जमशेदपुर : भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य रविंदर सिंह रिंकू ने आज राँची से जमशेदपुर पहुँचे हिंदूवादी नेता एवं समाजसेवक भैरव सिंह को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया। रविंदर सिंह रिंकू ने उनका स्वागत करते हुए कहा कि उनका कार्य समाज समाज को एक नई दिशा दिलाने में अहम कार्य कर रहा है और उनकी वजह से नौजवानों में हिंदुत्व की एक नई अलख जग रही है। (जारी…)
गौरतलब हो कि भैरव सिंह आज राँची से जमशेदपुर पहुँचे और घाघीडीह जेल में कैद भाजपा नेता अभय सिंह से मिलने गए एवं सारी स्थिति का जायजा लिया जिसके बाद उन्होंने एक प्रेस वार्ता भी की जहाँ उन्होंने अभय सिंह पर एक के बाद एक मामला दर्ज होने पर सरकार और हिन्दुविरोधी तत्वों पर निशाना साधा।
जमशेदपुर : भाजपा नेता अभय सिंह पिछले 3 महीने से ज्यादा समय से घाघीडीह कारावास में है, उनसे मिलने आज राँची के हिंदूवादी नेता और समाजसेवक भैरव सिंह पहुँचे और अभय सिंह से मुलाकात कर सारी स्थिति को जाना। जिसके बाद उन्होंने एक प्रेस वार्ता रखा और अभय सिंह को जमानत मिलने के बाद भी लगातार लग रहे प्रोडक्शन को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह एक तुष्टिकरण की राजनीति के तहत अभय सिंह को फँसाया गया है। विगत 9 अप्रैल को कदमा के शास्त्रीनगर में हुए हिंसा में अभय सिंह का कहीं नामो निशान नहीं था। जटाधारी मंदिर में माँस का टुकड़ा लटकाने वाले के विरोध करने पर इफ़्तार पार्टी से उठ कर आये लोगों ने प्रशासन और हिंदुओं पर हमला करते हैं लेकिन एक षड्यंत्र के तहत इसमें अभय सिंह जी को फंसाया गया। जबकि अभय सिंह की उपस्थिति कदमा के आस पास कहीं थी भी नही, न मोबाइल लोकेशन से, न किसी कैमरे के माध्यम से प्रशासन यह साबित कर पाई की अभय सिंह इसमें संलिप्त हैं। फिर भी उन्हें जेल में रखा गया, परन्तु प्रशासन ने वो मांस के टुकड़े लगाने वाले कि जांच नहीं की।(जारी…)
भैरव सिंह ने कहा कि झारखंड उच्च न्यायालय से जमानत मिलने के बाद अभय सिंह पर कदमा मामले से पूर्व घटित जुगसलाई मामले में अज्ञात के तौर पर नाम डाल कर केस किया गया और प्रोडक्शन लगा दिया गया और जब उसमें भी जमानत मिल गयी तो उन्होंने बरसों पुराने किसी मामले में झूठा केस बना कर फिर से प्रोडक्शन लगा दिया गया। जिसमें धारा 307 का भी उल्लेख किया गया है लेकिन यह पूरी तरह से फर्जी केस है क्योंकि 307 की धारा लगाने के लिए सबसे अहम जो दस्तावेज होते है वही प्रशासन ने नहीं दिया, क्योंकि प्रशासन के पास वह दस्तावेज है ही नहीं। (जारी…)
अभय सिंह को फंसाने में किसका हाथ है इस मामले में पूछे जाने पर भैरव सिंह ने कहा कि तुष्टिकरण की राजनीति करने वाली यह सरकार समझ चुकी है कि अभय सिंह इनकी हक़ीक़त जनता के सामने खोल कर रख देंगे जिससे इस सरकार को डर लगने लगा और उन्होंने हिन्दू विरोधी तत्वों के साथ मिलकर प्रशासनिक अधिकारों का गलत तरीकें से उपयोग करते हुए अभय सिंह को फंसाने के कार्य कर रही है। उन्होंने मीडिया के माध्यम से सरकार से कहा है कि अभय सिंह आज न केवल जमशेदपुर अपितु पूरे झारखण्ड में हिंदुओं की आवाज़ बन चुके हैं और हिन्दू विरोधी तत्वों को यह गंवारा नहीं है और हमें डर है कि जनता की आवाज बनने वाले नेताओं पर जिस तरह से हमले हो रहें हैं कहीं अभय सिंह पर भी न हो जाये इसलिए उनके बाहर आने के बाद सरकार उन्हें सुरक्षा प्रदान करने की व्यवस्था करें।
