एक नई सोच, एक नई धारा

दंगे के खिलाफ मिलकर लड़े थे हिंदू-मुस्लिम, रामवनमी पर पहली बार जला था जमशेदपुर

‘देश के लोग यह संकल्प क्यों नहीं लेते कि वो दूसरे समुदायों के प्रति सहिष्णुतापूर्ण रवैया अपनाएंगे.’ ये बात रामवनमी के ठीक एक दिन पहले देश की सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कही थी.

मगर ये बात किसी को भी सुनाई नहीं दी और देश के तीन राज्यों में कम से कम पांच जगहों पर भीषण हिंसा भड़क उठी. अगजनी, बम ब्लास्ट, जैसी घटनाएं हुई और कई लोग घायल हुए. बिहार में एक की जान भी गई. अलग-अलग राज्यों में ये हिंसा रामनवमी के दिन या रामनवमी के एक दिन बाद हुई.

दिल्ली के जंहागीरपुरी में रामनवमी के दिन हिंसा

दिल्ली के जंहागीरपुरी में रामनवमी के दिन शोभायात्रा निकाले जाने की कोशिश की गई, पुलिस ने इसकी इजाजत नहीं दी थी. यहां पर हिंसा भड़की और कुछ लोगों को छतों से पत्थर बरसाते हुए भी देखा गया. जहां पर पत्थर बरसाए गए उन इलाकों में मुस्लिम समुदाय की अधिक आबादी बताई जा रही है.

दिल्ली से दूर पश्चिम बंगाल में हुई हिंसा के पीछे ममता बनर्जी ने बीजेपी का हाथ बताया. हिंसा के बाद दो समुदायों के बीच तनावपूर्ण माहौल बना रहा.

बिहार के सासाराम और बिहारशरीफ में भी बना रहा संप्रादायिक तनाव

बिहार में रामनवमी के त्योहार के बाद दो शहरों सासाराम और बिहारशरीफ से लगातार संप्रादायिक तनाव की खबरें आई. बिहारशरीफ में रामनवमी के जुलूस के दौरान पथराव हुआ था. दोनों तरफ से किए गए हमलों में दो लोगों को गोली लगी थी. पथराव में तीन लोग जख्मी हुए थे.

रोहतास जिले के सासाराम कस्बे में रामनवमी के बाद दो बार ब्लास्ट हुए. पहले विस्फोट में एक और दूसरे में छह लोगों के घायल होने की खबर आई.

त्योहारों में बढ़ जाती है हिंसा

गौर करने वाली बात ये है कि इन सभी जगहों पर हिंसा रामनवमी और रमजान के मौके पर हुई. दिल्ली में शोभायात्रा के दौरान सतर्कता बरती गई लेकिन यही सतर्कता बंगाल, गुजरात और बिहार में नहीं बरती गई. जब भी कोई हिंसा भड़कती है तो गलती दोनों समुदायों की होती है. इसका एक उदाहरण जमशेदपुर में रामनवमी के दौरान साल 1979 में हुआ दंगा है.

इस दिन हुआ था रामनवमी के मौके पर पहला बड़ा दंगा

1979 का जमशेदपुर दंगा रामनवमी के मौके पर हुआ पहला बड़ा दंगा था, जिसमें 108 लोगों की जान गई थी. मारे गए लोगों में 79 मुस्लिम और 25 हिंदुओं की पहचान की गई थी.

रिपोर्टस के मुताबिक आरएसएस ने 1978 के राम नवमी जुलूस की योजना बनाई. इसकी शुरुआत डीमना बस्ती नामक एक आदिवासी पड़ोस इलाके से की गई.

हालांकि, पड़ोसी इलाका साबिरनगर एक मुस्लिम क्षेत्र था और अधिकारियों ने जुलूस को वहां से गुजरने की अनुमति देने से इनकार कर दिया. आरएसएस ने पूरे एक साल तक इस मुद्दे पर अभियान चलाया. आरएसएस ने ये तर्क दिया कि हमें अपने ही देश में स्वतंत्र रूप से जुलूस निकालने की अनुमति नहीं दी जा रही थी.

दोनों समुदायों के बीच गतिरोध बढ़ा, और शहर का माहौल खराब हो गया. हिंदुओं ने दुकानों को बंद करने के लिए मजबूर किया और उनमें से कुछ को गिरफ्तार कर लिया गया. रिपोर्ट्स के मुताबिक मार्च 1979 में आरएसएस प्रमुख बालासाहेब देवरस ने जमशेदपुर का दौरा किया और ध्रुवीकरण को लेकर भाषण दिया. इससे स्थिति और खराब हो गयी.

श्री रामनवमी केंद्रीय अखाड़ा समिति नामक एक संगठन ने 7 अप्रैल को एक पर्चा जारी किया जिसमें सांप्रदायिक हिंसा की घोषणा की गई थी . जुलूस निकाला गया. मुस्लिम पक्ष भी अपनी तरफ से पलटवार के लिए पूरी तरह से तैयार था. पत्थरबाजी हुई और दंगा भड़क गया. उस समय बिहार में कर्पूरी ठाकुर की सरकार थी. घटना के लगभग दस दिन बाद सरकार गिर गई.

सिख विरोधी दंगे- 1984

भारत के इतिहास में 31 अक्टूबर, 1984 का दिन काले दिन की तरह याद किया जाता है. उस दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके ही सिक्योरिटी गार्ड्स ने हत्या कर दी. अगले 24 घंटे में देशभर में सिखों के खिलाफ लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और दंगे भड़क उठे. सिखों को निशाना बनाकर उन्हें बेरहमी से मारा गया, उनके घर-दुकानें भी जला दी गई. दंगों में कुल मौतों की संख्या 410 थी जबकि1,180 लोग घायल हुए थे.

