केरल : मोबाइल फोन का यदि आप बहुत ज्यादा इस्तेमाल करते हैं तो यह खबर आपके लिए चिंता बढ़ाने वाली हो सकती है। केरल में मोबाइल फोन के फटने से एक 8 साल की बच्ची की मौत हो गई। यह हादसा उस वक्त हुआ, जब वह मोबाइल चला रही थी। आदित्यश्री नाम की बच्ची ने मोबाइल को अपने चेहरे के पास ही रखा हुआ था। मौके पर पहुंची पुलिस ने बताया कि यह घटना सोमवार को रात 10:30 बजे की है। आदित्यश्री पास के ही एक स्कूल में तीसरी क्लास की छात्रा थी। पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है और मामले की जांच की जा रही है।
मनोरमा न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक आदित्यश्री पूर्व ब्लॉक पंचायत सदस्य अशोक कुमार की बेटी है। शुरुआती जांच के मुताबिक पुलिस का कहना है कि बच्ची लंबे समय से वीडियो देख रही थी। इसलिए ऐसा हो सकता है कि बैटरी ओवरहीट हो गई हो और उसके चलते मोबाइल में धमाका हो गया। बच्ची की घटना के थोड़ी ही देर बाद मौत हो गई। पुलिस ने फॉरेंसिक टीम को भी मौके पर भेजा है, जिसने कुछ सबूत जुटाए हैं। मोबाइल फोन फटने की घटना हैरान करने वाली है और डराती भी है। ऐसे में पुलिस ने इसकी विस्तार से जांच का फैसला लिया है ताकि सच्चाई सामने आए। फॉरेंसिक टीम ने सबूत जुटाए हैं। इसके अलावा एक्सपर्ट्स को भी साथ लिया जा रहा है।
मोबाइल तीन साल पहले खरीदा गया था। इस फोन को बच्ची के चाचा ने उसके पिता के लिए खरीदा था। बीते साल फोन की बैटरी भी बदलवाई गई थी। यह घटना जिस वक्त हुई, उस दौरान आदित्यश्री और उसकी दादी ही मौके पर थीं। आदित्यश्री की दादी उस समय किचन में थीं, जब उनकी पोती के चेहरे पर मोबाइल फट गया। मनोरमा न्यूज से बातचीत में पुलिस ने बताया, ‘बच्ची के चेहरे पर गंभीर चोटें आई हैं। उसके दाएं हाथ की उंगलियां टूट गई हैं और हथेली बुरी तरह से जल गई है।’
पू्र्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल का देहांत हो गया है। प्रकाश सिंह बादल, जोकि कुछ दिनों से अस्पताल में इलाजाधीन थे, की मौत की खबर सुनते ही पंजाब के साथ-साथ पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है या यूं कहें कि पंजाब की सियासत को एक बड़ा झटका लगा है। बता दें कि अभी कुछ दिन पहले तबीयत खराब होने के चलते प्रकाश सिंह बादल को फोर्टिस अस्पताल में दाखिल करवाया गया था, जहां उनका इलाज चल रहा था।
उदित राज ने ट्विटर पर अपनी एक तस्वीर शेयर की, जिसमें वो भाषण देते हुए दिख रहे हैं। साथ ही कैप्शन में लिखा, “जो भी मोदी भक्त होगा, मारा जाएगा। अक्सर विवादित बयानों के कारण सुर्ख़ियों में रहने वाले कॉन्ग्रेस नेता उदित राज ने एक बार फिर से भड़काऊ बातें की हैं।
पार्टी ने उन्हें नवंबर 2023 में ‘अखिल भारतीय असंगठित कामगार और कर्मचारी कॉन्ग्रेस’ का अध्यक्ष बनाया था। उदित राज ने ट्विटर पर अपनी एक तस्वीर शेयर की, जिसमें वो भाषण देते हुए दिख रहे हैं। साथ ही कैप्शन में लिखा, “जो भी मोदी भक्त होगा, मारा जाएगा।” लोग उनके इस बयान की आलोचना कर रहे हैं।
2014 में भाजपा के ही टिकट पर नॉर्थ-वेस्ट दिल्ली से सांसद चुने गए उदित राज का 2019 में टिकट कट गया, जिसके बाद उन्होंने कॉन्ग्रेस का दामन थाम लिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ उलूल-जलूल बकने लगे। भाजपा ने उनका टिकट काट कर गायक हंस राज हंस को उम्मीदवार बनाया था, जिन्हें जीत भी मिली। इसके बाद वो उदित राज भाजपा के खिलाफ हर एक विरोध प्रदर्शन का समर्थन करते हैं और भड़काऊ बयान देते हैं।
