राँची : कुड़मी महतो समाज को एसटी की सूची में शामिल करने की मांग को लेकर कुड़मी समाज एक बार फिर आंदोलन करने की तैयार में है। इसे देखते हुए कुड़मी समाज के लोगों ने 20 सितंबर से झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में अनिश्चतकालीन रेल रोको आंदोलन करने जा रहे है। इस बात की जानकारी कुड़मी विकास मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष शीतल ओहदार ने दी है। उन्होंने कहा की सरकार हर बार उनकी मांग को टाल रही है। इस लिए उन्होंने दावा किया है कि इस बात की लड़ाई आर-पार की होगी। वहीं दूसरी ओऱ रेल रोको आंदोलन का असर जिस रूट में पड़ने वाला है। उसे देखते हुए रेलवे के द्वारा ट्रैनों को रद्द कर दिया गया है, साथ ही कई ट्रैनों को परिवर्तित कर दिया गया है।
रेलवे ने 9 ट्रेनों का परिचालन किया रद्द
20 सितंबर से शुरू होने वाली कुड़मी सामाज का अनिश्चतकालीन रेल रोको आंदोलन में झारखंड के मुरी, गोमो, नीमडीह व घाघरा रेलवे स्टेशन। पश्चिम बंगाल में खेमासुली व कुस्तौर रेलवे स्टेशन और ओडिशा के हरिचन्दनपुर, जराइकेला व धनपुर रेलवे रूट पूरी तरह से प्रभावीत रहेगी। इसे देखते हुए रेलवे ने 9 ट्रेनों को रद्द कर दिया है. वहीं, 7 ट्रेनों को परिवर्तित मार्ग से भेजा जाएगा।
12874 आनंदविहार-हटिया एक्सप्रेस अब टोरी-लोहरदगा-रांची होकर चलेगी। 12878 नई दिल्ली-रांची गरीब रथ अब सोन नगर- गढ़वा रोड-टोरी-लोहरदगा-रांची होकर चलेगी। 18612 बनारस-रांची एक्सप्रेस अब सोन नगर-गढ़वा रोड-टोरी-लोहरदगा-रांची होकर चलेगी। 18623 इस्लामपुर-हटिया ट्रेन अब टोरी- रांची होकर चलेगी। 22824 नई दिल्ली-भुवनेश्वर एक्सप्रेस अब गोमो-आद्रा-मेदिनीपुर-हिजली-भद्रक होकर चलेगी। 13351 धनबाद-अल्लापुझा अब टोरी-रांची होकर चलेगी। 13352 अल्लापुझा-धनबाद अब रांची-टोरी होकर चलेगी।
हरियाणा : इंटरनेशनल महिला पहलवान का आपत्तिजनक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो गया। वीडिया में वो किसी दूसरे पुरुष पहलवान के साथ आपत्तिजनक हालत में है। इधर महिला पहलवान के पिता ने पुलिस को शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ IT एक्ट के तहत केस दर्ज कर लिया है। (जारी…)
गौरतलब है कि उक्त महिला पहलवान ने जनवरी में जंतर मंतर पर WFI के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ दिए धरने के दौरान बड़े खुलासे और दावे किए थे। महिला पहलवान का दावा था कि बृजभूषण होटल में अपने कमरे का दरवाजा खोलकर रखते थे। इधर महिला पहलवान के पिता का आरोप है कि, वायरल वीडियो में आरोपियों ने एक इंटरनेशनल महिला पहलवान की दूसरे पुरुष पहलवान के साथ फोटो वीडियो वायरल कर दी है। (जारी…)
उन्होंने कहा कि, किसी व्यक्ति ने उनकी बेटी का फोटो उठाकर उसे अश्लील फोटो और वीडियो पर लगा दिया है। इसके बाद अश्लील फोटो-वीडियो को वायरल कर दिया है। इस मामले में महिला खिलाड़ी के पिता ने सदर थाना में शिकायत दर्ज करवाई है. उनके पिता का कहना की बेटी को बदनाम करने के लिए ये वीडियो एडिट किया गया है। इस मामले में पिता ने सख्त कार्रवाई की मांग की है। (जारी…)
नेशनल वुमेन रेसलर से जुड़ा मामला देखते ही पुलिस ने तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करते हुए अज्ञात आरोपियों के खिलाफ आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस उन सोशल मीडिया अकाउंट्स की जांच में जुट गई है, जहां ये फोटो-वीडियो पोस्ट की गई। पुलिस वीडियो वायल करने वाले सोर्स का पता लगाने में लग गई है। इसके साथ ही वायरल पोस्ट को फॉरवर्ड व शेयर करने वालों की शिनाख्त की जा रही है।
नई दिल्ली : संसद के विशेष सत्र के पहले दिन सोमवार को यहां केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक हुई. बैठक संसद की एनेक्सी बिल्डिंग में हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में महिला आरक्षण बिल पर मुहर लगी। इस बिल को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे थे। लेकिन केंद्रीय कैबिनेट ने आखिरकार इस बिल को मंजूरी दे दी। इस मंजूरी के बाद महिला आरक्षण बिल को लोकसभा में पेश किया जाएगा।
