वालीफायर के जरिए होगा। अमेरिका से 1 और एशिया व अफ्रीका से 2-2 टीमें वर्ल्ड कप का टिकट हासिल कर सकती है। 1 दिसंबर तक टी20 वर्ल्ड कप 2024 की सभी 20 टीमों का नाम साफ हो जाएगा।

बात अभी तक क्वालीफाई कर चुकी टीमों की करें तो वेस्टइंडीज, अमेरिका, आयरलैंड, पपुआ न्यू गिनी और स्कॉटलैंड के अलावा भारत, इंग्लैंड, बांग्लादेश, अफगाानिस्तान, पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, श्रीलंका, साउथ अफ्रीका और नीदरलैंड्स ने डायरेक्ट क्वालीफाई किया है।

पहली बार टी20 वर्ल्ड कप में होगी 20 टीमें

टी20 वर्ल्ड कप में पहली बार मुख्य दौर में 20 टीमें देखने को मिलेंगी, जिनको 4 ग्रुप में बांटा जाएगा। 5-5 टीमों वाले ग्रुप में शीर्ष पर रहने वाली 2-2 टीमों को सुपर 8 के लिए क्वालीफाई करने का मौका मिलेगा, जबकि सुपर 8 में चार-चार टीमों के दो ग्रुप बनाए जाएंगे और इन ग्रुपों में शीर्ष पर रहने वाली 2-2 टीमों को सीधे सेमीफाइनल में मौका मिलेगा और इसके बाद फाइनल खेला जाएगा।

टी20 वर्ल्ड कप का शेड्यूल तो अभी तक सामने नहीं आया है, मगर खबरों के मुताबिक टी20 विश्व कप 2024 में कुल 50 मैच होंगे, जिनमें से एक तिहाई मैच अमेरिका के अलग-अलग शहरों में आयोजित होंगे। अमेरिका पहली बार किसी आईसीसी इवेंट की मेजबानी करेगा। कुल 17 मैच यूएसए में खेले जा सकते हैं।

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बारिश की उम्मीद में झारखंड के किसान, अगले 15 दिन खेती के लिए काफी अहम, वैकल्पिक खेती की तैयारी में जुटा कृषि विभाग

झारखंड में कम बारिश की वजह से किसान के साथ कृषि विभाग के अधिकारी भी परेशान हैं. अगले 15 दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो खेती नहीं हो पाएगी. ऐसे में सभी बारिश की उम्मीदें लगाए हुए हैं.

रांची: झारखंड के 24 में से 23 जिलों में सामान्य से कम हुई मानसूनी बारिश ने राज्य के अन्नदाताओं के साथ-साथ कृषि विभाग के अधिकारियों के चेहरे पर भी परेशानी ला दी है. देर से आये मानसून और झारखंड के साथ बारिश की बेरुखी ने राज्य में खेती-बाड़ी की स्थिति को बिगाड़ दिया है. अब राज्य के किसान और कृषि विभाग को उम्मीद है कि IMD के पूर्वानुमान के अनुसार अगले 15 दिनों तक राज्य में अच्छी वर्षा हो और हालात सुधरें.

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पिछले वर्ष की तरह बनते जा रहे हैं हालात: कृषि निदेशालय के उप निदेशक मुकेश सिन्हा ने कहा कि अभी राज्य में वर्षा और खेती की स्थिति अच्छी नहीं है. उन्होंने कहा कि कल तक राज्य में 434 मिमी की जगह 236 मिमी वर्षा हुई है. मानसून ने राज्य में देर से दस्तक दी थी. 19 जून को मानसूनी हवाएं राज्य में पहुंची थी. वहीं 22-23 जून को पूरे राज्य में इसका स्प्रेड हो गया था. बावजूद इसके जून महीने में काफी कम वर्षा हुई. उप निदेशक ने कहा कि जून के जैसे ही जुलाई महीने में भी सामान्य से लगभग 46% कम वर्षा हुई है.