हालिया बयान उन्होंने मनरेगा मजदूरों के समर्थन में आयोजित एक विरोध प्रदर्शन में दिया है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार पर भी टिप्पणी करते हुए कहा है कि यूपी न तो दंगा मुक्त हुआ है और न ही गुंडा मुक्त हुआ है। माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या पर उदित राज ने यूपी सरकार को भला-बुरा कहा था। हाल ही में वो हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला पहुँचे थे और वहाँ भी मोदी सरकार के खिलाफ बयान दिया था।
जंतर-मंतर पर आयोजित हालिया प्रदर्शन में उन्होंने ‘मनरेगा मजदूर भूखा है, मोदी का वादा झूठा है’ का नारा भी दिया। बता दें कि सरकार पर मनरेगा बजट में कटौती का आरोप लगाते हुए ये विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। कई कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। बैनर पर ‘मनरेगा बचाओ, ग्रामीण भारत बचाओ’ लिखा हुआ था। हाल ही में उदित राज में फ़्रांस और इजरायल में दंगों के हवाला देते हुए भारत में भी ऐसा होने का डर दिखाया था।
झारखण्ड : रामगढ़ जिले के राष्ट्रीय राजमार्ग 33 पर मंगलवार को एक ट्रेलर, बस से टरका गई। इस हादसे में कम से कम दो लोगों की मौत हो गई और 10 अन्य के घायल होने की सुचना मिली है। रामगढ़ पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी रोहित कुमार महतो ने बताया कि राजधानी रांची से 50 किमी दूर चुतुपालु इलाके में सुबह एक ट्रेलर और यात्री वाहन के बीच टक्कर हो गई। उन्होंने कहा- “रांची-पटना राजमार्ग में घटित इस हादसे में दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और 10 अन्य घायल हो गए। सभी घायलों को रामगढ़ सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है।”
प्रभारी अधिकारी ने बताया कि चार लेन वाले राजमार्ग में पहले ट्रेलर डिवाइडर से टकराते और दूसरी तरफ बस से टकरा गया। इस घटना के समय बस बिहार के बख्तियारपुर से रांची वापस लौट रही थी। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने इस तरह की सड़क दुर्घटना से बचने के लिए सुरक्षा उपाओं के साथ राजमार्ग पर पुलिस की तैनाती की मांग करने लगे। इस दौरान यातायात कुछ समय के लिए बाधित भी रहा। राममगढ़ सर्कल अफसर सुधिर कुमार ने बताया कि लोगों द्वारा विरोध प्रदर्शन खत्म करने के बाद ट्राफिक फिर से सामान्य हो गया। इस घटना के बाद प्रशासन ने स्थानीय लोगों को राजमार्ग पर सुरक्षा सुनिश्चित करने का आश्वासन दिलाया।
झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता के प्रेमालाप वीडियो प्रकरण मामले और जमशेदपुर की गरमाई राजनीति को लेकर पढ़िये “गौरव हिन्दुस्तानी” की लेख
झारखंड की लौह नगरी जमशेदपुर के पश्चिम सिंहभूम के विधायक और झारखण्ड राज्य के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता का प्रेमालाप चलचित्र क्या प्रकाश में आया जमशेदपुर की राजनीति ने फिर एक करवट बदल ली। कदमा मामले में मौन बाबा बने पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास जेल में बंद नेताओं से मिलने चले गए और गए तो गए वहाँ से तत्काल डीजीपी को फोन करके मामले की जांच करने का आग्रह भी किया और प्रशासन में मानो स्टिंग एनर्जी के ऐड जैसी फुर्तीलापन आ गया, अगले दिन कोल्हान डीआईजी पहुंचने की खबर आ गयी। अब सोचने वाली बात यह है कि पिछले पंद्रह दिनों से जब सारे लोग गला फाड़ फाड़ कर बोल रहे थे तो प्रशासन ने यह पहल क्यों नहीं की और “मौनी बाबा” भी अचानक से कैसे जाग गए ? इस पर भी दो सवाल खड़े होते हैं, पहला यह कि क्या बन्ना गुप्ता के ऊपर अचानक से गिरी इस बिजली ने रघुवर दास के अंदरूनी याराना के तहत तय किसी सांठ गांठ को तो नहीं हिला दी ? और दूसरा यह कि सर्वजन हिन्दू समिति 25 तारीख से चरणबद्ध तरीके से विरोध और हड़ताल करने की बात कह रही थी और इससे अपनी जमीन खिसकती देख यह रणनीति बनाकर सर्वजन हिन्दू समिति के मुहिम को कमजोर करने की तैयारी तो नहीं कि गयी है ?
