तीसरी धारा न्यूज
जमशेदपुर | 12 अगस्त 2026
टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, वह अपना मौजूदा कार्यकाल पूरा करेंगे और इसके बाद दोबारा नियुक्ति की मांग नहीं करेंगे। चंद्रशेखरन का यह लगभग एक दशक लंबा कार्यकाल फरवरी 2027 में समाप्त होगा।
अपने इस कार्यकाल के दौरान उन्होंने भारत के सबसे बड़े बिजनेस ग्रुप को एयरलाइंस, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी और डिजिटल कारोबार वाले आधुनिक ग्रुप में बदल दिया।
बोर्ड को दी फैसले की जानकारी
मामले से जुड़े लोगों के अनुसार, 63 वर्षीय चंद्रशेखरन ने टाटा संस के बोर्ड को अपने निर्णय के बारे में बता दिया है। वह चेयरमैन के तौर पर फरवरी 2027 तक अपने कार्यकाल के आधिकारिक रूप से खत्म होने तक पद पर बने रहेंगे।
अनिश्चितता के बीच आया फैसला
चंद्रशेखरन के जाने का असर पूरे ग्रुप पर पड़ेगा। वह टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), टाटा मोटर्स और टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स समेत कई अन्य टाटा कंपनियों के भी चेयरमैन हैं। साल 2017 में टाटा संस को संभालने के बाद से ग्रुप के बिजनेस विस्तार में उनकी अहम भूमिका रही है।
उनका यह फैसला 18 अगस्त की मीटिंग और टाटा ट्रस्ट्स (जिसके पास टाटा संस की लगभग 66% हिस्सेदारी है) के वोटिंग रुख को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच आया है। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा को चंद्रशेखरन के पद पर बने रहने के पक्ष में नहीं देखा जा रहा था।
सर रतन टाटा ट्रस्ट पर फैसलों की रोक
टाटा संस के प्रमुख शेयरहोल्डर्स में से एक, सर रतन टाटा ट्रस्ट को फिलहाल महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर ने जांच लंबित रहने तक जरूरी फैसले लेने से रोक दिया है। टाटा संस के ‘आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन’ के तहत, सर रतन टाटा ट्रस्ट और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट द्वारा मिलकर नामित किए गए ट्रस्टी ही AGM में वोट करने के लिए अधिकृत हैं।
नोएल टाटा, डेरियस खंबाटा और जहांगीर जहांगीर समेत सर रतन टाटा ट्रस्ट के कुछ ट्रस्टियों ने चैरिटी कमिश्नर से मीटिंग में हिस्सा लेने की अनुमति मांगी है, जबकि विजय सिंह और वेणु श्रीनिवासन ने इस अनुरोध पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए। इस अनिश्चितता से एक विवादित वोट की संभावना बढ़ गई थी, जिससे चंद्रशेखरन की चेयरमैनशिप पर असर पड़ सकता था। इसी प्रक्रिया के पूरा होने से पहले ही उन्होंने पद छोड़ने का फैसला कर लिया।
चंद्रशेखरन के दौर में वित्तीय मजबूती
चंद्रशेखरन के कार्यकाल में टाटा ग्रुप के वित्तीय आंकड़ों में बड़ा उछाल देखने को मिला:
- कुल रेवेन्यू: वित्त वर्ष 2020 (FY20) के ₹7.89 लाख करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 (FY26) में ₹16.24 लाख करोड़ हो गया।
- शुद्ध लाभ (PAT): टैक्स के बाद प्रॉफिट पांच गुना से अधिक बढ़कर ₹32,000 करोड़ से ₹1.71 लाख करोड़ पहुंच गया।
- मार्केट कैप: टाटा की लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैपिटलाइजेशन FY20 में ₹9.31 लाख करोड़ से बढ़कर FY26 में ₹24.39 लाख करोड़ हो गया (हालांकि FY25 में यह ₹27.85 लाख करोड़ के स्तर पर था)।
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