मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के चौथे कार्यकाल का शुक्रवार को एक बर्ष पूरा हो जायेगा। इसको लेकर राज्य सरकार की ओर से 28 नवंबर को मोरहाबादी मैदान में भव्य समारोह आयोजित किया जायेगा। कार्यक्रम को लेकर सरकार के मुख्यसचिव अविनाश कुमार ने मुख्यमंत्री सोरेन को आमंत्रित किया। कार्यक्रम में हेमंत सरकार के सभी मंत्री भी उपस्थित रहेंगे और अपनी उपलब्धियां बतायेंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विभिन्न विभागों के लगभग 10 हजार अभ्यर्थियों के बीच नियुक्ति पत्र वितरित करेंगे। इसके अलावा परिसंपत्तियों का भी वितरण किया जायेगा। कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग द्वारा तैयारियों को लेकर विस्तृत दिशानिर्देश जारी कर सभी विभागों को वितरण व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है।
राज्य सरकार की ओर से जारी आदेश में बताया गया है कि झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा प्रतियोगिताए 2023 के माध्यम से झारखंड लोक सेवा आयोग द्वारा अनुशंसित 197 असैनिक अभ्यर्थियों को भी नियुक्ति पत्र प्रदान किया जाएगा। इसके लिए विभागवार अधिकारियों और सहायक कर्मियों की टीम गठित की गई है। प्रतिनियुक्त पदाधिकारियों एवं कर्मियों को सुबह 8 बजे तक स्थल पर उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है।
स्वास्थ्य मंत्री डा इरफान अंसारी ने निजी अस्पतालों को मरीज की मौत पर शव रोकने के मामले को अमानवीय, क्रूर और कानूनन अपराध बताया और कहा कि ऐसी हरकत करने वाले अस्पताल को तुरंत सील कर दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार अस्पतालों को भुगतान, संसाधन और सुविधाएँ उपलब्ध करा रही है।
लेकिन मानवता और संवेदनशीलता अस्पताल प्रबंधन को दिखानी होगी। स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि दुर्घटना पीड़ितों या गंभीर मरीजों को यह कहकर वापस न भेजा जाए कि उनका इलाज कार्ड की कवरेज में नहीं है। किसी मरीज को बिना इलाज लौटाना अस्वीकार्य है। कवरेज को सरल और स्पष्ट बनाया जाय।
झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य की जेलों में कैदियों को परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता की विस्तृत जांच कराने का निर्देश दिया है. रांची के होटवार स्थित बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल में भोजन की गुणवत्ता से संबंधित शिकायतों से जुड़े मामले में गुरुवार को जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली बेंच में सुनवाई हुई.
शिकायतें आकाश कुमार राय नामक शख्स की ओर से दायर क्रिमिनल अपील के दौरान अदालत के सामने लाई गई थीं. इस दौरान जेल अधीक्षक सुदर्शन मुर्मू और जेलर लवकुश कुमार गुरुवार को हाईकोर्ट में उपस्थित हुए. दोनों अधिकारियों ने कैदियों को दिए जा रहे भोजन की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की.
जेलर ने अदालत को बताया कि अब भोजन पूरी तरह से जेल मैनुअल के अनुसार उपलब्ध कराया जा रहा है और उसमें सुधार सुनिश्चित किया गया है. कोर्ट द्वारा पूर्व में दिए गए निर्देश के अनुसार, गृह सचिव और आईजी जेल की ओर से सभी जिलों की जेलों में भोजन की गुणवत्ता पर तैयार रिपोर्ट के साथ एक शपथ पत्र दाखिल किया गया.
सरकार ने कोर्ट को अवगत कराया कि भोजन की गुणवत्ता में पहले की तुलना में काफी सुधार हुआ है और अब सभी जेलों में मैनुअल के प्रावधानों के अनुरूप भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है. कैदियों के हित में अदालत ने जेल परिसर में कैंटीन संचालित करने की अनुमति भी दी है. साथ ही यह स्पष्ट कर दिया कि भोजन आपूर्ति में किसी भी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो उसकी जिम्मेदारी सीधे जेलर की होगी.