इन सब मामले में “अस्वस्थ” मंत्री बन्ना गुप्ता भी चर्चा में थे लेकिन इस प्रेमालाप चलचित्र मामले ने तो उन्हें और भी ख्याति प्रदान कर दी। वैसे मंत्री जी ने इसे फेक और एडिटेड बता कर एफआईआर दर्ज कराई है लेकिन सवाल यह उठता है कि एफआईआर दर्ज़ किसके ऊपर की जाएगी, व्हाट्सएप पर भेजने शेयर करने वाले भाजपा नेता विकास सिंह पर या ट्विटर पर शेयर करने वाले भाजपा सांसद निशिकांत दुबे पर ? अब जिसके भी नाम पर मंत्री एफआईआर करे यह उनके अपने विवेक और कानून के दिशा निर्देश पर होगा, लेकिन एक प्रश्न यह भी है कि आखिर भाजपा नेताओं के पास यह वीडियो पहुंचा कैसे ? यदि अपनी सलाह दूं तो मंत्री जी उस सूत्रधार का पता करें और उस पर एफआईआर करें जहाँ से इस चलचित्र ने चलना शुरू किया। अब मंत्री जी इस बाबत सोशल मीडिया में पोस्ट करने वाले हर किसी वे ऊपर तो केस नहीं कर सकते न। वैसे मंत्री जी के समर्थक लगभग हर पोस्ट में एफआईआर की धौंस दिखाते घूम रहे हैं सोशल मीडिया में, जरा इन्हें भी समझना चाहिए कि बिना आग के धुआँ कैसे उठेगा और धुआँ उठेगा तो राजनीति गलियारे में चर्चा गर्म रहेगी ही। वैसे वो भी क्या करे, बेचारे मजबूर है अपना समर्थक धर्म निभाने के लिए और ऐसा लगता है कि इस मामले को यदि और ज्यादा हवा लगी तो समर्थक अपना धर्म निभाने के चक्कर में कहीं यह न कह दे कि “अस्वस्थ्य मंत्री” वर्चुअल तरीके से फिज़िकल चेकअप कर रहें थे कि “आंत बड़ा हो गया, गुर्दा बड़ा हो गया या फेफड़ा।”
वहीं दूसरी तरफ पूर्वी सिंहभूम के विधायक सरयू राय ने जिस तरह से इस प्रकरण से जुड़ी हर वो बात जो किसी मीडिया वाले को भी नहीं मालूम उसका खुलासा करके यह तो साबित कर दिए कि आखिर वो विधायक जरूर बन गए हैं लेकिन उनके अंदर का पत्रकार अब भी जीवित है और यही वजह है कि वो अकेले इस मामले में खुलकर मोर्चा संभाले हुए हैं। खबर तो यहाँ तक आई कि 21 सेकेंड का वीडियो मात्र ट्रेलर था पिक्चर 3 मिनट का है, अब देखना यह है कि “अस्वस्थ मंत्री” चलचित्र को गलत साबित करके खुद को स्वस्थ बताएंगे या विपक्ष पूरी पिक्चर रिलीज़ करके इन्हें पूर्ण रूप से अस्वस्थ साबित करेगी। वैसे इस पूरे प्रकरण को देखते हुए और राजनीति में उभरते समय के बन्ना गुप्ता को याद करने से स्टैंडअप कॉमेडियन ज़ाकिर खान की बहुप्रचलित पंक्ति “वैसे तो मैं बड़ा सख्त लौंडा हूँ, पर यहाँ मैं फिसल गया” बेहद सटीक बैठती है। अब आगे देखना है कि यह मामला राजनीतिक गलियारे में क्या उठा पटक करती है।
प्रदेश कांग्रेस कमिटी के सचिव कमलेश कुमार पांडेय ने कहा कि झारखंड सरकार के लोकप्रिय एवं विकासनोमुखी नेता स्वास्थ्य एवं आपदा मंत्री श्री बन्ना गुप्ता का अश्लील वीडियो को वायरल कर के अपने घिनौनापना तथा अपनी अश्लील मानसिकता को दर्शाने का काम किया है। आज के समय में इस तरह से किसी भी प्रतिष्ठित व्यक्ति की छवि को खराब करने का काम करने की कोशिश करना आम बात हो गई है।
