एक नई सोच, एक नई धारा

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ईरान-इजरायल संघर्ष का भारत पर ‘ब्लैक वेडनेसडे’: निवेशकों के 9.7 लाख करोड़ स्वाहा, रुपया ₹92 के पार

मुंबई/नई दिल्ली: मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में गहराते युद्ध के बादलों ने भारतीय शेयर बाजार और अर्थव्यवस्था की नींव हिला दी है। ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई के बाद वैश्विक बाजारों में मचे हड़कंप का सीधा असर दलाल स्ट्रीट पर देखने को मिला। मात्र दो कारोबारी सत्रों में भारतीय निवेशकों की करीब 9.7 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति खाक हो गई है।

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शेयर बाजार में हाहाकार: सेंसेक्स 1,710 अंक टूटा

​बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में ‘रक्तपात’ जैसी स्थिति रही। चौतरफा बिकवाली के कारण प्रमुख सूचकांक धराशायी हो गए:

  • सेंसेक्स: 1,710 अंकों की भारी गिरावट के साथ 78,529 पर बंद हुआ। यह पिछले साल अप्रैल के बाद का सबसे निचला स्तर है।
  • निफ्टी 50: 477 अंक लुढ़ककर 24,389 के स्तर पर आ गया। सात महीनों में पहली बार निफ्टी 24,400 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसला है।
  • मार्केट कैप: BSE का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन सोमवार के 456.17 लाख करोड़ रुपये से गिरकर 446.47 लाख करोड़ रुपये पर आ गया।

ऐतिहासिक गिरावट: पहली बार डॉलर के मुकाबले रुपया 92 के पार

​युद्ध के डर से विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से पैसे निकालकर सुरक्षित निवेश (जैसे सोना और डॉलर) की ओर रुख किया है। इसका परिणाम यह हुआ कि भारतीय रुपया इतिहास के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। रुपया 55 पैसे गिरकर 92.03 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। यह पहली बार है जब भारतीय मुद्रा ने 92 का स्तर पार किया है।

क्यों डरा हुआ है बाजार?

​बाजार में इस गिरावट के पीछे तीन मुख्य कारण हैं:

  1. कच्चे तेल में उबाल: होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड $82.53 प्रति बैरल पर पहुंच गया है। भारत अपनी जरूरत का 85% तेल आयात करता है, जिससे देश में महंगाई बढ़ने का सीधा खतरा है।
  2. लंबा खिंच सकता है युद्ध: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी कि यह संघर्ष “4 से 5 सप्ताह” तक चल सकता है, ने अनिश्चितता बढ़ा दी है।
  3. विदेशी निवेशकों की निकासी: अकेले पिछले सत्र में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने 3,295.64 करोड़ रुपये के शेयर बेचकर बाजार से हाथ खींच लिए।

इन शेयरों पर गिरी गाज

​बिकवाली के इस दौर में सबसे ज्यादा मार दिग्गज कंपनियों पर पड़ी। L&T, इंडिगो, अडानी पोर्ट्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा और बजाज फाइनेंस के शेयरों में 3% से 6% तक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई।

विशेषज्ञों की सलाह: घबराएं नहीं, धीरे-धीरे करें निवेश

​जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार के अनुसार, असली चिंता महंगाई और विकास दर को लेकर है। हालांकि, उन्होंने निवेशकों को पैनिक (घबराहट) में आकर बिकवाली न करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि लंबी अवधि के निवेशक इस गिरावट का फायदा उठाकर अच्छी गुणवत्ता वाले शेयरों को अपने पोर्टफोलियो में शामिल कर सकते हैं।

रिपोर्ट: तीसरी धारा न्यूज डेस्क

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झारखंड में टाटा समूह का महा-निवेश: ₹11,000 करोड़ के प्रोजेक्ट्स और हाइड्रोजन ट्रकों से बदलेगी राज्य की सूरत

रांची: झारखंड के औद्योगिक परिदृश्य के लिए सोमवार का दिन ऐतिहासिक रहा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और टाटा समूह के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक में राज्य के विकास को नई ऊंचाई देने पर सहमति बनी है। टाटा समूह ने झारखंड में पारंपरिक स्टील उद्योग से लेकर भविष्य की तकनीक ‘ग्रीन एनर्जी’ तक में भारी निवेश का रोडमैप तैयार किया है।

