एक नई सोच, एक नई धारा

सोशल मीडिया और डेटिंग ऐप्स पर अब नहीं चलेगा ‘फेक’ खेल: मोदी सरकार ला सकती है KYC नियम, बिना पहचान नहीं होगा लॉगिन

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नई दिल्ली/डेस्क: भारत में सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेमिंग और डेटिंग ऐप्स का इस्तेमाल करने वाले करोड़ों यूजर्स के लिए एक बड़ा बदलाव आने वाला है। अब इन प्लेटफॉर्म्स पर अकाउंट बनाना या लॉगिन करना उतना आसान नहीं रहेगा जितना पहले था। सिम कार्ड खरीदने या बैंक खाता खुलवाने की तर्ज पर अब आपको अपनी डिजिटल पहचान (KYC) सत्यापित करानी पड़ सकती है।n705865345177458418825523954a35755e646b32dce741f5956886e576a4c17d5e317e869554e56209bf4c

संसदीय समिति की बड़ी सिफारिश

​’साइबर अपराध और महिलाओं की साइबर सुरक्षा’ पर गठित एक संसदीय समिति ने केंद्रीय आईटी (IT) और गृह मंत्रालय को एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया है। समिति का मानना है कि ऑनलाइन सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए KYC-आधारित सत्यापन (Verification) अनिवार्य किया जाना चाहिए।1002518072

क्यों पड़ी KYC की जरूरत?

​इस प्रस्ताव के पीछे मुख्य उद्देश्य डिजिटल दुनिया में बढ़ रहे अपराधों पर लगाम लगाना है:

  • फेक अकाउंट्स पर सर्जिकल स्ट्राइक: फर्जी प्रोफाइल के जरिए होने वाले उत्पीड़न, धोखाधड़ी और पहचान की चोरी (Identity Theft) को रोकने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है।
  • महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा: साइबरस्टॉकिंग, बिना सहमति के निजी तस्वीरें साझा करना और ऑनलाइन दुर्व्यवहार जैसे अपराधों में अक्सर फेक अकाउंट्स का इस्तेमाल होता है। पहचान उजागर होने के डर से अपराधी ऐसी गतिविधियों से बचेंगे।
  • ट्रैकिंग होगी आसान: पैनल का मानना है कि जब यूजर की असली पहचान सिस्टम में होगी, तो किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में अपराधी को ट्रैक करना बेहद आसान हो जाएगा।

उम्र का सत्यापन (Age Verification) भी होगा सख्त

​पैनल ने विशेष रूप से डेटिंग और गेमिंग ऐप्स के लिए ‘एज वेरिफिकेशन’ पर जोर दिया है।

  • ​ऐप्स को साइन-अप के समय यूजर की सही उम्र की जांच करनी होगी।
  • ​समय-समय पर दोबारा सत्यापन (Re-verification) करना होगा ताकि कम उम्र के बच्चे गलत कंटेंट या ऑनलाइन खतरों का शिकार न बनें।

नियम तोड़ने वालों पर गिरेगी गाज

​प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि जो प्लेटफॉर्म इन नए सुरक्षा मानकों को लागू करने में कोताही बरतेंगे, उन्हें सख्त कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही, उन अकाउंट्स पर भी कड़ी नजर रखी जाएगी जो बार-बार नियमों का उल्लंघन करते हैं।

तीसरी धारा न्यूज़ का विश्लेषण:

​यदि यह प्रस्ताव कानून की शक्ल लेता है, तो यह भारतीय इंटरनेट यूजर के अनुभव को पूरी तरह बदल देगा। जहाँ एक ओर इससे ‘साइबर बुलिंग’ और ‘धोखाधड़ी’ कम होगी, वहीं दूसरी ओर ‘यूजर प्राइवेसी’ (User Privacy) को लेकर नई बहस छिड़ना तय है।

रिपोर्ट: डेस्क, तीसरी धारा न्यूज

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