मलियाना दंगा- 1987

मई 1987 को मेरठ शहर में एक दिन के अंतराल में दो ऐसे दंगे हुए जिन्होंने पूरे देश को हिलाकर रख दिया. 22 मई को हाशिमपुरा में हुए दंगे की चिंगारी से शहर झुलस उठा था. दूसरे ही दिन 23 मई साल 1987 में मलियाना के होली चौक पर सांप्रदायिक दंगा भड़का था. मलियाना में दंगाइयों ने 63 लोगों की हत्या कर दी थी और 100 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे.

शबे-बरात के दिन हुई दंगे की शरुआत

दंगे की शुरुआत अप्रैल 1987 में शबे-बरात के दिन मेरठ से शुरू हई और रुक-रुक कर दो-तीन महीनों तक चलती रही. इस दौरान कई बार कर्फ्यू भी लगाया गया लेकिन हालात काबू से बाहर ही बने रहे.

घटनाक्रम के मुताबिक 23 मई 1987 की दोपहर करीब 2 बज कर 30 मिनट पर पीएसी की 44 वीं बटालियन के कमांडेंट और मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का जत्था भारी पुलिस बल के साथ मलियाना पहुंचा और वहां पहले से चल रहे दंगे को कंट्रोल करने के लिए गोलियां चलाई गई.

उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह और तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी भी बाद में दंगा पीड़ितों से मिलने पहुंचे थे.

24 मई 1987 को मेरठ के जिलाधिकारी ने 12 लोगों का मारा जाना स्वीकार किया. जून 1987 में आधिकारिक रूप से 15 लोगों की हत्या स्वीकार की गई. इस दौरान कई शव कुएं से बरामद किए गए थे. 27 मई 1987 को तत्कालीन मुख्यमंत्री ने मलियाना दंगा मामले में न्यायिक जांच की घोषणा की थी.

भागलपुर दंगा – 1989

भागलपुर 1989 को भुला दिए गए दंगे के रूप में याद किया जाता है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस दंगे भागलपुर शहर और तत्कालीन भागलपुर जिले के 18 प्रखंडों के 194 गांवों के ग्यारह सौ से ज़्यादा लोग मारे गये थे.

सरकारी दस्तावेज ये बताते हैं कि ये दंगा दो महीने से ज्यादा वक्त तक चला था. रिपोर्टस के मुताबिक सामाजिक कार्यकर्ताओं और दंगा पीड़ितों का ये कहना था कि लगभग छह महीने तक दंगे होते रहे थे.

नीतीश कुमार 2005 में मुख्यमंत्री बने थे. मुख्यमंत्री बनने के तुरंत बाद नीतीश कुमार ने न्यायमूर्ति एनएन सिंह के नेतृत्व में एक नए जांच आयोग का गठन किया. 2013 में, लोकसभा चुनाव से कुछ महीने पहले उन्होंने 384 दंगा प्रभावित परिवारों के लिए पेंशन को दोगुना कर दिया.

एनएन सिंह समिति की रिपोर्ट में 125 आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई थी. यह वही समय था जब राज्य की कांग्रेस सरकार को भी दोषी ठहराया गया था.

पीपुल्स यूनियन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स में 1996 में छपी एक रिपोर्ट में ये बताया गया है कि भागलपुर जिले में सांप्रदायिक हिंसा का इतिहास कैसा रहा है. इस रिपोर्ट में 1924, 1936, 1946 और 1967 का जिक्र है.

1989 का दंगा इसलिए भी याद किया जाता है क्योंकि भागलपुर के ग्रामीण इलाकों में इस तरह की हिंसा इससे पहले कभी नहीं हुई थी.

दंगा मामले में अबतक न्यायालय में 346 लोगों को सजा हो चुकी है. इनमें 128 लोगों को उम्र कैद और बाकियों को 10 साल से कम की सजा मिल चुकी है.

गोधरा दंगा -2002

गुजरात के गोधरा स्टेशन पर 27 फरवरी 2002 को 23 पुरुष और 15 महिलाओं और 20 बच्चों सहित 58 लोग साबरमती एक्सप्रेस के कोच नंबर S6 में जिंदा जला दिए गए थे. उस दौरान गुजरात के सहायक महानिदेशक जे महापात्रा ने कहा था कि दंगाई ट्रेन के गोधरा पहुंचने से काफी पहले से पेट्रोल से लैस थे और पूरी तैयारी करके आए थे.

गोधरा में हुई इस घटना के बाद पूरा गुजरात सुलगने लगा था. पूरे गुजरात में दंगे देखने को मिले. साबरमती एक्सप्रेस की आग में कारसेवकों की मौत के बाद पूरे गुजरात में जगह-जगह हिंदू और मुसलमानों के बीच हिंसक टकराव हुए थे. उस समय गुजरात के सीएम नरेन्द्र मोदी थे.

2006 अलीगढ़ दंगा

5 अप्रैल 2006 को रामनवमी उत्सव के दौरान हिंदुओं और मुसलमानों के बीच हिंसा भड़क गई थी, जिसमें पांच लोगों की मौत हो गई थी.

2009 पुसद दंगा

2009 में महाराष्ट्र के पुसद में रामनवमी जुलूस को दूसरे समुदाय के लोगों की तरफ से बाधित किया गया और पथराव किया गया. पथराव के बाद माहौल हिंसक बन गया. दंगों में 70 से ज्यादा दुकानों को जला दिया गया था और संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया था.

2016 हजारीबाग हिंसा

रामनवमी उत्सव के अंतिम दिन झारखंड के हजारीबाग शहर और आसपास के इलाकों में लोगों के दो समूहों के बीच झड़प हुई. दुकानों में आग लगाने और पुलिसकर्मियों पर पथराव के बाद कर्फ्यू लगा दिया गया था.