नए प्रोडक्शन पर अभय सिंह की जमानत याचिका खारिज होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह न्याययिक प्रक्रिया है और हमें न्यायालय पर भरोसा है कि न्यायालय सारे तत्वों को देखते हुए उन्हें जल्द से जल्द जमानत देगी। जब उनसे पूछा गया कि अभय सिंह पर फिर कोई केस बनाकर प्रोडक्शन लगा दिया गया तो आगे की रणनीति क्या होगी तो उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन हिन्दू विरोधी तत्वों के इशारे पर यदि फिर से इस तरह का कोई घृणित कार्य करती है तो हम चरणबद्ध तरीके से पूरे राज्य के हर जिले में एक विशाल आंदोलन खड़ा करेंगे। अभय सिंह की रिहाई के बाद किस तरह से उनका स्वागत होगा इस बात पर उन्होंने बताया कि हम सभी जानते है कि अभय सिंह आज न सिर्फ जमशेदपुर के नेता है अपितु पूरे झारखण्ड में उनका नाम है तो उनके रिहाई के बाद एक विशाल आयोजन के माध्यम से उनका स्वागत किया जाएगा जिसे पूरा देश देखेगा।
गुरुवार को हुई बैठक में झारखंड बीजेपी विधायक दल के नेता पर फैसला नहीं हो पाया. पार्टी के ऑबजर्वर सह केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने सभी विधायकों से वन-टू-वन बातचीत की और अपनी रिपोर्ट लेकर दिल्ली दरबार चले गए. ऐसे में एक बार फिर झारखंड को नेता प्रतिपक्ष नहीं मिल पाया. नेता प्रतिपक्ष के सवाल पर बाबूलाल मरांडी ने क्या कहा, इस रिपोर्ट में…
रांची: इस बात पर फिर मुहर लग गयी है कि भाजपा किसी मैटर पर कब और क्या फैसला लेगी, इसकी जानकारी भाजपा के अच्छे-अच्छे नेताओं तक को नहीं होती. इसकी झलक 27 जुलाई की शाम देखने को मिली. विधानसभा के मानसून सत्र से पहले इस बात की जोरशोर से चर्चा थी कि प्रदेश भाजपा अपने किसी नये नेता का नाम विधायक दल के नेता के रूप में घोषित कर देगी. इस रेस में सीपी सिंह, अनंत ओझा और बिरंची नारायण के नाम की चर्चा जोर शोर से चल रही थी. सभी की अलग-अलग वजहों से दावेदारी भी दिख रही थी. कोई अनुभव में आगे था तो कोई कास्ट सिस्टम के लिहाज से फिट बैठ रहा था.
इसी बीच इस रेस में झामुमो से भाजपा में आए जेपी पटेल के नाम की भी चर्चा शुरू होने से एक अलग माहौल बन चुका था. ऐसा इसलिए क्योंकि कुछ दिन पहले ही जेपी पटेल की राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष से दिल्ली में मुलाकात हुई थी. इस मुलाकात के बाद रांची पहुंचे जेपी पटेल का चेहरा खिला-खिला दिख रहा था.इधर, 27 जुलाई की शाम हुई बैठक के दौरान मानसून सत्र को लेकर सदन के भीतर पार्टी के रूख पर रणनीति भी बनी. इसके बाद विधायक दल के नेता को लेकर बात शुरू हुई. बैठक में पार्टी के ऑबजर्वर सह केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे के अलावा झारखंड संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह, झारखंड प्रभारी लक्ष्मीकांत वाजपेयी, प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी और क्षेत्रीय संगठन महामंत्री नागेंद्र त्रिपाठी मौजूद थे. कुछ देर तक मंथन के बाद सभी नेता कमरे से बाहर निकल आए. इसके बाद ऑबजर्वर अश्विनी चौबे ने अकेले में एक-एक करके विधायकों को बुलाना शुरू किया.
उन्होंने सभी विधायकों से प्रायोरिटी के आधार पर तीन नाम मांगे. खास बात है कि वह मुंहजबानी तीन नाम पूछ रहे थे और उसे नोट डाउन कर रहे थे. किसी से भी लिखित में नाम नहीं मांगे गये. इधर बंद कमरे के बाहर हलचल बढ़ी हुई थी. रेस में शामिल भाजपा के वरिष्ठ नेता सीपी सिंह, अनंत ओझा, बिरंची नारायण के अलावा अचानक चर्चा में आए जेपी पटेल घोषणा की राह ताक रहे थे. जाहिर है वक्त के साथ नेताओं की धड़कन भी तेज हो रही होगी. लेकिन देर रात तक कोई नतीजा नहीं निकला. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक ऑबजर्वर अश्विनी चौबे बस यही कहकर निकल गये कि वह अपनी रिपोर्ट केंद्रीय नेतृत्व को देंगे. इसपर केंद्रीय नेतृत्व ही आगे कोई फैसला लेगा.
