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कराची के ‘किलर’: जब कमोडोर बबरूवाहन यादव के पराक्रम से दहला था पाकिस्तान

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​नई दिल्ली/रेवाड़ी: भारतीय नौसेना के इतिहास में 4 दिसंबर का दिन शौर्य की उस पराकाष्ठा का प्रतीक है, जिसने युद्ध की दिशा ही बदल दी थी। इस ऐतिहासिक जीत के महानायक थे कमोडोर बबरूवाहन (बबरू) यादव, जिन्हें उनकी अदम्य वीरता के लिए ‘किलर ऑफ कराची’ की उपाधि दी गई। आज भी उनकी रणनीतिक कुशलता और साहस की गाथाएं युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं।

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​ऑपरेशन ट्राइडेंट: समंदर में ‘यमराज’ बनकर टूटी नौसेना

​1971 के युद्ध के दौरान, जब पाकिस्तान ने भारतीय हवाई ठिकानों पर हमला किया, तो भारतीय नौसेना ने कराची बंदरगाह को तबाह करने की गुप्त योजना बनाई। कराची पाकिस्तान का मुख्य आर्थिक और सैन्य केंद्र था। कमोडोर बबरूवाहन यादव के नेतृत्व में आईएनएस निपात, आईएनएस निर्घात और आईएनएस वीर ने रूसी स्टाइक्स मिसाइलों के साथ दुश्मन के इलाके में 250 मील अंदर प्रवेश किया।

​रात के अंधेरे में किए गए इस अचूक हमले ने पाकिस्तानी नौसेना की कमर तोड़ दी। पीएनएस खैबर और पीएनएस मुहाफिज़ जैसे युद्धपोत समंदर की गहराइयों में समा गए।

​कराची की लपटें और ‘ऑपरेशन पायथन’

​कमोडोर यादव की रणनीति का सबसे घातक हिस्सा कराची के तेल भंडारण टैंकों को निशाना बनाना था। केमारी तेल टर्मिनल में लगी आग इतनी भीषण थी कि कराची का आसमान कई दिनों तक काला और लाल बना रहा। लगभग 60,000 टन ईंधन जलकर राख हो गया, जिससे पाकिस्तानी सेना की रसद आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई। इसके बाद ‘ऑपरेशन पायथन’ के जरिए पाकिस्तान को संभलने का मौका भी नहीं दिया गया।

​विरासत को सम्मान: महावीर चक्र और ‘यादव मार्ग’

​इस मिशन की सबसे बड़ी उपलब्धि यह थी कि भारत ने बिना किसी जवान या जहाज को खोए यह जीत हासिल की। उनकी इस अद्वितीय सेवा के लिए:

  • ​कमोडोर यादव को महावीर चक्र से सम्मानित किया गया।
  • ​वह भारतीय नौसेना में महावीर चक्र प्राप्त करने वाले पहले अधिकारी बने।
  • ​उनकी याद में दिल्ली रोड का नाम बदलकर “कमोडोर बबरूभान यादव मार्ग” रखा गया है।

​अहीरवाल के शौर्य का प्रतीक

​हरियाणा के रेवाड़ी जिले के भाड़ावास गांव के रहने वाले कमोडोर यादव यदुवंश के गौरव हैं। 1971 की जंग में अहीर रेजिमेंट और सैनिकों का दबदबा रहा, जहाँ अकेले इस युद्ध में वीर अहीरों को 3 महावीर चक्र, 4 वीर चक्र और 8 सेना मेडल प्राप्त हुए।

​“किलर ऑफ कराची की उपाधि केवल एक नाम नहीं, बल्कि भारतीय नौसेना के अजेय होने का प्रमाण है।”

​भारतीय नौसेना आज भी 4 दिसंबर को ‘नौसेना दिवस’ के रूप में मनाकर कमोडोर यादव और उनके साथियों के बलिदान और शौर्य को नमन करती है।

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