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स्टील सेक्टर में ₹11,000 करोड़ का बड़ा निवेश

​बैठक का सबसे मुख्य आकर्षण टाटा स्टील द्वारा घोषित 11,000 करोड़ रुपये का निवेश रहा। इस राशि का उपयोग स्टील निर्माण में आधुनिक तकनीक, अनुसंधान और उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए किया जाएगा। खास बात यह है कि यह विस्तार पूरी तरह से पर्यावरण अनुकूल (Eco-friendly) होगा, जो झारखंड को औद्योगिक प्रदूषण कम करने में मदद करेगा।

जमशेदपुर बनेगा ‘हाइड्रोजन हब’

​एन. चंद्रशेखरन ने जानकारी दी कि टाटा समूह जमशेदपुर में हाइड्रोजन आधारित ट्रकों के निर्माण पर तेजी से काम कर रहा है। भविष्य की जरूरतों को देखते हुए यह प्रोजेक्ट न केवल परिवहन क्षेत्र में क्रांति लाएगा, बल्कि झारखंड को ‘ग्रीन एनर्जी’ सेक्टर में देश का अग्रणी राज्य बना देगा।

आईटी और स्किल डेवलपमेंट पर जोर

​मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने टाटा समूह से आग्रह किया कि वे केवल भारी उद्योगों तक सीमित न रहकर ज्ञान आधारित उद्योगों (Knowledge-based industries) जैसे:

  • IT और रिसर्च
  • नवाचार (Innovation)
  • स्किल डेवलपमेंट में भी निवेश करें। टाटा समूह ने इस दिशा में सकारात्मक रुख अपनाते हुए भविष्य में बड़े कदम उठाने के संकेत दिए हैं।

रांची में खुलेगा टाटा का आलीशान होटल!

​औद्योगिक निवेश के साथ-साथ टाटा समूह अब झारखंड के पर्यटन और आतिथ्य (Hospitality) क्षेत्र में भी हाथ आजमाने जा रहा है। समूह रांची में एक बड़े होटल प्रोजेक्ट की संभावनाओं को तलाश रहा है। यदि यह योजना सफल रहती है, तो आने वाले समय में राज्य के अन्य जिलों में भी टाटा के होटल्स देखने को मिल सकते हैं, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खुलेंगे।

बैठक में मौजूद प्रमुख चेहरे:

इस महत्वपूर्ण चर्चा के दौरान मुख्य सचिव अविनाश कुमार, टाटा स्टील के एमडी टी.वी. नरेंद्रन, उपाध्यक्ष डी.बी. सुंदररामन और चीफ रेजिडेंट एग्जीक्यूटिव संजय मोहन श्रीवास्तव भी उपस्थित रहे।

रिपोर्ट: तीसरी धारा न्यूज डेस्क

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जमशेदपुर पुलिस को बड़ी कामयाबी: कुख्यात अपराधी मनीष सिंह गोल्डन लीफ रिसॉर्ट से गिरफ्तार

जमशेदपुर: शहर के व्यापारियों के लिए लंबे समय से खौफ का पर्याय बना कुख्यात अपराधी मनीष सिंह आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गया है। पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर मानगो थाना क्षेत्र के गोल्डन लीफ रिसॉर्ट में घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार किया।

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रंगदारी और धमकियों से दहशत में थे व्यापारी

​हाल ही में जेल से छूटने के बाद मनीष सिंह ने शहर के कई बड़े कारोबारियों से रंगदारी मांगनी शुरू कर दी थी। लगातार मिल रही धमकियों के कारण व्यापार जगत में भारी दहशत का माहौल था। बता दें कि मनीष पर रंगदारी, आर्म्स एक्ट और गोलीबारी समेत कई संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं।

नए थाना प्रभारी की त्वरित कार्रवाई

​मनीष सिंह की गिरफ्तारी में देरी को लेकर पुलिस प्रशासन पर लगातार सवाल उठ रहे थे। इसी लापरवाही के चलते हाल ही में जुगसलाई थाना प्रभारी बैजनाथ कुमार को निलंबित कर दिया गया था। उनकी जगह दो दिन पूर्व ही कमान संभालने वाले नए थाना प्रभारी गुलाम रब्बानी ने पदभार संभालते ही सक्रियता दिखाई। उन्होंने टीम के साथ रिसॉर्ट में छापेमारी कर इस बड़ी सफलता को अंजाम दिया।