अब सवाल पैदा होता है कि इस तरह का अश्लील वीडियो वायरल करने वाले को कहाँ से उपलब्ध हुआ, क्या वह व्यक्ति इस घिनौना कार्य में लिप्त है? जब तक वायरल करने वाले व्यक्ति की संलिप्ता नहीं होगी तब तक उसके पास विडियो पहुँचा कैसे? आज कल इस तरह से लोगों को ब्लैकमेल करने का काम धड़ल्ले से चल रहा है इसलिए प्रशासन से अनुरोध है कि इस दिशा में भी जाँच करना अति आवश्यक है। जहाँ तक अश्लील वीडियो की बात है तो फौरेंसिक जाँच में तो सच्चाई सामने आ जाएगी की उसमें एडीटिंग है कि नहीं? अतः प्रशासन से निवेदन है कि त्वरित कार्रवाई करते हुए दूध का दूध और पानी का पानी करके विरोधियों के द्वारा छवि खराब करने के असफल प्रयास को निष्फल कर दोषियों पर कड़ी कार्यवाही करें, ताकि भविष्य में ऐसी घटना दुहराने की हिम्मत न हो।
झारखंड : ईडी ने झारखंड के सीएम के प्रेस सलाहकार अभिषेक प्रसाद उर्फ पिंटू के करीबी उदय शंकर के आवास पर छापामारी कर जमीन संबंधी कई दस्तावेज जब्त किए हैं। माना जा रहा है कि यह छापेमारी रांची में जमीन घोटाले के सिलसिले में की जा रही है।
ईडी ने उदय शंकर के मोबाइल की भी जांच की है। उसके पूरे घर की तलाशी ली गई है। उदय शंकर की सीएम हाउस में सीधी एंट्री रही है और वह सीएम के प्रेस सलाहकार अभिषेक के निजी सचिव के तौर पर सक्रिय रहा है। सोमवार को ईडी की एक टीम रांची के डोरंडा बाजार के पीछे स्थित उसके आवास पर पहुंची। दोपहर बाद तक घर में तलाशी जारी थी। सूत्रों के मुताबिक, उसके यहां से जमीन के जो दस्तावेज बरामद किए गए हैं, उसकी कड़ियां कई बड़े लोगों से जुड़ सकती हैं।
रांची में सेना की साढ़े चार एकड़ जमीन की अवैध तरीके से खरीद-बिक्री की जांच के दौरान ईडी ने करीब दस दिन पहले 21 ठिकानों पर छापामारी की थी। जांच में कई तरह की जालसाजी का खुलासा हुआ तो दूसरे दिन इस सिलसिले में कुल सात लोगों को गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तार लोगों को रिमांड पर लेकर की जा रही पूछताछ में कई अहम जानकारियां ईडी के हाथ लगी हैं। माना जा रहा है कि इसी कड़ी में सीएम हाउस में सीधी पहुंच रखने वाले उदय शंकर के यहां रेड डाली गई है। बता दें कि संताल क्षेत्र में 1000 करोड़ के अवैध खनन मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के तहत जांच कर रही ईडी ने पूर्व में सीएम के प्रेस सलाहकार अभिषेक प्रसाद उर्फ पिंटू और उसके बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से भी पूछताछ की थी। बीते शुक्रवार को ईडी की टीम रांची स्थित रजिस्ट्री कार्यालय पहुंची थी और हेमंत सोरेन और उनके परिवारी जनों की जमीन संबंधी 18 प्रॉपर्टी के दस्तावेज की सत्यापित प्रतियां हासिल की थी। इनमें खनन पट्टा लीज के वे दस्तावेज भी हैं, जिनके बारे में आरोप है कि सीएम पद पर रहते हुए हेमंत सोरेन ने अपने नाम पर अलॉट कराया था। हालांकि बाद में यह पट्टा उन्होंने सरेंडर कर दिया था।