इस बीच जेपी पटेल के नाम की चर्चा शुरू होने पर पार्टी के पुराने नेताओं में नाराजगी भी देखने को मिली. लेकिन कोई खुलकर जाहिर नहीं कर पा रहा था. अब फिर वही सवाल आ खड़ा हुआ है कि आखिर झारखंड भाजपा विधायक दल का नेता कौन होगा. इस सवाल पर एक तरह से बाबूलाल मरांडी ने विराम लगा दिया है. विधानसभा के मानसूत्र सत्र के पहले दिन प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि यह फैसला तो स्पीकर को लेना है. पार्टी तो नेता के नाम का चयन कर स्पीकर को जानकारी दे चुकी है. उनके इस कथन का मतलब समझा जा सकता है. भाजपा के सूत्रों का कहना है कि अगर एक-दो दिन के भीतर नाम की घोषणा नहीं हुई तो संभव है कि पूरा सत्र भी बगैर नेता प्रतिपक्ष के ही न निकल जाए. यह भी चर्चा है कि बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में कमेटी के गठन पर फाइनल मुहर लगने के दौरान ही नेता प्रतिपक्ष के नाम की घोषणा हो सकती है.
दरअसल, बाबूलाल मरांडी के प्रदेश अध्यक्ष की कमान मिलने के साथ ही यह साफ हो गया था कि किसी दूसरे को विधायक दल का नेता बनाया जाएगा. क्योंकि सदन के भीतर बाबूलाल मरांडी को विधायक दल की मान्यता नहीं मिली हुई. पहली बार झारखंड विधानसभा के इतिहास में सदन की कार्यवाही पिछले साढ़े तीन वर्षों से बगैर नेता प्रतिपक्ष के ही चल रही है. बाबूलाल मरांडी दलबदल का मामला फेस कर रहे हैं. उनके खिलाफ स्पीकर ट्रिब्यूनल का फैसला लंबित है. यह मामला हाईकोर्ट में भी पीआईएल के जरिए आ चुका है. लेकिन नतीजा नहीं निकल पाया है. फिलहाल कागजी तौर पर बाबूलाल मरांडी ही भाजपा विधायक दल के नेता हैं. अब देखना है कि पार्टी इस सस्पेंस को कब और कैसे खत्म करती है.
गर्मी में नदियों का सूखना तो आम बात है, लेकिन आप यह जानकर हैरान हो जाएंगे कि झारखंड में कई ऐसी नदियां हैं, जो बरसात में भी सूखी पड़ी हैं. सावन में जो नदियां उफान पर रहती थीं, वह आज पक्षियों के प्यास बुझाने के लायक भी नहीं बची है.
सावन और मानसून के दौरान भी लोगों को पानी के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
पहले कभी नहीं हुआ ऐसा
गर्मी के वक्त नदियों का पानी घटने के कारण उनमें प्रवाह कम होने की प्रवृत्ति देखी जाती थी, लेकिन बरसात के दिनों में ऐसा कभी नहीं देखा गया था. वह भी खासतौर पर तब, जब सावन का महीना हो और नदियां सूखी पड़ी हो, ऐसा कभी नहीं हुआ. झारखंड की नदियों का इस कदर सूख जाना, आने वाले वर्षों में खतरे का संकेत है. झारखंड की प्रमुख नदियां भी अब नाले में तब्दील हो रही है. प्रकृति प्रेमी की ओर से भी नदियों का बचाने का आवाहन किया जा रहा है.
क्यों बरसात में भी सूखी पड़ी हैं झारखंड की नदियां
मानसून की बेरूखी और नदियों की स्थिति ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. मानसून के दौरान भी अच्छी बारिश नहीं होने और सावन के महीने में बारिश की वजाय तीखी धूप रहने से नदियों की स्थिति भयावह है. इसके अलावा भी कई कारक हैं, जो नदियों के सूखने की वजह बड़ी है. आइए जानते हैं कि आखिर क्या कारण है कि बरसात में भी नदियों में पानी नहीं है-
खेती के तरीके में बदलाव
बताया जाता है कि पिछले कुछ सालों में खेती के तरीके में काफी बदलाव आया है. जिसके कारण राज्य में पहले भू-जल लगभग 60 से 70 फीट पर था, लेकिन अब उन इलाकों में 200 फीट से भी अधिक गहरा बोरिंग करना पड़ रहा है. भू-जल स्तर कम होने की वजह से नदियों का जलचक्र भी प्रभावित हुआ है. यहां जितनी बारिश हो रही है वह भूमिगत जल को रिचार्ज करने के लिए पर्याप्त नहीं है.
