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प्रेरणा: पद्मश्री छुटनी महतो के संघर्ष को मिला सम्मान, वीर सिंह देवगम ने अमानवीय कुप्रथा के विरुद्ध उनके साहस को सराहा

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​सरायकेला-खरसावां / चाईबासा: समाज में व्याप्त अंधविश्वास और डायन-कुप्रथा जैसी कुरीतियों के विरुद्ध दशकों से जंग लड़ रहीं पद्मश्री श्रीमती छुटनी महतो के प्रयासों को एक बार फिर सम्मानित किया गया है। झारखंड जनशक्ति क्रांतिकारी मोर्चा के केन्द्रीय अध्यक्ष सह सिंहभूम लोकसभा क्षेत्र के पूर्व प्रत्याशी श्री वीर सिंह देवगम ने नववर्ष के उपलक्ष्य में उनसे भेंट कर उनके ऐतिहासिक योगदान के प्रति आभार व्यक्त किया।

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​”लाखों महिलाओं के लिए जीवनदायिनी बनीं छुटनी महतो”

​मुलाकात के दौरान वीर सिंह देवगम ने कहा कि छुटनी महतो का संघर्ष केवल एक व्यक्तिगत लड़ाई नहीं, बल्कि मानवता को बचाने का एक महाअभियान है। उन्होंने रेखांकित किया कि:

  • ​साहसिक प्रयास: जिस अमानवीय कुप्रथा के नाम पर निर्दोष महिलाओं को प्रताड़ित किया जाता था, उसके खिलाफ छुटनी महतो ने ढाल बनकर काम किया।
  • ​जनजागरण का प्रभाव: उनके निरंतर अभियानों के फलस्वरूप अब तक लाखों महिलाओं की जान बचाई जा सकी है और समाज में जागरूकता का प्रसार हुआ है।
  • ​ऐतिहासिक योगदान: अंधविश्वास को जड़ से मिटाने के लिए उनका समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक का कार्य करेगा।

​सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ साझा रणनीति पर चर्चा

​सम्मान समारोह के दौरान केवल औपचारिक भेंट ही नहीं हुई, बल्कि सामाजिक बुराइयों को और अधिक सशक्त तरीके से समाप्त करने के लिए संयुक्त प्रयासों पर भी गंभीर चर्चा की गई। वीर सिंह देवगम ने विश्वास दिलाया कि वे और उनका मोर्चा सामाजिक बदलाव के इस अभियान में हर संभव सहयोग प्रदान करेंगे।

​एक नजर पद्मश्री छुटनी महतो के सफर पर

​श्रीमती छुटनी महतो स्वयं कभी इस कुप्रथा का शिकार हुई थीं, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय इसे अपनी ताकत बनाया। आज वे झारखंड के सरायकेला जिले में एक ‘पुनर्वास केंद्र’ चलाती हैं, जहाँ प्रताड़ित महिलाओं को आश्रय और नया जीवन दिया जाता है। भारत सरकार ने उनके इसी अदम्य साहस के लिए उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया है।

​निष्कर्ष: समाज के लिए संदेश

​इस मुलाकात ने समाज को यह संदेश दिया है कि जब तक समाज में सकारात्मक बदलाव लाने वाले व्यक्तित्वों का सम्मान होगा, तब तक अंधविश्वास जैसी कुरीतियां पैर नहीं पसार पाएंगी। श्री देवगम द्वारा किया गया यह सम्मान समारोह सामाजिक कार्यकर्ताओं के मनोबल को बढ़ाने की दिशा में एक सराहनीय कदम है।

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