भारतीय मानवाधिकार ऐसोसिएशन रांची जिला की पांचवी वर्षगांठ बहुत हर्षोल्लास के साथ प्रेस क्लब में मनाया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रुप में राज्यसभा सांसद डॉ महुआ मांझी जी ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया। इस अवसर पर कोल्हान टीम भी सम्मिलित थी। संगठन ने उत्कृष्ट कार्यों के लिए अपने सभी पदाधिकारीयो एवं सदस्यों को सम्मानित किया।
इस अवसर पर संगठन के विस्तार पर काफी गहन चर्चा किया गया और संगठन को सशक्त बनाने के लिए सभी ने अपनी राय भी दी। इस मौके पर प्रदेश प्रभारी रविंद्र शर्मा, प्रदेश उपाध्यक्ष अनूप, रांची जिला अध्यक्ष संतोष, कोल्हान अध्यक्ष रवि राज दुबे, कोल्हान उपाध्यक्ष सरबजीत सिंह, कोल्हान उपाध्यक्ष सुभाष घोष, कोल्हान सचिव सुशांत, कोल्हान पदाधिकारी प्रमोद, कोल्हान पदाधिकारी राजेश, रांची जिला के महासचिव विवेक मिश्रा एवं सभी पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित थे।
जमशेदपुर : कदमा हिंसा के बाद से लगातार भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवर दास और उनकी टीम के विरुद्ध भाजपा कार्यकर्ताओं में एक रोष देखने को मिल रहा था जो अब भी जारी है। रघुवर दास द्वारा कदमा मामले में गिरफ्तार भाजपा और विहिप नेताओं से 15 दिन गुजरने के बाद अचानक मिलने पहुंचना जमशेदपुर की राजनीति गलियारे को और भी गर्म कर दिया है। रघुवर दास द्वारा आश्चर्यजनक ढंग से चुप्पी साधे रहने एवं भाजपा महानगर अध्यक्ष द्वारा उनकी राह पकड़ के चलने और बिना झंडा बैनर के आंदोलन खड़ा करने के बाद भी सर्वजन हिंदू सभा के द्वारा एक मोर्चा खोला गया और उस मोर्चा के द्वारा हस्ताक्षर अभियान चलाया गया। जिस टीम में गुंजन यादव भाजपा महानगर अध्यक्ष व महामंत्री अनिल मोदी जैसे लोग भी शामिल थे।
सूत्र बताते हैं कि उसके बावजूद आश्चर्यजनक रूप से हस्ताक्षर अभियान के लिए किसी भी मंडल अध्यक्ष को हस्ताक्षर अभियान के दिन पूर्वाह्न 11 बजे तक खबर नहीं किया गया। बाद में जब अचानक से ऊपर के लोगों द्वारा दबाब बना तब खबर दिए जाने के बाद भाजपा अध्यक्ष गुंजन यादव द्वारा मंडल अध्यक्षों को खबर करवाया गया। परंतु अपनी तबीयत खराब होने का बहाना बनाकर वह अपने घर में पड़े रहे और कमोबेश जो लोग भी रघुवर दास के सपोर्टर थे, वह भी इस आंदोलन को फेल बनाने में लगे रहे।
पुनः जब सर्वजन हिंदू समिति की समीक्षा बैठक हुई और उस बैठक में जब यह जोर-शोर से मुद्दा उठा, तब पूर्वी विधानसभा के लोगों ने एक स्वर से कहा कि एक नेता के इशारे पर भाजपा के कार्यक्रमों में भाजपा के पदाधिकारी नहीं रहते हैं, परंतु अब वे संघ के द्वारा निर्देशित कार्यक्रमों की भी अवहेलना करने में लगे हैं। लोगों ने उक्त समीक्षा बैठक में ऐसे लोगों की जमकर शिकायत की और कुछ लोगों ने ऊपर भी इनकी शिकायत कर दी। बताया जाता है कि कल संघ के प्रांत प्रचारक गोपाल शर्मा जमशेदपुर आए थे और तय कार्यक्रम के मुताबिक सभी से बैठक कर सभी बातों की जानकारी ली। जिसके