एक नई सोच, एक नई धारा

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पूर्वी सिंहभूम: 20,000 राशन कार्ड होंगे रद्द! 6 महीने से अनाज नहीं लेने वालों पर प्रशासन का बड़ा एक्शन

जमशेदपुर: पूर्वी सिंहभूम जिले के खाद्य आपूर्ति विभाग ने खाद्यान्न वितरण व्यवस्था में सुधार लाने के लिए ‘सफाई अभियान’ शुरू कर दिया है। विभाग ने जिले के ऐसे 20,000 कार्डधारियों को चिह्नित किया है, जिन्होंने पिछले 6 महीने से एक साल तक अपने हिस्से का मुफ्त राशन नहीं लिया है। अब सत्यापन (Verification) के बाद इन कार्डों को रद्द कर दिया जाएगा।

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शहरी क्षेत्रों में सबसे ज्यादा ‘लापरवाह’ कार्डधारी

​विभागीय रिपोर्ट के अनुसार, राशन का उठाव न करने वाले अधिकांश कार्डधारी जमशेदपुर शहर (Jamshedpur Urban) के हैं।

  • शहरी स्थिति: जनवरी 2026 में शहरी क्षेत्रों (JNAC, मानगो, जुगसलाई) में लगभग 15% कार्डधारियों ने राशन नहीं लिया।
  • ग्रामीण स्थिति: ग्रामीण इलाकों में यह आंकड़ा करीब 8% रहा।
  • कुल आंकड़ा: जनवरी में जिले के कुल 4.20 लाख कार्डधारियों में से केवल 90.89% ने ही अनाज प्राप्त किया। लगभग 41,000 परिवार राशन लेने नहीं पहुंचे।

क्यों काटे जा रहे हैं नाम?

​जिला आपूर्ति पदाधिकारी जुल्फिकार अंसारी ने स्पष्ट किया कि बड़ी संख्या में ऐसे लोग सूची में दर्ज हैं जो राशन लेने नहीं आते। इससे वितरण प्रणाली के आंकड़े प्रभावित होते हैं और जरूरतमंदों तक समय पर लाभ पहुँचाने में बाधा आती है। इन 20,000 नामों के हटने से सूची अपडेट होगी और वास्तविक लाभार्थियों को बेहतर सेवा मिल सकेगी।

रैंकिंग में सुधार: 24वें से 22वें स्थान पर पहुँचा जिला

​प्रशासनिक कड़ाई और वितरण में तेजी का असर अब दिखने लगा है।

  • ​दिसंबर 2025 तक पूर्वी सिंहभूम जिला राशन वितरण के मामले में झारखंड में सबसे निचले पायदान यानी 24वें स्थान पर था।
  • ​जनवरी 2026 के सुधारों के बाद जिला दो पायदान ऊपर चढ़कर 22वें स्थान पर पहुंच गया है।

आगे क्या होगा?

  1. सत्यापन: पीडीएस (PDS) डीलरों से मंगवाई गई रिपोर्ट के आधार पर डोर-टू-डोर या डिजिटल सत्यापन होगा।
  2. नाम विलोपन: जो कार्डधारी वास्तव में अपात्र पाए जाएंगे या निष्क्रिय रहेंगे, उनका नाम डेटाबेस से हटा दिया जाएगा।
  3. वेटिंग लिस्ट: पुराने नाम हटने से नए पात्र आवेदकों के लिए जगह बनेगी।
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सावधान जमशेदपुर! साइबर शिकारियों ने बिछाया डिजिटल जाल, ‘डिजिटल अरेस्ट’ और निवेश के नाम पर ₹1.18 करोड़ की ठगी

जमशेदपुर: 90 के दशक का वह मशहूर विज्ञापन— “शिकारी आएगा, जाल बिछाएगा, दाना डालेगा, लोभ से उसमें फंसना नहीं”—आज के डिजिटल युग में जमशेदपुर के लिए सबसे बड़ी चेतावनी बन गया है। शहर में पिछले दो महीनों के भीतर साइबर ठगों ने अलग-अलग इलाकों में जाल बिछाकर मासूम नागरिकों से करीब 1.18 करोड़ रुपये की गाढ़ी कमाई लूट ली है।

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केस 1: मानगो में ‘डिजिटल अरेस्ट’ का खौफ, गंवाए ₹56 लाख