हाईकोर्ट ने झारखंड लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (झालसा) और जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) को राज्य के जिलों का औचक निरीक्षण कर दो सप्ताह के भीतर जेलों में भोजन पर अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट में दाखिल करने का आदेश दिया है. मामले की अगली सुनवाई 11 दिसंबर को निर्धारित की गई है.
कोर्ट ने झालसा के सदस्य सचिव को निर्देश दिया है कि वे सभी डालसा चेयरमैन को आदेश की प्रति भेजें और आवश्यकतानुसार आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करें.
उच्च न्यायालय ने भारतीय रेलवे से यह बताने को कहा है कि दुर्घटना बीमा कवर केवल ऑनलाइन टिकट खरीदने वाले यात्रियों को ही क्यों प्रदान किया जाता है, ऑफलाइन टिकट बुक करने वालों को क्यों नहीं।
शीर्ष अदालत भारतीय रेलवे से संबंधित एक मामले की सुनवाई कर रही थी।
न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ को बताया गया कि दुर्घटनाओं के लिए बीमा कवर केवल ऑनलाइन टिकट खरीदने वाले यात्रियों को प्रदान किया जाता है। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) विक्रमजीत बनर्जी इस मामले में रेलवे की ओर से अदालत में पेश हुए।
पीठ ने 25 नवंबर को पारित अपने आदेश में कहा, ‘इसके अलावा, न्याय मित्र ने बताया है कि दुर्घटनाओं को कवर करने के लिए ऑनलाइन टिकट खरीदने वाले यात्रियों को बीमा कवर प्रदान किया जाता है, जो ऑफलाइन टिकट खरीदने वालों के लिए उपलब्ध नहीं है। श्री बनर्जी को निर्देश लेने की आवश्यकता है कि टिकट प्राप्त करने के इन दो माध्यमों के बीच इस अंतर का क्या कारण है।’
पीठ ने राष्ट्रीय ट्रांसपोर्टर द्वारा प्रस्तुत एक रिपोर्ट का अवलोकन किया और कहा कि शुरुआती चरण में, पटरियों और रेलवे क्रॉसिंग की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए, जिससे अन्य पहलू सामने आएंगे। अदालत ने मामले को 13 जनवरी को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। अदालत ने रेलवे को दो मुद्दों पर रिपोर्ट या हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही बीमा से जुड़े मुद्दे पर भी जवाब देने के लिए कहा है।
घाटशिला प्रखंड अंतर्गत राजाबासा गांव के एक टोला में मुख्यमंत्री उज्जवल झारखंड योजना के तहत आज से विद्युत आपूर्ति शुरु हो गई है । बिजली सुविधा से वंचित 6 परिवारों को इस योजना के अंतर्गत कनेक्शन प्रदान किया गया जिसपर ग्रामीणों ने खुशी जाहिर की ।
इस अवसर पर उपायुक्त श्री कर्ण सत्यार्थी ने राजाबासा गांव पहुंचकर योजना के क्रियान्वयन की गुणवत्ता का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि सभी 6 परिवारों को सुरक्षित और सुचारू ढंग से विद्युत सुविधा मिलती रहे, आगे किसी प्रकार की बाधा न आए। उपायुक्त ने ग्रामीणों से सीधा संवाद स्थापित कर उनकी अन्य स्थानीय समस्याओं व आवश्यकताओं को भी सुना तथा मौके पर मौजूद घाटशिला बीडीओ को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उपायुक्त ने कहा कि मुख्यमंत्री उज्जवल झारखंड योजना के तहत छूटे हुए गांव-टोलों में विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने का प्रयास है । योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जा रहा है, राज्य सरकार के निर्देशानुसार जिला प्रशासन का प्रयास है कि कोई भी परिवार मूलभूत सुविधा से वंचित न रहे ।