रामनवमी जुलूस के दौरान इस्तेमाल किए जा रहे लाउडस्पीकर को लेकर एक समूह के लोगों ने आपत्ति जताई थी, जिसे लेकर विवाद बढ़ा. वहीं हजारीबाग में 2015 में मुहर्रम के जुलूस में लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को लेकर दंगा भड़का था. हिंसा में कई लोगों की मौत भी हुई थी.

2018 पश्चिम बंगाल दंगे

पश्चिम बंगाल के रानीगंज में रामनवमी के जुलूस के दौरान मुस्लिम समुदाय के लोगों ने लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई. इसके बाद दोनों समुदायों के बीच हिंसा शुरू हो गयी. पुलिस कर्मियों पर ईंटों और पत्थरों से हमला किया गया. भीड़ के हिंसक होते ही देसी बमों से बमबारी शुरू हो गई.

पुलिस उपायुक्त (मुख्यालय) अरिंदम दत्ता चौधरी पर भी बम से हमला किया गया. हादसे में उनका दाहिना हाथ लगभग उड़ गया.

2019 पश्चिम बंगाल के आसनसोल दंगे

पश्चिम बंगाल के आसनसोल में बराकर मारवाड़ी विद्यालय से निकाली गई रामनवमी रैली पर पथराव किया गया. जवाबी कार्रवाई हुई और हिंसा बढ़ गई.

2019 में राजस्थान के जोधपुर में 13 अप्रैल को सांप्रदायिक झड़प हुई थी. रामनवमी के जुलूस के दौरान मुसलमानों के एक वर्ग ने पथराव किया था.

2022 के दंगे

अप्रैल 2022 में चार भारतीय राज्यों गुजरात, मध्य प्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल में सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी. 10 अप्रैल 2022 को रामनवमी के मौके पुलिस इन सभी राज्यो में हिंसा हुई और पुलिस अधिकारियों सहित दर्जनों लोग घायल हो गए. गुजरात में एक व्यक्ति की मौत हो गई.

इसी दौरान झारखंड के बोकारो और लोहरदगा कम से कम 2 जगहों पर झड़पों की सूचना मिली. बोकारो में रामनवमी जुलूस के लिए जा रहे कुछ युवकों पर हमला किया गया. लोहरदगा में हिंसा बड़े पैमाने पर हुई थी, जिसमें दंगाइयों ने कई वाहनों को आग लगा दी थी. लोहारदगा में रामनवमी जुलूस के दौरान पथराव सहित झड़प में कम से कम 12 लोग घायल हो गए.

वो दंगा जिसमें हिंदू और मुसलमान एक साथ मिलकर लड़े थे

आज से ठीक 100 साल पहले एक ऐसा दंगा भी हुआ था जिसमें हिंदू- मुसलमान एक साथ मिलकर लड़े थे. ये दंगा गुलाम भारत के बॉम्बे (अब मुंबई) में हुआ था. बॉम्बे का ये दंगा नवंबर 1921 में हुआ. इस दंगे को प्रिंस ऑफ वेल्स दंगे के नाम से भी जाना जाता है.

ब्रिटेन के प्रिंस ऑफ वेल्स (एडवर्ड आठवें) नवंबर 1921 में भारत के अपने साम्राज्य के शाही दौरे पर आए थे. देश में उन दिनों महात्मा गांधी का असहयोग आंदोलन चल रहा था. गांधी जी उस समय हिंदू-मुस्लिम एकता की वकालत कर रहे थे.

सांप्रदायिक एकता के उस दौर में हिंदुओं और मुसलमानों की एकता हो गई थी. दोनों समुदायों की एकता ने बाकी अल्पसंख्यक समुदायों जैसे- ईसाई, सिख, पारसी और यहूदी के मन में बहुसंख्यक समुदायों के वर्चस्व को लेकर भय का भाव बिठा पैदा कर दिया था. नतिजतन बहुसंख्यक समुदायों ने कुछ हिंसक वारदातों को अंजाम दिया.


स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता पर भाजपा नेता अभय सिंह का पलटवार, यदि हिंदुओं और हिंदुत्व के लिए लड़ने पर मुझे दंगाई कहा जाए तो, मुझे इस पर गर्व है- अभय सिंह, देखें वीडियो

रामनवमी के मुद्दे में गरमाई जमशेदपुर की राजनीति में झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता पर पलटवार करते हुए
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और रामनवमी अखाड़ा समिति के केंद्रीय संरक्षक अभय सिंह ने कहा कि राज्य के स्वास्थ्य मंत्री अब जब सारा मामला का पटाक्षेप हो गया तब वे विधवा विलाप कर रहे हैं। कांग्रेसी कल्चर के डीएनए में श्रीराम का विरोध विगत काल खंड से रहा है, ये इतिहास में सर्वविदित रहा है। जिनके केंद्रीय नेताओं का प्रभु श्रीराम के विरुद्ध हमेशा बयानबाजी रहा है, वह अब नैतिकता की पाठ की दुहाई जमशेदपुर की जनता को दे रहे है।

राम जन्मभूमि का फैसला ना हो उनके प्रिय नेता कपिल सिब्बल जैसे लोग कांग्रेस के नेता राहुल गांधी एवं पूरे कांग्रेस के कहने पर कोर्ट के मामले के विरुद्ध खड़ा हो जाना यह सारा इतिहास सभी लोग जानते हैं।
राम जन्मभूमि को सार्वजनिक शौचालय बनाने की बात जिस पार्टी के द्वारा विगत वर्षों में किया गया हो उनकी पार्टी के नीचे के नेताओं का यह कथन कि हम प्रभु राम के पुजारी हैं, भक्त हैं कहना हास्यास्पद है।

शुरू से कांग्रेस दंगा फसाद करने वाली पार्टी रही है और हिंदुओं के हर त्यौहार में यह बखेड़ा खड़ा किया गया । एक सोची समझी साजिश के तहत पूरे हिंदुस्तान में रामनवमी के शुभ अवसर में जानबूझकर आगजनी, पत्थरबाजी, दंगा-फसाद किया गया, क्योंकि मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति थी। जिसका उदाहरण हावड़ा, गुजरात, बिहार, झारखंड रहा है । एक षड्यंत्र जानबूझकर पैदा किया गया। आखिर विगत वर्षों में ऐसी घटना कही नही हुई लेकिन इस वर्ष में ही क्यों हुआ ? कहीं ये 2024 के आगामी चुनाव का हिस्सा तो नही ?