नदियों से बालू का अंधाधुंध खनन
नदियों से अंधाधुंध बालू निकाला जा रहा है. इस वजह से नदी का प्राकृतिक प्रवाह अवरुद्ध हो गया. इसके अलावा भूमिगत जलस्तर कम हो रहा है. पर्यावरणविद् प्रोफेसर विमल किशोर सिंह ने बताया है कि भू-जल का दोहन बढ़ता ही जा रहा है और इसे रिचार्ज करने की व्यवस्था नहीं हो रही है. प्रशासन को इस तरफ भी प्रयास करना चाहिए. पौधरोपण और स्टॉपडेम बनाकर नदी को जीवित रखने के प्रयास करने की आवश्यकता है.
बालू ने नदी की वाटर कैपेसिटी को किया कम
विशेषज्ञों के अनुसार, झारखंड में नदियों से अवैज्ञानिक तरीके से बालू का खनन किया गया है. नदियों से बेहिसाब बालू के उठाव को कारण नदी में वाटर कैपेसिटी को कम हौो गई है. बालू के उठाव से नदियों के अधिकांश भागों में मिट्टी निकल आयी है और बालू नहीं रहने से वाटर रीचार्ज की क्षमता घट गयी. पानी की कमी से नदी के जलीय जीव-जंतु भी नष्ट हो गये हैं. साथ नदी का प्राकृतिक संतुलन भी बिगड़ा है.झमरिया नदी ठाकुर गंगटी
नदी की क्षमता घटने से नष्ट होंगे अन्य जलस्रोत
जल संसाधन विभाग के शोध के अनुसार, साल भर में होने वाली कुल बारिश का कम से कम 31 प्रतिशत पानी धरती के भीतर जमा होना चाहिए, तभी संबंधित क्षेत्र की नदियों, जल स्रोतों आदि में पर्याप्त पानी रहेगा. वहीं बारिश नहीं होने के कारण नदी के नीचे भी पानी सूख रहे हैं. मानसून में भी अगर नदियों में निरंतर पानी का बहाव नहीं रहा, तो आसपास के तालाब, कुआं सहित अन्य जलस्रोत धीरे-धीरे नष्ट हो जायेंगे. विशेषज्ञों के अनुसार, नदियों में बालू की वजह से बारिश के बाद जलस्तर लंबे समय तक बना रहता है, जिससे आसपास के जलस्रोत को भी पानी मिलता है. नदियों के सूखने से सिंचाई, पेयजल व अन्य जलापूर्ति का भी काम प्रभावित होने लगा है.अजय नदी
झारखंड की प्रमुख नदियों में पतली धार
झारखंड की प्रमुख नदियां जैसे- स्वर्णरेखा, दामोदर, मयुराक्षी, कोयल नदी, अजय नदी, डढ़वा नदी, पतरो नदी, चांदन नदी, मोतिहारा, सिद्धेश्वरी, पुसारो सहित आदि जो पानी के मामले में समृद्ध माना जाता है, लेकिन अब यह नदियां भी सूख रही है. बड़ी-बड़ी नदियों में भी केवल पतली धार दिख रही है. वह भी बारिश होने के चंद घंटे बाद या दूसरे दिन तक दिखती है, नहीं तो रेत ही रेत या मिट्टी ही नजर आती है. जलस्तर कम रहने की वजह से पेयजलापूर्ति की योजनाओं में भी कई बार दिक्कतें आ चुकी हैं. अजय नदी के नवाडीह घाट से इस मानसून में भी चैनल काटकर जलापूर्ति हो रही है. बरसात के मौसम में नदी का जलश्रोत कम रहने से किसानों के साथ साथ ग्रामीणों को भी चिंता सताने लगी है.बड़ी बड़ी नदियों में भी पानी की पतली धार
देवघर, दुमका, गोड्डा, जामताड़ा और अन्य जिलों की जिन नदियों का ऊपरी सतह का जलस्तर हमेशा दो से तीन फीट पूरे नदी में रहता था और पानी का बहाव भी रहता था. चांदन नदी में एक बूंद पानी तक नहीं है. अजय नदी में तो इस बरसात में पानी के अभाव में बड़े-बड़े घास उग आये हैं.
गोड्डा जिले में छोटी-बड़ी 12 नदियां हैं. प्राय: सभी नदियां बरसाती है. सावन के मौसम में जुलाई महीने में गोड्डा की नदियां उफान पर रहा करती थी लेकिन इस साल मानसून के बेरूखी के कारण नदियों में पक्षियों के प्यास बुझाने लायक ही पानी है.
