तीसरी धारा न्यूज / जमशेदपुर:
जमशेदपुर के सबसे प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों में से एक बिस्टुपुर स्थित पीएम मॉल पर टाटा स्टील का 223 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बकाया मामला गहरा गया है। झारखंड उच्च न्यायालय के सख्त आदेश के बाद अब इस मामले में प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई तेज कर दी गई है। मॉल प्रबंधन द्वारा लंबे समय से जमीन का भाड़ा और सेस का भुगतान नहीं किए जाने के कारण मामला अदालत पहुंचा था, जहां न्यायालय ने टाटा स्टील के पक्ष में फैसला सुनाया है।
अदालत का 15 दिनों का अल्टीमेटम
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में पीएम मॉल प्रबंधन को 15 दिनों के भीतर 223 करोड़ रुपये की पूरी बकाया राशि जमा कराने का कड़ा निर्देश दिया है। समय सीमा तय होने के बाद टाटा स्टील और जिला प्रशासन हरकत में आ गया है। इस आदेश के बाद से ही मॉल के भविष्य को लेकर शहर के व्यापारिक गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है।
अधिकारियों ने शुरू की भूमि की मापी और क्षेत्रफल की जांच
कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में टाटा स्टील के लैंड डिपार्टमेंट के वरिष्ठ अधिकारी और सरकारी राजस्व कर्मचारी पीएम मॉल परिसर पहुंचे। टीम ने पूरे मॉल क्षेत्र की पैमाइश और मापी की कार्रवाई शुरू कर दी है। इस प्रक्रिया में मॉल की कुल लंबाई-चौड़ाई, निर्मित क्षेत्र और अवैध निर्माणों का विस्तृत आकलन किया जा रहा है, ताकि बकाया राशि का सटीक निर्धारण किया जा सके।
अवैध हिस्सों को किया गया सील, अधिकारियों ने साधी चुप्पी
जांच और मापी अभियान के दौरान नियमों के विपरीत पाए गए अवैध हिस्सों को मौके पर ही सील कर दिया गया है। हालांकि, कार्रवाई के दौरान मॉल परिसर में मौजूद अधिकारियों ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कैमरे पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। प्रशासनिक गतिविधियों में आई तेजी से साफ है कि अब बकाया वसूली को लेकर कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।
भुगतान न होने पर मॉल बंद होने का खतरा गहराया
विभागीय सूत्रों के अनुसार, यदि निर्धारित 15 दिनों की समयावधि के भीतर 223 करोड़ रुपये का भुगतान जमा नहीं कराया जाता है, तो आने वाले दिनों में प्रशासन पीएम मॉल को पूरी तरह से सील कर बंद कर सकता है। अगर मॉल बंद होता है, तो वहां संचालित दर्जनों राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स के शो-रूम और स्थानीय व्यापारियों के साथ-साथ सैकड़ों कर्मचारियों के रोजगार पर सीधा असर पड़ेगा।
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