जमशेदपुर: लौहनगरी की स्वच्छता सुनिश्चित करने वाले सफाई कर्मियों ने अब अपने हक के लिए मोर्चा खोल दिया है। जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (JNAC) के अंतर्गत कार्यरत सैनिटेशन कर्मियों ने ठेकेदारों और अधिकारियों पर आर्थिक और श्रम शोषण का आरोप लगाते हुए उपायुक्त (DC) कार्यालय पर दस्तक दी।






प्रमुख आरोप: समझौते की अनदेखी और ‘PF’ में धांधली
सफाई कर्मियों के प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त को सौंपे ज्ञापन में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं:
- त्रिपक्षीय समझौते का उल्लंघन: कर्मियों के अनुसार, 30 मार्च 2022 को अपर श्रमायुक्त की मौजूदगी में जो त्रिपक्षीय समझौता हुआ था, उसे अब तक फाइलों से बाहर नहीं निकाला गया है।
- न्यूनतम मजदूरी से वंचित: आरोप है कि झारखंड सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी दर का पालन नहीं हो रहा है, जिससे मजदूरों को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है।
- PF और ESIC घोटाला: कर्मियों ने बड़ी वित्तीय गड़बड़ी की आशंका जताते हुए कहा कि उनके वेतन से PF की कटौती तो हो रही है, लेकिन वह खातों में जमा नहीं की जा रही। साथ ही ESIC सुविधाओं में भी भारी अनियमितता है।






खतरनाक परिस्थितियों में काम करने की मजबूरी
सफाई कर्मियों ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि वे गंदगी और संक्रमण के बीच शहर को साफ रखते हैं, लेकिन उन्हें बुनियादी सेफ्टी गियर (दस्ताने, मास्क, जूते) तक उपलब्ध नहीं कराए जा रहे।
- कार्य के घंटे: प्रतिदिन 8 घंटे से अधिक काम लिया जा रहा है।
- पहचान का संकट: इतने वर्षों की सेवा के बावजूद कर्मियों को न तो पहचान पत्र दिया गया है और न ही हाजिरी की कोई पारदर्शी व्यवस्था है।






‘न्याय नहीं तो आंदोलन’
उपायुक्त से भेंट करने वालों में मुख्य रूप से मुन्ना मुखी, राकेश, साहिल घोष और कर्मा शामिल थे। इन कर्मियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि त्रिपक्षीय समझौता लागू नहीं हुआ और दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो वे जल्द ही काम ठप कर आंदोलनात्मक कदम उठाएंगे।
न्यूज फ्लैश (Short Summary):
- किसने किया प्रदर्शन: JNAC के सफाई कर्मी।
- किसे सौंपा ज्ञापन: उपायुक्त, पूर्वी सिंहभूम।
- मुख्य मांग: लंबित PF जमा करना, न्यूनतम मजदूरी देना और सुरक्षा उपकरण मुहैया कराना।
- चेतावनी: जल्द समाधान न होने पर हड़ताल की संभावना।











