एक नई सोच, एक नई धारा

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लोको पायलट हत्याकांड: मुख्य आरोपी राजकिशोर और बेटे ने कोर्ट में किया सरेंडर, पुलिस को 4 दिनों की रिमांड मिली

जमशेदपुर: शहर के बहुचर्चित लोको पायलट जीके गौतम (ज्ञानेंद्र कुमार गौतम) हत्याकांड में पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। मामले के मुख्य आरोपी राजकिशोर और उसके बड़े बेटे अनिकेत ने मंगलवार को जमशेदपुर न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस पिछले 15 दिनों से दोनों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही थी, लेकिन आरोपियों ने बेहद नाटकीय तरीके से पुलिस को चकमा देकर सरेंडर की प्रक्रिया पूरी की।65b6b0fe3c3156811d0600ff659684b93d869ff50cc276afe5cb6ffc0529a1b4.0

पुलिस को चकमा देकर गेट नंबर-3 से घुसे आरोपी

​आरोपियों ने पुलिस की गिरफ्तारी से बचने के लिए एक सोची-समझी रणनीति अपनाई। जब पुलिस शहर और बाहर के ठिकानों पर दबिश दे रही थी, तब दोनों आरोपी चुपके से अदालत के गेट नंबर-3 से परिसर के भीतर दाखिल हो गए। जब तक पुलिस को इसकी भनक लगती, तब तक उन्होंने अपने अधिवक्ता के माध्यम से प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी अर्चना मिश्रा की अदालत में सरेंडर कर दिया। अदालत ने दोनों को तत्काल न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।b 1

4 दिनों की पुलिस रिमांड मंजूर, खुलेंगे कई राज

​हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने के लिए पुलिस ने आरोपियों की 6 दिनों की रिमांड मांगी थी। अदालत ने सुनवाई के बाद बुधवार (आज) से 4 दिनों की पुलिस रिमांड मंजूर की है। इस दौरान पुलिस आरोपियों से निम्नलिखित बिंदुओं पर पूछताछ करेगी:

  • ​हत्याकांड का असली मास्टरमाइंड कौन है?
  • ​वारदात को अंजाम देने वाले शूटरों की पहचान और ठिकाने।
  • ​हत्या में इस्तेमाल किए गए हथियारों की बरामदगी।

जमीन विवाद ने ली लोको पायलट की जान

​बता दें कि बीते 26 अप्रैल की रात टाटा स्टेशन के रनिंग रूम के ठीक सामने लोको पायलट जीके गौतम की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस जांच में अब तक यह स्पष्ट हुआ है कि इस खूनी खेल के पीछे जमीन का विवाद मुख्य कारण था। इस मामले में पुलिस अब तक 8 संदिग्धों से पूछताछ कर चुकी है।a 2

अब शूटरों पर पुलिस की नजर

​मुख्य आरोपियों के सरेंडर और रिमांड पर मिलने के बाद अब पुलिस की टीमें शूटरों की तलाश में छापेमारी तेज कर रही हैं। पुलिस का दावा है कि रिमांड के दौरान पूछताछ से कई अहम साक्ष्य मिलेंगे, जिससे इस सनसनीखेज हत्याकांड के सभी पहलुओं का खुलासा हो सकेगा।

ब्यूरो रिपोर्ट, तीसरी धारा न्यूज़

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झारखंड: व्यवस्था की बलि चढ़ा ‘मसीहा’; गुमला में डॉक्टर की अनुपस्थिति के कारण एंबुलेंस चालक की तड़पकर मौत

गुमला (कामडारा): झारखंड के गुमला जिले से स्वास्थ्य विभाग की एक शर्मनाक और हृदयविदारक तस्वीर सामने आई है। कामडारा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में ड्यूटी डॉक्टर की लापरवाही और अनुपस्थिति ने एक ऐसे व्यक्ति की जान ले ली, जिसने अपने जीवन के 15 साल दूसरों को अस्पताल पहुंचाकर उनकी जान बचाने में लगा दिए थे।351b598c8774b4d0eee7007ee81fd2eb237593a019c47e58dfb63724d1088233.0

क्या है पूरा मामला?

