एक नई सोच, एक नई धारा

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एक वर्ष पूर्ण होने पर सोरेन सरकार ने अभ्यर्थियों को दिए नियुक्ति पत्र

झारखंड में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार के दूसरे कार्यकाल का एक वर्ष शुक्रवार को पूरा हो गया. इस मौके पर राजधानी रांची के मोरहाबादी मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों में चयनित 8,792 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपे. ये नियुक्तियां उपसमाहर्ता, पुलिस उपाधीक्षक, काराधीक्षक, झारखंड शिक्षा सेवा, जिला समादेष्टा, श्रम अधीक्षक, प्रोबेशन पदाधिकारी, निरीक्षक उत्पाद, दंत चिकित्सक, सहायक आचार्य और कीटपालक सहित अन्य पदों पर की गई हैं.

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मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस मौके पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि ‘अबुआ सरकार’ (अपनी सरकार) के प्रथम वर्ष के साथ ही झारखंड अपने निर्माण के 25 वर्ष पूरे कर गर्व का अनुभव कर रहा है. उन्होंने कहा कि आज राज्य के हजारों युवाओं को सरकारी सेवा में प्रवेश का अवसर मिला है.

सोरेन ने कहा कि सिर्फ इस वर्ष लगभग 9 हजार नियुक्ति पत्र सौंपे जा रहे हैं, जबकि 2024 में कुल 16 हजार सरकारी नियुक्तियां पूरी की गईं. वहीं, निजी क्षेत्र में 8 हजार से अधिक युवाओं को रोजगार मिला है. उन्होंने कहा कि वर्ष 2020 से 2024 के बीच राज्य में 24-25 हजार सरकारी नियुक्तियां और करीब 28 हजार निजी क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध कराए गए.

उन्होंने कहा कि आज यहां जुटा युवा जनसमूह सरकार की पारदर्शी नियुक्ति प्रक्रिया और बढ़ते विश्वास का प्रतीक है. उन्होंने कहा, “25 साल के हमारे युवा राज्य में शायद पहले कभी एक साथ इतनी बड़ी संख्या में नियुक्ति नहीं दी गई होगी.” उन्होंने कहा कि यह अवसर भावुक करने वाला है, क्योंकि राज्य गठन के प्रेरणा स्रोत दिवंगत दिशोम गुरु शिबू सोरेन आज हमारे बीच नहीं हैं.

मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर सरकार के कामकाज में बाधा पहुंचाने का आरोप लगाते हुए कहा कि कई स्तरों पर भ्रम फैलाने और नियुक्ति प्रक्रियाओं को रोकने की साजिश की गई, लेकिन सरकार ने सभी बाधाओं के बावजूद युवाओं को अवसर देने का काम जारी रखा. उन्होंने कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है और किसी प्रकार के ‘पैसे या पैरवी’ का इसमें कोई स्थान नहीं है.

उन्होंने दावा किया कि वर्तमान नियुक्तियों में बड़ी संख्या में महिलाएं और बेटियां शामिल हैं, जो राज्य में सामाजिक बदलाव का संकेत है. उन्होंने चयनित अभ्यर्थियों से राज्य के विकास में साझेदार बनने की अपील की और कहा कि सभी नवपदस्थ अधिकारी अपने-अपने जिलों में जाकर एक-एक युवक को अपने जैसा सक्षम बनाने का संकल्प लें. उन्होंने कहा कि शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थानों के विस्तार से राज्य की आने वाली पीढ़ियां विकास की मुख्यधारा में तेजी से शामिल होंगी.

कार्यक्रम के दौरान कैबिनेट मंत्री राधाकृष्ण किशोर, डॉ. इरफान अंसारी, योगेंद्र प्रसाद, शिल्पी नेहा तिर्की, संजय प्रसाद, सुदिव्य कुमार सोनू, दीपिका पांडेय सिंह, हफीजुल अंसारी, चमरा लिंडा, दीपक बिरूआ, सांसद महुआ माजी और विधायक कल्पना सोरेन सहित कई जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे.

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कल से चलेगा ‘अतिक्रमण हटाओ अभियान’, सड़कों पर पूरी सख्ती से तैयारी!