एक तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रस्ताव
महिला आरक्षण विधेयक में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी या एक तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रस्ताव है। विधेयक में 33 फीसदी कोटा के भीतर एससी, एसटी और एंग्लो-इंडियन के लिए उप-आरक्षण का भी प्रस्ताव है। विधेयक में प्रस्तावित है कि प्रत्येक आम चुनाव के बाद आरक्षित सीटों को रोटेट किया जाना चाहिए। आरक्षित सीटें राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में रोटेशन द्वारा आवंटित की जा सकती है। इस संशोधन अधिनियम के लागू होने के 15 साल बाद महिलाओं के लिए सीटों का आरक्षण समाप्त हो जाएगा।
मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने ट्वीट कर बताया
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने ट्वीट कर बताया कि महिला आरक्षण की मांग को पूरा करने का नैतिक साहस केवल मोदी सरकार में था। कैबिनेट की मंजूरी से यह साबित हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मोदी सरकार को बधाई।
सर्वसम्मति बनाई जा सकती थी- जयराम रमेश
बिल को मंजूरी मिलने की खबर के बाद कांग्रेस की प्रतिक्रिया भी आई। पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने एक्स पर पोस्ट किया- ‘महिला आरक्षण लागू करने की कांग्रेस पार्टी की लंबे समय से मांग रही है। हम केंद्रीय मंत्रिमंडल के फैसले का स्वागत करते हैं। विधेयक के विवरण की प्रतीक्षा है। विशेष सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक में इस पर अच्छी तरह से चर्चा की जा सकती थी। गोपनीयता के पर्दे के तहत काम करने के बजाय सर्वसम्मति बनाई जा सकती थी।
अब संसद पटल पर आएगा बिल
करीब 27 सालों से लंबित महिला आरक्षण विधेयक अब संसद के पटल पर आएगा। आंकड़ों के मुताबिक, लोकसभा में महिला सांसदों की संख्या 15 फीसदी से कम है, जबकि राज्य विधानसभा में उनका प्रतिनिधित्व 10 फीसदी से भी कम है। इस मुद्दे पर आखिरी बार कदम 2010 में उठाया गया था, जब राज्यसभा ने हंगामे के बीच बिल पास कर दिया था और मार्शलों ने कुछ सांसदों को बाहर कर दिया था, जिन्होंने महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण का विरोध किया था। हालांकि यह विधेयक रद्द हो गया, क्योंकि लोकसभा से पारित नहीं हो सका था।
बीजेपी और कांग्रेस ने किया है समर्थन
बीजेपी और कांग्रेस दोनों दलों ने हमेशा इसका समर्थन किया। हालांकि कुछ अन्य दलों ने महिला कोटा के भीतर ओबीसी आरक्षण की कुछ मांगों को लेकर इसका विरोध किया। अब एक बार फिर कई दलों ने इस विशेष सत्र में महिला आरक्षण विधेयक लाने और पारित करने की जोरदार वकालत की, लेकिन सरकार की ओर से कहा गया है कि उचित समय पर उचित निर्णय लिया जाएगा। कैबिनेट की बैठक के एजेंडे में शामिल बिंदुओं को लेकर कोई आधिकारिक पक्ष नहीं आया है। संसद के विशेष सत्र की घोषणा के बाद से ही ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि इस सत्र में सरकार महिला आरक्षण विधेयक या अन्य महत्वपूर्ण विधेयक ला सकती है। इस बैठक में महिला आरक्षण बिल पर चर्चा हुई। इससे पहले पीएम मोदी ने संसद में अपने भाषण के दौरान इसका संकेत दिया था। सीडब्ल्यू की बैठक के भाषण में सोनिया गांधी ने भी मोदी सरकार से महिला आरक्षण बिल लाने की मांग की थी। तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर भी इसकी वकालत कर चुके हैं।
इस बीच राज्यसभा के महासचिव पीसी मोदी ने दोनों सदनों के सदस्यों से अनुरोध किया कि वे भारतीय संसद की समृद्ध विरासत को मनाने के लिए एकजुट हों। उन्होंने कहा कि सभी सदस्य 2047 तक देश को एक विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लेने के लिए 19 सितंबर को सुबह 11 बजे संसद के केंद्रीय कक्ष में इकट्ठा हों। कल 11 बजे से सेंट्रल हॉल में विशेष कार्यक्रम शुरू होगा। इसमें संसद की ऐतिहासिक विरासत का भी उल्लेख किया जाएगा और भारत को 2047 तक विकसित देश बनाने का संकल्प लिया जाएगा। इस कार्यक्रम में पीएम, राज्यसभा के सभापति आदि बोलेंगें। ये कार्यक्रम 11 बजे से 12:35 बजे तक चलेगा। अभी तक की तैयारी के मुताबिक पीएम संविधान की कॉपी लेकर पैदल पुराने संसद भवन से नए संसद भवन में जाएंगे और सभी सांसद उनके पीछे पैदल पुराने संसद से नए संसद जाएंगे।
दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज अपना 73वां जन्मदिन मना रहे हैं। पीएम मोदी के जन्मदिन के मौके पर आज देशभर में अलग-अलग जगहों पर कई कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। राजधानी दिल्ली के हज़रत निज़ामुद्दीन दरगाह पर भी मुस्लिम समुदाय के लोगों ने आज सामूहिक दुआ कार्यक्रम का आयोजन किया और प्रधानमंत्री मोदी की लंबी उम्र की दुआ मांगी। हज़रत निज़ामुद्दीन दरगाह में दुआ पढ़ने वाले मुस्लिम लोगों ने टीवी 9 भारतवर्ष से खास बातचीत के दौरान कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से देश को ही नहीं, बल्कि विश्व को भी उम्मीदें हैं। इसलिये उन्हें 2024 में भी प्रधानमंत्री बनना चाहिए।
दरगाह पर क़व्वाली गाकर मनाया गया पीएम का बर्थडे
पीएम मोदी के जन्मदिन के मौके पर हज़रत निज़ामुद्दीन दरगाह परिसर में लोगों ने आपस में लड्डू भी बांटे। इस दौरान कव्वाली गाकर पीएम के जन्मदिन का जश्न मनाया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए दुआएं मांगने आए लोगों ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी ने विश्व में भारत का नाम ऊंचा किया है। पीएम मोदी सबको साथ लेकर चलने की बात करते हैं, इसीलिए सभी धर्म के लोग उन्हें मानते हैं।
मुस्लिम समुदाय के हित के बारे में मोदी सरकार ही सोचती है- जमाल सिद्दिकी
इस दौरान इसरो को चंद्रयान 3 मिशन और दिल्ली में G-20 के सफल आयोजन पर भी हज़रत निज़ामुद्दीन दरगाह में लोगों ने पीएम मोदी को शुभकामनाएं दी। जश्न के बीच बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष जमाल सिद्दिकी भी यहां पहुंचे। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि मुस्लिम समुदाय के लोग अब समझ चुके हैं कि उनका असली हित मोदी सरकार ही सोचती है, बाकि विपक्ष केवल तुष्टिकरण और गुमराह करने का काम करता है।
जमशेदपुर : आईआईटी के प्रोफेसर दिव्या द्वारा इंटरनेशनल न्यूज़ के एक साक्षात्कार में भारतीय संस्कृति और भारत के विश्व मे बढ़ते कद को मीडिया का प्रभाव बताए जाने के बाद पूरे देश मे इसकी आलोचना हो रही है और इस बाबत भाजपा कृषि मोर्चा, बारीडीह मंडल के महामंत्री कुमार विश्वजीत ने कहा कि G20 सम्मेलन की सफलता की चर्चा जहां पूरे विश्व में हो रही है और हमारा भारत अपने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई में वैश्विक स्तर पर अपनी नई पहचान बना रहा है। (जारी…)
वहीं इस उल्लेखनीय उपलब्धि के चलते कईयों को मरोड़ उठ रहा है। दिल्ली आईआईटी में सोशल साइंस की एसोसिएट प्रोफेसर दिव्या ने “फ्रांस24” नामक न्यूज नेटवर्क को अपने साक्षात्कार के दौरान भारतीय सनातन संस्कृति के बारे में बहुत ही अशोभनीय बातें कहीं हैं। उन्होंने अपने “घृणित” वक्तव्य में कहा कि भविष्य में भारत से हिंदुत्व ही खत्म हो जाएगा। साथ ही भारत की टेक्नोलॉजी समेत अनेक क्षेत्रों में बढ़ती धाक और लोकप्रियता को उन्होंने मीडिया द्वारा गढ़ी गई कहानी बताया तथा भारत में कुछेक लोगों (10प्रतिशत) द्वारा आमजन को (90प्रतिशत) को दबाए, कुचले जाने की बात कही। उनके इस देश विरोधी बयान की मीडिया द्वारा कड़ी आलोचना तो हो रही है पर चिंतन की जरूरत है। (जारी…)
उन्होंने कहा कि आज जहां पूरा विश्व भारत के सामर्थ्य का लोहा मान रहा है वहीं देश के ही कुछेक घृणित मानसिकता वाले लोगों के चलते देश की इज्जत को बट्टा लगता है और मैं प्रोफेसर दिव्या के बयान की कड़ी भर्त्सना करता हूं और उन्हें सूचित करना चाहूंगा कि हमारा देश पुरातन सनातन संस्कृति के चलते जिंदाबाद था, है और रहेगा।
इन दिनों देश में ‘एक देश एक चुनाव’ का मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है. दरअसल, 31 अगस्त को संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने 18 से 22 सितंबर को संसद के विशेष सत्र बुलाये जाने की जानकारी साझा की.