झारखंड राज्य स्वास्थ्य मंत्री को यह बताना चाहिए कि झारखंड विधानसभा के अंदर जब भाजपा के विधायक डीजे पाबंदी का विरोध कर रहे थे तो उस समय आप एक राज्य के सम्मानित मंत्री होने के नाते अपनी कौन सी भूमिका का निभा रहे थे इसका पर्दाफाश हो गया है।
क्यों नहीं आपने उस समय अपने सरकार की नीति और नियत का विरोध किया ?

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जमशेदपुर में लगातार एक हफ्ते से वही स्थिति बनी हुई थी, उस परिस्थिति में भी आप कुंडली मारकर व्यवधान पैदा होने का क्या इंतजार कर रहे थे ? और क्या आप अपनी राजनीति रोटी सेंकने का इंतजार कर रहे थे ?
क्या आप इस भूमिका में थे ?
आपके कदमा आवास के अगल-बगल के अखाड़ा भी नहीं निकाल रहे थे तो आपने अगल-बगल के लोगों से भी बात करना क्यों उचित नहीं समझा ?
जब सारा मामला पटाक्षेप हो गया शांति पूर्वक, तब आपकी निद्रा बौखलाहट में जगी, आप वोट बैंक की राजनीति करना चाहते थे, वह नहीं पूर्ण होने से आपकी महत्वाकांक्षी राजनीति में गहरा धक्का लगा।

आपने जो आज के अखबार या सोशल मीडिया में आरोप लगाए कि अभय सिंह का परिवार 30 वर्ष पहले दंगा फसाद( इशारों इशारों में) में सम्मिलित थी, जिसे आज अखबार में प्रमुखता से छापा, तो मैं गर्व से कहता हूं कि जमशेदपुर में हिंदू त्रासदी हुआ, हिंदुओं के साथ में नाइंसाफी हुई तो मेरे पूर्वज हिंदुओं को बचाने के लिए अपनी भूमिका अदा किए। यह गर्व का विषय मैं मानता था, मानता हूं, और मानता रहूंगा। अगर हिंदुओं को बचाने के लिए हमारे परिवार को दंगाई बोलते हैं तो मैं इससे गर्व महसूस करता हूं और यह गलती एक बार नहीं सौ बार करने के लिए मैं भी तैयार हूं।

जहां तक हमारी राजनीतिक चोला बदलने की बात है तो सारे लोग जानते हैं कि हमने जेवीएम में भी रहते हुए हिंदुत्व से कभी समझौता नहीं किया, जिसका उदाहरण 2017 में बृहस्पतिवार, शुक्रवार के मुद्दे में स्थानीय प्रशासन के दबाव के बावजूद हमने अपना झंडा शुक्रवार को अकेले निकाला यह इतिहास को पढ़ ले और आप किस राजनीतिक चरित्र की बात करते हैं जिनके छन्नी में 100 छेद हैं वो दूसरे के ऊपर में आरोप ना लगाएं।

25 पार्टी बदलने वाले लोग जिनकी रात की और दिन की मानसिकता मात्र अपने कपड़े बदलने के जैसी भूमिका में हो उनको यह आरोप लगाने का अधिकार नहीं है।
जमशेदपुर की जनता आपके चरित्र को जानती है, आप चुप ही रहे अन्यथा हमारी पार्टी, हिंदू समाज आपको कभी माफ नहीं करेगा।
बन्ना गुप्ता के हिन्दू धर्म पर डिबेट करने की बात पर हमला करते हुए अभय सिंह ने कहा कि मैं कोई बहुत बड़ा विद्वान नहीं हूँ, न ही मैं कोई पंडित हूँ, मैं एक छोटा सा राम भक्त हूँ और यदि स्वास्थ्य मंत्री चाहते हैं तो बोले अपनी सरकार को कि मंच तैयार करवाएं मैं डिबेट करने को तैयार हूँ। उन्होंने यह भी कहा कि जिन्हें इतना भी ज्ञात नहीं कि गीता में कितने श्लोक हैं वो डिबेट करेंगे, जो जूते पहन कर नारियल फोड़ने का कार्य कर रहे हैं उन्हें वेद और उपनिषद के बारे में कितना ज्ञान होगा यह सब जानते हैं।

अभय सिंह ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि …और एक आवश्यक जानकारी मैं मीडिया के माध्यम से देना चाहता हूँ कि मैं अपनी गिरफ्तारी को एवं जमशेदपुर के सारे मुद्दों को लेकर अपने वरीय नेताओं से, प्रतिपक्ष के नेता श्री बाबूलाल मरांडी जी से, वरीय नेताओं को जानकारी दी। उन्होंने इसमें कहा कि यह केवल आप का मुद्दा नहीं समाज का मुद्दा है। आप गिरफ्तारी नहीं दे, पुलिस ने स्वयं गलती की है। वह विगत दिनों दुर्गा पूजा भोग वितरण के मामले में जिसमें आपको केस किया गया है वह आप की गिरफ्तारी करें आपको अपनी गिरफ्तारी नहीं देनी है।