​मानगो की हिल बिहार कॉलोनी के प्रमोद शर्मा को ठगों ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के जरिए अपना शिकार बनाया।

  • साजिश: ठगों ने खुद को IPS विजय खन्ना बताया और पुलिस की वर्दी में वीडियो कॉल किया।
  • धमकी: उन्हें डराया गया कि उनके आधार कार्ड का उपयोग मुंबई में आपराधिक गतिविधियों के लिए हुआ है।
  • नुकसान: डर के मारे पीड़ित ने तीन किस्तों में कुल 56 लाख रुपये ठगों के खातों में ट्रांसफर कर दिए।

केस 2: बुजुर्ग की पेंशन पर डकैती, ₹54.95 लाख साफ

​मानगो की ही माधवबाग कॉलोनी में एक बुजुर्ग के जीवन भर की जमापूंजी पर ठगों ने हाथ साफ कर दिया।

  • तरीका: बैंक अधिकारी बनकर ‘पेंशन क्रेडिट कार्ड’ बनाने का झांसा दिया गया।
  • चूक: बुजुर्ग ने झांसे में आकर अपना OTP साझा कर दिया।
  • अंजाम: 25 से 28 जनवरी के बीच ठगों ने बुजुर्ग के खाते से 54.95 लाख रुपये निकाल लिए।

केस 3: निवेश और शेयर ब्रोकिंग का फर्जी लालच

​गोविंदपुर और कदमा के इलाकों में ‘मुनाफे’ का लालच देकर लाखों की ठगी की गई:

  • गोविंदपुर (₹4.49 लाख): आकाश कुमार को ‘आरबीके शेयर ब्रोकिंग’ के नाम पर कम समय में ज्यादा मुनाफे का सपना दिखाया गया और उनके खाते से पैसे उड़ा लिए गए।
  • कदमा (₹2.87 लाख): यहाँ टेलीग्राम ऐप के जरिए ‘इन्वेस्टमेंट टास्क’ का झांसा दिया गया। ठगों द्वारा भेजे गए एक संदिग्ध लिंक पर क्लिक करते ही युवक का खाता खाली हो गया।

साइबर ठगों के ‘हथियार’—जिनसे आपको बचना है:

ठगी का प्रकारपहचानबचाव
डिजिटल अरेस्टपुलिस/CBI बनकर वीडियो कॉल करना।पुलिस कभी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी की धमकी नहीं देती।
पेंशन/बैंक फ्रॉडबैंक अधिकारी बनकर OTP मांगना।अपना OTP, PIN या पासवर्ड किसी को न बताएं।
इन्वेस्टमेंट लिंकटेलीग्राम/व्हाट्सएप पर भारी मुनाफे का लिंक।अनजान

क्या करें अगर ठगी हो जाए?

​यदि आप या आपका कोई परिचित साइबर ठगी का शिकार होता है, तो बिना देर किए:

  1. 1930 (नेशनल साइबर हेल्पलाइन नंबर) पर तुरंत कॉल करें।
  2. www.cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज करें।
  3. ​नजदीकी साइबर थाना (बिष्टुपुर, जमशेदपुर) को सूचित करें।
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झारखंड: खुद ‘बीमार’ हुई 108 एम्बुलेंस, बीच रास्ते में डीजल खत्म होने से अटकी डायरिया मरीज की जान

जमशेदपुर/पटमदा: झारखंड में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा ‘108 एम्बुलेंस’ की बदहाली थमने का नाम नहीं ले रही है। ताजा मामला गुरुवार को पटमदा क्षेत्र में सामने आया, जहाँ एक गंभीर मरीज को अस्पताल ले जा रही एम्बुलेंस का बीच सड़क पर डीजल खत्म हो गया। इस लापरवाही के कारण डायरिया पीड़ित महिला करीब एक घंटे तक सड़क पर तड़पती रही।

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धूसरा गांव के पास थमे एम्बुलेंस के पहिए

​आगुईडांगरा गांव की 45 वर्षीय सावित्री सिंह को बुधवार से लगातार उल्टी और दस्त (डायरिया) की शिकायत थी। हालत गंभीर होने पर परिजनों ने 108 पर कॉल किया। बोड़ाम के लावजोड़ा पीएचसी से एम्बुलेंस (JH01CJ-8238) मरीज को लेकर एमजीएम अस्पताल के लिए निकली, लेकिन महज 8 किमी दूर धूसरा गांव के पास गाड़ी का इंजन अचानक बंद हो गया।

