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एक नई सोच, एक नई धारा

टाटानगर-कीताडीह अतिक्रमण मामला: हाईकोर्ट से दुकानदारों को बड़ी राहत; 42 दिनों में पुनर्वास का आदेश, रेलवे को झटका

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​जमशेदपुर | 22 जनवरी, 2026

​टाटानगर रेलवे स्टेशन चौक से कीताडीह जाने वाली मुख्य सड़क के किनारे बसे दुकानदारों के लिए झारखंड हाईकोर्ट का फैसला एक नई उम्मीद लेकर आया है। पिछले कई दिनों से चल रहे रेलवे के ‘बुलडोजर अभियान’ पर कोर्ट ने न केवल ब्रेक लगाया है, बल्कि विस्थापित हो रहे दुकानदारों के पुनर्वास (Rehabilitation) के लिए भी ऐतिहासिक आदेश जारी किया है।

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​हाईकोर्ट का अहम फैसला: एक माह की मोहलत

​हाईकोर्ट के जस्टिस राजेश कुमार की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान दुकानदारों को बड़ी कानूनी राहत मिली। कोर्ट के आदेश के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  • ​एक महीने का समय: दुकानदारों को अपनी स्वेच्छा से जगह खाली करने के लिए एक महीने की मोहलत दी गई है।
  • ​42 दिनों में पुनर्वास: रेलवे अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया गया है कि वे 42 दिनों के भीतर इन दुकानदारों को रेलवे क्षेत्र में ही कहीं और बसाने (Relocate) की व्यवस्था करें।
  • ​रिपोर्ट तलब: अदालत ने 42 दिन बीतने के बाद इस संबंध में एक विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है।

​रेलवे की कार्रवाई और दुकानदारों का संघर्ष

​उल्लेखनीय है कि टाटानगर स्टेशन के विस्तार और आधुनिकीकरण योजना के तहत रेलवे इंजीनियरिंग विभाग ने अतिक्रमण हटाओ अभियान शुरू किया था।

  • ​हालिया कार्रवाई: स्टेशन-कीताडीह रोड पर स्थित कुल 25 दुकानों में से लगभग 12 दुकानों को पहले ही जमींदोज किया जा चुका था।
  • ​मलबे में तलाश: जिन दुकानदारों की दुकानें तोड़ी गई थीं, वे वर्तमान में मलबे से ईंटें और अपना जरूरी सामान निकालने में जुटे हैं। अब कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें भी पुनर्वास की प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा।

​”परिवार पालने का मिलेगा सहारा”

​हाईकोर्ट के इस फैसले से उन दुकानदारों के चेहरे पर मुस्कान लौट आई है जो अपनी आजीविका छिनने के डर से सहमे हुए थे। स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि वे विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के उन्हें हटाना अन्यायपूर्ण था। अब रेलवे क्षेत्र में ही जगह मिलने के आश्वासन से उनकी रोजी-रोटी सुरक्षित होती दिख रही है।

​स्टेशन विस्तार योजना पर असर

​टाटानगर स्टेशन के गोलपहाड़ी और कीताडीह क्षेत्र में विस्तार की योजना लंबे समय से प्रस्तावित है। हाईकोर्ट में मामला लंबित होने के कारण यह अभियान रुका हुआ था। अब कोर्ट के इस संतुलित आदेश (हटाने और बसाने दोनों का निर्देश) के बाद रेलवे को अपनी विस्तार योजनाओं के साथ-साथ दुकानदारों के व्यवस्थित पुनर्वास पर भी काम करना होगा।

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