शहर में सड़कों के किनारे फैले अतिक्रमण को हटाने के लिए प्रशासन कल से एक सघन अतिक्रमण हटाओ अभियान शुरू करने जा रहा है. इसे लेकर गुरुवार को ADC भगीरथ प्रसाद की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें टाटा स्टील, यूसिल, जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति, मानगो अधिसूचित क्षेत्र समिति और जुगसलाई नगर परिषद के अधिकारी उपस्थित थे.

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बैठक में निर्णय लिया गया कि सरकारी और कंपनी लीज वाली जमीन पर किए गए सभी अतिक्रमणों को कड़ाई से हटाया जाएगा. विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाएगा, जहाँ सड़क किनारे अतिक्रमण के कारण जाम की समस्या गंभीर रूप ले चुकी है.
प्रशासन ने साफ कहा है कि ट्रैफिक सुचारू करने के लिए सड़क किनारे किए गए सभी अवैध निर्माण हटाए जाएंगे.

इसके लिए जमशेदपुर पूर्वी और जमशेदपुर पश्चिमी क्षेत्रों के लिए दो अलग-अलग कमेटियाँ बनाई गई हैं. ये कमेटियाँ हर 15 दिनों में ADC के साथ समीक्षा बैठक करेंगी और अपनी रिपोर्ट पेश करेंगी.

इसके अलावा, नगर निकायों और टाटा स्टील की टीम पूरे शहर में भ्रमण कर अतिक्रमण की सूची तैयार करेगी, जिसके आधार पर अभियान चलाया जाएगा. उधर, साकची क्षेत्र में माइकिंग कर लोगों को पहले ही चेतावनी दी जा चुकी है कि प्रशासन कल से बड़े स्तर पर कार्रवाई शुरू करने वाला है.

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उपायुक्त ने जन शिकायत निवारण दिवस में सुनी नागरिकों की समस्याएं, प्राप्त आवेदनों पर समयबद्ध कार्रवाई हेतु पदाधिकारियों को किया निर्देशित

समाहरणालय स्थित कार्यालय कक्ष में उपायुक्त श्री कर्ण सत्यार्थी ने जन शिकायत निवारण दिवस में विभिन्न प्रखंडों एवं शहरी क्षेत्रों से आए नागरिकों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं/ सुझावों को सुना । इस दौरान पेंशन, आर्थिक सहयोग, दुकान आवंटन, लंबित वेतन भुगतान, घरेलू विवाद, जमीन विवाद, चिकित्सा सहयोग, अवैध जमाबंदी को रद्द करने, आधार सीडींग, अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति, स्थानांतरण संबंधी, नाली निर्माण, म्यूटेशन, ऋण माफी, रास्ता निर्माण सहित जनहित के अन्य मुद्दों से संबंधित आवेदन प्राप्त हुए।

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उपायुक्त द्वारा प्राप्त आवेदनों को संबंधित विभागीय पदाधिकारियों को अग्रसारित करते हुए निदेशित किया गया कि प्रत्येक आवेदन पर समयबद्ध कार्रवाई हो, इसके लिए सभी विभाग जिम्मेदारी के साथ कार्य करें। समाधान में अनावश्यक विलंब नहीं हो। जन शिकायत निवारण दिवस का उद्देश्य लोगों की समस्या को सीधे सुनकर उनका त्वरित समाधान सुनिश्चित करना है। उन्होंने पदाधिकारियों को नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया।

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झारखंड आंदोलनकारी सह झारखंड मुक्ति मोर्चा का वरिष्ठ नेता युद्धेश्वर सिंह भोक्ता का इलाज के दौरान निधन

रामगढ़ जिले के मांडू प्रखंड अंतर्गत झारखंड मुक्ति मोर्चा को वरिष्ठ नेता सह झारखंड आंदोलनकारी और भोक्ता समाज के केंद्रीय संरक्षक युद्धेश्वर सिंह भोक्ता का रांची के मेदांता अस्पताल में इलाज के दौरान गुरुवार को निधन हो गया l

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इस खबर से पूरे कोयलांचल में शोक की लार दौड़ गई l सूत्रों से पता चला है योगेश्वर सिंह गुप्ता लंबे समय से बीमार चल रहे थे किडनी और हार्ट की बीमारी से ग्रसित थे l योगेश्वर सिंह भोक्ता की उम्र 72 वर्ष थी l