विशेष सत्र बुलाये जाने के केंद्र सरकार के निर्णय के अगले ही दिन ‘एक देश एक चुनाव’ के लिए समिति बनाये जाने की जानकारी सामने आयी. तभी से लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराये जाने को लेकर चिंतन-मनन का दौर जारी है.
कयास लगाये जा रहे हैं कि विशेष सत्र में सरकार यह विधेयक पेश कर सकती है. भारतीय जनता पार्टी लंबे समय से एक देश एक चुनाव चाहती है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने के पक्षधर रहे हैं. वे इसका जिक्र भी कर चुके हैं और इसे भारत की जरूरत भी बता चुके हैं.
सरकार ने किया उच्च स्तरीय समिति का गठन
देशभर में लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ संपन्न हो सकते हैं या नहीं, इस बात का पता लगाने के लिए हाल ही में केंद्र सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है. यह समिति भारत की चुनावी प्रक्रिया का अध्ययन करेगी और उसी के आधार पर सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी. उसी िरपोर्ट के आधार पर सरकार अपन रुख तय करेगी.
रामनाथ कोविंद बने अध्यक्ष
केंद्र सरकार द्वारा गठित समिति की अध्यक्षता पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद करेंगे. गृह मंत्री अमित शाह, राज्यसभा में विपक्ष के पूर्व नेता गुलाम नबी आजाद, वित्त आयोग के पूर्व अध्यक्ष एनके सिंह, पूर्व लोकसभा महासचिव सुभाष सी कश्यप, वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे, पूर्व मुख्य सतर्कता आयुक्त संजय कोठारी समिति के सदस्य होंगे. कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी को भी समिति में शािमल किया गया है, पर उन्होंने इस समिति का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया है.
चुनाव आयोग ने भी दिया था सुझाव
वर्ष 1967 के बाद से एक साथ चुनाव का जो सिलसिला टूटा, उस कड़ी को फिर से जोड़ने की कवायद लगभग 16 वर्षों तक ठंडी पड़ी रही. वर्ष 1983 में चुनाव आयोग ने पहली बार अपनी वार्षिक रिपोर्ट में सुझाव दिया कि लोकसभा के साथ-साथ राज्यों के भी विधानसभा चुनाव कराये जाने चाहिए. पर तत्कालीन सरकार ने आयोग के सुझाव को तवज्जो नहीं दी. हालांकि, 1999 में यह मुद्दा एक बार फिर उभरा जब विधि आयोग ने एक साथ चुनाव कराने पर जोर दिया.
विधि आयोग की सिफारिश
न्यायमूर्ति बीपी जीवन रेड्डी की अध्यक्षता वाले विधि आयोग ने 1999 में चुनावी कानूनों में सुधार पर अपनी रिपोर्ट में एक साथ चुनाव कराये जाने की सिफारिश की थी. कहा था कि शासन में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए लोकसभा और सभी विधानसभाओं के चुनाव एक साथ ही होने चाहिए. रिपोर्ट के अनुसार, ‘हर वर्ष और बेमौसम चुनाव का सिलसिला समाप्त किया जाना चाहिए. हमें वापस उस स्थिति में लौट जाना चाहिए जहां लोकसभा और सभी विधानसभाओं के चुनाव एक साथ होते थे. आयोग ने यह भी कहा था कि वर्तमान परिस्थिति में प्रत्येक पांच वर्ष में एक साथ चुनाव कराने का लक्ष्य चरणबद्ध तरीके से प्राप्त करना होगा.