गेरुआ नदी बसंतराय से होकर महागमा होते हुए कहलगांव में गंगा की सहायक नदी के रूप में मिलती है. इस नदी से झारखंड और बिहार के किसानों को खेती में सिंचाई की सुविधा मिलती थी, आज इस नदी में भी नाम मात्र का ही पानी है.
सुंदर नदी की बात करें तो पथरगामा व बसंतराय से बहकर गेरुआ नदी में मिलती है. यह नदी भी पानी के लिए तरस रहा है.
मेहरमा प्रखंड की ढोलिया नदी राजमहल पहाड़ियों से निकलकर ठाकुर गंगटी व मेहरमा होते हुए गेरुआ नदी में जाकर मिलती है. यह नदी जिले की सबसे गहरी नदी के रूप में जाना जाता है. इस नदी में भी नाम मात्र का ही पानी है.
नदियों में उग आए घास
ठाकुर गंगटी की झमरिया नदी भी बरसात में आक्रामक स्थिति में रहने वाली नदी की तरह है, मगर अभी नदी में पानी का बहाव गर्मी के मौसम की तरह ही दिख रहा है.
वहीं बसंतराय प्रखंड के अलावा महागामा में बहने वाली ऐंचा नदी आज मैदानी भूभाग में तब्दील है. कुल मिलाकर देखा जाये तो गोड्डा जिले की 12 नदियों में एकाध को छोड़ दें तो शेष सभी नदियां सूख गयी हैं.
अमूमन दुमका जिले में जुलाई महीने में सभी छोटी बड़ी नदियों का जलस्तर बढ़ा हुआ रहता है. इधर एक पखवारे से भी ज्यादा समय तक भारी बारिश नहीं होने से नदियों का जलस्तर घट गया है.
रानीश्वर के इलाके में पटवन का एक बड़ा साधन नदी है. उससे संबंधित नहर है. नदी का जलश्रोत कम रहने से नदी से पंप लगाकर भी किसान खेती नहीं कर पा रहे है.
सिद्धेश्वरी नदी के भरोसे नदी किनारे दर्जनों गांवों के लोग निर्भर है. सिंचाई के लिए पानी का उपयोग करने के साथ साथ मवेशियों को पानी पिलाने, स्नान करने तथा कपड़ा साफ करने का काम आता है. ग्रामीणों को यह चिंता सता रही है कि बरसात के मौसम में नदी की यही स्थिति है तो ठंड व गर्मी के दिनों पानी के लिए हाहाकार मच जायेगा.
देवघर में महेशपुर प्रखंड के प्रमुख नदी बांसलोई नदी और पगला नदी सूख गयी है. प्रखंड की दो प्रमुख नदियां बांसलोई नदी और पगला नदी है. इन दिनों बांसलोई नदी नाले का रूप ले चुकी है. नदी में घना घास और पौधा उग चुका है. बांसलोई और पगला नदी में जगह-जगह जलजमाव भी हो गया है.
बांसलोई नदी
मानसून की बेरूखी के कारण नदियां जलविहीन
बरसात में भी नदियों के सूखे रहने का सबसे बड़ा कारण है झारखंड में मानसून का कमजोर होना. मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, झारखंड में अब भी 49 प्रतिशत कम बारिश हुई है. जबकि, झारखंड में मानसून आये करीब एक माह हो गया है. इसके बावजूद अब सामान्य से आधा के करीब ही बारिश हो पायी है. एक जून से 28 जुलाई तक 245.8 मिमी बारिश हुई है. जबकि, इस समय सामान्य बारिश रिकॉर्ड 478.3 मिमी है.
अब तक चतरा में सबसे कम और साहिबगंज में सबसे अधिक बारिश
झारखंड के 24 जिलों में चतरा जिला में सबसे कम बारिश हुई है. यहां अब भी 79 प्रतिशत बारिश कम हुई है. उसके बाद जामताड़ा है, जहां 70 फीसदी कम बारिश हुई है. फिर गिडिडीह और धनबाद जहां 68 फीसदी कम बारिश हुई है. फिर लोहरदगा, जहां 64 प्रतिशत और लातेहार जहां अब तक 62 प्रतिशत कम बारिश हुई. इसी तरह राज्य के लगभग सभी जिलों में बारिश का प्रतिशत काफी कम है. जबकि, सबसे अधिक बारिश साहिबगंज में हुई है. हालांकि, वह भी सामान्य से कम ही है. साहिबगंज में सामान्य से 9 प्रतिशत कम बारिश हुई है. आज को भी कई जगहों पर रुक-रुक कर बारिश हुई है. उम्मीद की जा रही है कि झारखंड में मानसून के दोबारा सक्रिय होने के बाद बारिश की कमी दूर हो जाएगी और राज्य की नदियों में भी पानी जमा हो पाएगा. हालांकि, नदियों के सूखने के पीछे जो मानवीय कारक हैं, जैसे अंधाधुध खनन, बालू का अवैज्ञानिक तरीके से उठाव, खेती की तकनीक में बदलाव उसे हम मानव को ही सुधारना होगा.