राज्य सरकार के दिशा-निर्देशानुसार जिला अंतर्गत सभी प्रखंडों एवं पंचायतों में आयोजित ‘सेवा का अधिकार सप्ताह’ के शिविर के माध्मम से व्यापक स्तर पर नागरिकों को सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा जा रहा है। इस अभियान के तहत अबतक कुल 24367 आवेदन प्राप्त हुए हैं। आज 24 पंचायत एवं 3 नगर निकाय में शिविर का आयोजन किया गया । शिविरों में बड़ी संख्या में जिलेवासियों की भागीदारी रही। माननीय विधायकगण एवं पंचायत जनप्रतिनिधियों ने शिविर में शामिल होकर विभिन्न योजनाओं के लाभुकों के बीच परिसंपत्ति का वितरण किया तथा नागरिकों से अपील किया कि सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठायें ।
उपायुक्त के निर्देशानुसार इन शिविरों में राईट टू सर्विस अंतर्गत चिन्हित सभी सेवाओं से संबंधित प्राप्त आवेदनों का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित किया जा रहा है । पंचायत एवं नगर निकायों में लगाए गए शिविर के माध्यम से अबतक प्राप्त आवेदनों में दिव्यांग पेंशन के 32, विधवा पेंशन 105, वृद्धा पेंशन के 2393, जन्म प्रमाण पत्र 179, आय प्रमाण पत्र 616, स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र 567, नया राशन कार्ड के 526, जाति प्रमाण पत्र के 760, झारखंड राज्य सेवा देने की गारंटी अधिनियम 2011 से जुड़ी अन्य सेवाएं के 306 आवेदन, भूमि की मापी के 34, मृत्यु प्रमाण पत्र के 89, भूमि धारण प्रमाण पत्र 25, दाखिल खारिज वादों का निष्पादन 68, तथा अन्य लोककल्याणकारी योजनाओं के 18664 आवेदन शामिल हैं।
‘सेवा का अधिकार सप्ताह’ के तहत आयोजित किए जा रहे शिविर 28 नवंबर तक प्रस्तावित हैं। उपायुक्त श्री कर्ण सत्यार्थी ने अपील करते हुए कहा कि अंतिम दिन अपने नजदीकी शिविर में जिलावासी जरूर शामिल हों तथा इस अभियान में परस्पर भागीदारी निभाते हुए सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठायें।
सरायकेला खरसावां : संविधान दिवस के अवसर पर कारूवा समाज एवं मुखी समाज ने जमशेदपुर, सीनी, सरायकेला, खरसावां में बाबा साहेब के प्रतिमा पर सीनी के स्वर्णपुर आंबेडकर खेल मैदान में माल्यार्पण कर निष्ठापूर्वक उनके आदर्शो पर चलने का संकल्प लिया। इस अवसर पर मानवाधिकार सहायता संघ अंतरराष्ट्रीय के वरिष्ठ संघ मित्र सह अखिल भारतीय अनूसूचित जाति जनजाति एकता मंच सरायकेला खरसावां जिला संरक्षक रंजन कारूवा ने कहा कि बाबा साहेब सिंबल ऑफ नॉलेज, संविधान के शिल्पकार द्वारा संविधान को तैयार करने में दो वर्ष ग्यारह महीने अठारह दिन लगे थे। उन्होंने स्मरण करते हुए कहा कि बाबा साहेब द्वारा महान् निर्मित संविधान विधिक दस्तावेज है बल्कि हमारे देश की विविधता, एकता और प्रगतिशील सोच का प्रतीक है। यह समानता, स्वतंत्रता, बंधुता, न्याय के मूल्यों पर चलने की प्रेरणा देता है।
जिला परिषद सदस्य लक्ष्मी सरदार ने भी बाबा साहेब के प्रतिमा पर माल्यार्पण करते हुए कहा कि हमें अपने अधिकार हक प्राप्त करने के लिए एक मंच में आकर बाबा साहेब के द्वारा लिखित संविधान के बारे में जानना, उनके आदर्शो पर चलना सभी नागरिकों एवं विद्यार्थियों का कर्तव्य है।
इस अवसर पर मूलनिवासी कारूवा समाज के प्रदेश कोषाध्यक्ष गुरूचरण मुखी, राजकुमार बेहरा, मुकेश कारूवा, संतोष कारूवा, रवि कुमार रवि, पंचु मुखी, बिमल मुखी, सुरेश कारूवा एवं समाज के द्वारा पोस्तुनगर, सारजामदा, बिरसा नगर, भालूबासा सलेग रोड, राउरकेला से भी संविधान दिवस मनाया गया।
