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मिडिल ईस्ट में महायुद्ध की आहट: इजराइल और अमेरिका का ईरान पर भीषण मिसाइल हमला, तेहरान में हड़कंप

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​तेहरान/तेल अवीव: मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। शनिवार तड़के संयुक्त राज्य अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान की राजधानी तेहरान समेत कई रणनीतिक ठिकानों पर भीषण मिसाइल हमला किया है। इस हमले के बाद पूरे तेहरान में जोरदार धमाकों की आवाज सुनी गई, जिससे इलाके में भारी तनाव फैल गया है।

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​राष्ट्रपति भवन के पास धमाके, सुरक्षित स्थान पर भेजे गए खामेनेई

​सूत्रों के मुताबिक, इस जवाबी कार्रवाई में ईरान के बेहद सुरक्षित माने जाने वाले ‘राष्ट्रपति भवन परिसर’ को भी निशाना बनाया गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ईरान के सर्वोच्च नेता, अयातुल्ला अली खामेनेई को आनन-फानन में किसी अज्ञात और सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट कर दिया गया है। यह हमला उस समय हुआ है जब तेहरान और वाशिंगटन के बीच पर्दे के पीछे राजनयिक बातचीत के प्रयास जारी थे।

​इजराइल के रक्षा मंत्री का बड़ा बयान: ‘प्रीएम्प्टिव स्ट्राइक’ की शुरुआत

​तनावपूर्ण स्थिति के बीच इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल कैट्ज ने आधिकारिक घोषणा करते हुए इसे एक ‘प्रीएम्प्टिव स्ट्राइक’ (निवारक हमला) करार दिया है। कैट्ज ने कहा:

​”इजराइल के खिलाफ पैदा हो रहे खतरों को जड़ से मिटाने के लिए हमने ईरान पर सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी है। हमें अंदेशा है कि इजराइल के नागरिकों पर जल्द ही मिसाइल और ड्रोन हमले हो सकते हैं, इसलिए पूरे देश में तत्काल प्रभाव से ‘स्पेशल इमरजेंसी’ लागू कर दी गई है।”

​रक्षा मंत्री ने ‘होम फ्रंट’ पर विशेष आदेशों पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसका अर्थ है कि इजराइल अब किसी भी बड़े जवाबी हमले के लिए पूरी तरह तैयार है।

​बातचीत की मेज से युद्ध के मैदान तक: क्यों बिगड़े हालात?

​हैरानी की बात यह है कि फरवरी 2026 में अमेरिका और ईरान ने अपने पुराने विवादों को सुलझाने के लिए बातचीत की पहल की थी। दोनों देश एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध से बचना चाहते थे। लेकिन इजराइल इस बातचीत से संतुष्ट नहीं था।

  • ​इजराइल की मांग: किसी भी समझौते में ईरान का न्यूक्लियर फ्यूल बनाने का प्रोसेस रुकने के साथ-साथ उसकी न्यूक्लियर फैसिलिटी पूरी तरह खत्म होनी चाहिए।
  • ​मिसाइल प्रोग्राम पर विवाद: इजराइल ने अमेरिका पर दबाव बनाया था कि समझौते में ईरान के मिसाइल प्रोग्राम पर भी पाबंदी लगाई जाए।
  • ​ईरान का रुख: ईरान आर्थिक पाबंदियां हटने की शर्त पर न्यूक्लियर लिमिट्स पर तो विचार करने को तैयार था, लेकिन उसने अपने मिसाइल प्रोग्राम को समझौते का हिस्सा बनाने से साफ इनकार कर दिया था।

​जून से ही सुलग रही थी चिंगारी

​बता दें कि जून 2026 में ही हालात तब बिगड़ने लगे थे जब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरानी न्यूक्लियर साइट्स पर बमबारी की थी। ईरान ने पहले ही चेतावनी दी थी कि यदि उसके पड़ोसी देशों में स्थित अमेरिकी बेस का इस्तेमाल उसके खिलाफ हुआ, तो वह उन देशों और अमेरिकी ठिकानों पर भीषण पलटवार करेगा।

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