तीसरी धारा न्यूज / जमशेदपुर:
शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व पूरे देश सहित जमशेदपुर में भी पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। नवरात्रि के तीसरे दिन मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप माता चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां चंद्रघंटा अपने भक्तों को सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति दिलाती हैं और उनके जीवन में सुख-शांति व समृद्धि का वास होता है। उनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित है, इसीलिए इन्हें ‘चंद्रघंटा’ कहा जाता है।
मां चंद्रघंटा का स्वरूप और महत्व
माता चंद्रघंटा का यह स्वरूप बेहद सौम्य और कल्याणकारी है। उनके दस हाथ हैं, जिनमें वे विभिन्न अस्त्र-शस्त्र धारण करती हैं और उनका वाहन सिंह (शेर) है। ऐसी मान्यता है कि मां के इस रूप की आराधना करने से भक्तों को निर्भयता की प्राप्ति होती है। उनकी कृपा से व्यक्ति के भीतर के सभी प्रकार के भय, क्रोध और अहंकार का नाश होता है। साधक को कठिन परिस्थितियों से लड़ने की आंतरिक शक्ति प्राप्त होती है।
पूजा की संपूर्ण विधि (Puja Vidhi)
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- स्नान और शुद्धि: नवरात्रि के तीसरे दिन सुबह जल्दी उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल को गंगाजल छिड़क कर पवित्र करें।
- कलश और माता का आह्वान: मां चंद्रघंटा की मूर्ति या तस्वीर को चौकी पर स्थापित करें। यदि आपने पहले दिन घटस्थापना की है, तो उसी विधान के अनुसार आगे की पूजा शुरू करें।
- पूजा सामग्री: माता को लाल रंग विशेष प्रिय है, इसलिए पूजा में लाल फूल (विशेषकर कमल या गुलाब), अक्षत, रोली, कुमकुम और सिंदूर अर्पित करें।
- भोग और प्रसाद: मां को दूध से बनी मिठाइयों, खीर या मखाने की खीर का भोग अत्यंत प्रिय है। इसके साथ ही फल और मिष्ठान अर्पित करें।
- मंत्र जाप और आरती: पूजा के दौरान मां के मंत्र “ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः” का जाप करें। इसके बाद धूप, दीप जलाकर विधि-विधान से मां चंद्रघंटा की आरती करें और अंत में क्षमा प्रार्थना करते हुए अपनी मनोकामनाएं मांगें।
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धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था का महापर्व, माता रानी की कृपा आप पर बनी रहे – तीसरी धारा न्यूज!





