​मृतक की पहचान 45 वर्षीय संदीप प्रधान के रूप में हुई है, जो लंबे समय से एंबुलेंस चालक के रूप में कार्यरत थे। जानकारी के अनुसार, अचानक संदीप के पेट में तेज दर्द उठा, जिसके बाद परिजन उन्हें लेकर तत्काल कामडारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। विडंबना देखिए कि जिस अस्पताल की चौखट पर वे रोज मरीजों को लाते थे, वहां उन्हें खुद प्राथमिक उपचार तक नसीब नहीं हुआ। अस्पताल में उस समय ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर मौजूद नहीं थीं।b 1

ड्यूटी रोस्टर में नाम, पर कुर्सी खाली

​परिजनों का आरोप है कि संदीप अस्पताल में तड़पते रहे, लेकिन कोई चिकित्सक उन्हें देखने वाला नहीं था। जांच में सामने आया कि ड्यूटी रोस्टर के अनुसार उस समय महिला चिकित्सक डॉ. सविता कुमारी की तैनाती थी, लेकिन वे केंद्र से नदारद थीं। इलाज में हुई इसी देरी के कारण संदीप ने अस्पताल परिसर में ही दम तोड़ दिया।a 2

ग्रामीणों का आक्रोश और हंगामा

​संदीप की मौत की खबर फैलते ही अस्पताल परिसर रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। आक्रोशित ग्रामीणों और परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। जब डॉ. सविता कुमारी अस्पताल पहुंचीं, तो उन्होंने पहले अपनी ड्यूटी होने से ही इनकार कर दिया। हालांकि, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी सुनील खलको द्वारा रोस्टर की जांच करने पर डॉक्टर की लापरवाही की पुष्टि हो गई।

ग्रामीणों के गंभीर आरोप:

  • ​डॉक्टर सप्ताह में मात्र दो दिन कुछ घंटों के लिए अस्पताल आती हैं।
  • ​अस्पताल में नाइट ड्यूटी का पालन नहीं किया जाता है।
  • ​शिकायतों के बावजूद उच्च अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती।

प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद शांत हुआ मामला

​नाराज ग्रामीणों ने रांची-सिमडेगा मुख्य मार्ग जाम करने की चेतावनी दी थी, जिससे प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों और अस्पताल प्रबंधन द्वारा दोषी डॉक्टर पर कड़ी कार्रवाई के आश्वासन के बाद ग्रामीण शांत हुए।

तीसरी धारा न्यूज़ की टिप्पणी

​एक एंबुलेंस चालक जो समाज के लिए जीवन रक्षक था, उसका सिस्टम की लापरवाही से दम तोड़ देना पूरे स्वास्थ्य महकमे पर सवालिया निशान खड़ा करता है। क्या बायोमेट्रिक हाजिरी और कागजी रोस्टर केवल खानापूर्ति के लिए हैं? क्या सरकार इन “लापरवाह” केंद्रों पर लगाम कसेगी?

ब्यूरो रिपोर्ट, तीसरी धारा न्यूज़

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आर्थिक देशभक्ति: पीएम मोदी ने पेश की मिसाल, अपने काफिले से हटाईं गाड़ियां; देश को दिया सादगी का संदेश

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने के लिए ‘आर्थिक देशभक्ति’ का मंत्र दिया है। इस मुहिम को केवल शब्दों तक सीमित न रखते हुए, प्रधानमंत्री ने स्वयं उदाहरण पेश कर नेतृत्व की एक नई मिसाल कायम की है।

खुद से शुरुआत: छोटा हुआ पीएम का काफिला

​प्रधानमंत्री ने अपने आधिकारिक काफिले के आकार में दो गाड़ियों की कटौती कर उसे छोटा करने का निर्णय लिया है। खास बात यह है कि यह फैसला सुरक्षा मानकों और SPG (विशेष सुरक्षा समूह) के कड़े प्रोटोकॉल को बरकरार रखते हुए लिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक सुरक्षा तकनीकों के समन्वय से सुरक्षा घेरे को अभेद्य रखते हुए भी संसाधनों का अनुकूलन (Optimization) संभव है।b 1

ईंधन संरक्षण और विदेशी मुद्रा पर नजर

​पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चे तेल की वैश्विक आपूर्ति पर असर पड़ा है, जिससे भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ रहा है। पीएम मोदी के इस कदम का सीधा संदेश ईंधन संरक्षण (Fuel Conservation) और सरकारी तंत्र में मितव्ययिता (Austerity) लाना है।

​प्रधानमंत्री के इस फैसले का व्यापक असर भी दिखने लगा है:

  • गृह मंत्री अमित शाह और कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी अपने काफिले छोटे करने की घोषणा की है।
  • ​विभिन्न मंत्रालयों ने अपने दैनिक परिचालन खर्चों में कटौती की योजना बनाई है।
  • ​सरकारी अधिकारियों को मेट्रो, सार्वजनिक परिवहन और ‘कार पूलिंग’ अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।a 2

7 सूत्रीय अपील और सोने से परहेज

​हाल ही में हैदराबाद में दिए अपने संबोधन में पीएम मोदी ने नागरिकों के सामने एक रोडमैप रखा था। उन्होंने वैश्विक महंगाई से लड़ने के लिए जनता से 7 महत्वपूर्ण अपीलें की थीं, जिनमें प्रमुख हैं:

    1. स्वर्ण त्याग: आगामी एक वर्ष तक सोना खरीदने से बचना।
    2. ईंधन की बचत: निजी वाहनों का सीमित उपयोग और ऊर्जा संरक्षण।
    3. स्वदेशी को बढ़ावा: आयातित वस्तुओं के बजाय स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता।

“जब देश संकट से जूझ रहा हो, तो शासन को भी त्याग कर जनता को प्रेरित करना चाहिए।”प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

 

निष्कर्ष

​प्रधानमंत्री का ‘लीड बाई एग्जांपल’ (स्वयं उदाहरण बनकर नेतृत्व करना) दृष्टिकोण जनता में यह विश्वास पैदा कर रहा है कि उनकी अपील केवल एक घोषणा नहीं, बल्कि राष्ट्रहित में उठाया गया एक आवश्यक कदम है। सत्ता के शीर्ष से शुरू हुई यह सादगी की लहर अब पूरे प्रशासनिक तंत्र और आम जनमानस में ‘आर्थिक देशभक्ति’ की भावना को प्रबल कर रही है।

ब्यूरो रिपोर्ट, तीसरी धारा न्यूज़

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जमशेदपुर में गहराया ईंधन संकट: पेट्रोल पंपों पर लगी लंबी कतारें, कई जगह ‘नो स्टॉक’ के बोर्ड से जनता परेशान

जमशेदपुर: लौहनगरी जमशेदपुर में पिछले दो-तीन दिनों से ईंधन की भारी किल्लत देखी जा रही है। शहर के अधिकांश पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल और डीजल के लिए वाहनों की लंबी-लंबी कतारें लगी हुई हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि कई प्रमुख पंपों पर ‘नो फ्यूल’ (No Fuel) के बोर्ड लटका दिए गए हैं, जिससे आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।IMG 20260512 083301

पंपों पर अफरा-तफरी का माहौल

​शहर के साकची, बिष्टुपुर, मानगो और टेल्को जैसे व्यस्त इलाकों में स्थित पेट्रोल पंपों पर सुबह से ही लोगों की भारी भीड़ उमड़ रही है। घंटों इंतजार करने के बाद भी कई लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। जिन पंपों पर तेल उपलब्ध है, वहां वाहनों की कतारें मुख्य सड़कों तक पहुंच गई हैं, जिससे यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।b 1

जनता में भारी रोष

​ईंधन की इस अचानक कमी ने नौकरीपेशा लोगों, स्कूली बच्चों के अभिभावकों और ट्रांसपोर्टरों की चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि एक तरफ सरकार ईंधन बचाने की अपील कर रही है, और दूसरी तरफ बाजार में उपलब्धता की कमी ने दैनिक जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। ऑटो और कमर्शियल वाहन चालकों को भी अपना काम बंद करना पड़ रहा है।a 2

संकट की मुख्य वजह?

​हालांकि आधिकारिक तौर पर किसी बड़ी तकनीकी खराबी की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन जानकारों का मानना है कि वैश्विक ईंधन संकट की आहट और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) में आई बाधा इसकी मुख्य वजह हो सकती है। वहीं, कुछ लोग इसे भविष्य में कीमतों में होने वाले बदलाव की आशंका से भी जोड़कर देख रहे हैं।

प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग

​शहर की जनता ने जिला प्रशासन से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि प्रशासन को पेट्रोल पंपों पर तेल की उपलब्धता सुनिश्चित करानी चाहिए और कालाबाजारी रोकने के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए। फिलहाल, लोग इस उम्मीद में एक पंप से दूसरे पंप के चक्कर काट रहे हैं कि कहीं उन्हें अपनी गाड़ी के लिए कुछ लीटर पेट्रोल मिल जाए।

