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झारखंड मतदाता सूची संशोधन: भाजपा ने उठाए 18 हजार से अधिक नामों पर सवाल, कांग्रेस की ओर से सिर्फ 2 आपत्तियां

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रांची | शनिवार, 17 जनवरी 2026

रांची: विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के बाद झारखंड की मतदाता सूची को लेकर राज्य की सियासत गरमा गई है। चुनाव आयोग द्वारा जारी आंकड़ों और राजनीतिक दलों द्वारा दर्ज कराई गई आपत्तियों ने चुनावी तैयारियों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है। मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाने की इस कवायद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच के आंकड़ों में जमीन-आसमान का अंतर देखने को मिल रहा है।

आंकड़ों का खेल: भाजपा बनाम कांग्रेस

​निर्वाचन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, मतदाता सूची से नाम हटवाने के मामले में भाजपा बेहद आक्रामक नजर आ रही है, जबकि कांग्रेस का रुख इसके उलट है:

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विवरणभारतीय जनता पार्टी (BJP)कांग्रेस (INC)
नाम हटाने के लिए आपत्तियां18,89602
नए नाम जोड़ने के आवेदन (सभी दल)478 (कुल)

भाजपा का दावा: ‘फर्जी मतदाताओं’ पर प्रहार

​भाजपा नेताओं का कहना है कि उन्होंने गहन जमीनी सर्वे के बाद ये आपत्तियां दर्ज कराई हैं। पार्टी के अनुसार, सूची में हजारों ऐसे नाम हैं जो या तो मृत हो चुके हैं, क्षेत्र से स्थानांतरित (Shifted) हैं या पूरी तरह अपात्र हैं। निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए इन ‘बोगस’ नामों का हटना अनिवार्य है।

कांग्रेस का तर्क: ‘राजनीति नहीं, पारदर्शिता’

​वहीं, महज 2 नाम हटवाने की आपत्ति पर कांग्रेस ने सफाई दी है कि उनकी पार्टी मतदाता सूची के नाम पर अनावश्यक राजनीति नहीं करना चाहती। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि उन्होंने केवल उन्हीं नामों पर आपत्ति जताई है जहां गड़बड़ी के पुख्ता प्रमाण मिले हैं।

अंतिम तिथि बढ़ी: 19 जनवरी तक का समय

​प्रशासनिक कारणों और बढ़ती आपत्तियों को देखते हुए निर्वाचन विभाग ने दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 19 जनवरी कर दिया है।

  • डिजिटल सत्यापन: इस बार चुनाव आयोग आधार लिंकिंग और डिजिटल रिकॉर्ड का उपयोग कर रहा है।
  • फील्ड वेरिफिकेशन: सभी आपत्तियों की जांच बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) द्वारा घर-घर जाकर की जाएगी।

चुनाव आयोग का रुख

​चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि हर एक आपत्ति का निष्पक्ष निस्तारण किया जाएगा। आयोग का उद्देश्य तकनीक (Digital Verification) और मैन्युअल जांच के जरिए एक ऐसी सूची तैयार करना है जिसमें फर्जीवाड़े की कोई गुंजाइश न हो। आगामी चुनावों के मद्देनजर इस प्रक्रिया को ‘निष्पक्ष चुनाव की आधारशिला’ माना जा रहा है।

संवाददाता, राजनीति डेस्क

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