संसदीय स्थायी समिति ने क्या कहा
कार्मिक, लोक शिकायत, विधि एवं न्याय पर संसदीय स्थायी समिति ने एम सुदर्शना नचियप्पन की अगुवाई में एक साथ चुनाव कराये जाने की संभावना को लेकर 17 दिसंबर, 2015 को सदन में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी. इस रिपोर्ट में कहा गया था कि बार-बार चुनाव होने से बहुत अधिक पैसा खर्च होता है. सामान्य जीवन पर असर पड़ता है और जरूरी सेवाएं प्रभावित होती हैं. चुनाव आयोग की ओर से आदर्श आचार संहिता लागू होने के कारण विकास कार्य प्रभावित होते हैं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि चुनाव के लिए लंबे समय तक सुरक्षा बलों की तैनाती करनी पड़ती है, जिससे उन पर बोझ पड़ता है.
विधि आयोग की मसौदा रिपोर्ट
न्यायमूर्ति बीएस चौहान की अध्यक्षता में विधि आयोग ने 30 अगस्त, 2018 को अपनी मसौदा रिपोर्ट में कहा था कि संविधान के मौजूदा ढांचे के तहत एक साथ चुनाव नहीं कराये जा सकते. इसके लिए संविधान के लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 और लोकसभा और विधानसभाओं की प्रक्रिया के नियमों में संशोधन करना होगा. साथ ही कम से कम 50 प्रतिशत राज्यों को संशोधनों को स्वीकार करना होगा.
एक साथ चुनाव के लाभ
अगस्त, 2018 को सौंपी गयी मसौदा रिपोर्ट में विधि आयोग ने लोकसभा व सभी राज्य विधानसभाओं के एक साथ चुनाव कराने का लाभ भी बताया है. रिपोर्ट के अनुसार,
एक साथ चुनाव कराने से सार्वजनिक धन की बचत होगी.
प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा बलों पर पड़ने वाला बोझ कम होगा.
सरकारी नीतियों का समय पर कार्यान्वयन सुनिश्चित होगा.
प्रशासनिक मशीनरी चुनावी कार्यों में लगे रहने की बजाय विकास कार्यों में संलग्न रहेंगी
पहले भी हो चुके हैं एक साथ चुनाव
देश के स्वतंत्र होने के बाद पहली बार 1952 में चुनाव हुए. तब आम चुनाव (लोकसभा) के साथ-साथ सभी राज्यों की विधानसभाओं के लिए भी चुनाव हुए. इसके पांच वर्षों बाद, 1957 में भी ऐसा ही हुआ. हालांकि, तब राज्यों के पुनर्गठन, यानी नये राज्यों के बनने के कारण 76 प्रतिशत राज्यों के चुनाव लोकसभा के साथ ही हुए. परंतु एक साथ चुनाव का यह सिलसिला पहली बार तब टूटा जब 1959 में केंद्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने अनुच्छेद 356 का उपयोग करते हुए केरल की ईएमएस नंबूदरीपाद की कम्युनिस्ट सरकार को बर्खास्त कर दिया.
इसके बाद फरवरी 1960 में केरल में फिर से विधानसभा चुनाव हुआ. इस प्रकार, देश के किसी भी राज्य में मध्यावधि चुनाव का यह पहला मामला था. हालांकि, इसके बाद 1962 और 1967 में भी लोकसभा के साथ 67 प्रतिशत राज्यों के विधानसभाओं के चुनाव एक साथ ही हुए.
देश के स्वतंत्र होने के बाद पहली बार 1952 में चुनाव हुए. तब आम चुनाव (लोकसभा) के साथ-साथ सभी राज्यों की विधानसभाओं के लिए भी चुनाव हुए. इसके पांच वर्षों बाद, 1957 में भी ऐसा ही हुआ. हालांकि, तब राज्यों के पुनर्गठन, यानी नये राज्यों के बनने के कारण 76 प्रतिशत राज्यों के चुनाव लोकसभा के साथ ही हुए. परंतु एक साथ चुनाव का यह सिलसिला पहली बार तब टूटा जब 1959 में केंद्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने अनुच्छेद 356 का उपयोग करते हुए केरल की ईएमएस नंबूदरीपाद की कम्युनिस्ट सरकार को बर्खास्त कर दिया. इसके बाद फरवरी 1960 में केरल में फिर से विधानसभा चुनाव हुआ. इस प्रकार, देश के किसी भी राज्य में मध्यावधि चुनाव का यह पहला मामला था. हालांकि, इसके बाद 1962 और 1967 में भी लोकसभा के साथ 67 प्रतिशत राज्यों के विधानसभाओं के चुनाव एक साथ ही हुए.
