एक नई सोच, एक नई धारा

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उच्च न्यायालय ने रेलवे से पूछा बड़ा सवाल बीमा सिर्फ ऑनलाइन टिकट वालों को क्यों मिलता है?

उच्च न्यायालय ने भारतीय रेलवे से यह बताने को कहा है कि दुर्घटना बीमा कवर केवल ऑनलाइन टिकट खरीदने वाले यात्रियों को ही क्यों प्रदान किया जाता है, ऑफलाइन टिकट बुक करने वालों को क्यों नहीं।

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शीर्ष अदालत भारतीय रेलवे से संबंधित एक मामले की सुनवाई कर रही थी।

न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ को बताया गया कि दुर्घटनाओं के लिए बीमा कवर केवल ऑनलाइन टिकट खरीदने वाले यात्रियों को प्रदान किया जाता है। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) विक्रमजीत बनर्जी इस मामले में रेलवे की ओर से अदालत में पेश हुए।

पीठ ने 25 नवंबर को पारित अपने आदेश में कहा, ‘इसके अलावा, न्याय मित्र ने बताया है कि दुर्घटनाओं को कवर करने के लिए ऑनलाइन टिकट खरीदने वाले यात्रियों को बीमा कवर प्रदान किया जाता है, जो ऑफलाइन टिकट खरीदने वालों के लिए उपलब्ध नहीं है। श्री बनर्जी को निर्देश लेने की आवश्यकता है कि टिकट प्राप्त करने के इन दो माध्यमों के बीच इस अंतर का क्या कारण है।’

पीठ ने राष्ट्रीय ट्रांसपोर्टर द्वारा प्रस्तुत एक रिपोर्ट का अवलोकन किया और कहा कि शुरुआती चरण में, पटरियों और रेलवे क्रॉसिंग की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए, जिससे अन्य पहलू सामने आएंगे। अदालत ने मामले को 13 जनवरी को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। अदालत ने रेलवे को दो मुद्दों पर रिपोर्ट या हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही बीमा से जुड़े मुद्दे पर भी जवाब देने के लिए कहा है।

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घाटशिला के राजाबासा गांव अंतर्गत एक टोला में ‘मुख्यमंत्री उज्जवल झारखंड योजना’ के तहत विद्युत आपूर्ति शुरू, 6 परिवारों को मिला योजना का लाभ

घाटशिला प्रखंड अंतर्गत राजाबासा गांव के एक टोला में मुख्यमंत्री उज्जवल झारखंड योजना के तहत आज से विद्युत आपूर्ति शुरु हो गई है । बिजली सुविधा से वंचित 6 परिवारों को इस योजना के अंतर्गत कनेक्शन प्रदान किया गया जिसपर ग्रामीणों ने खुशी जाहिर की ।

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इस अवसर पर उपायुक्त श्री कर्ण सत्यार्थी ने राजाबासा गांव पहुंचकर योजना के क्रियान्वयन की गुणवत्ता का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि सभी 6 परिवारों को सुरक्षित और सुचारू ढंग से विद्युत सुविधा मिलती रहे, आगे किसी प्रकार की बाधा न आए। उपायुक्त ने ग्रामीणों से सीधा संवाद स्थापित कर उनकी अन्य स्थानीय समस्याओं व आवश्यकताओं को भी सुना तथा मौके पर मौजूद घाटशिला बीडीओ को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उपायुक्त ने कहा कि मुख्यमंत्री उज्जवल झारखंड योजना के तहत छूटे हुए गांव-टोलों में विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने का प्रयास है । योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जा रहा है, राज्य सरकार के निर्देशानुसार जिला प्रशासन का प्रयास है कि कोई भी परिवार मूलभूत सुविधा से वंचित न रहे ।

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28 नवंबर को ‘सेवा का अधिकार सप्ताह’ का अंतिम दिन, नागरिकों से अपील है कि अपने नजदीकी शिविरों में शामिल होकर अवश्य लाभ उठाएं… उपायुक्त