खराब रखरखाव और तकनीकी खामियां

​एम्बुलेंस चालक कामदेव महतो और टेक्नीशियन गणेश कौशल महतो ने जो खुलासे किए, वे बेहद चौंकाने वाले हैं:

  • डीजल की कमी: टंकी खाली होने के कारण गाड़ी बंद हुई और इंजन ने ‘एयर’ ले लिया, जिससे वाहन पूरी तरह ठप हो गया।
  • कबाड़ में तब्दील वाहन: यह एम्बुलेंस पहले जुगसलाई में थी और वहां भी अक्सर खराब रहती थी। 10-15 दिन पहले ही इसे लावजोड़ा भेजा गया है।
  • बैटरी और मरम्मत का अभाव: चालक के अनुसार, वाहन की बैटरी खराब है और नियमित मरम्मत न होने से यह कभी भी बंद हो जाती है।

दूसरी एम्बुलेंस के भरोसे तय हुआ सफर

​मरीज की जान जोखिम में देख आनन-फानन में एमजीएम अस्पताल से दूसरी एम्बुलेंस मंगवाई गई। लगभग एक घंटे की देरी के बाद सावित्री सिंह को एमजीएम अस्पताल पहुंचाया जा सका। परिजनों में इस देरी को लेकर गहरा आक्रोश है।

पुरानी घटनाओं से भी नहीं लिया सबक

​यह पहली बार नहीं है जब बोड़ाम-पटमदा क्षेत्र में 108 सेवा फेल हुई है:

  • 25 दिसंबर की घटना: डांगरडीह गांव में समय पर एम्बुलेंस न पहुंचने के कारण सांस की बीमारी से जूझ रही एक महिला की मौत हो गई थी।
  • ​उसी घटना के बाद लावजोड़ा पीएचसी को यह एम्बुलेंस आवंटित की गई थी, जो अब खुद तकनीकी खराबी और ईंधन की कमी का शिकार है।

उठते सवाल: जिम्मेदार कौन?

​सरकार और विभाग के बीच समन्वय की कमी का खामियाजा गरीब मरीज भुगत रहे हैं। एम्बुलेंस में तेल न होना और खराब बैटरी के साथ उसे फील्ड में भेजना प्रशासन की बड़ी लापरवाही को दर्शाता है।

परिजनों का पक्ष: “हमने समय पर कॉल किया, एम्बुलेंस भी आई, लेकिन सिस्टम की लापरवाही ने हमारी मरीज की जान खतरे में डाल दी। अगर कुछ अनहोनी हो जाती तो इसका जिम्मेदार कौन होता?” — रविन्द्र सिंह (रिश्तेदार)

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‘ऑल इंडिया ब्रेकडाउन’: आज देशभर में ओला, उबर और रैपिडो की हड़ताल, ठप रहेंगी कैब और बाइक-टैक्सी सेवाएं

नई दिल्ली/मुंबई: आज यानी शनिवार, 7 फरवरी को देशभर में ऐप-आधारित परिवहन सेवाओं (Ola, Uber, Rapido) का पहिया थम गया है। तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) और कई राष्ट्रीय मजदूर संगठनों ने मिलकर ‘ऑल इंडिया ब्रेकडाउन’ का आह्वान किया है। इस हड़ताल के कारण यात्रियों को कार, ऑटो और बाइक-टैक्सी की बुकिंग में भारी किल्लत का सामना करना पड़ सकता है।

क्यों बंद हैं ऐप-आधारित टैक्सियां?

​ड्राइवर संगठनों का आरोप है कि एग्रीगेटर कंपनियां उनका “अंतहीन शोषण” कर रही हैं। हड़ताल के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  1. किराया नीति में मनमानी: ड्राइवरों का कहना है कि सरकार की ओर से कोई न्यूनतम किराया (Minimum Fare) तय नहीं है। कंपनियां अपनी मर्जी से कमीशन काटती हैं, जिससे ड्राइवरों की आय अनिश्चित हो गई है।
  2. पैनिक बटन का वित्तीय बोझ: महाराष्ट्र कामगार सभा के अनुसार, ड्राइवरों को 12,000 रुपये खर्च कर नए पैनिक बटन डिवाइस लगाने के लिए मजबूर किया जा रहा है। पहले लगाए गए कई डिवाइस को सरकार ने ‘अनधिकृत’ घोषित कर दिया है, जिसका खामियाजा ड्राइवरों को भुगतना पड़ रहा है।
  3. ओपन परमिट पॉलिसी: ऑटो रिक्शा की बढ़ती संख्या और अवैध बाइक टैक्सियों के कारण पुराने ड्राइवरों की कमाई में भारी गिरावट आई है।
  4. बीमा का अभाव: यूनियन का आरोप है कि बाइक टैक्सी हादसों के पीड़ितों को उचित बीमा लाभ नहीं मिल पा रहा है।

