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अजब-गजब: 8 चांदी के सिक्कों की सुरक्षा में 24 घंटे तैनात हैं 3 पुलिसकर्मी, महीने का खर्च 3 लाख रुपये

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अम्बेडकरनगर: उत्तर प्रदेश के आलापुर तहसील से एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक जर्जर भवन में बंद आठ चांदी के सिक्कों की सुरक्षा के लिए प्रशासन हर महीने लाखों रुपये खर्च कर रहा है। सुनने में भले ही यह किसी फिल्म की कहानी लगे, लेकिन हकीकत यह है कि इन सिक्कों की पहरेदारी में तीन पुलिसकर्मी पांच साल से 24 घंटे तैनात हैं।n71059483517776047294320d9a47aa44d160147ad88446c444c96fff1b172b7ff53b42125ae6f7346fcd5d

क्या है पूरा मामला?

​मामला राजेसुल्तानपुर के चांडीपुर कला गांव स्थित राजा मोरध्वज के किले से जुड़ा है। करीब आठ साल पहले पास के ही एक खेत में खुदाई के दौरान मिट्टी निकालते समय आठ प्राचीन सिक्के मिले थे। पुरातत्व विभाग के निर्देश पर पुलिस ने इन सिक्कों को जब्त कर आलापुर तहसील के उप कोषागार (Sub-Treasury) में सुरक्षित रखवा दिया था।WhatsApp Image 2026 03 07 at 17.22.01

खत्म हो गया दफ्तर, पर नहीं हटी सुरक्षा

​करीब पांच साल पहले प्रदेश सरकार ने सभी उप कोषागारों को बंद करने का आदेश दिया था। इसके बाद आलापुर उप कोषागार के सभी कर्मचारी और दस्तावेज जिला मुख्यालय स्थानांतरित कर दिए गए। भवन जर्जर हो चुका है, लेकिन इन सिक्कों की सुरक्षा के लिए पुलिस लाइंस से तैनात राकेश वर्मा, विशाल पाल और रामानंद यादव आज भी वहीं ड्यूटी दे रहे हैं।

खर्च का गणित: जानकारों के मुताबिक, इन तीन पुलिसकर्मियों के वेतन और अन्य भत्तों को मिलाकर सरकार हर महीने करीब 3 लाख रुपये सिर्फ इन आठ सिक्कों की सुरक्षा पर खर्च कर रही है।

 

अधिकारियों के बयानों में विरोधाभास

​इस मामले में प्रशासन के अलग-अलग बयान सामने आ रहे हैं:

  • वरिष्ठ कोषाधिकारी (बृजलाल): उनका दावा है कि सिक्कों और कीमती सामान को कुछ समय पहले ही जिला मुख्यालय के मुख्य कोषागार में शिफ्ट कर दिया गया है। सुरक्षा हटाने के लिए निदेशालय से मार्गदर्शन मांगा गया है।
  • तहसीलदार (पद्मेश श्रीवास्तव): उनका कहना है कि तिजोरी में क्या है, इसकी सटीक जानकारी उन्हें नहीं है, लेकिन सामान शिफ्ट करने और पुलिस बल की वापसी के लिए पत्राचार जारी है।

क्यों नहीं जमा हो पा रहे सिक्के?

​खबर है कि इन सिक्कों को अयोध्या स्थित पुरातत्व विभाग के कार्यालय में जमा करने की कोशिश की गई थी। लेकिन विभाग ने इन्हें स्वीकार करने से मना कर दिया क्योंकि सिक्कों को सील करने वाले दरोगा उस वक्त मौजूद नहीं थे। बताया जा रहा है कि संबंधित दरोगा का स्थानांतरण हो चुका है, अब उन्हें बुलाकर ही इन सिक्कों को आधिकारिक रूप से जमा कराया जाएगा।

निष्कर्ष: एक तरफ जहां पुलिस बल की कमी की बातें होती हैं, वहीं दूसरी तरफ महज आठ सिक्कों के लिए एक खंडहर बन चुके भवन पर लाखों रुपये और मानव संसाधन खर्च करना चर्चा का विषय बना हुआ है।

ब्यूरो रिपोर्ट: तीसरी धारा न्यूज

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