लैंड स्कैम के आरोपी रांची के पूर्व DC छवि रंजन की जमानत याचिका पर रांची प्रीवेन्शन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट की स्पेशल कोर्ट में सुनवाई हुई. सस्पेंड हो चुके आइएएस छवि रंजन के अधिवक्ता अभिषेक चौधरी और अभिषेक सिंह में अपनी बहस के दौरान अदालत को बताया कि उन्हें सिर्फ मौखिक बयान के आधार पर आरोपी बनाया गया है.
इसलिए छवि रंजन को जमानत दी जानी चाहिए. वहीं ED की ओर से उपस्थित विशेष लोक अभियोजक शिव कुमार ऊर्फ काका जी ने अपनी बहस में कहा कि लैंड स्कैम के प्रमुख अभियुक्त छवि रंजन ही हैं, इसलिए इन्हें बेल नहीं दी जानी चाहिए. वहीं ईडी की ओर से जवाब भी दाखिल किया गया. इसके बाद कोर्ट ने छवि रंजन की जमानत पर अगली सुनवाई के लिए 5 अगस्त की तारीख तय की है.
बता दें कि रांची के बड़गाईं अंचल के बरियातु स्थित सेना के कब्जे वाली जमीन की खरीद बिक्री से जुड़े इस केस में ED रांची के पूर्व उपायुक्त आइएएस छवि रंजन, बड़गाईं अंचल के राजस्व उप निरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद, सेना के कब्जे वाली जमीन का फर्जी रैयत प्रदीप बागची, जमीन कारोबारी अफसर अली, इम्तियाज खान, तल्हा खान, फैयाज खान व मोहम्मद सद्दाम, अमित अग्रवाल और दिलीप घोष के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है. वहीं IAS छवि रंजन पिछले 85 दिनों से जेल में बंद हैं.
केंद्रीय शिक्षा राज्यमंत्री अन्नपूर्णा देवी ने झारखंड सरकार पर गंभीर आरोप लगाये हैं. कोडरमा की बीजेपी सांसद और केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने प्रभात खबर संवाद में कहा कि झारखंड सरकार शिक्षा की बेहतरी के लिए गंभीर नहीं है.
उन्होंने कहा कि शिक्षा के लिए जो पैसे केंद्र से भेजे जाते हैं, उसका राज्य सरकार बेहतर इस्तेमाल नहीं करती. उन्होंने कहा कि अक्टूबर में जब समीक्षा बैठक हुई थी, तो झारखंड के अधिकारियों ने बताया कि राज्य में शिक्षकों के 80 हजार पद रिक्त पड़े हैं. लेकिन, बाद में राज्य के तत्कालीन शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने इसे सिरे से खारिज कर दिया. इससे पता चलता है कि राज्य सरकार शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए गंभीर नहीं है. केंद्र सरकार के खिलाफ झूठा प्रचार करती है.
रांची 28 जुलाई झारखंड में विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शुक्रवार को मानसून सत्र के पहले दिन विधानसभा के मुख्य द्वार के बाहर प्रदर्शन किया और राज्य में एक माकपा नेता की हत्या की सीबीआई जांच कराने एवं कथित तौर पर बिगड़ती कानून व्यवस्था की स्थिति पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस्तीफे की मांग की।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने दावा किया कि झारखंड में कानून-व्यवस्था की स्थिति ”बद से बदतर” हो गई है। उन्होंने कहा, ‘पुलिस का काम अपराधियों को पकड़ना है, लेकिन सरकार इसे अपने उद्देश्यों के लिए एक औजार के तौर पर इस्तेमाल कर रही है।’
प्रदर्शन में शामिल नेताओं और समर्थकों ने सोरेन के इस्तीफे तथा हत्या की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच की मांग करते हुए तख्तियां लहराईं।
सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है।
भाजपा के एक अन्य नेता अमर बाउरी ने दावा किया कि ज्यादातर अपराध जमीन पर कब्जे के लिए हो रहे हैं और ये सोरेन के संरक्षण में किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘हम मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग करते हैं।’
भाजपा के मुख्य सचेतक बिरंची नारायण ने कहा कि पहले महिलाओं के खिलाफ अपराध के कारण संथाल परगना क्षेत्र नागरिकों के लिए असुरक्षित था लेकिन ”अब राजधानी रांची भी सुरक्षित नहीं है।”
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) नेता सुभाष मुंडा की बुधवार को यहां दलदली चौक स्थित उनके कार्यालय में गोली मारकर हत्या कर दी गई।
नारायण ने मांग की कि यह मामला सीबीआई को सौंपा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आजसू नेता अजय मुंडा को भी एक दिन पहले ही गोली मार दी गई थी और उनकी हालत गंभीर बनी हुई है।
कांग्रेस के नेता एवं मंत्री बन्ना गुप्ता ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि पुलिस अपना काम कुशलता से कर रही है। उन्होंने कहा, ”विपक्ष बिना किसी वजह के, हंगामा कर रहा है।”
सुभाष मुंडा हत्या मामले में अब तक हुई जांच के बारे में पूछे जाने पर रांची के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक किशोर कौशल ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘मामले में जांच की जा रही है और हम जल्द ही निष्कर्ष पर पहुंचेंगे। कई लोगों से पूछताछ की जा रही है।’
आगई नई इलेक्ट्रिक बुलेट! ऑटो जगत में आज का दौर बड़े बदलाव का है, जिसमें चाहे कार हो, बाइक हो या फिर साइकिल ही क्यों न हो, सब इलेक्ट्रिफाइड हो रहा है. ये हमारी प्रकृति के साथ-साथ तमाम तरह से हमारे लिए भी फायदेमंद है.