ऐसे टूटा सिलसिला
वर्ष 1968 और 1969 में कुछ राज्य विधानसभा अपने निर्धारित कार्यकाल को पूरा नहीं कर सकीं और विधानसभा समय पूर्व ही भंग हो गयी. इसके चलते एक देश एक चुनाव का सिलसिला पूरी तरह टूट गया. वास्तव में, 1967 के चुनाव में कांग्रेस को उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, पंजाब, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और मद्रास आदि राज्यों में झटका लगा. कई जगह तो कांग्रेस के बागियों ने अन्य दलों के साथ मिलकर सरकार बनायी. पर ऐसी अनेक गठबंधन सरकारें अपने पांच वर्ष का निर्धारित कार्यकाल पूरा नहीं कर सकीं और गिर गयीं. वर्ष 1970 में तो लोकसभा भी समय से पहले भंग हो गयी और 1971 में फिर से आम चुनाव हुए. इसके बाद पांचवी लोकसभा का कार्यकाल बढ़ाकर 1977 तक कर दिया गया. छठी, सातवीं, नौवीं, 11वीं, 12वीं और 13वीं लोकसभा भी समय पूर्व भंग हो गयी. इस प्रकार, 1967 के बाद से लोकसभा और सभी विधानसभाओं के चुनाव एक साथ संपन्न नहीं हो सके.
ये हैं कुछ प्रमुख चुनौतियां
यदि देश में एक देश एक चुनाव लागू होता है तो इसके लिए संविधान के पांच अनुच्छेदों- 83, 85, 172, 174 और 356 में संशोधन करना होगा. अनुच्छेद 83 संसद के दोनों सदनों के कार्यकाल, 85 राष्ट्रपति द्वारा लोकसभा को भंग करने, 172 राज्य विधानसभाओं के कार्यकाल, 174 राज्य विधानसभाओं को भंग करने और अनुच्छेद 356 राज्यों में राष्ट्रपति शासन लागू करने से संबंधित है.
एक देश एक चुनाव को लागू करने के लिए सभी राजनीतिक दलों और सभी राज्य सरकारों की सहमति होना आवश्यक है.
इस कार्य के लिए अतिरिक्त ईवीएम/ वीवीपैट की आवश्यकता होगी. इस समय देश में दस लाख मतदान केंद्र हैं. यदि पूरे देश में वीवीपैट सिस्टम प्रयोग किया जाता है तो एक साथ चुनाव कराने के लिए दोगुने वीवीपैट की आवश्यकता होगी. इस प्रकार, एक साथ चुनाव कराने के लिए ईवीएम और वीवीपैट की खरीद पर नौ हजार दो सौ चौरासी करोड़ से अधिक रुपया खर्च करना पड़ेगा.
इवीएम को रखने के लिए भंडार गृह की जरूरत दोगुनी हो जायेगी, जो समस्या का कारण बन सकती है.
अतिरिक्त मतदान कर्मियों और सुरक्षा बलों की जरूरत होगी, जिससे राज्यों पर दबाव पड़ेगा.
एक साथ चुनाव कराने के लिए पर्याप्त धन की आवश्यकता भी होगी
आगे की राह
देश में कुछ-कुछ महीनों के अंतराल पर अलग-अलग राज्यों में चुनाव होते हैं और आचार संहिता लागू होने के कारण विकास कार्य बाधित होता है. विकास कार्यों के निर्बाध चलते रहने के लिए एक देश एक चुनाव के मुद्दे पर गहन विचार-विमर्श और अध्ययन आवश्यक है. केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, सभी दलों और विशेषज्ञों के साथ मिलकर इस बात पर सर्वसहमति बनानी चाहिए कि राष्ट्र को एक देश एक चुनाव की आवश्यकता है या नहीं. यहां दल से ऊपर उठकर देशहित में विचार करने की जरूरत है.
