जमशेदपुर: देश के प्रतिष्ठित ढोलक वादक और संगीत जगत के अनमोल रत्न रमेश दास अब हमारे बीच नहीं रहे। मंगलवार की देर रात टाटा मुख्य अस्पताल (TMH) में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से संगीत प्रेमियों और कलाकारों में शोक की लहर दौड़ गई है।

कैंसर से लंबी जंग
रमेश दास पिछले डेढ़ वर्ष से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। हाल ही में उनकी स्थिति बिगड़ने पर उन्हें TMH के CCU में भर्ती कराया गया था। चिकित्सकों के अनुसार, उनके लिवर और फेफड़ों सहित पूरे शरीर में पानी भर गया था, जिसके चलते स्वास्थ्य में सुधार नहीं हो सका।
संगीत का शानदार सफर
रमेश दास जी ने अपनी थाप से देश के कई दिग्गज कलाकारों के साथ संगत की थी।
- प्रमुख सहयोग: उन्होंने मशहूर भजन गायक लखबीर सिंह लक्खा के अलावा देश के कई विख्यात गजल और भजन गायकों के साथ मंच साझा किया।
- पारिवारिक विरासत: उनकी बेटी श्रद्धा दास (सुरों की राजकुमारी) आज भारतीय संगीत और बॉलीवुड पार्श्व गायन में एक जाना-माना नाम हैं।
- व्यावसायिक पृष्ठभूमि: वे टाटा स्टील में कार्यरत थे, जहाँ से उन्होंने ESS (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति) ली थी।
अंतिम विदाई
वर्तमान में उनका पार्थिव शरीर TMH के शीतगृह (Morgue) में रखा गया है।
- अंतिम यात्रा: गुरुवार सुबह 10:00 बजे, अनिल सुर पथ, नाना नानी पार्क स्थित उनके आवास से शुरू होगी।
- अंतिम संस्कार: बिष्टुपुर स्थित पार्वती घाट पर उनका अंतिम संस्कार संपन्न किया जाएगा।
उनके आवास पर सांत्वना देने वालों का तांता लगा हुआ है। संगीत जगत ने एक ऐसे कलाकार को खो दिया है जिसकी कमी सदैव महसूस की जाएगी।