गिरफ्तारी या ‘सरेंडर’? उठ रहे हैं सवाल

​हालांकि पुलिस इसे एक बड़ी कामयाबी मान रही है, लेकिन शहर में इस गिरफ्तारी को लेकर चर्चाएं भी तेज हैं। कुछ लोगों का मानना है कि यह पुलिसिया दबाव के कारण किया गया एक तरह का ‘सरेंडर’ है। सवाल उठाए जा रहे हैं कि अगर अपराधी को सरेंडर ही करना था तो वह सीधे थाने क्यों नहीं गया? रिसॉर्ट में कमरा लेकर ठहरने और फिर वहां से गिरफ्तारी की कहानी पर फिलहाल सस्पेंस बना हुआ है।

व्यापारियों ने ली राहत की सांस

​इस गिरफ्तारी के बाद शहर के व्यापारियों ने राहत की सांस ली है। पुलिस अब मनीष सिंह से पूछताछ कर रही है ताकि उसके पूरे आपराधिक नेटवर्क और मददगारों का खुलासा किया जा सके।

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BREAKING: जमशेदपुर में आतंकी हमले का ‘इंटरपोल’ अलर्ट; एक दर्जन से ज्यादा स्लीपर सेल सक्रिय, निशाने पर टाटा स्टील और टाटा मोटर्स

जमशेदपुर: झारखंड की औद्योगिक राजधानी जमशेदपुर को लेकर एक बेहद सनसनीखेज और चिंताजनक खुफिया रिपोर्ट सामने आई है। इंटरपोल (Interpol) ने झारखंड सरकार को आगाह किया है कि जमशेदपुर में आतंकी हमले की बड़ी साजिश रची जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, शहर में एक दर्जन से अधिक ‘स्लीपर सेल’ मौजूद हैं, जिनके तार सीधे पाकिस्तान से जुड़े होने की आशंका है।

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पाकिस्तान से मिल रहा प्रशिक्षण और निर्देश

​सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, जमशेदपुर में सक्रिय स्लीपर सेल के सदस्य सीमा पार (पाकिस्तान) के संपर्क में हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से कई संदिग्धों ने पाकिस्तान जाकर हथियारों का प्रशिक्षण भी लिया है। इस इनपुट के बाद राज्य सरकार हाई-लेवल मीटिंग बुलाने की तैयारी कर रही है और IB (इंटेलिजेंस ब्यूरो) व झारखंड इंटेलिजेंस को चौबीसों घंटे निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।

सैयद मोहम्मद अर्शियान: नेटवर्क का मास्टरमाइंड!

​रिपोर्ट में इस नेटवर्क को लीड करने वाले मुख्य संदिग्ध का नाम भी सामने आया है। आजाद नगर के जाकिरनगर (रोड नंबर-14) निवासी सैयद मोहम्मद अर्शियान इस पूरे सिंडिकेट का नेतृत्व कर रहा है। अर्शियान पिछले 7-8 वर्षों से फरार है और NIAATS की टीमें उसकी तलाश में कई बार जमशेदपुर में छापेमारी कर चुकी हैं।

अलकायदा कनेक्शन और पुरानी कड़ियां

​जमशेदपुर में आतंकी गतिविधियों का इतिहास पुराना रहा है:

  • अब्दुल शमी: 2016 में दिल्ली पुलिस ने अलकायदा से जुड़े आतंकी अब्दुल शमी को गिरफ्तार किया था, जो पाकिस्तान में ट्रेनिंग ले चुका था।
  • अब्दुल रहमान उर्फ कटकी: ओडिशा के कटक से पकड़े गए कटकी को झारखंड और ओडिशा में अलकायदा का नेटवर्क तैयार करने की जिम्मेदारी मिली थी। शमी इसी कटकी का करीबी था।

आतंकियों के निशाने पर क्यों है जमशेदपुर?