IMD के पूर्वानुमान पर कृषि निदेशालय की नजर: कृषि उपनिदेशक ने बताया कि मौसम केंद्र,रांची ने 28 जुलाई से अच्छी वर्षा होने की संभावना जताई है. IMD के पूर्वानुमान पर राज्य के किसानों के साथ-साथ कृषि विभाग की भी उम्मीदें टिकी हैं. कृषि उप निदेशक ने बताया कि राज्य के किसान 15 अगस्त तक धान की रोपनी करते हैं. ऐसे में अगर अगले 10-15 दिन अच्छी वर्षा हो गयी तो स्थिति में सुधार होने की संभावना है.

वैकल्पिक खेती की तैयारी भी कर रहा है विभाग: वर्ष 2022 में राज्य के 22 जिलों के 226 प्रखंडो में सुखाड़ था. कमोबेश वही स्थिति राज्य में इस वर्ष भी बनती दिख रही है. ऐसे में कृषि निदेशालय ने सभी जिले के जिला कृषि पदाधिकारियों को वैकल्पिक खेती का विकल्प तैयार रखने को कहा है. बारिश सामान्य से काफी कम होने की स्थिति में जहां आत्मा के सहयोग से किसानों को संगोष्ठी के माध्यम से धान की सीधी बुआई की जानकारी देने को कहा गया है. वहीं धान की जगह अन्य फसल जैसे मक्का, रागी, दलहन, तिलहन की खेती करने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है.

राज्य में सिर्फ 13-14% धान आच्छादन: राज्य में सामान्य से कम वर्षा की वजह से खेतों में धान की रोपनी के लायक पानी नहीं है. ऐसे में अभी तक 02 लाख 30 हजार हेक्टेयर (13%) में ही धान का आच्छादन हुआ है. वहीं मक्का, दलहन, तिलहन और अन्य फसलों को मिलाकर कुल मिलाकर 05 लाख 50 हजार हेक्टेयर(20%) का आच्छादन हुआ है. राज्य में कुल खेती लगभग 28 लाख हेक्टेयर में होती है, उसमें 18 लाख हेक्टेयर में धान की फसल लगाई जाती है. खराब मौसम की वजह से इस वर्ष खेती की स्थिति बेहद खराब है.

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हिंदू पक्ष को मिली बड़ी राहत, ज्ञानवापी परिसर का ASI सर्वे रहेगा जारी, इलाहाबाद HC ने दिया आदेश.

ज्ञानवापी मामलें में इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला आया है। कोर्ट ने एएसआई (ASI) सर्वे को जारी का आदेश जारी किया है। साथ ही ढांचे को बिना कोई नुकसान हानि पहुंचाए आगामी 31 जुलाई तक काम पूरा करने की बात कही है।

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हाईकोर्ट के इस फैसले से हिंदू पक्ष को बड़ी राहत मिली है। ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के एएसआई सर्वे पर सुप्रीम कोर्ट की रोक का आदेश आज शाम 5 बजे तक प्रभावी था।

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श्रावणी मेले में पूजा स्थलों पर बिक रहे हैं मिलावटी पेड़े और प्रसाद, फूड टेस्टिंग की जांच में हुआ खुलासा

झारखंड में देवघर, दुमका, रांची और खूंटी में श्रावणी मेले में मिलावटी और खराब गुणवत्ता वाले पेड़े और प्रसाद मिल रहे हैं. राज्य फूड सेफ्टी विभाग ने अपनी जांच में इसका खुलासा किया है.

रांची: सावन के महीने में बड़ी संख्या में शिवभक्त बाबा बैद्यनाथ धाम, देवघर और दुमका के बासुकीनाथ के दरबार में पहुंचते हैं. बाबा के दरबार में जलाभिषेक करने पहुंचने वाले शिव भक्त प्रसाद के रूप में सबसे ज्यादा पेड़ा की खरीददारी करते हैं. लेकिन इस पेड़ा और बाकि अन्य प्रसादों में मिलावट की जा रही है. दरअसल, श्रावणी मेले के दौरान देवघर, दुमका, खूंटी, रांची के पहाड़ी मंदिर और अन्य तीर्थस्थलों पर बिकने वाले प्रसादों की फूड सेफ्टी विभाग की टीम ने जब जांच की पेड़ा खराब गुणवत्ता वाले मिले.