नितिन गडकरी को लिखा पत्र

​यूनियन ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि लाखों ट्रांसपोर्ट वर्कर्स ‘इनकम इनसिक्योरिटी’ (आय की असुरक्षा) और खराब वर्किंग कंडीशन से जूझ रहे हैं। उनका दावा है कि कंपनियां भारी मुनाफा कमा रही हैं, जबकि ड्राइवर गरीबी की ओर धकेले जा रहे हैं।

यात्रियों के लिए क्या है स्थिति?

  • मोबाइल ऐप बंद: अधिकांश ड्राइवरों ने अपने पार्टनर ऐप लॉग-ऑफ कर दिए हैं।
  • ऑफलाइन विकल्प: यात्रियों को स्टेशन, एयरपोर्ट और बस स्टैंड पर जाने के लिए काली-पीली टैक्सी या स्थानीय ऑटो पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जहाँ मनमाना किराया वसूले जाने की भी खबरें आ रही हैं।
  • सोशल मीडिया पर गूंज: #AllIndiaBreakdown के साथ ड्राइवर अपनी समस्याओं को साझा कर रहे हैं।

निष्कर्ष

​यह हड़ताल भारत में तेज़ी से बढ़ते ‘गिग इकोनॉमी’ (Gig Economy) के भीतर गहरे असंतोष को दर्शाती है। यदि सरकार और कंपनियों के बीच जल्द कोई सहमति नहीं बनी, तो आने वाले दिनों में यह संकट और गहरा सकता है।

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जमशेदपुर में अनुभव सिन्हा: ‘अस्सी’ की दस्तक और झारखंड के नायकों को स्क्रीन पर उतारने की तैयारी

जमशेदपुर: मशहूर बॉलीवुड निर्देशक अनुभव सिन्हा शुक्रवार को ‘लौहनगरी’ जमशेदपुर पहुंचे। गोलमुरी में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने न केवल शहर की सुव्यवस्थित सुंदरता की तारीफ की, बल्कि झारखंड की ऐतिहासिक विरासत और आदिवासी संस्कृति को फिल्म जगत के लिए एक अनमोल खजाना बताया।

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बिरसा मुंडा और सिद्धू-कान्हू की वीरता से हुए प्रभावित

​सिन्हा ने स्वीकार किया कि इस यात्रा ने उन्हें झारखंड के महान क्रांतिकारियों के बारे में जानने का नया दृष्टिकोण दिया है।

  • अनसुनी गाथाएं: उन्होंने पहली बार सिद्धू-कान्हू के संघर्षों के बारे में सुना और अब वे उनके जीवन पर विस्तार से अध्ययन करने के इच्छुक हैं।
  • भगवान बिरसा मुंडा: बिरसा मुंडा के उलगुलान (आंदोलन) को गहराई से समझने की इच्छा जताते हुए उन्होंने कहा कि झारखंड के इन नायकों की कहानियां राष्ट्रीय स्तर पर सिनेमा के जरिए सामने आनी चाहिए।

झारखंडी स्वाद: हड़िया और धुसका का अनुभव

​फिल्मी चकाचौंध से दूर अनुभव सिन्हा ने यहाँ की जमीनी जीवनशैली को करीब से महसूस किया:

  • आदिवासी खान-पान: उन्होंने स्थानीय पेय ‘हड़िया’ और लोकप्रिय व्यंजन ‘धुसका’ का आनंद लिया। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि हड़िया का स्वाद शुरुआत में अलग लगा, लेकिन यही यहाँ की मौलिक पहचान है।
  • भारत दर्शन: उन्होंने कहा कि मुंबई की जिंदगी से निकलकर वे अब तक 40 शहरों का दौरा कर चुके हैं ताकि ‘असली भारत’ को समझ सकें।