​सुरक्षा एजेंसियों ने शहर की संवेदनशीलता के चार मुख्य कारण बताए हैं:

  1. औद्योगिक केंद्र: टाटा स्टील और टाटा मोटर्स जैसी राष्ट्रीय महत्व की इकाइयां ‘हाई इम्पैक्ट टारगेट’ हैं।
  2. कनेक्टिविटी: ओडिशा, पश्चिम बंगाल और बिहार से सीधी सीमाएं संदिग्धों की आवाजाही को आसान बनाती हैं।
  3. लॉजिस्टिक हब: टाटानगर रेलवे स्टेशन और नेशनल हाईवे का मजबूत नेटवर्क।
  4. इतिहास: पूर्व में सिमी (SIMI) और अलकायदा के संदिग्धों की यहाँ से गिरफ्तारी हो चुकी है।

सियासी और कानूनी हलकों में चिंता

​जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने इस रिपोर्ट पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जमशेदपुर में अंतर्राष्ट्रीय अपराधियों की मौजूदगी पहले भी देखी गई है। प्रशासन को अपनी खुफिया टीम (Local Intelligence) को सक्रिय कर जल्द से जल्द संदिग्धों को गिरफ्तार करना चाहिए।

​वहीं, जमशेदपुर कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू ने कहा कि बड़े उद्योग घरानों और संवेदनशील रेलवे स्टेशन की सुरक्षा के लिए पुलिस को अपना सूचना तंत्र मजबूत करना होगा ताकि किसी भी अप्रिय घटना को टाला जा सके।

तीसरी धारा न्यूज की अपील: शहरवासी सतर्क रहें। अपने आसपास किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि की सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस को दें।

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शेयर बाजार में ‘ब्लैक वेडनेसडे’: सेंसेक्स 1500 अंक टूटा, निफ्टी 24,400 के नीचे; मिडिल ईस्ट वार ने निवेशकों के डुबोए करोड़ों

मुंबई/दलाल स्ट्रीट: पश्चिम एशिया (इजरायल-ईरान) में बढ़ते युद्ध के तनाव का सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर दिख रहा है। बुधवार, 4 मार्च को बाजार खुलते ही कोहराम मच गया। भारी बिकवाली के कारण सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही प्रमुख सूचकांकों ने गोता लगा दिया है।

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बाजार का हाल: लाल निशान में डूबा दलाल स्ट्रीट

​आज सुबह बाजार की शुरुआत बेहद कमजोर रही। निवेशकों में युद्ध के कारण वैश्विक मंदी और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का डर साफ देखा गया:

  • BSE Sensex: सेंसेक्स में 1,500 अंकों की भारी गिरावट दर्ज की गई।
  • NSE Nifty: निफ्टी ने 24,400 का महत्वपूर्ण स्तर तोड़ दिया है और इसके नीचे कारोबार कर रहा है।
  • प्रभाव: केवल लार्ज कैप ही नहीं, बल्कि स्मॉल कैप और मिड कैप शेयरों में भी बिकवाली का भारी दबाव देखा जा रहा है।

FII और DII के आंकड़ों का गणित

​बाजार में अस्थिरता के बीच विदेशी और घरेलू निवेशकों के रुख में बड़ा अंतर देखा गया है:

  • FII (विदेशी निवेशक): इन्होंने 2 मार्च के आंकड़ों के अनुसार 3,295.64 करोड़ रुपये के शेयर बेचकर बाजार से पैसा निकाला है।
  • DII (घरेलू निवेशक): घरेलू संस्थानों ने मोर्चा संभालते हुए 8,593.87 करोड़ रुपये की खरीदारी की है, लेकिन युद्ध की खबरों के आगे यह खरीदारी बाजार को संभालने में नाकाम रही।

मिडिल ईस्ट संकट का साया

​बता दें कि सोमवार, 2 मार्च को भी बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई थी। इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक सप्लाई चेन और तेल बाजार को अनिश्चित कर दिया है। सोमवार को सेंसेक्स जहाँ 1048 अंक टूटकर 80,238 पर बंद हुआ था, वहीं आज की गिरावट ने बाजार को 79,000 के स्तर की ओर धकेल दिया है।

विशेषज्ञों की राय

​बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता, बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी। निवेशकों को फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ (इंतजार करो और देखो) की नीति अपनानी चाहिए और जल्दबाजी में खरीदारी से बचना चाहिए।

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ईरान में खामेनेई युग का अंत: बेटे मोजतबा खामेनेई होंगे नए ‘सुप्रीम लीडर’, IRGC के भारी दबाव में असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स का फैसला

