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सरायकेला: एन. आर. गवर्नमेंट प्लस टू स्कूल में प्रधानाध्यापिका को बिना नोटिस हटाने पर बवाल, विवादित शिक्षक को मिला प्रभार

तीसरी धारा न्यूज (सरायकेला):

​सरायकेला स्थित एन. आर. गवर्नमेंट प्लस टू स्कूल में शिक्षा विभाग के एक चौंकाने वाले फैसले ने पूरे क्षेत्र में नया विवाद खड़ा कर दिया है। विद्यालय की प्रभारी प्रधानाध्यापिका अंबिका प्रधान को बिना किसी पूर्व नोटिस या कारण बताओ (Show-Cause) नोटिस के अचानक पद से हटा दिया गया है। वहीं दूसरी ओर, प्रशासनिक और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोपों से घिरे एक शिक्षक को विद्यालय की कमान सौंप दी गई है। शिक्षा विभाग के इस दोहरे मापदंड वाले फैसले पर अब स्थानीय लोगों, अभिभावकों और बुद्धिजीवियों ने गंभीर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।IMG 20260625 WA0021

​बिना विभागीय जांच और स्पष्टीकरण के कार्रवाई

​मालूम हो कि निवर्तमान प्रभारी प्रधानाध्यापिका अंबिका प्रधान के कार्यकाल के दौरान विद्यालय के शैक्षणिक माहौल में न सिर्फ बड़ा सुधार देखा गया था, बल्कि परीक्षा परिणामों में भी काफी बेहतरीन प्रगति दर्ज की गई थी। ऐसे में बिना किसी विभागीय जांच, बिना सार्वजनिक स्पष्टीकरण और बिना नियमानुसार किसी नोटिस के उन्हें अचानक पदमुक्त किए जाने से लोग हैरान हैं। जनता का सीधा सवाल है कि यदि उनके काम में कोई कमी थी, तो नियमों को ताक पर रखकर यह गुप्त कार्रवाई क्यों की गई?b 1

​विवादित शिक्षक को मिला प्रभार, उठे सवाल

​प्रधानाध्यापिका को हटाने के बाद विभाग ने विद्यालय की जिम्मेदारी शिक्षक वासुदेव राम को सौंप दी है। गौरतलब है कि वासुदेव राम पहले से ही स्थानीय स्तर पर कई तरह के वित्तीय और प्रशासनिक विवादों एवं शिकायतों के घेरे में रहे हैं। हालांकि इन आरोपों पर विभाग की ओर से अब तक कोई आधिकारिक टिप्पणी या जांच निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन इसके बावजूद एक दागी चेहरे को इतनी बड़ी जिम्मेदारी दिए जाने से विभाग की कार्यशैली संदेह के घेरे में है।a 2

​इस फैसले से खड़े हुए बड़े सवाल:

    • ​नियमों की अनदेखी क्यों?: क्या शिक्षा विभाग में अब बिना कारण बताओ नोटिस और बिना किसी जांच के सीधे हटाने की नई परंपरा शुरू हो गई है?
    • ​दागी को तरजीह क्यों?: एक तरफ बेहतर परिणाम देने वाली शिक्षिका को बिना वजह हटाया गया, तो दूसरी तरफ विवादों में घिरे शिक्षक पर विभाग इतना मेहरबान क्यों है?
    • ​बच्चों के भविष्य का क्या?: इस नेतृत्व परिवर्तन और प्रशासनिक खींचतान का सीधा असर विद्यालय के शैक्षणिक माहौल और बच्चों की पढ़ाई पर पड़ना तय माना जा रहा है।

​उबल रहा है आक्रोश: इस अचानक लिए गए फैसले के बाद से शिक्षा विभाग के भीतर भी तरह-तरह की चर्चाएं गर्म हैं। स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों ने मांग की है कि विभाग तुरंत इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट करे और वास्तविकता को सामने लाए, अन्यथा इस मनमाने फैसले के खिलाफ आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी।

 

​— तीसरी धारा न्यूज

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