फिल्म ‘अस्सी’: 20 फरवरी को कोर्टरूम में होगा फैसला

​उनकी आगामी फिल्म ‘अस्सी’ को लेकर दर्शकों में काफी उत्साह है। सिन्हा ने फिल्म के बारे में कुछ अहम बातें साझा कीं:

  1. रिलीज डेट: यह फिल्म 20 फरवरी को सिनेमाघरों में प्रदर्शित होगी।
  2. सजीव चित्रण: यह एक कोर्टरूम ड्रामा है। इसके लिए सिन्हा ने वास्तविक अदालती कार्यवाहियों का गहन अध्ययन किया है ताकि फिल्म बनावटी न लगे।
  3. दर्शक ही जज: उन्होंने कहा, “कोर्टरूम फिल्मों में दर्शक खुद को जज की कुर्सी पर महसूस करता है, वह वकीलों की दलीलें सुनकर अपना फैसला खुद देता है।”

झारखंड में शूटिंग की संभावना

​अनुभव सिन्हा ने जमशेदपुर की लोकेशंस और यहाँ की संस्कृति की सराहना करते हुए कहा कि यदि उन्हें उपयुक्त कहानी मिली, तो वे भविष्य में झारखंड में शूटिंग करना जरूर पसंद करेंगे। उनके अनुसार, छोटे शहरों के दर्शक भी गंभीर विषयों वाली फिल्मों को उतनी ही ईमानदारी से देखते हैं।

निष्कर्ष: अनुभव सिन्हा की इस यात्रा ने यह संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में बॉलीवुड के बड़े पर्दे पर झारखंड की जनजातीय वीरता और यहाँ की मिट्टी की सोंधी खुशबू देखने को मिल सकती है।

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चाईबासा ब्लड बैंक कांड: मासूमों को HIV+ खून चढ़ाने के मामले में FIR दर्ज, हाईकोर्ट के आदेश पर बड़ी कार्रवाई

चाईबासा: झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले में स्वास्थ्य विभाग की एक रूह कंपा देने वाली लापरवाही के खिलाफ आखिरकार कानूनी शिकंजा कसना शुरू हो गया है। झारखंड हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद, चाईबासा सदर अस्पताल के ब्लड बैंक टेक्नीशियन मनोज कुमार और अन्य के खिलाफ सदर थाने में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है।

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क्या है पूरा मामला?

​अक्टूबर 2025 में यह मामला तब उजागर हुआ जब चाईबासा सदर अस्पताल में थैलेसीमिया (Thalassemia) से पीड़ित पांच मासूम बच्चों को इलाज के दौरान HIV पॉजिटिव रक्त चढ़ा दिया गया। नियमित रक्त चढ़ाने की प्रक्रिया के दौरान हुई इस भारी चूक ने इन बच्चों के भविष्य को खतरे में डाल दिया।

हाईकोर्ट का कड़ा रुख और आदेश

​मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस गौतम कुमार की अदालत ने बुधवार को स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कार्रवाई का निर्देश दिया था:

  • ​अदालत ने पीड़ित परिवारों को सदर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने और थाना प्रभारी को इसे तुरंत स्वीकार करने का आदेश दिया।
  • ​न्यायालय ने इस घटना को स्वास्थ्य प्रणाली की चरम विफलता माना।

सरकारी आश्वासन और धरातल की हकीकत

​घटना के प्रकाश में आने के बाद स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने चाईबासा का दौरा कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और परिवारों को आजीवन सहयोग का वादा किया था।

  • मुआवजा: अब तक परिवारों को केवल 2 लाख रुपये की सहायता राशि मिली है।
  • असंतोष: पीड़ित परिवारों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि इतने महीनों बाद भी दोषी कर्मचारियों पर कोई ठोस कानूनी कदम नहीं उठाया गया था, जिसके कारण उन्हें कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

जनसंघर्ष मोर्चा की भूमिका

​झारखंड बचाओ जनसंघर्ष मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष माधव चंद्र कुंकल ने इस लड़ाई को अंजाम तक पहुँचाने में मुख्य भूमिका निभाई।

  1. धरना प्रदर्शन: पीड़ित परिवारों ने पहले विधानसभा के समक्ष धरना दिया।
  2. याचिका: न्याय न मिलने पर मोर्चा द्वारा हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई।
  3. मांग: कुंकल ने कहा, “यह स्वास्थ्य प्रणाली में व्याप्त लापरवाही का उदाहरण है। हमारी मांग है कि दोषियों को कठोरतम दंड मिले ताकि भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न हो।”

आगे क्या?