तेहरान: पश्चिम एशिया में जारी भीषण युद्ध और इजरायली हमलों के बीच ईरान में सत्ता के सबसे ऊंचे शिखर पर बड़ा बदलाव हुआ है। सूत्रों के अनुसार, मारे गए अयातुल्ला अली खामेनेई के दूसरे बेटे मोजतबा खामेनेई को ईरान का अगला ‘सुप्रीम लीडर’ (सर्वोच्च नेता) चुन लिया गया है। ईरान की शक्तिशाली ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ ने मंगलवार को हुई आपातकालीन वर्चुअल मीटिंग में उनके नाम पर मुहर लगा दी।

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IRGC का बढ़ा कद: 47 साल बाद नया उत्तराधिकारी

​ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक, मोजतबा का चयन ईरान की सबसे ताकतवर सैन्य इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के भारी दबाव में किया गया है।

  • इतिहास: 1989 में अली खामेनेई के चयन के बाद, यानी 47 वर्षों में यह पहली बार है जब ईरान ने अपना नया सर्वोच्च नेता चुना है।
  • सत्ता का ढांचा: मोजतबा का चयन यह स्पष्ट करता है कि ईरान के आंतरिक शासन और फैसले लेने की प्रक्रिया में IRGC का प्रभाव अब पहले से कहीं अधिक गहरा हो गया है।

कौन हैं मोजतबा खामेनेई?

​56 वर्षीय मोजतबा खामेनेई अपने पिता के ‘इनर सर्कल’ के सबसे प्रभावशाली सदस्य माने जाते रहे हैं।

  • धार्मिक पृष्ठभूमि: वे एक मध्यम स्तर के शिया धर्मगुरु हैं।
  • सैन्य संबंध: IRGC के साथ उनके संबंध बेहद मजबूत हैं, जो उन्हें युद्ध की इस घड़ी में सेना का समर्थन दिलाने में मदद करेंगे।
  • विवाद: मोजतबा का चयन इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि ईरान का इस्लामिक गणतंत्र लंबे समय से राजशाही या खानदानी उत्तराधिकार (Dynastic Succession) का विरोध करता रहा है।

कैसे हुआ चयन? (असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स की भूमिका)

​ईरान के संविधान के अनुसार, 88 सदस्यों वाली मौलवियों की संस्था ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ ही सर्वोच्च नेता की नियुक्ति या उसे हटाने का अधिकार रखती है।

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को दो गोपनीय वर्चुअल मीटिंग्स बुलाई गईं, जिसमें देश की सुरक्षा और स्थिरता को देखते हुए मोजतबा के नाम पर सहमति बनी।

ईरान के लिए क्या बदल जाएगा?

​मोजतबा खामेनेई के सामने चुनौतियां पहाड़ जैसी हैं। एक तरफ उनके पिता और पूरी टॉप मिलिट्री लीडरशिप का खात्मा हो चुका है, तो दूसरी तरफ इजरायल और अमेरिका के हमले जारी हैं। उनके नेतृत्व में ईरान की विदेश नीति और परमाणु कार्यक्रम किस दिशा में जाएगा, इस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं।

तीसरी धारा न्यूज का विश्लेषण: हालांकि सरकारी मीडिया ने अभी इसकी औपचारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन सूत्रों का दावा है कि घोषणा केवल सुरक्षा कारणों से रोकी गई है। मोजतबा का आना ईरान में ‘हार्डलाइनर्स’ (कट्टरपंथियों) की पकड़ और मजबूत होने का संकेत है।

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ग्लोबल स्टार शाहरुख खान पर छिड़ी इंटरनेट जंग: ऑस्ट्रेलियन शो में कंटेस्टेंट ने बताया ‘सॉफ्टवेयर डेवलपर’, फैंस और ट्रोलर्स आमने-सामने

मनोरंजन डेस्क: बॉलीवुड के ‘बादशाह’ और दुनिया के सबसे मशहूर अभिनेताओं में शुमार शाहरुख खान इन दिनों एक अजीबोगरीब वजह से अंतरराष्ट्रीय चर्चा में हैं। ऑस्ट्रेलिया के मशहूर क्विज़ शो ‘मिलियनेयर हॉट सीट’ (Millionaire Hot Seat) का एक वीडियो और स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल रहा है, जिसने ‘ग्लोबल आइकन’ की बहस को फिर से जिंदा कर दिया है।

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50 हजार डॉलर का सवाल और गलत जवाब

​’मिलियनेयर हॉट सीट’ (जो भारत के केबीसी जैसा ही शो है) में एक कंटेस्टेंट से 50,000 ऑस्ट्रेलियन डॉलर के लिए सवाल पूछा गया: “शाहरुख खान मुख्य रूप से किस क्षेत्र में अपने काम के लिए जाने जाते हैं?”