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इनका इलाज रांची के मेदांता अस्पताल में चल रहा था l इनका अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव वेस्ट बोकारो ओपी अंतर्गत फकोडीह के श्मशान घाट में किया जाएगा

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रिमोट से चल रही है नीतीश सरकार: सुधीर कुमार पप्पू

जमशेदपुर। समाजवादी चिंतक एवं अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू छपरा तरैया निवासी ने बिहार की नीतीश कुमार सरकार पर आरोप लगाया है कि यह रिमोट से संचालित हो रही है। इसका नियंत्रण दिल्ली से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं गृह मंत्री अमित शाह तथा नागपुर से आरएसएस कर रहा है।

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पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को आवास खाली करने की नोटिस और नोटिस की भाषा से यह स्पष्ट हो गया है कि बिहार में जो सरकार बनी है, वह सामंतवादी एवं मनुवादी सोच से प्रेरित है।

दिखावे के तौर पर पिछड़ा वर्ग के नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री तथा पिछड़ा वर्ग के सम्राट चौधरी को उपमुख्यमंत्री बनाया गया है, लेकिन नौकरशाही के माध्यम से पूरा नियंत्रण दिल्ली और नागपुर से किया जा रहा है।

मंडल आयोग लागू होने के बाद जो सामंतवादी और सांप्रदायिक शक्तियाँ बिहार में कमजोर पड़ गई थीं, उन्हें फिर से शक्ति प्रदान करने का काम तथाकथित ‘सामाजिक न्याय’ के नेता—नीतीश कुमार, जीतन राम मांझी, उपेंद्र प्रसाद कुशवाहा और चिराग पासवान—ने किया है। आने वाला इतिहास और वंचित–शोषित वर्ग इन्हें कभी क्षमा नहीं करेगा।

राष्ट्रीय जनता दल, विशेषकर लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव, दलित, महादलित, पिछड़ा, अति पिछड़ा, वंचित–शोषित एवं प्रगतिशील वर्ग के मसीहा हैं, और इसलिए उनके खिलाफ फर्जी मुकदमे खड़े किए जाते हैं, ताकि उनका समय न्यायालयों में बीतता रहे और वे जनता की आवाज न बन सकें।

बीजेपी और नीतीश कुमार जितनी मनमानी करना चाहें कर लें; आने वाला समय और बिहार की जनता उन्हें उचित सबक सिखाएगी।

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21 वर्षीय युवक ने दुकान में फांसी लगाकर की आत्महत्या, गर्लफ्रेंड से वीडियो कॉल के बाद लगाई फांसी

चांडिल: चौका थाना क्षेत्र के चांदुडीह में गुरुवार दोपहर 21 वर्षीय राहुल मंडल ने अपनी दुकान के अंदर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. घटना तब हुई जब राहुल दुकान में अकेला था और दुकान का शीशे वाला दरवाजा अंदर से लॉक किया हुआ था.

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जानकारी के अनुसार राहुल ने पहले अपनी गर्लफ्रेंड को वीडियो कॉल किया और फिर मोबाइल को खिड़की से बांधकर पूरे घटना क्रम को रिकॉर्ड करने का प्रयास किया. सूत्रों ने बताया कि राहुल ने दुकान के बिछौने के शीट से फंदा बनाकर फांसी लगाई और जीवन समाप्त कर लिया. घटना देख कर राहुल की गर्लफ्रेंड घबरा गई और उसने कॉल काट दी तथा कई बार कॉल कर के भी राहुल से बात नहीं कर पाई.

इसके बाद गर्लफ्रेंड ने राहुल के दोस्तों और बड़े भाई को फोन कर इस घटना की सूचना दी. राहुल का बड़ा भाई रांची में पढ़ाई करता है और रांची में रहता है. आनन-फानन में पिता कृपा मंडल को सूचित किया गया और जब परिवार मौके पर पहुंचा तो दुकान का शीशा का दरवाजा अंदर से बंद मिला और अंदर राहुल लटका हुआ था.

सूचना पाकर चौका पुलिस मौके पर पहुंची और शीशा का दरवाजा तोड़ कर दुकान के अंदर दाखिल हुई. पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सरायकेला सदर अस्पताल भेज दिया.