आलोचकों की राय
लोकसभा ओर विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने को लेकर जहां कई दल समर्थन में हैं, वहीं कई इसके विरोध में. आलोचकों का कहना है कि एक साथ चुनाव कराने का विचार राजनीति से प्रेरित है. एक साथ चुनाव कराने से मतदाताओं का व्यवहार इस रूप में प्रभावित हो सकता है कि वे विधानसभा चुनाव के लिए भी राष्ट्रीय मुद्दों पर मतदान करने लगेंगे. इससे संभावना है कि बड़ी राष्ट्रीय पार्टियां लोकसभा और विधानसभा दोनों चुनावों में जीत हासिल करें. इस कारण क्षेत्रीय पार्टियों के हाशिये पर चले जाने की आशंका है. वहीं कुछ आलोचकों का मानना है कि प्रत्येक पांच वर्ष में एक से ज्यादा बार मतदाताओं का सामना करने से नेताओं की जवाबदेही बढ़ती है और वे सतर्क रहते हैं. विरोध करने वाले दलों में कांग्रेस, एनसीपी, सीपीआई, तृणमूल कांग्रेस, तेलुगू देशम, एआईएमआईएम आदि शामिल हैं.
ये दल हैं समर्थन में
एआइएडीएमके, असम गण परिषद, आईयूएमएल, बीजू जनता दल समेत अनेक दल एक देश एक चुनाव के समर्थन में हैं.
क्या कहना है चुनाव आयोग का
एक देश एक चुनाव को लेकर प्रश्न पूछे जाने पर मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने कहा है कि भारत का चुनाव संवैधानिक प्रावधानों और जनप्रतिनिधि अधिनियम (आरपी एक्ट) के अनुसार काम करने को तैयार है.
जमशेदपुर : आज़ाद भारत के इतिहास में पहली बार हमारा देश G20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। यह उल्लेखनीय, अविस्मरणीय उपलब्धि हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की वैश्विक छवि के कारण ही हासिल हो पाई है। श्री मोदीजी ने “वसुधैव कुटुंबकम्” के महामंत्र से प्रेरित होकर इस वैश्विक शिखर सम्मेलन की मेजबानी का शुभारंभ किया है। पूरे विश्व से सुप्रसिद्ध व्यक्तित्व हमारे देश में पधारकर यहां की सांस्कृतिक विरासत, सनातन संस्कृति की झलक, लोकतांत्रिक व्यवस्था की नीति का दर्शन करेंगे। “G 20 शिखर सम्मेलन” भारत को श्री नरेंद्र मोदी जी की अगुआई में मजबूती से विश्व पटल पर स्थापित करने में सहभागी बनें यही मुझ राष्ट्रवादी, देशप्रेमी, सनातनी कुमार विश्वजीत की हार्दिक शुभेच्छा है।
लोकसभा चुनाव 2024 अब बेहद करीब है। इस बीच चुनाव से जुड़े कई सर्वे कराए जा रहे हैं। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उत्तराधिकारी को लेकर सर्वे किया गया। इस सर्वे में लोगों का मन टटोला गया कि पीएम मोदी के उत्तराधिकारी के लिए सबसे उपयुक्त बीजेपी का नेता कौन होगा। (जारी…)
पीएम नरेंद्र मोदी का उत्तराधिकारी किसे बनाया जाए, हजारों लोगों ने इस बारे में इंडिया टुडे-सी वोटर के सर्वे ‘देश का मूड’ में अपनी राय दी। वैसे तो पीएम मोदी का अभी रिटायर होने का कोई इरादा नहीं है, लेकिन इस सर्वे में ये जानने की कोशिश की गई है कि अगर पीएम मोदी का उत्तराधिकारी बनाया जाए तो कौन सबसे उपयुक्त होगा।
इस बीजेपी नेता पर जनता को सबसे ज्यादा भरोसा
सर्वे में लोगों ने अमित शाह, योगी आदित्यनाथ और नितिन गडकरी को वोट किया। सर्वे के मुताबिक, पीएम मोदी के उत्तराधिकारी के रूप में 29 प्रतिशत लोगों ने अमित शाह का नाम लिया है। 26 प्रतिशत लोगों ने योगी आदित्यनाथ को चुना तो वहीं 15 प्रतिशत लोगों ने नितिन गडकरी का नाम आगे रखा।
अमित शाह अभी केंद्रीय गृह मंत्री हैं और गुजरात में बीजेपी की सरकार बनने के समय से ही मोदी के करीबी रहे हैं। जब मोदी केंद्र की सत्ता में आए तो बीजेपी के मुखिया अमित शाह ही बनाए गए थे। अमित शाह के बाद लोगों ने जिस बीजेपी नेता पर सबसे ज्यादा भरोसा जताया, वो हैं यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। 26 प्रतिशत लोग योगी आदित्यनाथ को मोदी के उत्तराधिकारी के रूप में पसंद कर रहे हैं। (जारी…)