ऐसे में इस इलेक्ट्रिकफिकेशन के दौर में हम सभी को इंतजार है, हमारी फेवरेट बाइक बुलेटे के इलेक्ट्रिफाइड होने का, जिसे लेकर कंपनी खुद भी अपने इराजे जाहिर कर चुकी है, हालांकि अभी इसबर काम जारी है. मगर क्या हो अगर आपको मालूम चले कि बुलेट का इलेक्ट्रिक सेगमेंट पहले भी भारतीय ऑटो बजार में मौजूद है? जी हां… बेंगलुरू एक बेस्ड बाइक कस्टम्स कंपनी ने दिलचस्प इलेक्ट्रिक बुलेट तैयार की गई है, जिसका नाम है ‘Gasoline’.
दरअसल इस फर्म का नाम है बुलेटियर कस्टम्स, जो पिछले करीब 16 साल से रॉयल एनफील्ड की बाइक्स को कस्टमाइजेशन मॉडिफिकेशन का काम कर रहे हैं. ये फर्म खासतौर पर रॉयल एनफील्ड की बाइक्स पर अपने अनोखे क्रिएटिव अंदाज में न सिर्फ कलाकारी करती है, बल्कि उसे एडवांस फीचर्स के साथ लैस कर एक बेहतीन गाड़ी बनाती है. इसी के मद्देनजर हाल ही में इस फर्म ने 1984 मॉडल रॉयल एनफील्ड बुलेट को अनोखे लुक्स फीचर्स के साथ तैयार किया है, फर्म ने इसे एक नया इलेक्ट्रिक कलेवर दिया है, जो न सिर्फ देखेने में शानदार है, बल्कि परफॉर्मेंस के मामले में भी उम्दा होने का दावा किया जा रहा है. तो चलिए इसके बारे में जानें…
ऐसी है नई इलेक्ट्रिक बुलेट…
हासिल जानकारी के मुताबिक ये नई इलेक्ट्रिक बुलेट, डिजाइन परफॉर्मेंस दोनों ही मामलों में ओरिजनल बुलेट से काफी ज्यादा अलग है. अगर पहले डिजाइन की बात करें, तो इस बाइक में 3 इंच लंबे चेचिस के साथ, नए लुक्स का फ्यूल टैंक दिया गया है. वहीं इसे बिल्कुल ठीक नीचे एक बड़े इंजन जैसा दिखने वाला कवर भी तैयार किया गया है, जिसके अंदर बैटरी लगाई गई है. इसमें अलग-अलग ड्राइविंग मोड्स मौजूद हैं, साथ ही बाइक की मोटर को पावरफुल बनाने के लिए नाइट्रो बूस्ट सिस्टम भी है.
वहीं अगर इसकी रेंज परफॉर्मेंस की बात करें, तो इसमें मुख्यत: तो मोड दिए गए हैं, पहला रेगुलर मोड, जिसमें बाइक करीब 90 किमी चल सकती है. दूसरा इकोनॉमी मोड, जिसमें बाइक 100 किमी से ज्यादा चल सकती है. इसमें मुंबई बेस्ड गोगो ए1 फर्म से 5kW की क्षमता का BLDC हब मोटर दिया गया है.