परिजनों के अनुसार राहुल पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिला के बागमुंडी थाना क्षेत्र के ईलू गांव की तन्नु नामक लड़की से बात करता था और दोनों के बीच हाल में कोई विवाद चल रहा था. यही विवाद आत्महत्या का कारण हो सकता है, ऐसा परिवार वालों का कहना है. चौका थाना प्रभारी सोनू कुमार ने बताया कि प्रथम दृष्टि से यह आत्महत्या लग रहा है और मामले की हर पहलू पर गंभीरता से जांच की जा रही है.

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नौकरी दिलाने के नाम पर 514 युवाओं को नक्सली बनाकर फर्जी सरेंडर मामले में हुई सुनवाई

झारखंड हाईकोर्ट में गुरुवार को बर्ष 2014 में बड़ी संख्या में 514 आदिवासी युवाओं को नौकरी दिलाने के नाम पर नक्सली बताकर फर्जी सरेंडर कराने के चर्चित मामले में सुनवाई हुई. चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ में सुनवाई के दौरान इस मामले को अत्यंत संवेदनशील बताते हुए राज्य पुलिस की भूमिका पर कड़ी टिप्पणी की. सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से डीएसपी रैंक के अधिकारी का शपथपत्र दाखिल किया गया.

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इस पर खंडपीठ ने गहरी नाराजगी जताई और कहा कि इतने गंभीर और संवेदनशील मामले में निम्न स्तरीय अधिकारी का हलफनामा स्वीकार्य नहीं है. इसके साथ ही खंडपीठ ने इस प्रकरण में राज्य के डीजीपी को शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया. खंडपीठ ने इस मामले में पुलिस मुख्यालय से स्पष्ट और विस्तृत स्पष्टीकरण मांगी है. खंडपीठ ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए शीर्ष स्तर से जबाब आवश्यक है.

इस मामले में अब अगली सुनवाई 8 दिसंबर के लिए निर्धारित की है. जिसमें डीजीपी का शपथपत्र अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करना होगा. खंडपीठ ने कहा कि यह मामला सीधे पुलिस की कार्यप्रणाली और युवाओं के संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा है. इस तरह के मामलों में उच्चस्तरीय जबाबदेही जरूरी है. ज्ञात हो कि इस मामले में झारखंड काउंसिल फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स की ओर से जनहित याचिका दायर की गई है.

याचिका में बताया गया है कि बर्ष 2014 में 514 आदिवासी युवकों को नौकरी देने का लालच देकर कोचिंग संस्थान दिग्दर्शन और कुछ पुलिस अधिकारियों की मिलीभगत से नक्सली बताने की साजिश रची गई थी. युवाओं से कहा गया था कि यदि वे सरेंडर प्रक्रिया का हिस्सा बनेंगे तो उन्हें सरकारी नौकरी दिलाई जाएगी. याचिका में यह भी उल्लेख है कि फर्जी सरेंडर की तैयारी के दौरान इन युवकों को पुरानी जेल में बंद रखा गया, ताकि उन्हें वास्तविक नक्सली के रूप में प्रस्तुत किया जा सके.

कहा गया कि पुलिस अधिकारियों ने नक्सलियों के सरेंडर के आंकड़े बढ़ाने के लिए पूरी योजना बनाई थी. युवाओं को झांसा देकर उन्हें नक्सली घोषित करने और फिर उनके सरेंडर को उपलब्धि बताने की तैयारी राज्य स्तर पर की गई थी. राज्य सरकार के वरीय पुलिस अधिकारियों ने करोड़ों रुपए खर्च कराया, ताकि उन्हें केंद्रीय गृहमंत्री के सामने अवार्ड मिल सके.

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झारखंड सरकार के चौथे कार्यकाल की पहली वर्षगांठ पर मोरहाबादी मैदान में भव्य समारोह

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के चौथे कार्यकाल का शुक्रवार को एक बर्ष पूरा हो जायेगा। इसको लेकर राज्य सरकार की ओर से 28 नवंबर को मोरहाबादी मैदान में भव्य समारोह आयोजित किया जायेगा। कार्यक्रम को लेकर सरकार के मुख्यसचिव अविनाश कुमार ने मुख्यमंत्री सोरेन को आमंत्रित किया। कार्यक्रम में हेमंत सरकार के सभी मंत्री भी उपस्थित रहेंगे और अपनी उपलब्धियां बतायेंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विभिन्न विभागों के लगभग 10 हजार अभ्यर्थियों के बीच नियुक्ति पत्र वितरित करेंगे। इसके अलावा परिसंपत्तियों का भी वितरण किया जायेगा। कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग द्वारा तैयारियों को लेकर विस्तृत दिशानिर्देश जारी कर सभी विभागों को वितरण व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है।