इंडिगो के विमान की तेलंगाना में इमरजेंसी लैंडिंग, 137 यात्री बाल-बाल बचे

इंडिगो फ्लाइट में तकनीकी समस्या आने के बाद उसकी इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी है।दरअसल,बेंगलुरु से वाराणसी जाने वाली (6E897) फ्लाइट में 137 यात्री सवार थे, जिसकी तकनीकी खराबी के कारण आज सुबह 6.15 बजे तेलंगाना के शमशाबाद हवाई अड्डे पर आपातकालीन लैंडिंग की गई। सभी यात्री सुरक्षित बताए गए हैं।

तकनीकी समस्या के चलते हुई इमरजेंसी लैंडिंग

जानकारी के अनुसार, फ्लाइट जैसे बेंगलुरु से रवाना हुई कुछ देर बाद पायलट को उसमें तकनीकी समस्या का पता चला। इसके बाद पायलट ने विमान की तेलंगाना के शमशाबाद हवाई अड्डे पर इमरजेंसी लैंडिंग की।
बता दें कि बीते दिन बेंगलुरु से अबू धाबी के लिए उड़ान भरने वाली एतिहाद एयरवेज की फ्लाइट EY237 में भी तकनीकी खराबी आई थी, जिसके तुरंत बाद उसकी वापिस बेंगलुरु के एयरपोर्ट पर आपातकालीन लैंडिंग करवाई गई।

कैबिन प्रेशर में दिक्कत

दरअसल, जैसे ही फ्लाइट ने टेक-ऑफ किया तो पायलट को अहसास हुआ कि प्लाइट में कुछ दिक्कत है। कैप्टन ने पाया कि विमान के कैबिन प्रेशर में कमी है, जिसके बाद उसने इमरजेंसी लैंडिंग का फैसला किया।

कोर्ट ने सरकार, ईडी को हेमंत सोरेन के खिलाफ खनन पट्टा मामले में जांच रिपोर्ट पेश करने का दिया निर्देश

राँची : झारखंड उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ खनन पट्टा मामले में की गई जांच की स्थिति रिपोर्ट पेश करने का सोमवार को निर्देश दिया। सोरेन अंगड़ा में अपने नाम पर एक खनन भूखंड की खबरों को लेकर मुश्किल में हैं। आरोप है कि पट्टा मुख्यमंत्री के पक्ष में उनकी व्यक्तिगत हैसियत से प्रदान किया गया था, जबकि उनके पास खान विभाग का प्रभार था।

मुख्य न्यायाधीश संजय कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति आनंद सेन की खंडपीठ ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) कार्यकर्ता सुनील कुमार महतो द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और ईडी को स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। मामले में अगली सुनवाई एक मई को होगी।

महतो ने अपनी याचिका में कहा है कि सोरेन का उनके पक्ष में लीज पर ली गई खदान जनप्रतिनिधियों के लिए “लाभ का पद नहीं रखने” के शासनादेश का सीधा उल्लंघन है। महाधिवक्ता राजीव रंजन ने राज्य सरकार का बचाव करते हुए कहा कि जनहित याचिका ओछे ढंग से दायर की गई है और राजनीति से प्रेरित है। इससे पहले भी हाईकोर्ट में इसी तरह की याचिका दायर की गई थी, जिसने मामले की जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद, मामले को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था।

महाधिवक्ता के बयानों पर पलटवार करते हुए महतो के वकील ने कहा कि पहले का मामला एक शिव शंकर शर्मा द्वारा दायर किया गया था, जिसे शायद सोरेन परिवार के खिलाफ व्यक्तिगत द्वेष दिखाया गया था। सुप्रीम कोर्ट के समक्ष शर्मा की विश्वसनीयता भी स्पष्ट रूप से स्थापित नहीं हुई थी। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास ने सोरेन पर आरोप लगाया था कि उन्होंने रांची के अंगारा ब्लॉक में 0.88 एकड़ में फैली एक पत्थर की खदान के लिए मई 2021 में उनके द्वारा आयोजित एक कंपनी को खनन पट्टा आवंटित किया था।

पाकिस्तानी पत्रकार भारत छोड़ने पर कोस रही अपने दादा जी को, भारत आने का मिल रहा न्यौता

पाकिस्तान आर्थिक रूप से कंगाल हो चुका है जिसका सीधा असर वहां लोगों पर पड़ रहा है। इतना ही नहीं बल्कि जो लोग भारत पाकिस्तान बंटवारे के समय पाकिस्तान चले गए थे उनकी नस्लें अब अपने बाप दादाओं को कोस रहे हैं। उन लोगों में अब पाकिस्तान की मशहूर पत्रकार आरजू काज़मी भी शामिल हो गई है। अपनी हालत को लेकर आरजू ने एक ट्वीट किया है जो वायरल हो रहा है। अपने इस ट्वीट में आरजू ने लिखा है कि वह असल में हिंदुस्तान की रहने वाली हैं, लेकिन उनके दादा बंटवारे के समय दिल्ली और प्रयागराज से पाकिस्तान चले गए थे। आपको बता दें कि पाकिस्तान में अभी आर्थिक हालात बेहद खराब चल रहे हैं। यहां को लोगों को आटा तक नहीं मिल रहा। यहां खाने पीने के सामानों की कीमत आसमान पर चली गई हैं।

भारत छोड़ने का पछतावा

आरजू काजमी ने अपने पूर्वजों के 1947 में भारत से पाकिस्तान चले जाने के फैसले पर अफसोस जताया है और ट्वीट किया, मेरे भाइयों और परिवार के अन्य सदस्यों को लगता है कि उनका पाकिस्तान में कोई भविष्य नहीं है। मेरे दादाजी और उनका परिवार पाबेहतर भविष्य के लिए प्रयागराज और दिल्ली से पाकिस्तान चला आया था। वाट लगा दी दादा जी। आरजू का यह ट्वीट जबरदस्त रूप से वायरल हो रहा है।