​FIR दर्ज होने के बाद अब पुलिस इस मामले में आरोपी टेक्नीशियन और अन्य संबंधित अधिकारियों से पूछताछ करेगी। जांच का मुख्य केंद्र यह होगा कि ब्लड बैंक में रक्त की स्क्रीनिंग (Screening) के प्रोटोकॉल का उल्लंघन कैसे हुआ।

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झारखंड शराब दुकान अपडेट: आज शाम तय होगा कितनी दुकानें होंगी सरेंडर, 1343 दुकानों के भविष्य पर फैसला

रांची: झारखंड में शराब दुकानों के संचालन को लेकर आज यानी शनिवार का दिन बेहद महत्वपूर्ण है। राज्य की कुल 1343 खुदरा शराब दुकानों के नवीनीकरण (Renewal) के लिए लाइसेंस शुल्क जमा करने की अंतिम समय-सीमा 7 फरवरी को समाप्त हो रही है। आज शाम तक यह साफ हो जाएगा कि कितनी दुकानों का संचालन निजी हाथों में रहेगा और कितनी दुकानें सरकारी नियंत्रण में वापस जाएंगी।

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आज शाम तक की समय-सीमा: क्या है नियम?

​उत्पाद विभाग के नियमों के अनुसार, जिन दुकानों के संचालकों ने आज शाम तक लाइसेंस शुल्क जमा नहीं किया, उनकी दुकानों को ‘सरेंडर’ माना जाएगा।

  • 31 मार्च के बाद का प्लान: सरेंडर की गई दुकानें 1 अप्रैल से झारखंड राज्य बेवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (JSBCL) के अधीन चली जाएंगी।
  • अगली प्रक्रिया: JSBCL इन खाली दुकानों के लिए फिर से लॉटरी प्रक्रिया शुरू करेगा। यदि लॉटरी के माध्यम से बंदोबस्ती नहीं हो पाती है, तो जेएसबीसीएल खुद इन दुकानों का संचालन करेगा।

दुकानों का वर्तमान ढांचा

​राज्य में वर्तमान में शराब दुकानों की स्थिति इस प्रकार है:

  • कुल दुकानें: 1343
  • देसी शराब दुकानें: 159
  • कंपोजिट शराब दुकानें: 1184
  • वर्तमान व्यवस्था: 1 सितंबर 2025 से ये सभी दुकानें निजी लाइसेंसियों द्वारा संचालित की जा रही हैं।

विवादों के घेरे में उत्पाद विभाग: प्लेसमेंट एजेंसियों का मुद्दा

​एक तरफ नई बंदोबस्ती की तैयारी है, वहीं दूसरी तरफ पुरानी व्यवस्था का हिसाब अब तक चुकता नहीं हो पाया है। राज्य में पिछले 7 महीनों से प्लेसमेंट एजेंसियों और उत्पाद विभाग के बीच देनदारी (Liability) का मामला अटका हुआ है।

मुख्य विवादविवरण
JSBCL का आरोपप्लेसमेंट एजेंसियों ने शराब बिक्री के करोड़ों रुपयों का गबन किया है।
एजेंसियों का पक्षजेएसबीसीएल ने मैनपावर आपूर्ति का बकाया भुगतान अभी तक नहीं किया है।
वर्तमान स्थिति1 जुलाई से सभी दुकानें JSBCL के अधीन आने के बावजूद, विभाग अभी तक यह तय नहीं कर पाया है कि किस एजेंसी पर कितनी देनदारी बनती है।

राजस्व पर पड़ सकता है असर

​अगर बड़ी संख्या में दुकानें सरेंडर होती हैं और लॉटरी प्रक्रिया में देरी होती है, तो इसका सीधा असर राज्य के राजस्व पर पड़ेगा। अंधेरे का फायदा उठाकर अवैध शराब की बिक्री बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।

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झारखंड में पश्चिमी विक्षोभ का असर: अगले 48 घंटों में गिरेगा पारा, ठिठुरन बढ़ने के आसार

राँची: झारखंड में एक बार फिर मौसम करवट लेने वाला है। मौसम विज्ञान केंद्र, राँची के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के सक्रिय होने से राज्य के तापमान में बड़ी गिरावट दर्ज की जा सकती है। अगले 24 से 48 घंटों के भीतर न्यूनतम तापमान में 3 डिग्री सेल्सियस तक की कमी आने की संभावना है, जिससे सुबह और देर रात की कनकनी बढ़ेगी।