बाद कहा जा रहा है कि सर्वजन हिंदू समिति द्वारा दिनांक 25 अप्रैल को महाबैठक का आयोजन तुलसी भवन में किया गया है। जिसके दूसरे दिन मशाल जुलूस एवं तीसरे दिन कोल्हान बंद की बात कही गई। जब इस पूरे आंदोलन की भनक रघुवर दास और उनके लोगों को लगी तो इन सारे लोगों को अपना जनाधार खिसकता हुआ नजर आया। कालांतराल में भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा फिर से कोपभाजन न बन जाये। रघुवर दास और उनके पदचिह्नों पर चलनेवाले लोगों को भय सताने लगी।
लोग बता रहे हैं कि इसी बात को लेकर आज भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवर दास जेल गेट में मिलने अभय सिंह से पहुंचे और वहां पर सभी लोगों से मिलकर फेसबुक पर डाला कि उन्होंने डीजीपी से बात की है और डीआईजी पूरे मामले की जांच करेंगे। परंतु दूसरी ओर नाराज भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब भाजपा का प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मिलकर सीबीआई जांच और न्यायिक जांच की मांग कर रहा है, ऐसे में पुलिस प्रशासन से जांच की मांग करना कहीं कार्यक्रम को रोकने के लिए किया गया प्रयास तो नहीं है।
लोगों को लगता है कि कल डीआईजी जमशेदपुर आएंगे और उचित जांच का भरोसा देकर कार्यक्रम को रोका जाएगा और इसी रणनीति के तहत आज रघुवर दास जेल गए और निकल कर डीजीपी से बात की, ताकि सर्वजन हिन्दू समिति के अंतर्गत होने आले आंदोलन को कमजोर किया जाए। भाजपा कार्यकर्ताओं का यह भी कहना है कल से ट्विटर पर और फेसबुक पर भाजपा की प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस के नेता व झारखंड सरकार के मंत्री बन्ना गुप्ता के अश्लील वीडियो वायरल होने पर भी भाजपा महानगर जमशेदपुर और रघुवर दास एकदम चुप्पी साधे हुए हैं। सूत्रों के हवाले से यह भी पता चला कि कार्यकर्ताओं के बीच यह भी बात हो रही है कि स्वास्थ्य मंत्री से उनकी मित्रता अब जगजाहिर हो चुकी है। कहीं ऐसा तो नहीं कि वही कांग्रेस में जाने की सोच रहे हो। भाजपा कार्यकर्ताओं में इस बात को लेकर बहुत ही चिंता प्रकट की जा रही है। कार्यकर्ता सोच में हैं कि जब किसी बड़े नेता के जाने पर भाजपा आंदोलन नहीं करती हैं और झंडा बैनर नहीं लेकर चलती हैं, जबकि छात्र संगठन में कुछ छात्र होने के बावजूद रांची में हुई विरोध की घटना के बाद कोल्हान समेत झारखंड में पूरी तरह से असरदार बंदी कराई गई थी, परंतु राष्ट्र के सबसे बड़े संगठन होने के बाद भी भाजपा का जमशेदपुर कदमा कांड पर कोई आंदोलन ना करना लोगों को संदेह में डाल रहा है।
दूसरी ओर जमशेदपुर भाजपा ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की है। उस प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि सोमवार को पूर्व मुख्यमंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवर दास ने राज्य के पुलिस महानिदेशक अजय कुमार सिंह से टेलीफोन पर बातचीत की तथा उनसे कहा कि शास्त्रीनगर उपद्रव के मामले में कई निर्दोष व्यक्तियों को नामजद आरोपी बनाया गया है। अत: वरीय पुलिस पदाधिकारी से इस मामले की जांच कराकर निर्दोष लोगों का नाम हटाया जाये। श्री दास के आग्रह को मानते हुए डीजीपी ने कोल्हान के डीआईजी से मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया।