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भारत आने का मिला न्यौता

इस पर अफशान नाम की ट्वीटर यूजर ने लिखा कि, मेरे दादा-दादी बिहार और यूपी से पलायन कर पाकिस्तान आए थे और उन्हें अंतिम सांस लेने तक अपने फैसले पर पछतावा हो रहा था। वहीं, समीर अहमद नाम के एक यूजर ने लिखा, मैं बेहतर तरीके समझ सकता हूं। मेरे दादा ने भी यही किया था और अंत में हमारी हालत खराब हो गई। वहीं, जगदीश नाम के यूजर ने कारजू के ट्वीट पर रिप्लाई करते हुए लिखा, योगी जी घर वापसी करा देंगे। वहीं, मंजूर अहमद ने लिखा-चिंता की बात नहीं है अब्बा (भारत) का दिल बहुत बड़ा है। इसी के साथ ही आरजू को इसके बाद कई लोगों ने भारत में आने का न्यौता दिया।

मुख्यमंत्री ने टिनप्लेट कंपनी के विस्तारीकरण का किया शिलान्यास, कहा- जमशेदपुर में ताज होटल और राँची में कैंसर हॉस्पिटल खुलेगा

टिनप्लेट कंपनी की विस्तारीकरण परियोजना का सोमवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कंपनी परिसर में शिलान्यास किया। इसके बाद उन्होंने कहा कि आज टाटा समूह की टिनप्लेट कंपनी की विस्तारीकरण किया जा रहा है। बहुत जल्द जमशेदपुर में होटल ताज और रांची में टाटा स्टील द्वारा निर्मित टाटा कैंसर हॉस्पिटल लोगों के लिए खुलेगा। इससे शहर और राज्य की जनता के साथ बाहर के लोगों को भी इसका फायदा होगा। इंडस्ट्री को चलाने और उसके बेहतर प्रबंधन और मजदूर कैसे अच्छे से काम करें, इस पर टाटा समूह काम करता है। इसमें टाटा समूह की बहुत बड़ी भूमिका होती है। सरकार के रूप में हमारी यह सोच रहती है कि राज्य में उद्योग लगेंगे तो रोजगार का सृजन होगा। इसके लिए कौन-कौन सी नीतियां बनानी हैं, उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए कैसे नीतियां बनानी हैं, इस पर हमारा ज्यादा फोकस रहता है। सरकार बनने के बाद हमने नई उद्योग नीति बनाई है। इसके बाद कई उद्योगों के प्रबंधन ने यहां आने की इच्छा जताई है। संयोग से उस उद्योग नीति को सार्वजनिक करने के मौके पर कई उद्योग घराने के लोग समारोह में शामिल थे। उस पर सहमति भी बनी।

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मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड की उद्योग नीति के तहत टाटा स्टील अपना एक्सटेंशन भी करेगी। कोरोना के कारण कई चुनौतियां भी खड़ी थीं। फिर भी राज्य में आर्थिक गतिविधि बनाए रखने के लिए उद्योग के साथ-साथ आम जीवन सामान्य बना रहे, इसका भी हमलोगों ने भरसक प्रयास किया था। आज जिस उद्योग नीति को लेकर कई बेहतर परिणाम भी देखने को मिले। उनमें से एक टिनप्लेट कंपनी के विस्तारीकरण योजना है। इससे पहले बोकारो का सीमेंट प्लांट भी अपने एक्सटेंशन की स्थिति में था, लेकिन कई कारणों से वह अपने आपको फैला नहीं पाया। लेकिन हमारी उद्योग नीति के साथ आगे बढ़ा और उसमें उत्पादन भी शुरू हो गया है।

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मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि यहां टाटा समूह की ओर से यहां दो हजार करोड़ रुपए का इन्वेस्टमेंट हो रहा है। प्रत्यक्ष रूप से एक हजार लोगों को इसमें रोजगार मिलेगा। निश्चित ही प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से कम से कम पांच से सात हजार लोग इसका लाभ उठाएंगे। उन्होंने कहा कि इस देश को लोगों ने जाना है तो टाटा और बिड़ला समूह की वजह से ही जाना है। देश और राज्य को आगे बढ़ाने में टाटा समूह की बहुत बड़ी भूमिका रही है। राज्य के व्यावसायिक घरानों के साथ मिलकर राज्य में व्यावसायिक व्यवस्थाएं मजबूत करने पर काम किया जा रहा है। टाटा समूह होटल व्यवसाय में भी अपनी अलग पहचान रखता है। राज्य में खनिज सम्पदा काफी मात्रा में है। राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मजबूती से कई काम किए हैं। इस कारण टाटा समूह यहां अपने ताज समूह को भी यहां लाने के प्रयास में है। इसके लिए हर प्रयास किए जाएंगे।

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टाटा स्टील के सीईओ सह प्रबंध निदेशक (एमडी) टीवी नरेंद्रन ने कहा कि टिनप्लेट कंपनी की इस प्रोजेक्ट के लिए दो-तीन साल पहले दिल्ली में एमओयू पर हस्ताक्षर हुआ था। यह प्रोजेक्ट जमशेदपुर और टाटा स्टील के लिए काफी महत्वपूर्ण है। टाटा स्टील लगातार आगे बढ़ रहा है। टिनप्लेट कंपनी का 100 साल का इतिहास है। पैकेजिंग स्टील में भारत में नंबर वन कंपनी है। जमशेदपुर में टाटा समूह का जिंजर होटल है। जमशेदपुर में बहुत जल्द ताज का भी होटल आने वाला है। रांची में टाटा कैंसर हॉस्पिटल बनकर तैयार है, जो बहुत जल्द लोगों के लिए शुरू हो जाएगा।

