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हिस्ट्रीशीटर विक्रम शर्मा हत्याकांड—सिस्टम पर सवाल! 30 मर्डर के आरोपी को कैसे मिल गया रिवॉल्वर का लाइसेंस?

​जमशेदपुर/देहरादून:

जमशेदपुर का खूंखार हिस्ट्रीशीटर विक्रम शर्मा भले ही अब इस दुनिया में नहीं रहा, लेकिन उसकी हत्या ने उत्तराखंड से लेकर झारखंड तक के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। टीएनपी डेस्क को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक, पुलिस फिलहाल विक्रम के छोटे भाई अरविंद शर्मा और दो शूटरों से कड़ाई से पूछताछ कर रही है। लेकिन इस हत्याकांड की परतों के पीछे एक ऐसा सच छिपा है जो उत्तराखंड प्रशासन और पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।

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​अपराध की दुनिया से ‘समाजसेवी’ तक का सफर

​विक्रम शर्मा कोई साधारण नाम नहीं था। जमशेदपुर में दशकों तक उसका खौफ रहा। रंगदारी, लेवी वसूली और हत्या जैसे 50 से अधिक आपराधिक मामले (जिसमें 30 हत्याकांड शामिल हैं) उसके नाम दर्ज थे। जेल की सजा काटने के बाद उसने अपनी पहचान बदली और उत्तराखंड के देहरादून में शरण ली। वहां वह एक ‘आम आदमी’ और ‘समाजसेवी’ का चोला ओढ़कर स्टोन क्रशर का कारोबार करने लगा। हैरानी की बात यह है कि उसके पड़ोसियों को भनक तक नहीं थी कि उनके बगल में झारखंड का एक बड़ा अपराधी रह रहा है।

​प्रशासनिक मेहरबानी या बड़ी लापरवाही?

​विक्रम शर्मा देहरादून में आलीशान जिंदगी जी रहा था—महंगी घड़ियां, सोने की चेन और लग्जरी गाड़ियां। लेकिन सबसे बड़ा पेच उसके लाइसेंसी रिवॉल्वर और बिजनेस परमिट को लेकर फंस रहा है:

  1. ​कैसे मिला आर्म्स लाइसेंस?: जिस अपराधी पर 30 मर्डर केस हों, उसे ऊधम सिंह नगर जिला प्रशासन ने ‘साफ चरित्र’ का प्रमाण पत्र कैसे दे दिया? एक आम आदमी को लाइसेंस के लिए सालों चक्कर काटने पड़ते हैं, तो एक हिस्ट्रीशीटर को रिवॉल्वर थमाने में इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई गई?
  2. ​स्टोन क्रशर का लाइसेंस: उत्तराखंड में छुपकर रह रहे अपराधी को स्टोन क्रशर जैसा बड़ा बिजनेस शुरू करने का लाइसेंस कैसे मिल गया? क्या प्रशासन ने उसके बैकग्राउंड की जांच (Verification) करना जरूरी नहीं समझा?

​झारखंड पुलिस की गिरफ्तारी और फिर वापसी

​बता दें कि 2014 से 2017 के बीच जब वह देहरादून में था, तब झारखंड पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था। यानी पुलिस रिकॉर्ड में यह स्पष्ट था कि वह एक अपराधी है। बावजूद इसके, 2021 में जेल से छूटने के बाद वह फिर उत्तराखंड पहुंचा और न सिर्फ बिजनेस शुरू किया बल्कि प्रशासन की नाक के नीचे लाइसेंसी हथियार लेकर घूमने लगा।

​सवालों के घेरे में ऊधम सिंह नगर पुलिस

​विक्रम शर्मा हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने में जुटी पुलिस के सामने अब असली चुनौती यह है कि वे उन कड़ियों को जोड़ें जिन्होंने एक अपराधी को ‘सिस्टम का संरक्षण’ दिलाया।

  • ​क्या यह जिला प्रशासन की महज एक लापरवाही थी?
  • ​या फिर विक्रम शर्मा को सिस्टम के भीतर से किसी बड़े रसूखदार का समर्थन प्राप्त था?
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