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कमजोर आदिवासियों पर खर्च होंगे 24 हजार करोड़, जमशेदपुर में राष्ट्रपति का ऐलान; जानिए क्या कहा

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोमवार को जमशेदपुर में कहा कि हमारे आदिवासी समाज में कई समूह ऐसे हैं, जो स्वयं अपना विकास नहीं कर सकते। आजादी के 75 साल पूरे होने पर जब देश अमृतकाल का जश्न मना रहा है, तब मैंने सरकार से कहा कि आज भी कई आदिवासी भाई-बहन पेड़ों पर रहने को विवश हैं।

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न तो उनके तन पर कपड़े हैं न रहने को घर। हमें उनकी मदद करनी चाहिए। सरकार ने इसको संज्ञान में लिया और देश के 75 विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) के लिए मिशन मोड पर विकास की पहल शुरू की है। बिरहोर समेत 75 पीवीटीजी के विकास लिए 24 हजार करोड़ का बजटीय प्रावधान किया गया है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु जमशेदपुर के करनडीह स्थित दिशोम जाहेरथान में सोमवार को ऑल इंडिया संताली राइटर्स एसोसिएशन और दिशोम जाहेरथान कमेटी की ओर से आयोजित 22वें संताली परसी माहा व ओलचिकी शताब्दी समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रही थीं। उन्होंने संताली भाषा में भी कार्यक्रम को संबोधित किया। कार्यक्रम में राज्यपाल संतोष गंगवार तथा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी शामिल हुए।

‘हम आदिवासियों को भी सीखना होगा’

इस मौके पर राष्ट्रपति ने कहा कि आज भी हमारे आदिवासी नहीं जानते कि पीएम आवास बन रहे हैं या ऐसी कोई योजना उनके लिए लाई गई है। ये लोग यह भी नहीं जानते कि आवास बनने के लिए सीमेंट कहां से आएगा और घर कैसे बनेगा। उन्होंने कहा कि मेरे लोग (आदिवासी) आज भी पैसे का इस्तेमाल करना नहीं जानते। इसलिए सरकार उन्हें डायरेक्ट ट्रांसफर से पैसे देने की जगह इन्हें घर बनाकर दें। अब हम आदिवासियों को भी सीखना होगा। हमें खुद भी प्रयास करना होगा।

आदिवासी अफसर कम से कम दो लोगों को गोद लें

राष्ट्रपति ने कहा कि आज हमारे कुछ आदिवासी भाई-बहन पढ़-लिखकर बड़े-बड़े अफसर बन रहे हैं, लेकिन उनके घर-गांव पीछे छूट गए हैं। उनको समय निकालकर गांव-समाज के बीच जाना चाहिए और आदिवासियों को कुशल बनाने में मदद करनी चाहिए। जो आदिवासी नौकरी कर रहे हैं, उन्हें अपनी क्षमता के अनुरूप कम से कम हमें दो लोगों को विकसित करने की पहल करनी चाहिए।

राष्ट्रपति का संताली भाषा की समृद्धि में बड़ा योगदान: हेमंत

इस अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि देश के सर्वोच्च पद पर बैठीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ओलचिकी लिपि और संताली भाषा के विकास में अपना अहम योगदान दिया है। राष्ट्रपति के ही प्रयास का प्रतिफल है कि संविधान को संताली में अनुवाद करवाया गया। उन्होंने ऐसा करके महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि रघुनाथ मुर्मू ने संतालों को अपनी लिपि देकर अलग पहचान दी है। वे हमारे दिलों में हमेशा अमर रहेंगे। राज्य सरकार आदिवासियों के विकास के लिए लगातार विभिन्न योजनाओं पर काम कर रही है। उनकी आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है।

राष्ट्रपति जनजातीय उत्थान की सशक्त उदाहरण: गवर्नर

इस अवसर पर राज्यपाल संतोष गंगवार ने कहा कि यह सिर्फ एक आम उत्सव नहीं बल्कि संस्कृति के जीवंत होने का परिचायक है। राज्यपाल ने कहा कि राष्ट्रपति जनजातीय उत्थान की सशक्त उदाहरण हैं। राष्ट्रपति की जीवन यात्रा सबके लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी की नेतृत्व वाली सरकार ने वर्ष 2003 में संताली को आठवीं अनुसूची में शामिल किया था। उस समय मैं भी अटल सरकार में मंत्री था। उन्होंने रघुनाथ मुर्मू के योगदान पर चर्चा की। कहा कि ओलचिकी सिर्फ लिपि नहीं बल्कि सांस्कृतिक विरासत की पहचान है।