तीसरी धारा न्यूज

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नक्सलियों के अभेद्य किले ‘बूढ़ा पहाड़’ पहुंचे सीआरपीएफ स्पेशल डीजी, जवानों का बढ़ाया हौसला

गढ़वा: सीआरपीएफ के स्पेशल डीजी दीपक कुमार ने मंगलवार को गढ़वा जिले के सुदूरवर्ती बड़गड़ थाना क्षेत्र स्थित बूढ़ा पहाड़ कैंप का दौरा किया। एक समय में नक्सलियों का सबसे मजबूत और अभेद्य किला माना जाने वाला यह क्षेत्र अब सुरक्षा और विकास के नए दौर से गुजर रहा है। स्पेशल डीजी ने इस दौरान क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और चल रही विकास योजनाओं का जायजा लिया।n7120553561778651747710eccddaf83bea4dd1556bc61b2515719583085d9efecc84b2f373a9497f994e7b

भयमुक्त वातावरण और विकास की नई इबारत

​निरीक्षण के दौरान स्पेशल डीजी ने कहा कि झारखंड और छत्तीसगढ़ की सीमा पर स्थित यह दुर्गम क्षेत्र कभी नक्सलियों का गढ़ था, जहाँ लोग खौफ के साये में जीने को मजबूर थे। लेकिन आज जिला प्रशासन, गढ़वा पुलिस और सीआरपीएफ के साझा प्रयासों से यहाँ स्थिति बदली है। अब यहाँ भयमुक्त वातावरण है और विकास की किरणें घर-घर तक पहुंच रही हैं। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था की वर्तमान स्थिति और ऑपरेशनल तैयारियों की भी समीक्षा की।b 1

बूढ़ा पहाड़ डेवलपमेंट योजना की समीक्षा

​दौरे के दौरान स्पेशल डीजी ने राज्य सरकार द्वारा संचालित “बूढ़ा पहाड़ डेवलपमेंट योजना” की प्रगति की जांच की। उन्होंने अधिकारियों के साथ सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर चर्चा की। डीजी ने सख्त निर्देश दिए कि चुनौती अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, इसलिए सक्रिय नक्सलियों की हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी जाए।a 2

जवानों की वीरता को सलाम

​बूढ़ा पहाड़ का भ्रमण करने के बाद स्पेशल डीजी गढ़वा स्थित सीआरपीएफ 172 बटालियन के मुख्यालय पहुंचे। वहां आयोजित ‘सैनिक सम्मेलन’ में उन्होंने जवानों को संबोधित करते हुए उनकी वीरता और साहस की जमकर सराहना की।

​इस महत्वपूर्ण दौरे के दौरान उनके साथ:

  • ​सीआरपीएफ आईजी साकेत कुमार
  • ​डीआईजी पंकज कुमार
  • ​पलामू रेंज के डीआईजी किशोर कौशल
  • ​गढ़वा एसपी आशुतोष शेखर
  • ​172 बटालियन के कमांडेंट अमरेंद्र कुमार सिंह

​सहित कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और सशस्त्र जवान मुख्य रूप से उपस्थित थे।