वहीं, अमित शाह और योगी आदित्यनाथ के बाद लगभग 15 प्रतिशत लोगों ने माना है कि नितिन गडकरी, जोकि वर्तमान में केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उत्तराधिकारी के रूप में उपयुक्त होंगे।
तमिलनाडु : मदुरई रेलवे स्टेशन के पास ट्रेन के अंदर आग लगने की घटना सामने आई है। मदुरई में रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, लखनऊ से रामेश्वरम जा रही ट्रेन के टूरिस्ट कोच में आग लगने से 9 लोगों की मौत हो गई है जबकि 20 लोग घायल बताए जा रहे हैं।
रेलवे ने प्रत्येक मृतक के परिजनों को 10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने का ऐलान किया है। निजी पार्टी कोच ने 17 अगस्त को लखनऊ से अपनी यात्रा शुरू की थी और कल चेन्नई पहुंचने वाली थे और इसके बाद इसे वहीं से लखनऊ लौटना था।
अधिकारियों के मुताबिक, आग लगने की घटना की सूचना सुबह करीब 5.15 बजे मिली जब ट्रेन मदुरै यार्ड जंक्शन पर रुकी हुई थी। रेलवे के अनुसार कुछ पैसेंजर अवैध तरीके से गैस सिलेंडर लेकर कोच में घुस गये थे। मदुरई जंक्शन आग को लेकर रेलवे की तरफ से हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं। जो हैं- 9360552608 और 8015681915।
ट्रेन में बना रहे थे चाय नाश्ता
खबर के मुताबिक, ट्रेन के निजी कोच में लखनऊ से 65 यात्रियों को लेकर एक निजी पार्टी सवार हुई थी। ट्रेन संख्या 16730 (मदुरै-पुनालूर एक्सप्रेस) आज सुबह 3.47 बजे मदुरई पहुंची। बुक किए गए निजी कोच को पार्क किया गया था इसमें सवार कुछ सदस्य चाय/नाश्ता तैयार करने के लिए अनधिकृत रूप से अवैध रूप से तस्करी किए गए रसोई गैस सिलेंडर का उपयोग करने लगे। इसकी वजह कोच में आग लग गई। आग लगने की सूचना पर अधिकांश यात्री कोच से बाहर निकल गए.अन्य किसी कोच को नुकसान नहीं हुआ है।
आग लगने का वीडियो आया सामने
आग लगने का वीडियो भी सामने आया है। जिसमें दिख रहा है कि कोच में भीषण आग लगी हुई है और कुछ लोग आसपास चिल्ला भी रहे हैं। इस दौरान बगल के रेलवे ट्रैक से एक ट्रेन भी गुजर रही है। मौके पर पहुंचे दमकल विभाग ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू किया। इस दौरान ट्रेन का कोच बुरी तरह से जला हुआ नजर आ रहा है।
रेलवे ने बताया कि लोग अवैध तरीके से गैस सिलेंडर ले गए थे जिसके कारण लगी आग। रेलवे के रूल के मुताबिक, कोई भी ज्वलनशील पदार्थ रेलवे कोच के अंदर ले जाना सख्त मना है। जिस कोच में आग लगी है वो एक प्राइवेट कोच था।
अवैध तरीके से ले जा रहे थे सिलेंडर
रेलवे के मुताबिक, स्टेशन अधिकारी द्वारा 26.8.23 को 5.15 बजे मदुरई यार्ड में निजी पार्टी कोच में आग लगने की सूचना दी गई। तुरंत फायर सर्विस को सूचना दी गई और फायर टेंडर यहां 5.45 बजे पहुंचे। 7.15 बजे आग बुझा ली गई। किसी अन्य कोच को कोई नुकसान नहीं। यह एक निजी पार्टी कोच है जिसे कल नागरकोइल जंक्शन पर जोड़ा गया था। पार्टी कोच को अलग कर मदुरै स्टेबलिंग लाइन पर रखा गया है।
प्राइवेट पार्टी कोच में यात्री गैस सिलेंडर को अवैध तरीके से ले जा रहे थे और इसी वजह से आग लगी। आग लगने की सूचना पर कई यात्री कोच से बाहर निकल गए थे। कुछ यात्री प्लेटफार्म पर ही उतर गये थे। आपको बता दें कि कोई भी व्यक्ति आईआरसीटीसी पोर्टल का उपयोग करके पार्टी कोच बुक कर सकता है। उन्हें गैस सिलेंडर जैसा कोई भी ज्वलनशील पदार्थ ले जाने की अनुमति नहीं होती है।
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