राज्य सरकार के दिशा-निर्देशानुसार जिला अंतर्गत सभी प्रखंडों एवं पंचायतों में आयोजित ‘सेवा का अधिकार सप्ताह’ के शिविर के माध्मम से व्यापक स्तर पर नागरिकों को सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा जा रहा है। इस अभियान के तहत अबतक कुल 24367 आवेदन प्राप्त हुए हैं। आज 24 पंचायत एवं 3 नगर निकाय में शिविर का आयोजन किया गया । शिविरों में बड़ी संख्या में जिलेवासियों की भागीदारी रही। माननीय विधायकगण एवं पंचायत जनप्रतिनिधियों ने शिविर में शामिल होकर विभिन्न योजनाओं के लाभुकों के बीच परिसंपत्ति का वितरण किया तथा नागरिकों से अपील किया कि सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठायें ।

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उपायुक्त के निर्देशानुसार इन शिविरों में राईट टू सर्विस अंतर्गत चिन्हित सभी सेवाओं से संबंधित प्राप्त आवेदनों का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित किया जा रहा है । पंचायत एवं नगर निकायों में लगाए गए शिविर के माध्यम से अबतक प्राप्त आवेदनों में दिव्यांग पेंशन के 32, विधवा पेंशन 105, वृद्धा पेंशन के 2393, जन्म प्रमाण पत्र 179, आय प्रमाण पत्र 616, स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र 567, नया राशन कार्ड के 526, जाति प्रमाण पत्र के 760, झारखंड राज्य सेवा देने की गारंटी अधिनियम 2011 से जुड़ी अन्य सेवाएं के 306 आवेदन, भूमि की मापी के 34, मृत्यु प्रमाण पत्र के 89, भूमि धारण प्रमाण पत्र 25, दाखिल खारिज वादों का निष्पादन 68, तथा अन्य लोककल्याणकारी योजनाओं के 18664 आवेदन शामिल हैं।

‘सेवा का अधिकार सप्ताह’ के तहत आयोजित किए जा रहे शिविर 28 नवंबर तक प्रस्तावित हैं। उपायुक्त श्री कर्ण सत्यार्थी ने अपील करते हुए कहा कि अंतिम दिन अपने नजदीकी शिविर में जिलावासी जरूर शामिल हों तथा इस अभियान में परस्पर भागीदारी निभाते हुए सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठायें।

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संविधान दिवस पर कारूवा समाज एवं मुखी समाज ने आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उनके आदर्शो पर चलने का लिया संकल्प

सरायकेला खरसावां : संविधान दिवस के अवसर पर कारूवा समाज एवं मुखी समाज ने जमशेदपुर, सीनी, सरायकेला, खरसावां में बाबा साहेब के प्रतिमा पर सीनी के स्वर्णपुर आंबेडकर खेल मैदान में माल्यार्पण कर निष्ठापूर्वक उनके आदर्शो पर चलने का संकल्प लिया। इस अवसर पर मानवाधिकार सहायता संघ अंतरराष्ट्रीय के वरिष्ठ संघ मित्र सह अखिल भारतीय अनूसूचित जाति जनजाति एकता मंच सरायकेला खरसावां जिला संरक्षक रंजन कारूवा ने कहा कि बाबा साहेब सिंबल ऑफ नॉलेज, संविधान के शिल्पकार द्वारा संविधान को तैयार करने में दो वर्ष ग्यारह महीने अठारह दिन लगे थे। उन्होंने स्मरण करते हुए कहा कि बाबा साहेब द्वारा महान् निर्मित संविधान विधिक दस्तावेज है बल्कि हमारे देश की विविधता, एकता और प्रगतिशील सोच का प्रतीक है। यह समानता, स्वतंत्रता, बंधुता, न्याय के मूल्यों पर चलने की प्रेरणा देता है।