तीसरी धारा न्यूज

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जमशेदपुरः टाटानगर रेलवे यार्ड में तेंदुए जैसे वन्यजीव के देखे जाने की खबर से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें झाड़ियों के बीच एक जंगली जानवर घूमता नजर आ रहा है। वीडियो सामने आने के बाद रेलवे कर्मियों और आसपास के लोगों में भय का माहौल बन गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए टाटानगर रेलवे प्रबंधन ने तत्काल जमशेदपुर के डीएफओ सबा आलम अंसारी को औपचारिक पत्र भेजते हुए वायरल वीडियो साझा किया है। रेलवे प्रशासन ने वन विभाग से जल्द रेस्क्यू अभियान चलाने की मांग की है। रेलवे यार्ड का इलाका काफी संवेदनशील माना जाता है, जहां दिन-रात रेल कर्मचारियों की आवाजाही और ट्रेनों की शंटिंग का कार्य चलता रहता है। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम सक्रिय हो गई। डीएफओ के निर्देश पर रिसर्चर इमरान और फॉरेस्टर मिथुन के नेतृत्व में विशेषज्ञों की टीम को मौके पर भेजा गया है। टीम इलाके की निगरानी कर रही है और ट्रैप कैमरे लगाने की तैयारी भी की जा रही है। रेलवे कॉलोनियों और यार्ड के आसपास रहने वाले लोगों में डर का माहौल है। यार्ड का बड़ा हिस्सा झाड़ियों और सुनसान इलाकों से घिरा होने के कारण खतरा बढ़ गया है। इसे देखते हुए रेलवे और वन विभाग ने संयुक्त रूप से लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। अधिकारियों ने कहा है कि रात में सुनसान रास्तों पर अकेले न जाएं, बच्चों को बाहर अकेला न छोड़ें और किसी भी जंगली जानवर को देखकर उसके पास जाने या वीडियो बनाने की कोशिश न करें, बल्कि तुरंत प्रशासन को सूचना दें। फिलहाल पूरे यार्ड क्षेत्र में विशेष निगरानी और गश्त बढ़ा दी गई है। वन विभाग की जांच रिपोर्ट और ट्रैप कैमरों के फुटेज आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी।

जमशेदपुर: टाटानगर रेलवे यार्ड में तेंदुए जैसा एक वन्यजीव देखे जाने की खबर से पूरे रेल क्षेत्र में दहशत फैल गई है। इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें झाड़ियों के बीच एक जंगली जानवर को घूमते हुए देखा जा सकता है। वीडियो सामने आने के बाद यार्ड में काम करने वाले रेल कर्मचारियों और नजदीकी कॉलोनियों के निवासियों में डर का माहौल है।32c2d2c01e9619c8b31b4edbac6ffb9e0daaea64e32314e2db05b7663981cf6a.0

रेलवे प्रबंधन ने वन विभाग को लिखा पत्र

​मामले की गंभीरता को देखते हुए टाटानगर रेलवे प्रबंधन ने तत्काल जमशेदपुर के डीएफओ (DFO) सबा आलम अंसारी को औपचारिक पत्र भेजकर घटना की जानकारी दी है। वायरल वीडियो को साक्ष्य के तौर पर साझा करते हुए रेलवे प्रशासन ने मांग की है कि वन विभाग जल्द से जल्द रेस्क्यू अभियान चलाए। बता दें कि रेलवे यार्ड एक संवेदनशील इलाका है, जहां दिन-रात ट्रेनों की शंटिंग और कर्मचारियों का आवागमन बना रहता है।b 1

जांच में जुटी विशेषज्ञों की टीम

​सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम हरकत में आ गई है। डीएफओ के निर्देश पर रिसर्चर इमरान और फॉरेस्टर मिथुन के नेतृत्व में विशेषज्ञों की एक टीम यार्ड भेजी गई है।

  • निगरानी: टीम पूरे इलाके में पगमार्क (पदचिह्न) की तलाश कर रही है।
  • ट्रैप कैमरे: जानवर की पहचान सुनिश्चित करने के लिए इलाके में ट्रैप कैमरे लगाने की तैयारी की जा रही है।

प्रशासन की ओर से सतर्क रहने की अपील

​यार्ड का एक बड़ा हिस्सा घनी झाड़ियों और सुनसान इलाकों से घिरा हुआ है, जिससे जंगली जानवरों के छिपने की संभावना बढ़ जाती है। इसे देखते हुए रेलवे और वन विभाग ने संयुक्त रूप से एडवायजरी जारी की है:a 2

  1. ​रात के समय सुनसान रास्तों पर अकेले जाने से बचें।
  2. ​बच्चों को घर से बाहर अकेला न छोड़ें।
  3. ​किसी भी वन्यजीव को देखकर उसके करीब जाने या वीडियो बनाने की कोशिश न करें।
  4. ​जानवर दिखने पर तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचित करें।

​फिलहाल, वन विभाग की जांच रिपोर्ट और कैमरों के फुटेज का इंतज़ार किया जा रहा है ताकि पुष्टि हो सके कि दिखाई देने वाला जानवर तेंदुआ ही है या कोई अन्य वन्यजीव। पूरे क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी गई है।

तीसरी धारा न्यूज

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सोने-चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक उछाल: इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ते ही सोना 1.64 लाख और चांदी 3 लाख के पार