​सवाल के चार विकल्प थे:

  1. ​सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट
  2. ​फिल्म एक्टिंग
  3. ​मोटर रेसिंग
  4. ​प्रोफेशनल पोकर

​हैरानी की बात यह रही कि कंटेस्टेंट को शाहरुख के बारे में कोई जानकारी नहीं थी और उसने ‘सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट’ विकल्प चुन लिया।

सोशल मीडिया पर छिड़ी ‘नाम और पहचान’ की जंग

​कंटेस्टेंट के इस गलत जवाब ने इंटरनेट पर दो फाड़ कर दिए हैं। जहां शाहरुख के आलोचक उन्हें ट्रोल कर रहे हैं, वहीं फैंस उनके बचाव में उतर आए हैं।

  • ट्रोलर्स का वार: एक यूजर ने तंज कसते हुए लिखा, “और कुछ लोग कहते हैं कि शाहरुख ग्लोबल आइकॉन हैं।” वहीं एक ऑस्ट्रेलियन यूजर ने कमेंट किया, “सच कहूं तो मैंने कभी उनका नाम तक नहीं सुना। अगर तुक्का मारना होता, तो मैं मोटर रेसिंग चुनता।”
  • फैंस का पलटवार: शाहरुख के प्रशंसकों का कहना है कि एक व्यक्ति की अज्ञानता से किसी का कद छोटा नहीं होता। एक यूजर ने लिखा, “शाहरुख का नाम दुनिया भर के टीवी शो और खबरों में आना आम बात है। किसी एक रैंडम व्यक्ति को उनके पेशे के बारे में नहीं पता, तो लोग ऐसे जश्न मना रहे हैं जैसे कोई सीक्रेट एक्सपोज कर दिया हो।”

ग्लोबल आइकन बनाम स्थानीय पहचान

​यह बहस इस बात पर टिक गई है कि क्या वाकई कोई कलाकार पूरी दुनिया में एक जैसा मशहूर हो सकता है? शाहरुख खान को लॉस एंजिल्स से लेकर लंदन और दुबई तक करोड़ों लोग जानते हैं, लेकिन इस घटना ने दिखाया कि दुनिया के कुछ हिस्सों में अब भी लोग उनके नाम से अनजान हैं।

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ईरान की टॉप लीडरशिप तबाह: 48 घंटे के भीतर दूसरे रक्षा मंत्री की भी मौत; इजरायली हमले में सैयद माजिद अब अल-रेज़ा ढेर

तेहरान/तेल अवीव: पश्चिम एशिया में जारी भीषण युद्ध के बीच ईरान को एक और बड़ा झटका लगा है। इजरायली मीडिया के दावों के अनुसार, ईरान के नव-नियुक्त कार्यवाहक रक्षा मंत्री सैयद माजिद अब अल-रेज़ा (Sayyed Majid Ebn Al-Reza) एक हवाई हमले में मारे गए हैं। यह घटना तब सामने आई है जब ईरान अपने सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई और पूरी सैन्य कमान के खात्मे के बाद अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है।

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48 घंटे भी नहीं टिक सके नए रक्षा मंत्री

​गौरतलब है कि 28 फरवरी को शुरू हुए अमेरिका और इजरायल के साझा हमले (ऑपरेशन रोरिंग लायन) में ईरान के पूर्व रक्षा मंत्री जनरल अजीज नासिरजादेह और सेना प्रमुख अब्दुल रहीम मौसवी मारे गए थे। नासिरजादेह की मौत के बाद राष्ट्रपति मसूद पेजेशक्यान ने तत्काल प्रभाव से ब्रिगेडियर जनरल सैयद माजिद अब अल-रेज़ा को रक्षा मंत्रालय की कमान सौंपी थी। लेकिन कार्यभार संभालने के महज 48 घंटों के भीतर ही वे भी हमले का शिकार हो गए।

कौन थे सैयद माजिद अब अल-रेज़ा?

