🔥 तीसरी धारा न्यूज | जमशेदपुर | 11 अगस्त 2026
JPSC-JSSC आंदोलन और पुलिसिया बल प्रयोग
जमशेदपुर: झारखंड की राजनीति में इन दिनों सबसे बेचैन करने वाली तस्वीर राजधानी रांची में विधानसभा के बाहर दिखाई दी, जहां JPSC और JSSC परीक्षाओं की पारदर्शिता तथा रोजगार की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे हजारों छात्रों पर पुलिस को वाटर कैनन, आंसू गैस और लाठियों का प्रयोग करना पड़ा। 10 अगस्त को 17 दिनों से चले आ रहे छात्र आंदोलन ने विधानसभा घेराव के दौरान हिंसक रूप ले लिया। बैरिकेडिंग तोड़ने और पथराव के बीच हुए लाठीचार्ज में कई छात्र घायल हुए हैं, वहीं पुलिसकर्मी भी मूकदर्शक बनने के बजाय बल प्रयोग करते नजर आए।
मुख्यमंत्री का संदेश बनाम जमीनी हकीकत
घटनाक्रम के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का बयान सामने आया, जिसमें उन्होंने एक तरफ स्थिति संभालने के लिए पुलिस-प्रशासन को धन्यवाद दिया, वहीं दूसरी तरफ छात्रों की मांगों के प्रति संवेदनशीलता और संवाद की बात दोहराई। हालांकि, इस दोहरे रवैये पर सवाल उठ रहे हैं कि यदि सरकार सचमुच युवाओं की आवाज सुनने के प्रति गंभीर है, तो 17 दिनों तक चले शांत आंदोलन के बाद भी सीधे संवाद के बजाय सड़कों पर लाठियां क्यों खड़ी की गईं।
सरयू राय की सलाह और राजनीतिक सरगर्मी
जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री को कूटनीतिक रास्तों और मध्यस्थों को छोड़कर सीधे छात्रों के बीच जाकर उनकी विधिसम्मत मांगों को स्वीकार करने की सलाह दी है। उन्होंने इस आंदोलन को प्रशासनिक ढिलाई और व्यवस्थागत भ्रष्टाचार की झलक करार दिया। वहीं, केंद्र में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा भी पुलिसिया कार्रवाई की आलोचना किए जाने से गठबंधन सरकार पर प्रशासनिक और राजनीतिक दबाव काफी बढ़ गया है।
अविश्वास का चक्र और समाधान की दरकार
परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर उठे सवालों ने युवाओं के मन में अविश्वास का गहरा चक्र बना दिया है। जानकार मानते हैं कि लाठियों के दम पर आंदोलन को भले ही अस्थायी रूप से दबाया जा सकता है, लेकिन युवाओं के मन से अविश्वास को मिटाने के लिए सरकार को राजनीतिक बयानबाजी छोड़कर सीधी बातचीत, निष्पक्ष जांच और ठोस फैसलों का रास्ता अपनाना होगा।