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जिला परिषद सदस्य लक्ष्मी सरदार ने भी बाबा साहेब के प्रतिमा पर माल्यार्पण करते हुए कहा कि हमें अपने अधिकार हक प्राप्त करने के लिए एक मंच में आकर बाबा साहेब के द्वारा लिखित संविधान के बारे में जानना, उनके आदर्शो पर चलना सभी नागरिकों एवं विद्यार्थियों का कर्तव्य है।

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इस अवसर पर मूलनिवासी कारूवा समाज के प्रदेश कोषाध्यक्ष गुरूचरण मुखी, राजकुमार बेहरा, मुकेश कारूवा, संतोष कारूवा, रवि कुमार रवि, पंचु मुखी, बिमल मुखी, सुरेश कारूवा एवं समाज के द्वारा पोस्तुनगर, सारजामदा, बिरसा नगर, भालूबासा सलेग रोड, राउरकेला से भी संविधान दिवस मनाया गया।

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अवैध कनेक्शन पर हाई कोर्ट सख्त: JNAC से पूछा- जुस्को को कब लिखी चिट्ठी?

झारखंड हाई कोर्ट ने जमशेदपुर में बढ़ते अवैध निर्माण, पार्किंग अतिक्रमण और बिना कंप्लीशन सर्टिफिकेट (सीसी) वाली इमारतों को बिजली-पानी कनेक्शन दिए जाने के मुद्दे पर जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (JNAC) को कड़ी फटकार लगाई है।

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बुधवार को मुख्य न्यायाधीश और न्यायाधीश राजेश शंकर की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान जेएनएसी की कार्यप्रणाली और लापरवाही पर गंभीर सवाल उठाए।

अदालत ने सख्त लहजे में पूछा कि जब जुस्को (टाटा स्टील यूआईएसएल) को म्युनिसिपल कानून की जानकारी थी, तो उसने अवैध भवनों के बिजली-पानी कनेक्शन क्यों नहीं काटे? साथ ही कोर्ट ने यह भी पूछा कि जेएनएसी ने आखिर जुस्को को कनेक्शन हटाने के लिए चिट्ठी कब लिखी? कोर्ट में पेश हुए अधिकारी सवाल का जवाब नहीं दे सके।

बिल्डरों और पार्किंग अतिक्रमण पर रिपोर्ट ही नहीं

राकेश झा बनाम झारखंड सरकार मामले की सुनवाई में अधिवक्ता अखिलेश श्रीवास्तव ने अदालत को बताया कि पूर्व के आदेश में हाई कोर्ट ने जेएनएसी को कई निर्देश दिए थे। इनमें पार्किंग पर कब्जा करने वालों की सूची, अवैध निर्माण वाले बिल्डरों पर हुई कार्रवाई और सीसी मिलने तथा न मिलने वाली इमारतों का टेबुलर फॉर्म में विस्तृत ब्योरा शामिल था।

इसके अलावा, अदालत ने यह जानकारी भी मांगी थी कि बिना सीसी वाली इमारतों से बिजली बिल कमर्शियल या सामान्य किस दर पर वसूला जा रहा है।

लेकिन जेएनएसी ने अपने शपथ पत्र में न तो सारणीबद्ध जानकारी प्रस्तुत की और न ही आपूर्ति दरों पर कोई विवरण दिया। अदालत ने इसे अपने आदेश की सीधी अवमानना माना और तीखी टिप्पणी की कि यह रवैया स्वीकार्य नहीं।

टाटा स्टील पर दोष मढ़ने की कोशिश को अदालत ने रोका

सुनवाई के दौरान जेएनएसी की ओर से तर्क दिया गया कि विभाग अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चला रहा है और जुर्माना वसूल रहा है। साथ ही बताया गया कि जेएनएसी ने टाटा स्टील को पत्र लिखकर पूछा था कि बिना सीसी के बिजली-पानी कनेक्शन क्यों दिए जा रहे हैं।