नई दिल्ली: केंद्र सरकार द्वारा सोने और चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी (आयात शुल्क) बढ़ाने के फैसले का असर घरेलू बाजार पर तुरंत और बेहद तीखा देखने को मिला है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर बुधवार को सोने और चांदी की कीमतों ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। जहां सोने की कीमत में एक ही दिन में 11,000 रुपये से ज्यादा की तेजी आई, वहीं चांदी ने पहली बार 3 लाख रुपये प्रति किलोग्राम का ऐतिहासिक स्तर पार कर लिया।n71205025817786511755241144f11712ecce680dbdd4a4724d9ef55cc4f3443fed8c962003272d4f79f0a2

बाजार में जबरदस्त हलचल

​वायदा बाजार के आंकड़ों के अनुसार:

  • सोना: कारोबारी सत्र के दौरान सोने की कीमत 1,64,497 रुपये प्रति दस ग्राम के उच्च स्तर पर पहुंच गई। सुबह बाजार खुलने के कुछ ही घंटों के भीतर इसमें करीब 11,055 रुपये का इजाफा देखा गया।
  • चांदी: चांदी की कीमतों ने भी लंबी छलांग लगाई और 3,01,429 रुपये प्रति किलोग्राम के शिखर को छू लिया। पिछले बंद भाव की तुलना में इसमें 22,367 रुपये से अधिक की तेजी दर्ज की गई।b 1

क्यों बढ़ी कीमतें?

​कीमतों में इस भारी उछाल की मुख्य वजह सरकार द्वारा इंपोर्ट टैरिफ को 6% से बढ़ाकर 15% करना है। इसमें 10% बेसिक कस्टम ड्यूटी और 5% कृषि बुनियादी ढांचा एवं विकास उपकर (AIDC) शामिल है। सरकार ने यह कदम गिरते रुपये को थामने, व्यापार घाटे को कम करने और सोने के आयात पर निर्भरता घटाने के लिए उठाया है।

​इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका-ईरान युद्ध की अनिश्चितता और डॉलर इंडेक्स में उतार-चढ़ाव ने भी सोने-चांदी को ‘सुरक्षित निवेश’ के रूप में मजबूती दी है।a 2

इंटरनेशनल मार्केट बनाम घरेलू बाजार

​दिलचस्प बात यह है कि जहां भारतीय बाजारों में कीमतें आसमान छू रही हैं, वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड की कीमतों में करीब 0.4% की गिरावट देखी गई और यह 4,695.99 डॉलर प्रति औंस पर रहा। घरेलू बाजार में बढ़ी कीमतें मुख्य रूप से बढ़ी हुई ड्यूटी के साथ तालमेल बिठाने (Price Adjustment) का परिणाम हैं।

क्या आगे गिरेंगे दाम?

​कमोडिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि कीमतों में यह उछाल फौरी प्रतिक्रिया है। एक्सपर्ट अनुज गुप्ता के अनुसार, सरकार का मकसद आयात कम करना है। ड्यूटी बढ़ने से मांग में कमी आ सकती है, जिसके चलते अगले कुछ दिनों में कीमतों में सुधार (गिरावट) देखने को मिल सकता है। हालांकि, यह गिरावट कितनी होगी, इसके लिए बाजार के अगले कुछ सत्रों पर नजर रखनी होगी।

तीसरी धारा न्यूज

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ईंधन और खर्च कटौती की बड़ी मुहिम: सीएम योगी ने दिए मंत्रियों का काफिला आधा करने के निर्देश, प्रदेशवासियों से की खास अपील

लखनऊ: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वैश्विक ईंधन संकट और आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए किए गए आह्वान के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़े कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शासन स्तर पर फिजूलखर्ची रोकने और बचत की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं।n71201173017786509609878e7a87aead941e031ac52840d5dd7d04292cb667c0c8578e330464720f395a2d

काफिले में 50% की कटौती और वर्क फ्रॉम होम पर जोर

​मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव, डीजीपी और सभी विभागों के प्रमुखों के साथ बैठक में स्पष्ट निर्देश दिया कि मुख्यमंत्री और मंत्रियों की फ्लीट (काफिले) में तत्काल 50 प्रतिशत की कमी की जाए। अनावश्यक वाहनों को तत्काल हटाया जाए। इसके अलावा, सीएम ने ‘वर्क फ्रॉम होम’ को प्राथमिकता देने की अपील की है ताकि सड़कों पर गाड़ियों का दबाव और ईंधन की खपत कम हो सके।b 1