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समारोह में स्वागत भाषण टिनप्लेट कंपनी के एमडी आरएन मूर्ति ने दिया। उन्होंने मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, विशिष्ट अतिथि परिवहन मंत्री चंपई सोरेन, स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता, टाटा स्टील के एमडी टीवी नरेंद्रन व सभी विधायकों को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। समारोह में मुख्यमंत्री को मोमेंटो भी भी दिया गया। समारोह में टाटा स्टील के वाइस प्रेसिडेंट (कॉर्पोरेट सर्विसेज) चाणक्य चौधरी, जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय, पोटका के विधायक संजीव सरदार, जुगसलाई के विधायक मंगल कालिंदी, घाटशिला के विधायक रामदास सोरेन, बहरागोड़ा के विधायक समीर महंती, ईचागढ़ की विधायक सविता महतो उपस्थित थे। इनके अलावा मुख्य सचिव वंदना डाडेल, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव, उद्योग विभाग के सचिव जितेंद्र सिंह, डीसी विजया जाधव, एसएसपी प्रभात कुमार मौजूद थे। अंत में धन्यवाद ज्ञापन टिनप्लेट कंपनी के महाप्रबंधक (वर्क्स) एसके वत्स ने किया।

24 घंटे में कोरोना के आए 3641 नए केस, देश में संक्रमितों की संख्या 20000 के पार

वैश्विक महामारी कोरोना का भारत में पिछले कुछ दिनों से एकबार फिर से खौफ बढ़ने लगा है। पिछले कई दिनों से देश में कोरोना के मामलों में लगातार इजाफा देखने को मिल रहा है। इससे पहले देश में कोरोना धीरे-धीर दम तोड़ता नजर आ रहा था लेकिन मौसम में बदलाव के बीच एकबार फिर से कोरोना के नए मामले तेजी से बढ़ने लगी है। कोरोना मामलों में बढ़ोतरी पिछले 8 हफ्तों से लगातार बढ़ रही है। आलम यह है कि देश में पिछले कई दिनों से कोरोना के 3000 से ज्यादा नए केस सामने आ रहे हैं।

24 घंटे में कोरोना के 3641 नए केस आए

पिछले कुछ दिनों से देश में एकबार फिर से कोरोना के मामलों में तेजी देखी जा रही है। हालांकि कल के मुकाबले देश में आज कोरोना के दैनिक मामले में थोड़ी गिरावट दर्ज की गई है। देश में आज कोरोना के 3641 नए केस सामने आए हैं। इस दौरान कोरोना संक्रमण की वजह से 11 लोगों की मौत की खबर है। इससे पहले पिछले दिन रविवार को देश में कोरोना के 3824 नए केस सामने आए थे जबकि 4 लोगों की मौत हुई थी। यानी कल के मुकाबले आज देश में कोरोना के 183 कम नए केस सामने आए हैं। वहीं शनिवार को देश में कोरोना के 2994 नए केस सामने आए थे जबकि 9 लोगों की मौत की खबर थी। वहीं शुक्रवार को देश में कोरोना के 3095 नए मामले आए थे, जबकि 5 लोगों की मौत की मौत हुई थी।

देश में फिर डराने लगा है कोरोना

स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से आज सुबह जारी आंकड़े के मुताबिक बीते 24 घंटे में देश में कोरोना संक्रमण के 3641 नए केस सामने आए। इस दौरान कोरोना संक्रमण की वजह से 11 व्यक्तियों की मौत की खबर है। वहीं इस दौरान कोरोना वायरस के संक्रमण को 1800 लोग मात देने में कामयाब रहे, यानी स्वस्थ्य हुए। इसके साथ ही देश में कोरोना के एक्टिव केस की संख्या उछलकर 20,000 के पार पहुंच गई है। आज देश में कोरोना के एक्टिव केसों की संख्या 20,219 हो गई है। इस तरह पिछले 24 घंटे में एक्टिव केस की संख्या में 2035 की तेजी दर्ज की गई है।

देश में अब तक कोरोना संक्रितों की संख्या 4,47,26,459 हुई

इसके साथ ही देश में कुल कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़कर 4 करोड़ 47 लाख 26 हजार 459 हो गई है। जबकि ठीक होने वाले लोगों का आंकड़ा बढ़कर 4 करोड़ 41 लाख 75 हजार 135 हो गया है। वहीं देश में अब तक कुल 5 लाख 30 हजार 892 लोग कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से दम तोड़ चुके हैं।

देश में अबतक कोरोना की ताजा स्थिति

अभी कुल एक्टिव केस- 20 हजार 219
अबतक कुल संक्रमित- 4 करोड़ 47 लाख 26 हजार 459
अबतक कुल डिस्चार्ज- 4 करोड़ 41 लाख 75 हजार 135
अबतक कुल मौतें- 5 लाख 30 हजार 892

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, डेली पॉजिटिव रेट इस समय 2.87 फीसदी तो वीकली पॉजिटिव रेट 2.24 प्रतिशत है। कोरोना से ठीक होने वालों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। देश में अब रिकवरी रेट बढ़कर 98.77 फीसदी पहुंच गया है। जबकि मृत्यु दर 1.19 फीसदी पर बरकरार है। वहीं सक्रिय मामलों में कुल संक्रमणों का 0.04 प्रतिशत शामिल है। मंत्रालय की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक, राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत अभी तक करीब कोविड-19 रोधी टीकों की 220.66 करोड़ खुराक दी जा चुकी है।