आर्टिफिशियल खोवा, पाम ऑयल और स्टार्च की मिलावट: रांची स्थित स्टेट फूड टेस्टिंग लैब के हेड और फूड विश्लेषक चतुर्भुज मीणा ने ईटीवी भारत को बताया कि देवघर और दुमका में इन दिनों श्रावणी मेले को लेकर पेड़ों की खपत काफी बढ़ जाती है. मांग बढ़ने पर दुकानदार पेड़ों की कीमत तो बढ़ाते ही हैं.

जांच में यह बात भी सामने आई है कि FSSAI के प्रावधानों का उल्लंघन कर कई तरह की मिलावट भी करते हैं. चतुर्भुज मीणा ने बताया कि आर्टिफिशियल खोवा, शुद्ध देसी घी की जगह पाम आयल का इस्तेमाल हो रहा है. साथ ही पेड़ा का वजन बढ़ाने के लिए बड़ी मात्रा में बाहर से स्टार्च मिलाया जा रहा है. इसकी वजह से खरीददारों के स्वास्थ्य खराब होने का खतरा बढ़ जाता है. वहीं उनके जेब को भी चूना लगता है.

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मौके पर ही बर्बाद किये जा रहे हैं मिलावटी पेड़े: राज्य के खाद्य विश्लेषक चतुर्भुज मीणा ने बताया कि श्रावणी मेले के दौरान लगातार फूड सेफ्टी विभाग की टीम मेले में बिक रही खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांच कर रही है. उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में सैंपल को मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब में जांच करने पर उसमें तरह-तरह के मिलावट की पुष्टि हुई है. उन्होंने कहा कि मौके पर मिलावट या खराब गुणवत्ता वाले मिठाईयां और पेड़ा को नष्ट कर दिया जा रहा है, जबकि बड़े दुकानदारों को अर्थदंड भी लगाया गया है.

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कई लोग 100 की जगह 110 का पेट्रोल लेते हैं… क्या सही में इससे ज्यादा पेट्रोल आता है?

सबसे पहले तो आपको बताते हैं कि लोग ऐसा क्यों करते हैं. दरअसल, पेट्रोल पंप पर 100, 200, 500, 1000 जैसे अमाउंट की एंट्री के लिए वन बटन सिस्टम होता है. यानी जिस अमाउंट में ज्यादा पेट्रोल बिकता है, उसके कोड सेट रखे जाते हैं.

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इससे होता क्या है कि अगर कोई 200 रुपये का पेट्रोल मांगता है तो सिर्फ एक कोड का एक ही बटन दबाना होता है और 200 नहीं लिखना पड़ता है. ऐसे में 4 बटन की जगह एक ही बटन दबाना होता है और काम हो जाता है .लेकिन, लोगों का मानना है कि जब पेट्रोल पंप वाले ये कोड सेट करते हैं तो उसमें बेईमानी कर लेते हैं और अपने हिसाब से लिमिट तय करते हैं. लोगों को इस शॉर्टकट की पर विश्वास नहीं होता है और ऐसे में लोग अपना अलग अमाउंट बताते हैं.इस वजह से लोग जब 100 का पेट्रोल डलवाना हो तो 105 या 110 रुपये का पेट्रोल डलवाते हैं या फिर 200 का चाहिए तो 194, 199, 205 जैसे अमाउंट का पेट्रोल डलवाते हैं ताकि पेट्रोल पंप कर्मचारी को मैनुअली अमाउंट भरना पड़े, जिससे वो बेईमानी नहीं कर पाए.

क्या इससे फायदा होता है? लोग भले ही इस ट्रिक से पेट्रोल भरवाकर खुश होते हैं, लेकिन इसका कोई प्रमाण नहीं है कि इससे सही में फायदा होता है और शॉर्टकट बटन से पेट्रोल लेने पर कम पेट्रोल आता है. अगर आपको पेट्रोल पंप पर शक है तो इसकी सत्यता आप सरकारी रुप से मान्यता प्राप्त लीटर मेजरमेंट मग के जरिए पेट्रोल पंप की जांच करवा सकते हैं. इसके जरिए ही आप पता लगा सकते हैं कि पेट्रोल पंप ने जितना पेट्रोल मांगा है, उतना ही दिया है.