प्रमुख सरकारी निर्देश और अपील:

  • वर्चुअल बैठकें: सरकारी बैठकों, सेमिनारों और कॉन्फ्रेन्स का आयोजन वर्चुअली किया जाए। सचिवालय की आधी आंतरिक बैठकें भी ऑनलाइन होंगी।
  • सार्वजनिक परिवहन: मंत्री, सांसद और विधायक सप्ताह में कम से कम एक दिन पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग करें। स्कूलों और कॉलेजों में ‘नो व्हीकल डे’ आयोजित करने का सुझाव दिया गया है।
  • बिजली बचत: रात 10 बजे के बाद व्यावसायिक परिसरों में सजावटी लाइटों का न्यूनतम प्रयोग करने और सरकारी भवनों में बिजली की बचत करने के निर्देश दिए गए हैं।
  • ईवी और साइकिलिंग: पब्लिक ट्रांसपोर्ट के साथ-साथ इलेक्ट्रिक वाहनों (EV), साइकिलिंग और कार-पूलिंग पर विशेष बल दिया गया है।

विदेशी यात्रा और सोने की खरीद पर रोक की अपील

​मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से आग्रह किया है कि वे अगले छह महीने तक गैर-आवश्यक विदेशी यात्राएं न करें। उन्होंने वेडिंग प्लानर्स और नागरिकों से अपील की कि वे ‘डेस्टिनेशन वेडिंग’ के लिए यूपी के किलों, हैरिटेज और ईको साइट्स का चुनाव करें। साथ ही, देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए सोने की अनावश्यक खरीद से बचने और निवेश के अन्य माध्यमों को चुनने को कहा है।a 2

स्वदेशी और सेहत पर ध्यान

​खाद्य तेल के बढ़ते आयात को देखते हुए सीएम ने लोगों से इसके उपयोग में कमी लाने का आग्रह किया है। उन्होंने स्थानीय कारीगरों और ओडीओपी (ODOP) उत्पादों को उपहार के रूप में देने और ‘स्वदेशी’ को बढ़ावा देने पर जोर दिया। जेलों, छात्रावासों और सरकारी कैंटीन में भी कम तेल वाले भोजन को प्राथमिकता देने को कहा गया है।

​मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि दुनिया में मौजूदा उथल-पुथल को देखते हुए हमें सावधानी बरतनी होगी। प्रधानमंत्री के विजन को धरातल पर उतारने के लिए उत्तर प्रदेश पूरी तैयारी के साथ कदम बढ़ा रहा है।

तीसरी धारा न्यूज

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बड़ी खबर: अखिलेश यादव के छोटे भाई प्रतीक यादव का निधन, लखनऊ के अस्पताल में मृत घोषित

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के परिवार से एक बेहद दुखद खबर सामने आ रही है। अखिलेश यादव के सौतेले भाई और दिवंगत मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव का बुधवार सुबह निधन हो गया। प्रतीक यादव भाजपा नेता अपर्णा यादव के पति थे।1968501 prateek aparna

संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत

​जानकारी के अनुसार, प्रतीक यादव को बुधवार सुबह करीब 5:30 बजे लखनऊ के सिविल अस्पताल लाया गया था, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। अस्पताल के निदेशक डॉक्टर जीपी गुप्ता ने प्रारंभिक तौर पर इसे ‘सस्पेक्टेड प्वाइजनिंग’ (संदिग्ध विषाक्तता) का मामला बताया है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह फूड प्वाइजनिंग थी या किसी अन्य पदार्थ का सेवन।

​रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रतीक यादव सुबह करीब 4 बजे अपने घर के किचन में अचेत अवस्था में पाए गए थे। मौके पर डॉक्टर को बुलाया गया, लेकिन तब तक उनकी मृत्यु हो चुकी थी।b 1

जांच का विषय और पोस्टमार्टम

​प्रतीक यादव की मौत के असली कारणों का पता लगाने के लिए शव का पोस्टमार्टम डॉक्टरों के एक पैनल द्वारा किया गया है।

  • पोस्टमार्टम की स्थिति: पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और शव को घर ले जाया गया है।
  • रिपोर्ट का इंतज़ार: विस्तृत पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने में 3-4 दिन का समय लग सकता है, जिसके बाद ही मौत की गुत्थी सुलझ पाएगी।