झारखंड हाई कोर्ट ने जमशेदपुर में बढ़ते अवैध निर्माण, पार्किंग अतिक्रमण और बिना कंप्लीशन सर्टिफिकेट (सीसी) वाली इमारतों को बिजली-पानी कनेक्शन दिए जाने के मुद्दे पर जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (JNAC) को कड़ी फटकार लगाई है।
बुधवार को मुख्य न्यायाधीश और न्यायाधीश राजेश शंकर की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान जेएनएसी की कार्यप्रणाली और लापरवाही पर गंभीर सवाल उठाए।
अदालत ने सख्त लहजे में पूछा कि जब जुस्को (टाटा स्टील यूआईएसएल) को म्युनिसिपल कानून की जानकारी थी, तो उसने अवैध भवनों के बिजली-पानी कनेक्शन क्यों नहीं काटे? साथ ही कोर्ट ने यह भी पूछा कि जेएनएसी ने आखिर जुस्को को कनेक्शन हटाने के लिए चिट्ठी कब लिखी? कोर्ट में पेश हुए अधिकारी सवाल का जवाब नहीं दे सके।
बिल्डरों और पार्किंग अतिक्रमण पर रिपोर्ट ही नहीं
राकेश झा बनाम झारखंड सरकार मामले की सुनवाई में अधिवक्ता अखिलेश श्रीवास्तव ने अदालत को बताया कि पूर्व के आदेश में हाई कोर्ट ने जेएनएसी को कई निर्देश दिए थे। इनमें पार्किंग पर कब्जा करने वालों की सूची, अवैध निर्माण वाले बिल्डरों पर हुई कार्रवाई और सीसी मिलने तथा न मिलने वाली इमारतों का टेबुलर फॉर्म में विस्तृत ब्योरा शामिल था।
इसके अलावा, अदालत ने यह जानकारी भी मांगी थी कि बिना सीसी वाली इमारतों से बिजली बिल कमर्शियल या सामान्य किस दर पर वसूला जा रहा है।
लेकिन जेएनएसी ने अपने शपथ पत्र में न तो सारणीबद्ध जानकारी प्रस्तुत की और न ही आपूर्ति दरों पर कोई विवरण दिया। अदालत ने इसे अपने आदेश की सीधी अवमानना माना और तीखी टिप्पणी की कि यह रवैया स्वीकार्य नहीं।
टाटा स्टील पर दोष मढ़ने की कोशिश को अदालत ने रोका
सुनवाई के दौरान जेएनएसी की ओर से तर्क दिया गया कि विभाग अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चला रहा है और जुर्माना वसूल रहा है। साथ ही बताया गया कि जेएनएसी ने टाटा स्टील को पत्र लिखकर पूछा था कि बिना सीसी के बिजली-पानी कनेक्शन क्यों दिए जा रहे हैं।
इस पर अदालत ने उन्हें तुरंत रोकते हुए पूछा कि सिर्फ चिट्ठी लिखने से क्या होगा?जुस्को को कानून पता था, तो अवैध कनेक्शन हटाए क्यों नहीं? खंडपीठ ने दोबारा पूछा कि यह चिट्ठी किस तारीख को जारी की गई, परंतु अदालत को कोई जवाब नहीं मिला।
अगली सुनवाई रिज्वाइंडर के बाद
मामले में आगे की कार्यवाही को लेकर अदालत ने याचिकाकर्ता पक्ष के अधिवक्ताओं अखिलेश श्रीवास्तव और नेहा अग्रवाल से पूछा कि वे अपना प्रतिउत्तर(रिज्वाइंडर) कब दाखिल करेंगे। अधिवक्ताओं ने तीन दिन का समय मांगा, लेकिन अदालत ने सात दिन का समय देते हुए कहा कि रिज्वाइंडर दाखिल होते ही मामले की अगली सुनवाई तय की जाएगी।
झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस राजेश कुमार की अदालत में जमशेदपुर स्थित अतिथि होटल के तीन कमरों को सील किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर बुधवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद अदालत ने होटल के सभी तीनों कमरों को तुरंत खोलने का निर्देश दिया है।
सुनवाई के दौरान मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य के डीजीपी, जमशेदपुर एसएसपी और सीतारामडेरा थाना के तत्कालीन थाना प्रभारी भी कोर्ट में शारीरिक रूप से उपस्थित हुए। अदालत ने पुलिस अधिकारियों से तीखे अंदाज में पूछा कि होटल के कमरे अब तक सील क्यों रखे गए हैं और किस आधार पर इतना लंबा समय बीत जाने के बाद भी उन्हें नहीं खोला गया।