इस पर अदालत ने उन्हें तुरंत रोकते हुए पूछा क‍ि सिर्फ चिट्ठी लिखने से क्या होगा?जुस्को को कानून पता था, तो अवैध कनेक्शन हटाए क्यों नहीं? खंडपीठ ने दोबारा पूछा कि यह चिट्ठी किस तारीख को जारी की गई, परंतु अदालत को कोई जवाब नहीं मिला।

अगली सुनवाई रिज्वाइंडर के बाद

मामले में आगे की कार्यवाही को लेकर अदालत ने याचिकाकर्ता पक्ष के अधिवक्ताओं अखिलेश श्रीवास्तव और नेहा अग्रवाल से पूछा कि वे अपना प्रतिउत्तर(रिज्वाइंडर) कब दाखिल करेंगे। अधिवक्ताओं ने तीन दिन का समय मांगा, लेकिन अदालत ने सात दिन का समय देते हुए कहा कि रिज्वाइंडर दाखिल होते ही मामले की अगली सुनवाई तय की जाएगी।

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होटल अतिथि के कमरे Seal करने पर अदालत नाराज, बंद तीनों कमरे खोलने का निर्देश

झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस राजेश कुमार की अदालत में जमशेदपुर स्थित अतिथि होटल के तीन कमरों को सील किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर बुधवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद अदालत ने होटल के सभी तीनों कमरों को तुरंत खोलने का निर्देश दिया है।

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सुनवाई के दौरान मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य के डीजीपी, जमशेदपुर एसएसपी और सीतारामडेरा थाना के तत्कालीन थाना प्रभारी भी कोर्ट में शारीरिक रूप से उपस्थित हुए। अदालत ने पुलिस अधिकारियों से तीखे अंदाज में पूछा कि होटल के कमरे अब तक सील क्यों रखे गए हैं और किस आधार पर इतना लंबा समय बीत जाने के बाद भी उन्हें नहीं खोला गया।

डीजीपी की ओर से अदालत को बताया गया कि संबंधित मामले में जांच जारी है, इसलिए कमरे सील रखे गए थे। इस पर अदालत ने स्पष्ट किया कि पुलिस अपनी जांच जारी रख सकती है, लेकिन होटल के कमरों को सील रखने का कोई औचित्य नहीं है।

अदालत ने कहा, जांच अपनी जगह है, लेकिन कमरे खोल दिए जाएं। गौरतलब है कि होटल में अवैध गतिविधियों के आरोप में कुछ लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिन्हें बाद में पुलिस ने पीआर बांड पर छोड़ दिया।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने होटल के तीन कमरों को सील कर दिया था, जिसे लेकर होटल प्रबंधन ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। अदालत के ताजा आदेश के बाद होटल के तीनों कमरों पर लगी सील हटाई जाएगी।

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शेख हसीना को सजा ए मौत के बाद भ्रष्टाचार मामले में अब 21 साल की जेल

बांग्लादेश की राजधानी ढाका के एक कोर्ट ने पदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को भ्रष्टाचार के आरोप में 21 साल जेल की सजा सुनाई है। शेख हसीना को यह सजा ऐसे समय पर सुनाई गई, जब इससे पहले ICT ने उन्हें मौत की सजा सुना चुका है।

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दरअसल, ढाका के स्पेशल जज 5 मोहम्मद अब्दुल्ला अल मामून ने शेख हसीना को तीन प्लॉट फ्रॉड केस में 7-7 साल की सजा सुनाई है।

शेख हसीना पर लगे सरकारी प्लॉट बांटने के आरोप

बता दें कि बांग्लादेश के एंटी-करप्शन कमीशन (ACC) ने पिछले जनवरी में शेख हसीना और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ ढाका के पुरबाचल इलाके में कथित तौर पर गैरकानूनी तरीके से सरकार प्लॉट बांटने के लिए छह अलग-अलग मामला दर्ज कराए थे। बाकी तीन मामलों में फैसला 1 दिसंबर को सुनाया जाएगा।

कोर्ट ने शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद जॉय को पांच साल जेल और 100,000 Tk का जुर्माना लगाया। कोर्ट ने शेख हसीना की बेटी साइमा वाजेद पुतुल को पांच साल की सजा सुनाई है।