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राज्य सरकार की ओर से जारी आदेश में बताया गया है कि झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा प्रतियोगिताए 2023 के माध्यम से झारखंड लोक सेवा आयोग द्वारा अनुशंसित 197 असैनिक अभ्यर्थियों को भी नियुक्ति पत्र प्रदान किया जाएगा। इसके लिए विभागवार अधिकारियों और सहायक कर्मियों की टीम गठित की गई है। प्रतिनियुक्त पदाधिकारियों एवं कर्मियों को सुबह 8 बजे तक स्थल पर उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है।

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स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने दिया बड़ा निर्देश, अब मृतक मरीजों के शव रोकने पर अस्पताल होगा सील

स्वास्थ्य मंत्री डा इरफान अंसारी ने निजी अस्पतालों को मरीज की मौत पर शव रोकने के मामले को अमानवीय, क्रूर और कानूनन अपराध बताया और कहा कि ऐसी हरकत करने वाले अस्पताल को तुरंत सील कर दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार अस्पतालों को भुगतान, संसाधन और सुविधाएँ उपलब्ध करा रही है।

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लेकिन मानवता और संवेदनशीलता अस्पताल प्रबंधन को दिखानी होगी। स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि दुर्घटना पीड़ितों या गंभीर मरीजों को यह कहकर वापस न भेजा जाए कि उनका इलाज कार्ड की कवरेज में नहीं है। किसी मरीज को बिना इलाज लौटाना अस्वीकार्य है। कवरेज को सरल और स्पष्ट बनाया जाय।

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जेलों में भोजन की गुणवत्ता पर झारखंड उच्च न्यायालय ने मांगी विस्तृत रिपोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य की जेलों में कैदियों को परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता की विस्तृत जांच कराने का निर्देश दिया है. रांची के होटवार स्थित बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल में भोजन की गुणवत्ता से संबंधित शिकायतों से जुड़े मामले में गुरुवार को जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली बेंच में सुनवाई हुई.

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शिकायतें आकाश कुमार राय नामक शख्स की ओर से दायर क्रिमिनल अपील के दौरान अदालत के सामने लाई गई थीं. इस दौरान जेल अधीक्षक सुदर्शन मुर्मू और जेलर लवकुश कुमार गुरुवार को हाईकोर्ट में उपस्थित हुए. दोनों अधिकारियों ने कैदियों को दिए जा रहे भोजन की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की.

जेलर ने अदालत को बताया कि अब भोजन पूरी तरह से जेल मैनुअल के अनुसार उपलब्ध कराया जा रहा है और उसमें सुधार सुनिश्चित किया गया है. कोर्ट द्वारा पूर्व में दिए गए निर्देश के अनुसार, गृह सचिव और आईजी जेल की ओर से सभी जिलों की जेलों में भोजन की गुणवत्ता पर तैयार रिपोर्ट के साथ एक शपथ पत्र दाखिल किया गया.

सरकार ने कोर्ट को अवगत कराया कि भोजन की गुणवत्ता में पहले की तुलना में काफी सुधार हुआ है और अब सभी जेलों में मैनुअल के प्रावधानों के अनुरूप भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है. कैदियों के हित में अदालत ने जेल परिसर में कैंटीन संचालित करने की अनुमति भी दी है. साथ ही यह स्पष्ट कर दिया कि भोजन आपूर्ति में किसी भी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो उसकी जिम्मेदारी सीधे जेलर की होगी.

हाईकोर्ट ने झारखंड लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (झालसा) और जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) को राज्य के जिलों का औचक निरीक्षण कर दो सप्ताह के भीतर जेलों में भोजन पर अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट में दाखिल करने का आदेश दिया है. मामले की अगली सुनवाई 11 दिसंबर को निर्धारित की गई है.

कोर्ट ने झालसा के सदस्य सचिव को निर्देश दिया है कि वे सभी डालसा चेयरमैन को आदेश की प्रति भेजें और आवश्यकतानुसार आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करें.

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