चलती ट्रेन में सरफिरे ने लगाई आग, बच्चे समेत कूदे 3 लोग, हुई मौत

केरल के कोझिकोड में एक सिरफिरे ने चलती ट्रेन में दूसरे यात्रियों पर ज्वलनशील पदार्थ छिड़ककर आग लगा दी। बोगी में अचानक भड़की आग देखकर एक साल के बच्चे को लेकर सफर कर रही महिला ने चलती ट्रेन से ही छलांग लगा दी। पुलिस को पटरियों से उन दोनों के अलावा एक और शख्स की लाश मिली है।
पुलिस ने मामला दर्ज कर उस शख्स की तलाश शुरू कर दी है, जिसने ट्रेन की बोगी में आगजनी को अंजाम दिया। आगजनी के दौरान ट्रेन में सवार 9 लोग भी गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनका अस्पताल में इलाज चल रहा है।

आगजनी कर फरार हो गया शख्स

पुलिस ने एजेंसी को बताया कि घटना अलप्पुझा-कन्नूर एग्जीक्यूटिव एक्सप्रेस में रविवार रात 9.45 बजे हुई। कोझिकोड शहर को क्रॉस करने के बाद ट्रेन जैसे ही कोरापुझा रेलवे पुल पर पहुंची एक अज्ञात व्यक्ति ने दूसरे यात्रियों पर ज्वलनशील पदार्थ डाला और आग लगा दी। इस आगजनी में 9 लोग बुरी तरह से झुलस गए। घटना को अंजाम देने के बाद संदिग्ध आरोपी वहां से फरार हो गया।

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ट्रेन में मिला महिला का मोबाइल

ट्रेन की बोगी में धधकती आग को देखकर दूसरे यात्रियों ने चेन पुलिंग की और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। यहां से आगे चलने के बाद जब ट्रेन कन्नूर पहुंची, तो कुछ यात्रियों ने घटना के बाद से एक महिला और एक बच्चे के लापता होने की शिकायत की। आगजनी में घायल एक शख्स दोनों की तलाश कर रहा था। काफी तलाश करने के बाद ट्रेन से महिला का मोबाइल फोन और बच्चे का एक जूता मिला।

सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही पुलिस

पुलिस ने महिला और बच्चे की खोजबीन शुरू की तो इलाथुर रेलवे स्टेशन के पास पटरियों पर महिला और बच्चे के अलावा एक और शख्स की लाश पड़ी मिली। पुलिस को अंदेशा है कि आग देखने के बाद उन्होंने चलती ट्रेन से छलांग लगा दी। पुलिस इस घटना की सत्यता पता करने के लिए सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है।

यहां चल रहा घायलों का इलाज

एजेंसी सूत्रों के मुताबिक महिला बच्चे की आंटी थी। आगजनी में कुल 9 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनका कोझिकोड मेडिकल कॉलेज सहित अलग-अलग अस्पतालों में इलाज चल रहा है।

चतरा में पुलिस और माओवादियों के बीच भीषण मुठभेड़ में पांच नक्सली ढ़ेर

चतरा : चतरा जिले से सटे पलामू सीमा पर सुरक्षाबलों और माओवादियों के बीच भीषण मुठभेड़ हो रही है। सुरक्षा बलों ने पलामू-चतरा सीमा पर लावालौंग थाना क्षेत्र में माओवादियों खिलाफ अभियान शुरू किया था। इस अभियान में सीआरपीएफ 190, कोबरा बटालियन, जैप, आईआरबी के साथ- साथ पलामू और चतरा के जिला बल को लगाया गया था। एंटी नक्सल अभियान के दौरान लावालौंग थाना क्षेत्र में सुरक्षा बलों ने पांच माओवादियों को मार गिराया है। वहीं मुठभेड़ में आधा दर्जन अन्य माओवादियों को गोली लगने की भी सूचना है। मुठभेड़ के दौरान मौके से सुरक्षाबलों ने माओवादियों का भारी मात्रा में हथियार और नक्सल सामान भी बरामद किया है। एसपी राकेश रंजन ने मुठभेड़ की पुष्टि की है। उन्होंने कहा है कि अभियान के दौरान जवानों को बड़ी सफलता हाथ लगी है और हथियार बरामद किया गया है।

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3 महीने पहले पड़ोसियों द्वारा को गयी दंपत्ति हत्या के नर कंकाल चौका थाना क्षेत्र के जंगल से हुई बरामद

सरायकेला : ज़िले के चौका थाना क्षेत्र के मुटुदा जंगल से पुलिस ने दो नर कंकाल बरामद किये हैं। रविवार को चौका पुलिस को सूचना प्राप्त हुई कि जंगल में दो नर कंकाल मिले हैं। जिसके बाद पुलिस ने जांच प्रारंभ किया। जिसमें दोनों नर कंकाल मुटूदा गांव निवासी दंपत्ति सोमा मुंडा और एतवारी देवी के निकले।

प्राप्त जानकारी के अनुसार मृतक के 12 वर्षीय बेटे बाजू मुंडा ने अपने मामा और अन्य परिजनों के साथ चौका थाने में रविवार को नर कंकाल मिलने की जानकारी दी। इसके बाद पुलिस मुटूदा गांव पहुंची और घने जंगल से नर कंकाल बरामद किया। मृत एतवारी देवी के भाई सनातन मुंडा ने चौका थाने में पड़ोसियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कराया है। जिसके बाद पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।
मिली जानकारी के अनुसार 3 महीने पहले जनवरी माह में दंपत्ति सोमा मुंडा और एतवारी देवी का गांव के पड़ोसियों से झगड़ा हुआ था। जिसके कुछ दिन बाद ये दोनों लापता हो गए थे। इधर मृतक के परिजनों ने पुलिस को बताया है कि मारपीट के बाद हत्या कर पड़ोसियों ने शव को जंगल में फेंक दिया था, जो अब बरामद हुआ है। इधर पुलिस द्वारा मामला दर्ज कर अनुसंधान प्रारंभ कर दिया गया है।

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