ICT ने शेख हसीना को मानवाता के खिलाफ अपराधों का दोषी माना

गौरतलब है कि बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) ने जुलाई 2024 में सरकार के विरुद्ध प्रदर्शनों को दबाने की शेख हसीना की कोशिशों के लिए उन्हें मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी माना और हसीना को मौत की सजा सुनाई।

इस दौरान शेख हसीना और उनके परिवार के पास इन मामलों में कोई वकील नहीं था। हालांकि, उन्होंने अलग-अलग भाषणों और बयानों में किसी भी भ्रष्टाचार के आरोपों में शामिल होने से इनकार किया है।

यूनुस सरकार को भारत की दो टूक

इन सब के बीच बुधवार को भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत सरकार अभी बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के उन अनुरोध की जांच कर रही है, जिसमें पूर्व बांग्लादेशी पीएम शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग की गई है।

मीडिया ब्रीफिंग के दौरान MEA के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि नई दिल्ली को इस मामले पर ढाका से औपचारिक रूप से जानकारी मिली है। जिसमें इस बात पर जोर दिया गया है कि भारत अपनी चल रही न्यायिक और आंतरिक कानूनी प्रक्रियाओं के हिस्से के रूप में बांग्लादेश की स्थिरता और उसके लोगों की भलाई के लिए प्रतिबद्ध है। रणधीर जायसवाल ने कहा कि हमें एक अनुरोध बांग्लादेश की ओर से प्राप्त हुआ है, इसकी जांच कर रहे हैं।

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ड्यूटी पर निकले युवक की मिली संदिग्ध मौत की खबर, परिवार में मचा कोहराम

आरआईटी थाना क्षेत्र के कुलुपटांगाबस्ती में रहने वाले मनीष वाजपेयी (36) की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। इससे क्षेत्र में सनसनी फैल गई है। मृतक की पत्नी रिंकू कुमारी ने आदित्यपुर थाना प्रभारी को आवेदन सौंपकर जांच की मांग की है।

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घटना के संबंध में परिजनों ने बताया कि बीते सोमवार, 24 नवंबर की रात मनीष अपने मित्र श्रीराम के साथ दोपहिया वाहन से ड्यूटी के लिए निकले थे।

अगले दिन, बुधवार रात मनीष ने घर पर फोन कर जानकारी दी कि वे भोजन करने के लिए वापस लौट रहे हैं। इसके बाद काफी समय बीत जाने पर भी वे घर नहीं पहुंचे।

जब परिजनों ने संपर्क करने की कोशिश की तो मनीष का मोबाइल फोन बंद मिला, जिससे परिजन चिंतित हो उठे। इसी बीच देर रात करीब 12:30 बजे टीएमएम की ओर से परिजनों को फोन पर सूचना दी गई कि मनीष की स्थिति गंभीर है और उन्हें टीएमएच में भर्ती कराया गया है।

परिजन तुरंत अस्पताल पहुंचे, जहां उन्हें बताया गया कि मनीष की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो चुकी है। यह सुनते ही परिवार में कोहराम मच गया।

रिंकू कुमारी ने आवेदन में स्पष्ट रूप से कहा है कि उनके पति की स्वाभाविक मौत नहीं हुुई है। उन्होंने पुलिस से पूरे मामले की जांच की मांग की है।

पुलिस ने आवेदन प्राप्त होने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने घटना स्थल, कंपनी परिसर, तथा मनीष के साथ अंतिम समय में मौजूद रहे लोगों से पूछताछ शुरू कर दी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर पुलिस कार्रवाई करेगी।

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गंभीर चूक: एमजीएम ब्लड बैंक में औचक निरीक्षण, तैनात अधिकारी नदारद

महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज अस्पताल के ब्लड बैंक में गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। हाल ही में ब्लड बैंक का औचक निरीक्षण करने पहुंचे प्रिंसिपल डॉ. दिवाकर हांसदा ने पाया कि ड़यूटी पर तैनात एक भी पदाधिकारी मौके पर मौजूद नहीं था।

