ताजा खबर
शिक्षा जगत की अनमोल धरोहर: डीबीएमएस परिवार ने श्रीमती के. उमा को दी भावुक विदाई, मुंबई के लिए करेंगी प्रस्थान•सरायकेला में कोल्हान आयुक्त ने की राजस्व विकास और मतदाता पुनरीक्षण कार्य की समीक्षा, पेंडिंग योजनाओं को जल्द पूरा करने के निर्देश•शारदीय नवरात्रि 2026: तीसरे दिन होती है मां चंद्रघंटा की पूजा, जानिए स्वरूप, महत्व और संपूर्ण पूजा विधि•बिष्टुपुर पथराव मामले में भाजपा नेता अजीत सिंह चन्द्रवंशी बोले- झड़प में मुझे भी आई चोट, निष्पक्ष हो उच्चस्तरीय जांच•बिष्टुपुर हिंसा पर गरमाई राजनीति: कांग्रेस ने भाजपा जिलाध्यक्ष और पूर्वी विधायक पर बोला हमला•झारखंड में धान खरीद की शुरू हुई तैयारियां: 15 दिसंबर से होगी शुरुआत, इस बार 50 लाख क्विंटल धान खरीद का लक्ष्य•जमशेदपुर के बिष्टुपुर में भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच भीषण झड़प, पथराव में पूर्व जिला अध्यक्ष दिनेश कुमार समेत 10 से अधिक घायल•पूर्वी सिंहभूम में दुर्गा पूजा पंडालों के 100 मीटर के दायरे को किया गया तंबाकू मुक्त घोषित, नियम तोड़ने पर लगेगा 1,000 रुपये तक जुर्माना•जमशेदपुर में प्रशासनिक फेरबदल: एसएसपी डॉ. एहतेशाम वाकारिब ने तीन थानों को दिए नए प्रभारी, सीतारामडेरा, बिरसानगर और श्यामसुंदरपुर में तैनाती•शारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन: ब्रह्मचारिणी स्वरूप की होती है पूजा, जानिए पूरी विधि और महत्वशिक्षा जगत की अनमोल धरोहर: डीबीएमएस परिवार ने श्रीमती के. उमा को दी भावुक विदाई, मुंबई के लिए करेंगी प्रस्थान•सरायकेला में कोल्हान आयुक्त ने की राजस्व विकास और मतदाता पुनरीक्षण कार्य की समीक्षा, पेंडिंग योजनाओं को जल्द पूरा करने के निर्देश•शारदीय नवरात्रि 2026: तीसरे दिन होती है मां चंद्रघंटा की पूजा, जानिए स्वरूप, महत्व और संपूर्ण पूजा विधि•बिष्टुपुर पथराव मामले में भाजपा नेता अजीत सिंह चन्द्रवंशी बोले- झड़प में मुझे भी आई चोट, निष्पक्ष हो उच्चस्तरीय जांच•बिष्टुपुर हिंसा पर गरमाई राजनीति: कांग्रेस ने भाजपा जिलाध्यक्ष और पूर्वी विधायक पर बोला हमला•झारखंड में धान खरीद की शुरू हुई तैयारियां: 15 दिसंबर से होगी शुरुआत, इस बार 50 लाख क्विंटल धान खरीद का लक्ष्य•जमशेदपुर के बिष्टुपुर में भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच भीषण झड़प, पथराव में पूर्व जिला अध्यक्ष दिनेश कुमार समेत 10 से अधिक घायल•पूर्वी सिंहभूम में दुर्गा पूजा पंडालों के 100 मीटर के दायरे को किया गया तंबाकू मुक्त घोषित, नियम तोड़ने पर लगेगा 1,000 रुपये तक जुर्माना•जमशेदपुर में प्रशासनिक फेरबदल: एसएसपी डॉ. एहतेशाम वाकारिब ने तीन थानों को दिए नए प्रभारी, सीतारामडेरा, बिरसानगर और श्यामसुंदरपुर में तैनाती•शारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन: ब्रह्मचारिणी स्वरूप की होती है पूजा, जानिए पूरी विधि और महत्व

एक नई सोच, एक नई धारा

झारखंड के महानायक ‘दिशोम गुरु’ शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण: कारूवा समाज ने जताई खुशी, कहा— पूरे राज्य के लिए गर्व का क्षण

तीसरी धारा न्यूज (सरायकेला):

​झारखंड राज्य गठन के आंदोलन के महानायक, आदिवासियों और मूलवासियों के हक-अधिकारों तथा ‘जल, जंगल, जमीन’ की रक्षा के लिए आजीवन संघर्ष करने वाले ‘दिशोम गुरु’ शिबू सोरेन को देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पॉद्म भूषण से सम्मानित किया गया है। राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक भव्य समारोह में महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों दिशोम गुरु की पत्नी रूपी सोरेन ने यह सम्मान ग्रहण किया।IMG 20260625 WA0020

​दिशोम गुरु को मरणोपरांत यह सर्वोच्च सम्मान मिलने पर पूरे झारखंड सहित सरायकेला क्षेत्र में हर्ष का माहौल है। इस ऐतिहासिक क्षण पर मूलनिवासी कारूवा समाज ने अपनी गहरी खुशी और आभार व्यक्त किया है।

​झारखंड के संघर्ष और अस्मिता को मिला सर्वोच्च सम्मान

​इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर मूलनिवासी कारूवा समाज के प्रदेश कोषाध्यक्ष श्री गुरुचरण मुखी ने हर्ष जताते हुए कहा कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण मिलना हर एक झारखंडी के लिए सर्वोच्च सम्मान की बात है। यह न केवल उनके दशकों लंबे त्याग और संघर्ष का सम्मान है, बल्कि यह पूरे झारखंड राज्य को गौरवान्वित करने वाला क्षण है।b 1

​उन्होंने कहा कि शिबू सोरेन ने अपना पूरा जीवन दबे-कुचलों, आदिवासियों और मूलवासियों की आवाज बुलंद करने में समर्पित कर दिया था। आज देश के सर्वोच्च स्तर पर उनके योगदान को सराहा जाना इस बात का प्रतीक है कि जन-आंदोलनों और जन-नेताओं का संघर्ष कभी व्यर्थ नहीं जाता।a 2

​जल, जंगल, जमीन की लड़ाई के प्रतीक थे ‘दिशोम गुरु’

​स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों और समाजसेवियों का कहना है कि दिशोम गुरु का नाम झारखंड के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है।

    • ​अखंड संघर्ष: महाजन प्रथा के खिलाफ लड़ाई से लेकर अलग झारखंड राज्य के निर्माण तक, उनका नेतृत्व हमेशा मार्गदर्शक रहा।
    • ​अधिकारों की अलख: उन्होंने आदिवासियों और मूलवासियों को उनके जल, जंगल और जमीन के अधिकारों के प्रति जागरूक किया।

​समाज में उत्सव का माहौल: इस सम्मान के बाद सरायकेला और आस-पास के क्षेत्रों में विभिन्न सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों द्वारा खुशियां मनाई जा रही हैं। लोगों का मानना है कि महामहिम राष्ट्रपति के हाथों रूपी सोरेन द्वारा यह सम्मान लिया जाना झारखंड की सांस्कृतिक और राजनीतिक अस्मिता के लिए एक ऐतिहासिक और भावुक कर देने वाला पल है।

 

​— तीसरी धारा न्यूज

CCTV 2 CAMERA TWISTER 1
error: Content is protected !!