इससे पूर्व श्री दास ने शास्त्रीनगर उपद्रव के सिलसिले में न्यायिक हिरासत में भेजे गये भाजपा नेताओं से केंद्रीय कारा, घाघीडीह में मुलाकात की। उन्होंने जानना चाहा कि किस परिस्थिति उन्हें यहां लाया गया है? कुछ ने जहां यह बताया कि उन्हें “जय श्री राम” का नारा लगाने पर पकड़ा गया, तो विश्व हिन्दू परिषद के पदाधिकारियों ने बताया कि उपद्रव के खिलाफ अधिकारी को ज्ञापन देने गये थे, तो उन्हें पकड़ कर बंद कर दिया गया। सर्वाधिक लोगों ने कहा कि उन्हें किस जुर्म में पकड़ा गया है, उन्हें पता नहीं है। श्री दास ने शास्त्रीनगर उपद्रव को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि अगर जिला प्रशासन चाहता तो यह घटना चिंगारी से आग नहीं बनती। दरअसल मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन साम्प्रदायिकता के जिस रथ पर सवार होकर तुष्टिकरण की मंजिल तक पहुंचना चाहते हैं, उसमें ऐसी घटनाएं होगी ही। सत्ता के नशे में इन्हें पता ही नहीं कि ये क्या कर रहे हैं?
दूसरी ओर रघुवर दास से नाराज भाजपा कार्यकर्ताओं ने कहा कि सच्चाई यह है कि सबसे पहले अगर किसी ने जेल में बंद इन भाजपाइयों के लिए अपना मुंह खोला, वो तो भाजमो के सरयू राय थे। उसके बाद बाबूलाल मरांडी, दीपक प्रकाश, अर्जुन मुंडा आदि नेताओं ने घाघीडीह जेल जाकर बंद भाजपा कार्यकर्ताओं से मुलाकात की और अपना नैतिक समर्थन दिया, जबकि रघुवर दास जो जमशेदपुर के ही भाजपा कार्यकर्ताओं के कंधे पर सवार होकर विधायक बने, मंत्री बने बाद में मुख्यमंत्री तक बन गये पर जब उन्हीं भाजपा कार्यकर्ताओं पर गाज गिरी तो उन तक पहुंचने में उन्हें आधे महीने लग गये।
वह भी तब जब उन्होंने देखा कि अब भाजपा कार्यकर्ताओं का समूह सदा के लिए उनसे दूरी बनाने में अपना दिमाग लगाने लगा। अब चूंकि रघुवर दास को आधे महीने बीतने के बाद ज्ञान प्राप्त हुआ है, तो क्या इस ज्ञान का प्रसाद आनेवाले विधानसभा चुनाव में मिलेगा या भाजपा कार्यकर्ता फिर से उन्हें सबक सिखाने के लिए हार की माला पहनाने पर ज्यादा ध्यान देंगे, क्योंकि फिलहाल भाजपा कार्यकर्ताओं का एक बड़ा वर्ग इनके खिलाफ हैं। देखना तक पसन्द नहीं कर रहा।
