जमशेदपुर: लौहनगरी के चर्चित संजीव सिंह हत्याकांड में करीब एक दशक बाद अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। मंगलवार को एडीजे-5 मंजू कुमारी की अदालत ने झामुमो नेता दुबराज नाग और मृतक के चचेरे भाई जितेंद्र सिंह को हत्या का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।






फैसले की मुख्य बातें:
- कड़ी सजा: दोनों दोषियों को उम्रकैद के साथ-साथ 20-20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
- आर्म्स एक्ट: अवैध हथियार रखने के जुर्म में 3 साल की अतिरिक्त जेल और 10-10 हजार रुपये दंड का भी आदेश दिया गया।
- 6 आरोपी बरी: साक्ष्य के अभाव और गवाहों के मुकर जाने के कारण मंगल टुडू, चित्रो सरदार, मिथुन चक्रवर्ती समेत छह अन्य आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।






12 मई 2016: वो काली सुबह
जमीन कारोबारी संजीव सिंह की हत्या ने पूरे जमशेदपुर को हिलाकर रख दिया था। 12 मई 2016 की सुबह करीब 10:45 बजे, जब संजीव बाइक से सरजामदा अपने घर लौट रहे थे, जोजोबेड़ा रेलवे फाटक के पास घात लगाए अपराधियों ने उन पर अंधाधुंध गोलियां बरसा दी थीं। संजीव की मौके पर ही मौत हो गई थी।






साजिश का पर्दाफाश: चचेरा भाई ही निकला गद्दार
पुलिस तफ्तीश में जो सच सामने आया वह चौंकाने वाला था। यह केवल एक हत्या नहीं, बल्कि एक गहरी साजिश थी:
- मुख्य सूत्रधार: झामुमो नेता दुबराज नाग को साजिश का मास्टरमाइंड पाया गया।
- घर का भेदी: संजीव के अपने चचेरे भाई जितेंद्र सिंह ने ही हत्यारों को संजीव की पल-पल की लोकेशन दी थी।
- वजह: जांच में पाया गया कि राजनीतिक रंजिश और जमीन के कारोबार में वर्चस्व की लड़ाई के कारण इस वारदात को अंजाम दिया गया।
न्याय की घड़ी (Timeline):
| घटना | विवरण |
|---|---|
| हत्या की तारीख | 12 मई 2016 |
| स्थान | जोजोबेड़ा रेलवे फाटक, गोविंदपुर |
| मुख्य दोषी | दुबराज नाग और जितेंद्र सिंह |
| सजा का ऐलान | 27 जनवरी 2026 (आजीवन कारावास) |