आईसीसी मेंस टी20 वर्ल्ड कप का 9वां एडिशन अगले साल वेस्टइंडीज और अमेरिका में खेला जाना है। इस वर्ल्ड कप में कुल 20 टीमों ने हिस्सा लेना है जिसमें से 15 टीमें क्वालीफाई कर चुकी है, वहीं 5 टीमों की जगह अभी भी खाली है।
टी20 वर्ल्ड कप 2024 आगाज जून में होगा। टी20 वर्ल्ड कप 2022 की टॉप-8 टीमों समेत, आईसीसी रैंकिंग के टॉप-10 में मौजूद दो टीमों ने डायरेक्ट क्वालीफाई किया, वहीं मेजबान होने के नाते वेस्टइंडीज और अमेरिका को भी सीधा टिकट मिला। इसके अलावा क्वालीफायर्स राउंड खेलकर 3 और टीमों ने इस लिस्ट में अपनी जगह बनाई है।
इन 12 टीमों के अलावा अभी तक आयरलैंड, स्कॉटलैंड और पपुआ न्यू गिनी ने टी20 वर्ल्ड कप 2024 के लिए क्वालीफाई कर लिया है।
अब अन्य 5 टीमों का फैसला अमेरिका क्वालीफायर, एशिया क्वालीफायर और अफ्रीका क्वालीफायर के जरिए होगा। अमेरिका से 1 और एशिया व अफ्रीका से 2-2 टीमें वर्ल्ड कप का टिकट हासिल कर सकती है। 1 दिसंबर तक टी20 वर्ल्ड कप 2024 की सभी 20 टीमों का नाम साफ हो जाएगा।
बात अभी तक क्वालीफाई कर चुकी टीमों की करें तो वेस्टइंडीज, अमेरिका, आयरलैंड, पपुआ न्यू गिनी और स्कॉटलैंड के अलावा भारत, इंग्लैंड, बांग्लादेश, अफगाानिस्तान, पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, श्रीलंका, साउथ अफ्रीका और नीदरलैंड्स ने डायरेक्ट क्वालीफाई किया है।
पहली बार टी20 वर्ल्ड कप में होगी 20 टीमें
टी20 वर्ल्ड कप में पहली बार मुख्य दौर में 20 टीमें देखने को मिलेंगी, जिनको 4 ग्रुप में बांटा जाएगा। 5-5 टीमों वाले ग्रुप में शीर्ष पर रहने वाली 2-2 टीमों को सुपर 8 के लिए क्वालीफाई करने का मौका मिलेगा, जबकि सुपर 8 में चार-चार टीमों के दो ग्रुप बनाए जाएंगे और इन ग्रुपों में शीर्ष पर रहने वाली 2-2 टीमों को सीधे सेमीफाइनल में मौका मिलेगा और इसके बाद फाइनल खेला जाएगा।
टी20 वर्ल्ड कप का शेड्यूल तो अभी तक सामने नहीं आया है, मगर खबरों के मुताबिक टी20 विश्व कप 2024 में कुल 50 मैच होंगे, जिनमें से एक तिहाई मैच अमेरिका के अलग-अलग शहरों में आयोजित होंगे। अमेरिका पहली बार किसी आईसीसी इवेंट की मेजबानी करेगा। कुल 17 मैच यूएसए में खेले जा सकते हैं।
जमशेदपुर : जमशेदपुर के मानगो निवासी अमरनाथ सिंह की देवघर में गोली मारकर अज्ञात अपराधियों ने हत्या कर दी। यह घटना बासुकीनाथ मंदिर से आगे नंदिनी चौक के पास घटी। बताया जाता है कि अमरनाथ सिंह अपने परिवार और कुछ साथियों के साथ बाबा धाम में देवघर गया था। जल अर्पण करने के बाद वह अपने परिवार के साथ बासुकीनाथ गया और उसके बाद एक सरकारी ठहराव के स्थान पर रुका। उसके साथ के लोग गाड़ी लेने चले गए थे। इसी बीच अमरनाथ सिंह बाहर टहल रहा था। (जारी…)
टहलने के दौरान ही देवघर के बाबा के धाम वाले गेरुआ वस्त्र पहने दो लड़के आए। उसके बाद उन दोनों लड़कों ने उसको सिर में ही गोली मार दी। इससे उसकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई। गोली मारने के बाद सारे अपराधी वहां से भाग निकले। अमरनाथ सिंह जमशेदपुर के मानगो क्षेत्र में काफी दिनों से एक अपराधिक गिरोह भी चला रहा था। इसको लेकर उसका कई दिनों से विवाद भी चल रहा था। वह कुछ दिनों पहले ही देवघर में शिव की आराधना करने के लिए बाबा धाम गया। उसके साथ उसकी पत्नी और बच्चे भी थे। इसी बीच अपराधियों ने इस घटना को अंजाम दे दिया।