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यह घटना 12 नवंबर की शाम करीब 6.30 बजे की है। ब्लड बैंक जैसी संवेदनशील और जरूरी सेवा में अधिकारियों की अनुपस्थिति को लेकर प्रिंसिपल ने कड़ी नाराजगी जताई है।

उन्होंने पैथोलॉजी और ब्लड बैंक विभागाध्यक्ष को भेजे पत्र में कहा है कि यह अत्यंत गंभीर लापरवाही है। ब्लड बैंक में सातों दिन, 24 घंटे कम से कम एक चिकित्सक की उपस्थिति अनिवार्य की जाए।

इसके लिए रोस्टर तैयार कर तत्काल प्रभाव से चिकित्सकों की तैनाती सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। प्रिंसिपल ने चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसी चूक बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

उन्होंने कहा कि ब्लड बैंक जैसी महत्वपूर्ण इकाई में किसी भी प्रकार की ढिलाई न केवल अस्पताल की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि मरीजों की जान जोखिम में डालती है।

चाईबासा ब्लड बैंक कांड के बाद बढ़ी सतर्कता में भी मिली लापरवाही

गौरतलब है कि हाल ही में चाईबासा ब्लड बैंक में एक बड़ा मामला सामने आया था, जिसमें संक्रमित खून चढ़ाने के कारण कई बच्चे एचआईवी पॉजिटिव पाए गए थे। इस गंभीर प्रकरण के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सभी सरकारी और निजी ब्लड बैंकों में निगरानी और नियमित जांच को अनिवार्य रूप से सख्त करने के निर्देश जारी किए थे।

ऐसे समय में एमजीएम अस्पताल के ब्लड बैंक में इस तरह की लापरवाही सामने आना चिंताजनक है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, ब्लड बैंक जैसे उच्च-संवेदनशील विभाग में तैनात कर्मियों का 24×7 उपलब्ध रहना जरूरी है।

इस औचक जांच ने एक बार फिर ब्लड बैंक प्रबंधन व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल प्रबंधन ने आश्वासन दिया है कि दोषियों की पहचान कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

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झारखंड – ओडिशा को जोड़ने वाली 60 किमी नई रेल लाइन को मिली मंजूरी, चाकुलिया के गांवों की भूमि आएगी रेलवे परियोजना के दायरे में

कोल्हान और पड़ोसी राज्य ओडिशा के लाखों निवासियों के लिए दशकों पुराना सपना अब हकीकत की पटरी पर दौड़ने को तैयार है। केंद्र सरकार के रेल मंत्रालय ने बहुप्रतीक्षित बुरामारा-चाकुलिया नई रेल लाइन परियोजना के निर्माण के लिए पूर्वी सिंहभूम जिले में भूमि अधिग्रहण की आधिकारिक अधिसूचना (गजट) जारी कर दी है।

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इस महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम के साथ ही बहरागोड़ा और घाटशिला क्षेत्र के रेल मानचित्र पर आने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। रेल लाइन के लिए बहरागोड़ा अंचल के करीब 13 गांवों (मौजा) की जमीन का विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक किया गया है।

अधिसूचना में हर प्लाट और जमीन की किस्म का ब्योरा

दक्षिण पूर्व रेलवे (निर्माण संगठन) की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक, 59.96 किलोमीटर लंबी इस विशेष रेल परियोजना के लिए निजी जमीन की आवश्यकता है। अधिग्रहण के दायरे में आने वाली जमीनों की प्रकृति अलग-अलग है। इसमें ”दोन” (खेतिहर निचली भूमि) और ”गोड़ा” (ऊपरी टांड़ भूमि) दोनों तरह की जमीनें शामिल हैं।