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आसमान साफ होते ही बढ़ेगी ठंड

​मौसम विज्ञान केंद्र के प्रमुख डॉ. बाबूराज पीपी ने बताया कि शनिवार से आसमान साफ होने की उम्मीद है। जैसे ही बादल छंटेंगे, उत्तर-पश्चिमी ठंडी हवाओं का प्रवेश राज्य में सुगम हो जाएगा। इससे न्यूनतम तापमान में तेजी से गिरावट आएगी। सुबह के समय राज्य के अधिकांश हिस्सों में हल्के से मध्यम दर्जे का कुहासा (Fog) छाया रहेगा।

क्षेत्रवार तापमान का पूर्वानुमान (अगले 5 दिन)

क्षेत्रजिलेअधिकतम तापमानन्यूनतम तापमान
उत्तर-पश्चिमगढ़वा, पलामू, चतरा, लातेहार25°C – 29°C7°C – 9°C
मध्य झारखंडरांची, बोकारो, हजारीबाग, गुमला25°C – 27°C7°C – 11°C
पूर्वोत्तरदेवघर, धनबाद, गिरिडीह, साहिबगंज26°C – 28°C8°C – 11°C
दक्षिण झारखंडजमशेदपुर, सिमडेगा, सरायकेला29°C – 30°C8

प्रमुख अपडेट्स:

  • सबसे ज्यादा ठंड: गुमला, खूंटी, गढ़वा और पलामू में पारा 7 डिग्री तक गिरने की संभावना है, जिससे यहाँ शीतलहर जैसे हालात बन सकते हैं।
  • दिन और रात के तापमान में अंतर: दक्षिण झारखंड (कोल्हान क्षेत्र) में दिन का तापमान 30 डिग्री तक रहेगा जबकि रात में यह 8 डिग्री तक गिर जाएगा। तापमान में इस बड़े अंतर के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।
  • खगोल गणना: 7 फरवरी को सूर्योदय सुबह 06:21 बजे और सूर्यास्त शाम 05:33 बजे होगा। धूप की अवधि कम होने से शाम होते ही ठंड का अहसास तेज होगा।

सावधानी की सलाह

​मौसम विभाग ने लोगों को विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। दिन में धूप के बावजूद रात के समय अचानक गिरते तापमान से वायरल बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

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बोकारो में हाथियों का खूनी तांडव: गोमिया में 48 घंटे के भीतर 5 की मौत, ग्रामीणों में दहशत

गोमिया (बोकारो): झारखंड के बोकारो जिले का गोमिया प्रखंड इन दिनों हाथियों के भीषण आतंक से थर्रा उठा है। पिछले 48 घंटों के भीतर हाथियों ने अलग-अलग गांवों में हमला कर 5 निर्दोष ग्रामीणों को मौत के घाट उतार दिया है। गुरुवार रात गांगपुर गांव में दादा-पोते की मौत के साथ ही इस क्षेत्र में मातम और आक्रोश का माहौल है।

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गांगपुर में आधी रात का कहर: दादा और पोते की जान गई

​महुआटांड़ पंचायत के गांगपुर गांव में गुरुवार रात करीब 8:30 बजे तीन हाथियों का झुंड अचानक घुस आया। गांव में बिजली नहीं होने के कारण अंधेरे का फायदा उठाकर हाथियों ने घरों पर हमला करना शुरू कर दिया।

  • मृतक: 60 वर्षीय सोमर साव और उनका 8 वर्षीय पोता अमन कुमार (आयुष)।
  • घायल: हाथियों ने घर की दीवारें तोड़कर अंदर मौजूद लोगों को निशाना बनाया, जिसमें 10 वर्षीय राहुल कुमार, शांति देवी और राशि कुमारी गंभीर रूप से घायल हो गए।
  • लापता: ग्रामीणों के अनुसार एक व्यक्ति अभी भी लापता है, जिसकी तलाश वन विभाग और स्थानीय लोग कर रहे हैं।

बड़की पन्नू गांव: एक ही परिवार के तीन लोगों को कुचला

​इससे पूर्व बुधवार देर रात करीब 3 बजे बड़की पन्नू गांव में हाथियों के पांच सदस्यीय झुंड ने भीषण तबाही मचाई थी। यहाँ हाथियों ने एक ही परिवार के तीन सदस्यों को बेरहमी से मार डाला:

  1. गंगवा करमाली: घर से बाहर भागते समय हाथियों ने सूंड में लपेटकर पटक दिया।
  2. कमली देवी: पति की चीख सुनकर बाहर निकलीं पत्नी को भी हाथियों ने कुचल दिया।
  3. भगिया देवी: जान बचाने की कोशिश कर रही गंगवा करमाली की भाभी को भी हाथियों ने अपना शिकार बनाया।

प्रशासनिक विफलता और अंधेरे का फायदा

​ग्रामीणों में प्रशासन और वन विभाग के प्रति भारी रोष है। ग्रामीणों का कहना है कि:

  • ​गांवों में बिजली की अनुपलब्धता के कारण हाथियों की आवाजाही का पता नहीं चल पाता।
  • ​हाथी घरों के दरवाजे और दीवारें तोड़कर सीधे रिहायशी इलाकों में हमला कर रहे हैं।
  • ​वन विभाग की गश्त और हाथियों को भगाने के इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं।
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जमशेदपुर में गूंजेगा ‘जय भवानी, जय शिवाजी’: 19 फरवरी को निकलेगी भव्य भगवा शोभायात्रा

जमशेदपुर: हिंदवी स्वराज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज की 396वीं जयंती के अवसर पर इस वर्ष भी जमशेदपुर की सड़कें भगवामय होने वाली हैं। ‘छत्रपति शिवाजी सेना’ द्वारा आयोजित होने वाली यह भव्य शोभायात्रा लगातार तीसरे वर्ष 19 फरवरी 2026 को निकाली जाएगी।

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बारीडीह से एग्रीको तक उमड़ेगा जनसैलाब

​एक प्रेस वार्ता के दौरान आयोजन की रूपरेखा साझा करते हुए छत्रपति शिवाजी सेना के संस्थापक मनीष कुमार प्रसाद (मनीष सिंदे) ने बताया कि शोभायात्रा बारीडीह दुर्गा पूजा मैदान से शुरू होगी और एग्रीको पुराने दुर्गा पूजा मैदान तक जाएगी। इस यात्रा में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं और युवाओं के शामिल होने की उम्मीद है।

शौर्य और संस्कृति का अनूठा संगम

​शोभायात्रा को भव्य बनाने के लिए विशेष तैयारियां की जा रही हैं:

  • पारंपरिक छटा: शोभायात्रा में लहराते भगवा ध्वज, ढोल-नगाड़ों की थाप और पारंपरिक वेशभूषा में सजे श्रद्धालु आकर्षण का केंद्र होंगे।
  • राष्ट्रभक्ति का संदेश: देशभक्ति के नारों और शिवाजी महाराज के जीवन दर्शन की झांकियों के माध्यम से युवा पीढ़ी को उनके गौरवशाली इतिहास से परिचित कराया जाएगा।
  • अनुशासन सर्वोपरि: मनीष कुमार प्रसाद ने जोर दिया कि आयोजन पूरी तरह से अनुशासित और सामाजिक सौहार्द के साथ संपन्न होगा।

तीसरे वर्ष भी ऐतिहासिक होगा आयोजन

​संस्थापक ने शहरवासियों से अपील करते हुए कहा:

​”छत्रपति शिवाजी महाराज केवल एक योद्धा नहीं, बल्कि सुशासन और राष्ट्र निर्माण के प्रतीक हैं। हर साल लोगों का उत्साह बढ़ रहा है और यह तीसरा वर्ष जमशेदपुर के इतिहास में ऐतिहासिक होगा। हम सभी को मिलकर इस राष्ट्रभक्ति के उत्सव को सफल बनाना है।”

युवाओं को जोड़ने का संकल्प

​आयोजकों का मुख्य उद्देश्य आधुनिक युवाओं को शिवाजी महाराज के आदर्शों, स्वाभिमान और राष्ट्र सेवा की भावना से जोड़ना है। प्रेस वार्ता में यह भी बताया गया कि सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए कार्यकर्ताओं की टोलियां भी तैनात रहेंगी।

कार्यक्रम का विवरण:

  • दिनांक: 19 फरवरी 2026
  • प्रारंभ: बारीडीह दुर्गा पूजा मैदान
  • समापन: एग्रीको पुराना दुर्गा पूजा मैदान
  • आयोजक: छत्रपति शिवाजी सेना
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