​सैयद माजिद ईरान के बेहद प्रभावशाली सैन्य अधिकारियों में गिने जाते थे:

  • सैन्य विशेषज्ञ: उन्हें सैन्य प्रशासन और रसद (Logistics) का विशेषज्ञ माना जाता था।
  • SATA के अध्यक्ष: वे सशस्त्र बल सामाजिक सुरक्षा संगठन (SATA) के प्रमुख रह चुके थे, जो सेना के आर्थिक और पारिवारिक हितों की देखरेख करता है।
  • भरोसेमंद रणनीतिकार: खामेनेई की मौत के बाद उपजी अस्थिरता में उन्हें इसलिए चुना गया था क्योंकि उनकी सेना के भीतर गहरी पैठ थी और वे अधिकारियों की वफादारी सुनिश्चित करने में माहिर थे।

नेतन्याहू और ट्रंप का रुख: ‘खत्म हो रहा है शासन’

​इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे “अस्तित्व के खतरों को खत्म करने का अभियान” बताया है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे ईरान में शासन परिवर्तन (Regime Change) का एक बड़ा अवसर करार दिया है।

युद्ध का चौथा दिन: हाहाकार और तबाही

​मंगलवार (3 मार्च) को युद्ध के चौथे दिन भी तेहरान और आसपास के इलाकों में बमबारी जारी है। ईरानी रेड क्रेसेंट के मुताबिक, अब तक 787 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई में खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागी हैं, जिससे पूरा विश्व एक बड़े आर्थिक और ऊर्जा संकट की कगार पर खड़ा है।

तीसरी धारा न्यूज की विशेष रिपोर्ट।

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पलामू: होली की खुशियां मातम में बदलीं; सड़क हादसे में सेना के पूर्व जवान और वर्तमान SAP जवान मनोज पांडेय का निधन

मेदिनीनगर (पलामू): रंगों के त्योहार होली से ठीक पहले झारखंड पुलिस महकमे और पलामू जिले के बड़कागांव में शोक की लहर दौड़ गई है। झारखंड विधानसभा में सैप (SAP) जवान के रूप में तैनात मनोज कुमार पांडेय की एक सड़क दुर्घटना में दर्दनाक मौत हो गई। सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद वे देश और राज्य की सेवा में समर्पित थे।

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कीर्तन कार्यक्रम से लौटते समय हुआ हादसा

​मिली जानकारी के अनुसार, मनोज कुमार पांडेय अपने पैतृक गांव बड़कागांव में आयोजित होली मिलन सह अखंड कीर्तन कार्यक्रम में शामिल होने गए थे। सोमवार देर रात कार्यक्रम संपन्न कर जब वे अपनी बुलेट मोटरसाइकिल से डाल्टनगंज लौट रहे थे, तभी पांकी-मेदिनीनगर मार्ग पर पोखराहा मेडिकल चौक के समीप यह हादसा हो गया।

नए ब्रेकर ने बिगाड़ा संतुलन!

​स्थानीय लोगों और पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार, सड़क पर हाल ही में बने एक स्पीड ब्रेकर के कारण उनकी तेज रफ्तार बुलेट का संतुलन बिगड़ गया। संतुलन खोने के बाद वे सड़क पर जा गिरे, जिससे उनके सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आईं। मंगलवार सुबह जब मॉर्निंग वॉक पर निकले ग्रामीणों ने उन्हें सड़क किनारे बेसुध देखा, तब मामले की जानकारी पुलिस को दी गई।

अस्पताल में चिकित्सकों ने मृत घोषित किया

​सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुँची और उन्हें तत्काल मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल ले जाया गया। हालांकि, तब तक काफी देर हो चुकी थी और डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। फिलहाल पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की छानबीन जारी है।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

​मनोज कुमार पांडेय अपने पीछे भरा-पूरा परिवार (दो बेटे और दो बेटियां) छोड़ गए हैं। परिजनों ने बताया कि पिछले साल ही उन्होंने अपनी बड़ी बेटी का विवाह धूमधाम से संपन्न किया था। होली के त्यौहार पर घर लौटने की खुशियां अब आंसुओं में बदल गई हैं। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है।