गजट में ”दोन 1”, ”दोन 2”, ”दोन 3” तथा ”गोड़ा 1”, ”गोड़ा 2”, ”गोड़ा 3” श्रेणी की जमीनों के अलावा, कई मौजा में ”पोखर” (तालाब), ”नाला”, ”मोटी आड़” और ”पुरानी परती” जैसी भूमियों का भी उल्लेख है।

बहरागोड़ा को मिलेगी पहली रेल कनेक्टिविटी

बुरामारा-चाकुलिया रेलखंड का सामरिक और आर्थिक महत्व काफी अधिक है। करीब 60 किलोमीटर लंबी यह लाइन झारखंड के चाकुलिया को ओडिशा के मयूरभंज जिले स्थित बुरामारा से जोड़ेगी।

वर्तमान में चाकुलिया हावड़ा-मुंबई मुख्य मार्ग पर है। इस मिसिंग लिंक के जुड़ने से चाकुलिया से बारीपदा और बालेश्वर की दूरी काफी घट जाएगी।

सबसे बड़ी बात यह है कि बहरागोड़ा, जो अब तक केवल सड़क मार्ग पर निर्भर था, उसे सीधी रेल कनेक्टिविटी मिलेगी। 1639 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना से क्षेत्र में कृषि, व्यापार और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

भू-मालिकों के पास आपत्ति दर्ज कराने का अधिकार

सरकार ने प्रभावित रैयतों को अपनी बात रखने का पूरा मौका दिया है। 30 दिनों के भीतर कोई भी जमीन मालिक, जिसकी जमीन इस अधिसूचना में शामिल है, वह लिखित रूप में अपनी आपत्ति दर्ज करा सकता है।

यह आपत्ति सक्षम प्राधिकारी, यानी पूर्वी सिंहभूम के जिला भूमि अधिग्रहण अधिकारी या दक्षिण पूर्व रेलवे (निर्माण) के उप मुख्य अभियंता के कार्यालय में जमा की जा सकती है। आपत्ति दर्ज कराने वाले लोगों को व्यक्तिगत रूप से या अपने वकील के माध्यम से सुनवाई का अवसर दिया जाएगा। इसके बाद ही सक्षम प्राधिकारी अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेंगे और अधिग्रहण पर अंतिम मुहर लगेगी।

इन गांवों (मौजा) की जमीन होगी अधिग्रहित

बोहोड़ा : थाना संख्या 928, अंचल- बहरागोड़ा
कुमारडुबी : थाना संख्या 948, अंचल- बहरागोड़ा
गौरंगपुर : थाना संख्या 908, अंचल- बहरागोड़ा
भुरशानी : थाना संख्या 916, अंचल- बहरागोड़ा
खैरबनी : थाना संख्या 909, अंचल- बहरागोड़ा
बोनाबुड़ा : थाना संख्या 867, अंचल- बहरागोड़ा
जामडिहा : थाना संख्या 882, अंचल- बहरागोड़ा

वेनागाड़िया
हिजली : थाना संख्या 949
जमीरा : थाना संख्या 929
तोमाबनी : थाना संख्या 900
पारुलिया : थाना संख्या 883

क्या है दोन, गोड़ा और आड़? (जमीन की किस्में)

दोन : यह निचली सतह की उपजाऊ कृषि भूमि होती है, जहां पानी रुकता है। यह धान की खेती के लिए सबसे उत्तम मानी जाती है। इसे 1, 2 और 3 श्रेणी में बांटा गया है (1 सबसे उत्तम)।
गोड़ा : यह ऊपरी सतह की भूमि या टांड़ जमीन होती है। यहां पानी नहीं रुकता। इसमें मोटे अनाज या सब्जियों की खेती होती है।
पोखर : जमीन का वह हिस्सा जो तालाब या जलाशय के रूप में दर्ज है। ”पोखर झाड़ी” का अर्थ है झाड़ियों वाला तालाब।
मोटी आड़: खेतों के बीच की चौड़ी मेड़ जो सीमा निर्धारण करती है।
परती: वह जमीन जिस पर वर्तमान में खेती नहीं हो रही है।

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