सोमवार को पूर्व मुख्यमंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवर दास ने राज्य के पुलिस महानिदेशक अजय कुमार सिंह से टेलीफोन पर बातचीत की तथा उनसे कहा कि शास्त्रीनगर उपद्रव के मामले में कई निर्दोष व्यक्तियों को नामदर्ज आरोपी बनाया गया है। अत: वरीय पुलिस पदाधिकारी से इस मामले की जांच कराकर निर्दोष लोगों का नाम हटाया जाये। श्री दास के आग्रह को मानते हुए डीजीपी ने कोल्हान के डीआईजी से मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया।इससे पूर्व श्री दास ने शास्त्रीनगर उपद्रव के सिलसिले में न्यायिक हिरासत में भेजे गये भाजपाजनों से केंद्रीय कारा, घाघीडीह में मुलाकात की। उन्होंने जानना चाहा कि किस परिस्थिति में लाया गया है? कुछ ने जहां यह बताया कि उन्हें ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने पर पकड़ा गया तो विश्व हिन्दू परिषद के पदाधिकारियों ने बताया कि उपद्रव के खिलाफ अधिकारी को ज्ञापन देने गये थे तो उन्हें पकड़ कर बंद कर दिया गया। सर्वाधिक लोगों ने कहा कि उन्हें किस जुर्म में पकड़ा गया है, उन्हें पता नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री ने इन्हें आश्वस्त किया कि वह उन्हें न्याय दिलाने के लिए हर न्यायसंगत रास्ता निकालेंगे।
श्री दास ने शास्त्रीनगर उपद्रव को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि अगर जिला प्रशासन चाहता तो यह घटना चिंगारी से आग नहीं बनती। दरअसल मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन साम्प्रदायिकता के जिस रथ पर सवार होकर तुष्टीकरण की मंजिल तक पहुंचना चाहते हैं, उसमें ऐसी घटनायें होगी हीं। सत्ता के नशे में इन्हें पता ही नहीं कि ये क्या कर रहे हैं । इसी सुनियोजित साजिश का परिणाम है यह शास्त्रीनगर उपद्रव। इसके लिए पहले एक धार्मिक झंडे में प्रतिबंधित मांस बांधे गये। इस हरकत से ध्वजपुजकों के तन-बदन में आग लग गयी। आनन-फानन में बैठक बुलायी गयी। उधर कांग्रेस और झामुमो के लोगों की इफ्तार पार्टी गणेश पूजा मैदान कदमा में चल रही थी। इस पार्टी के लिए प्रशासन से कोई अनुमति नहीं ली गयी थी। इस पार्टी में शामिल लोगों को जब ध्वजपुजकों की बैठक की जानकारी मिली तो वे वहां दल बल के साथ पहुंच गये। बैठक कर रहे लोगों पर पत्थर बसाये गये। वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया। बात यहीं तक नहीं रुकी वहां तैनात पुलिस वालों पर भी पथराव किया गया। और फिर क्या-क्या हुआ, सब को पता है।
इस पूरे घटनाक्रम में जिला प्रशासन नींद में विभोर नजर आयी। एक छोटी सी चिंगारी जब आग बन गयी तो प्रशासन ने अपनी कमियों पर पर्दादारी शुरू की। किसी को यहां से गिरफ्तार किया गया, किसी को वहां से। दस सदस्यीय विश्व हिन्दू परिषद का एक प्रतिनिधिमंडल इस घटना के खिलाफ ज्ञापन देने गया तो उन्हें ही धर दबोचा गया। इस हैरतअंगेज घटना ने लौहनगरी को अंधेर नगरी बना दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त की है कि डीआईजी अपने पर्यवेक्षण प्रतिवेदन में निर्दोषों को आरोप मुक्त करेंगे।
श्री दास के साथ केंद्रीय कारा पहुंचने वालों में प्रमुख रूप से पूर्व विधायक मेनका सरदार, महानगर भाजपा अध्यक्ष गुंजन यादव, महामंत्री राकेश सिंह, पूर्व जिलाध्यक्ष रामबाबू तिवारी, भुपेन्दर सिंह, विभीषण सरदार, चंचल चक्रवर्ती, संदीप शर्मा बौबी व अन्य शामिल थे।