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एक नई सोच, एक नई धारा

झारखंड का ऐसा गांव जहां आजादी के बाद भी पक्की सड़क नहीं

जमशेदपुर/पोटका…गाँव का विकास तभी संभव होगा,जब गाँव में पक्की सड़क होंगी।…लेकिन झारखण्ड के पूर्वी सिंहभूम जिले में कुछ ऐसे भी गाँव हैं जहाँ आजादी के बाद भी अबतक पक्की सड़क नहीं बनी जिससे ग्रामीणों को होती हैं काफ़ी परेशानी।

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हम बात कर रहें पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका प्रखंड के नारदा पंचायत की जहाँ आज़ादी के 78 साल बाद भी चिरूगौड़ा से कोरोर कोचा गाँव को जोड़ने वाली मुख्य सड़क की जहाँ आज़ादी के इतने दशक बीत जाने के बाद भी यहाँ आज तक पक्की सड़क नहीं बनी है। कच्ची सड़क बारिश के दिनों में पूरी तरह दलदल बन जाती है। जिससे स्कूल जाने वाले बच्चे, बीमार लोग, गर्भवती महिलाएँ – हर किसी को इस रास्ते पर जान जोखिम में डालकर गुज़रना पड़ता है। एम्बुलेंस तक नहीं पहुँच पाती, जिससे कई बार मरीज़ों को दिक्क़त होती हैं,ग्रामीण बार-बार प्रशासन से गुहार लगा चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सवाल यही है – कब तक इन गाँव वालों को मूलभूत सुविधाओं के लिए तरसना पड़ेगा?

ग्रामीणो ने कहा बरसात में तो यहाँ चलना भी मुश्किल हो जाता हैं,बच्चे स्कूल नहीं जा पाते, दवाइयाँ-राशन लाने में दिक्कत काफ़ी होती हैं पक्की सड़क बन जाती तो काफ़ी अच्छा होता। कई गाँव के लोग आना जाना इसी रास्ते से करते हैं सबर जाती और आदिवासी समुदाय के लोग इस गाँव में रहते हैं।

सवाल प्रशासन से भी है और हम सब से भी… क्योंकि गाँव की सड़कें सिर्फ़ रास्ते नहीं, विकास की पहली सीढ़ी होती हैं। हम उम्मीद करते हैं कि संबंधित अधिकारी इस रिपोर्ट को संज्ञान में लेंगे ताकि चिरूगौड़ा-कोरोर कोचा गाँव को जल्द पक्की सड़क मिल सकें।

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