अखिलेश यादव के साथ मधुर संबंध

​38 वर्षीय प्रतीक यादव राजनीति से दूर रहकर अपना व्यवसाय संभालते थे, जबकि उनकी पत्नी अपर्णा यादव भाजपा की सक्रिय नेता हैं। अखिलेश यादव और उनके छोटे भाई प्रतीक के बीच संबंध हमेशा मधुर रहे। प्रतीक, मुलायम सिंह यादव की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के बेटे थे। मुलायम सिंह ने 2003 में साधना गुप्ता के साथ अपने रिश्ते को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था।a 2

परिवार में शोक की लहर

​प्रतीक यादव के आकस्मिक निधन से यादव परिवार और राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर है। बीते कुछ समय से उनके अस्वस्थ होने की खबरें भी आ रही थीं, लेकिन अचानक इस तरह उनके निधन ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस और प्रशासन अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतज़ार कर रहे हैं ताकि जांच को आगे बढ़ाया जा सके।

तीसरी धारा न्यूज

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मितव्ययिता की मिसाल: पीएम मोदी ने अपने काफिले को किया आधा, देश को दिया खर्च कटौती का कड़ा संदेश

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह जो कहते हैं, उसे खुद भी अमल में लाते हैं। वैश्विक ईंधन संकट की आहट और बढ़ते आर्थिक दबाव के बीच, पीएम मोदी ने सरकारी खर्च में कटौती की शुरुआत अपने ही काफिले से की है। उन्होंने सुरक्षा एजेंसी एसपीजी (SPG) को विशेष निर्देश देकर अपने काफिले में शामिल गाड़ियों की संख्या 50 प्रतिशत तक कम करने को कहा है।1002475098

खुद उदाहरण बनकर पेश की मिसाल

​टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री के इस कदम का मुख्य उद्देश्य सरकारी संसाधनों की बचत करना और एक ‘एग्जांपल सेट’ करना है। पीएम मोदी लगातार देशवासियों से ईंधन और सोने की खपत कम करने की अपील कर रहे हैं। हाल ही में हैदराबाद और गुजरात के दौरों के दौरान भी उन्होंने जनता से खर्चों में कटौती करने और विदेश यात्राओं से बचने का आग्रह किया था। अब खुद अपने काफिले को छोटा कर उन्होंने संदेश दिया है कि राष्ट्रहित में त्याग की शुरुआत शीर्ष स्तर से हो चुकी है।b 1

एसपीजी को मिले खास निर्देश

​सूत्रों के मुताबिक, पीएम मोदी ने स्पष्ट किया है कि काफिला छोटा करने के साथ-साथ इसमें इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EVs) की संख्या बढ़ाई जाए। हालांकि, उन्होंने यह भी हिदायत दी है कि इसके लिए नई गाड़ियों की खरीद न की जाए, बल्कि मौजूदा संसाधनों का ही बेहतर इस्तेमाल हो ताकि अतिरिक्त वित्तीय बोझ न पड़े।a 2

​एसपीजी ने इस निर्देश पर अमल करना शुरू कर दिया है। हाल ही में दिल्ली के बाहर प्रधानमंत्री की यात्राओं के दौरान काफिले का आकार पहले की तुलना में काफी छोटा देखा गया। सुरक्षा एजेंसी यह सुनिश्चित कर रही है कि गाड़ियों की संख्या कम होने के बावजूद ‘ब्लू बुक’ के सुरक्षा नियमों में कोई ढील न आए।

पूरे देश में दिखने लगा असर

​प्रधानमंत्री की इस पहल का असर अब राज्यों में भी दिखने लगा है। उत्तर प्रदेश से लेकर मध्य प्रदेश तक, कई मंत्रियों ने अपने काफिले कम करने शुरू कर दिए हैं। केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालय भी अब खर्चों में कटौती की योजना बना रहे हैं। इसमें कर्मचारियों को मेट्रो का इस्तेमाल करने, कारपूलिंग अपनाने और भव्य आयोजनों से बचने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

​प्रधानमंत्री का यह कदम न केवल ईंधन की बचत करेगा, बल्कि सरकारी कार्यशैली में एक नई सादगी और उत्तरदायित्व की संस्कृति को भी बढ़ावा देगा।

तीसरी धारा न्यूज

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