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विश्व का एकमात्र शिवलिंग, जहां सरसों और तिल के तेल से होता है भगवान का अभिषेक

क्या आपने सुना है कि किसी शिवलिंग का अभिषेक पूजन सरसो और तिल के तेल से भी किया जाता है. यदि नहीं तो धार्मिक नगरी उज्जैन में स्थित श्री हनुमंतेश्वर महादेव के दर्शन-पूजन जरूर कीजिए, क्योंकि यहां विश्व का एकमात्र ऐसा शिवलिंग है, जहां पर भगवान की शिवलिंग प्रतिमा पर सरसो और तिल का तेल चढ़ाकर भगवान का अभिषेक पूजन किया जाता है.

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मंदिर के पुजारी पंडित केदार मोड़ ने बताया कि गढ़कालिका से कालभैरव मार्ग पर जाने वाले ओखलेश्वर घाट पर श्री हनुमंतेश्वर महादेव का अति प्राचीन मंदिर विद्यमान है, जो कि 84 महादेव में 79वें स्थान पर आता है. पुजारी पंडित केदार मोड़ ने बताया कि यहां विश्व का एकमात्र ऐसा शिवलिंग है, जहां सरसों का तेल भगवान को अर्पित कर उनका अभिषेक पूजन किया जाता है और उन्हें तिल के बने पकवानों का ही भोग लगाया जाता है.

यह एकमात्र ऐसा मंदिर है, जो कि 24 घंटे खुला रहता है. मंदिर में कहीं भी ताला नहीं लगाया जाता है. पुजारी ने बताया कि वैसे तो श्री हनुमंतेश्वर महादेव की महिमा अत्यंत निराली है, जिनके दर्शन करने मात्र से ही सर्वमनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं, लेकिन मंगलवार और शनिवार को मंदिर में विशेष पूजन-अर्चन करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है.

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शिव के साथ विराजमान हैं पंचमुखी हनुमान

मंदिर में भगवान शिव की अत्यंत चमत्कारी प्रतिमा के साथ ही पंचमुखी हनुमान की प्रतिमा भी अत्यंत मनोहारी है. इन प्रतिमाओं के साथ ही मंदिर में भगवान श्री गणेश, कार्तिक जी और माता पार्वती के साथ ही नंदी जी भी विराजमान हैं. मंदिर में वैसे तो वर्षभर ही अनेको उत्सव मनाए जाते हैं, लेकिन हनुमान अष्टमी, हनुमान जयंती, शिव नवरात्रि के नौ दिन और श्रावण मास में भगवान का महारुद्राभिषेक विशेष रूप से किया जाता है.

पवन देव ने दिया था श्री हनुमत्केश्वर नाम

वैसे तो इस मंदिर की कई कहानियां प्रचलित हैं, लेकिन बताया जाता है कि लंका पर विजय प्राप्त करने के बाद भगवान श्रीराम से मिलने के लिए जब हनुमान जी उपहार स्वरूप एक शिवलिंग साथ ले जा रहे थे, तभी उन्होंने कुछ समय महाकाल वन में रुककर शिवलिंग की पूजा की थी. इस पूजन-अर्चन के बाद भगवान सदैव यहीं विराजमान हो गए थे, क्योंकि इन्हें हनुमान जी साथ लेकर आए थे. इसीलिए इस मंदिर का नाम श्री हनुमंतेश्वर महादेव पड़ गया.मंदिर में पंचमुखी हनुमान की प्रतिमा आज भी विराजमान है, जबकि इस मंदिर की कथा में यह भी बताया जाता है कि हनुमान जी के बाल्यावस्था में जब वे भगवान सूर्य को गेंद समझकर पकड़ने के लिए गए थे. उसी समय भगवान इंद्र ने उन पर वज्राघात कर दिया था. हनुमान जी को महाकाल वन में विराजमान शिवलिंग का पूजन अर्चन करने से ही चेतन्यता प्राप्त हुई थी. पवन देव ने तभी से इस शिवलिंग का नाम श्री हनुमंतेश्वर महादेव रखा और यही कारण है कि इसी नाम से यह विख्यात भी हुआ.

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