काठमांडू:
नेपाल के नवनियुक्त प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने अपनी पहली ही कैबिनेट बैठक में कड़ा रुख अपनाते हुए पिछले साल सितंबर में हुए ‘जेनरेशन जेड’ (Gen Z) आंदोलन की उच्च स्तरीय जांच आयोग (कार्की आयोग) की रिपोर्ट को तत्काल लागू करने का फैसला किया है। इस फैसले के कुछ ही घंटों बाद नेपाल पुलिस ने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को उनके गुंडू (भक्तपुर) स्थित आवास से हिरासत में ले लिया।
प्रमुख गिरफ्तारियां और आरोप
- केपी शर्मा ओली: पूर्व प्रधानमंत्री पर पद पर रहते हुए आंदोलन को दबाने के लिए अत्यधिक बल प्रयोग और आपराधिक लापरवाही बरतने का आरोप है।
- रमेश लेखक: पूर्व गृह मंत्री को भी उनके आवास से गिरफ्तार किया गया है। उन पर सुरक्षा व्यवस्था को सही से न संभालने और हिंसा रोकने में विफल रहने का आरोप है।
- सजा की संभावना: जांच आयोग ने इन दोनों दिग्गजों के खिलाफ ‘गैर-इरादतन हत्या’ (Culpable Homicide) के तहत मामला चलाने और अधिकतम 10 साल की कैद की सिफारिश की है।

कैबिनेट के अन्य बड़े फैसले
शुक्रवार को हुई पहली कैबिनेट बैठक में सरकार ने स्पष्ट किया कि “कानून से ऊपर कोई नहीं है।”
- प्रवक्ता की नियुक्ति: विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री सस्मित पोखरेल को सरकार का नया आधिकारिक प्रवक्ता नियुक्त किया गया है।
- रिपोर्ट का कार्यान्वयन: सरकार ने आंदोलन के दौरान मारे गए 76 लोगों (जिनमें कई युवा शामिल थे) के परिवारों को न्याय दिलाने के लिए आयोग की सिफारिशों को अक्षरशः लागू करने की प्रतिबद्धता जताई है।
क्या था जेन-जी आंदोलन?
यह आंदोलन सितंबर 2025 में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध और भ्रष्टाचार के खिलाफ युवाओं (Gen Z) द्वारा शुरू किया गया था। इस दौरान हुई पुलिस फायरिंग और झड़पों में दर्जनों लोगों की जान गई थी, जिसके कारण तत्कालीन सरकार गिर गई थी और बालेन शाह की पार्टी को भारी जनादेश मिला।