डीजीपी की ओर से अदालत को बताया गया कि संबंधित मामले में जांच जारी है, इसलिए कमरे सील रखे गए थे। इस पर अदालत ने स्पष्ट किया कि पुलिस अपनी जांच जारी रख सकती है, लेकिन होटल के कमरों को सील रखने का कोई औचित्य नहीं है।
अदालत ने कहा, जांच अपनी जगह है, लेकिन कमरे खोल दिए जाएं। गौरतलब है कि होटल में अवैध गतिविधियों के आरोप में कुछ लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिन्हें बाद में पुलिस ने पीआर बांड पर छोड़ दिया।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने होटल के तीन कमरों को सील कर दिया था, जिसे लेकर होटल प्रबंधन ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। अदालत के ताजा आदेश के बाद होटल के तीनों कमरों पर लगी सील हटाई जाएगी।
बांग्लादेश की राजधानी ढाका के एक कोर्ट ने पदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को भ्रष्टाचार के आरोप में 21 साल जेल की सजा सुनाई है। शेख हसीना को यह सजा ऐसे समय पर सुनाई गई, जब इससे पहले ICT ने उन्हें मौत की सजा सुना चुका है।
दरअसल, ढाका के स्पेशल जज 5 मोहम्मद अब्दुल्ला अल मामून ने शेख हसीना को तीन प्लॉट फ्रॉड केस में 7-7 साल की सजा सुनाई है।
शेख हसीना पर लगे सरकारी प्लॉट बांटने के आरोप
बता दें कि बांग्लादेश के एंटी-करप्शन कमीशन (ACC) ने पिछले जनवरी में शेख हसीना और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ ढाका के पुरबाचल इलाके में कथित तौर पर गैरकानूनी तरीके से सरकार प्लॉट बांटने के लिए छह अलग-अलग मामला दर्ज कराए थे। बाकी तीन मामलों में फैसला 1 दिसंबर को सुनाया जाएगा।
कोर्ट ने शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद जॉय को पांच साल जेल और 100,000 Tk का जुर्माना लगाया। कोर्ट ने शेख हसीना की बेटी साइमा वाजेद पुतुल को पांच साल की सजा सुनाई है।
ICT ने शेख हसीना को मानवाता के खिलाफ अपराधों का दोषी माना
गौरतलब है कि बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) ने जुलाई 2024 में सरकार के विरुद्ध प्रदर्शनों को दबाने की शेख हसीना की कोशिशों के लिए उन्हें मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी माना और हसीना को मौत की सजा सुनाई।
इस दौरान शेख हसीना और उनके परिवार के पास इन मामलों में कोई वकील नहीं था। हालांकि, उन्होंने अलग-अलग भाषणों और बयानों में किसी भी भ्रष्टाचार के आरोपों में शामिल होने से इनकार किया है।
यूनुस सरकार को भारत की दो टूक
इन सब के बीच बुधवार को भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत सरकार अभी बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के उन अनुरोध की जांच कर रही है, जिसमें पूर्व बांग्लादेशी पीएम शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग की गई है।
मीडिया ब्रीफिंग के दौरान MEA के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि नई दिल्ली को इस मामले पर ढाका से औपचारिक रूप से जानकारी मिली है। जिसमें इस बात पर जोर दिया गया है कि भारत अपनी चल रही न्यायिक और आंतरिक कानूनी प्रक्रियाओं के हिस्से के रूप में बांग्लादेश की स्थिरता और उसके लोगों की भलाई के लिए प्रतिबद्ध है। रणधीर जायसवाल ने कहा कि हमें एक अनुरोध बांग्लादेश की ओर से प्राप्त हुआ है, इसकी जांच कर रहे हैं।