साथी जवानों ने दी श्रद्धांजलि

​अस्पताल परिसर में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी और स्थानीय लोग एकत्रित हुए। उनके साथी जवानों ने मनोज जी को एक अत्यंत कर्तव्यनिष्ठ और मिलनसार व्यक्ति बताया। पुलिस प्रशासन ने पीड़ित परिवार को इस दुख की घड़ी में हर संभव सहायता और सहयोग देने का भरोसा दिलाया है।

तीसरी धारा न्यूज की अपील: सड़क पर बने नए ब्रेकरों और मोड़ों पर सावधानी बरतें। हेलमेट का अनिवार्य रूप से प्रयोग करें, ताकि आपके घर की खुशियां सुरक्षित रहें।

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दुबई जा रही फ्लाइट ने हवा में लिया ‘डबल रिवर्स’, यात्रियों की अटकी सांसें; मिसाइल अलर्ट से दहला मिडिल ईस्ट

दुबई/मुंबई: पश्चिम एशिया (Middle East) में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी भीषण युद्ध ने अब हवाई यात्राओं को भी असुरक्षित बना दिया है। मंगलवार (3 मार्च) को मुंबई से दुबई जा रही एमिरेट्स (Emirates) की फ्लाइट EK501 ने आसमान में कुछ ऐसा किया, जिसे विमानन विशेषज्ञ ‘रेयर’ (दुर्लभ) और बेहद खतरनाक मान रहे हैं।

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मिसाइल अलर्ट और आसमान में ‘डबल यू-टर्न’

​Flightradar24 के लाइव डेटा के अनुसार, जब यह फ्लाइट मुंबई से उड़ान भरकर दुबई के करीब पहुँचने वाली थी, तभी अचानक मिसाइल हमले का अलर्ट जारी हुआ।

  • ​खतरे को देखते हुए पायलट ने विमान को हवा में ही डबल रिवर्स (दो बार मोड़ा) किया।
  • ​एक समय ऐसा लगा कि फ्लाइट वापस मुंबई लौट रही है, लेकिन फिर रूट बदलकर इसे सुरक्षित तरीके से दुबई की ओर बढ़ाया गया। विमान का यह ‘जिग-जैग’ मूवमेंट रडार पर साफ देखा गया, जो युद्ध क्षेत्र में मिसाइलों से बचने की एक आपातकालीन कोशिश थी।

नेतन्याहू का दावा: ‘यह कभी न खत्म होने वाला युद्ध नहीं’

​इस बीच, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने उन दावों को खारिज कर दिया कि यह युद्ध कभी खत्म नहीं होगा। नेतन्याहू ने कहा:

​”यह कभी न खत्म होने वाला युद्ध नहीं है। इसके अंत के बाद शांति के एक ऐसे दौर की शुरुआत होगी, जिसके बारे में हमने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा।”

दहशत में खाड़ी देश: कुवैत और दुबई में धमाके

​ईरान ने सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत का बदला लेने के लिए हमले तेज कर दिए हैं।

  • धमाकों से दहले शहर: दुबई, अबू धाबी और दोहा जैसे व्यापारिक केंद्रों में मिसाइलें गिरने और धमाकों की आवाजें सुनी गई हैं।
  • US एम्बेसी की चेतावनी: कुवैत स्थित अमेरिकी दूतावास ने नागरिकों को घर के भीतर, खिड़कियों से दूर और सबसे नीचे की मंजिल पर रहने का आदेश दिया है।

उड़ानें निलंबित: भारत पर भी असर

​हवाई क्षेत्र में बढ़ते खतरे को देखते हुए अकासा एयर (Akasa Air) ने 3 मार्च को अबू धाबी, दोहा, जेद्दा, कुवैत और रियाद जाने वाली अपनी सभी उड़ानें रद्द कर दी हैं। इंडिगो और एयर इंडिया भी स्थिति पर करीब से नजर रख रही हैं।

तीसरी धारा न्यूज का विशेष विश्लेषण: ईरान द्वारा अमेरिका से बातचीत के इनकार और मिसाइल हमलों के दौर ने खाड़ी देशों में फंसे लाखों प्रवासियों, विशेषकर भारतीयों की चिंता बढ़ा दी है। विमानों का इस तरह रास्ता बदलना खतरे की गंभीरता को दर्शाता है।

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