हजारीबाग – हज़ारीबाग़ के छड़वा डैम से अंतरराष्ट्रीय पारा बैडमिंटन खिलाड़ी प्रशांत कुमार सिन्हा का शव बरामद किया गया है. प्रशांत कुमार सिन्हा जमशेदपुर के बिरसा नगर थाना अंतर्गत मकान संख्या-265 बिरसानगर जोन नम्बर 01 का रहने वाले थे . हत्यारे ने उसके शव को प्लास्टिक की बोरी में बांधकर छठवा डैम स्थित पुल के नीचे फेंक दिया. इस घटना को उसकी प्रेमिका रही हजारीबाग के न्यू एरिया निवासी काजल ने अपने नए दोस्त रौनक कुमार के सहयोग से किया. पुलिस ने हत्या के दोनों आरोपियों को गिरफ्त में ले लिया है. जमशेदपुर के बिरसानगर थाना से आई पुलिस की टीम और हजारीबाग के पेलावल पुलिस ने संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए युवती के निशान देही पर शनिवार को क्षत-विक्षत शव को बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया।
जमशेदपुर : टाटा टिनप्लेट डिवीजन सीआरएम मेकेनिकल मेनटेंस के कर्मचारी सी अनिल कुमार जी ने कम्पनी में अपने 29 साल 9 महीने कार्य कर अहम योगदान देकर आज सेवानिवृत्त हुए। सभी कर्मचारियों ने विदाई समारोह कर उन्हें विदाई दी। कम्पनी मे कार्य कर कम्पनी को ऊंचाइयों एवम बुलंदी तक पहुंचाने मे उनका अहम योगदान रहा। कर्मचारियों के कहा कि आप की आगे की जिंदगी भी खुशहाल हो जिस तरह कंपनी में पूरी सुरक्षा के साथ कार्य किया आगे की जिंदगी भी आप सुरक्षा पूर्वक जिए और अपने सेहत का ख्याल रखें। इस मौके पर सीआरएम मैकेनिक मेनटेंस के सभी कर्मचारी कमेटी मेंबर जयशंकर सिंह, नवजोत सिंह सोहल मौजूद थे।
जमशेदपुर : भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता श्री अभय सिंह ने खास महल स्थित जगन्नाथ प्रभु के मंदिर पहुंचकर पूजन किया। ज्ञातव्य हो कि अखबारों में प्रभु जगन्नाथ मंदिर जी के बारे में एक समाचार प्रकाशित हुआ था कि जगन्नाथ मंदिर को तोड़ा जाएगा, साथ ही वहां रेलवे द्वारा नोटिस जारी कर दिया गया। यह समाचार सुनकर रेलवे के वरीय पदाधिकारीयों से श्री अभय सिंह के द्वारा बातचीत की गई। उनको कहा गया यह धार्मिक मामले में रेलवे प्रशासन सोच समझकर निर्णय ले, क्योंकि वह क्षेत्र जहां मंदिर बना है बरसों से लोग पूजा कर रहे हैं। रथ यात्रा निकलता है।
बागबेड़ा, जुगसलाई, कीताडीह हरहरगुटूटू, परसुडीह, खास महल, सुंदर नगर इत्यादि क्षेत्रों का वह एक आस्था का केंद्र बन चुका है। ऐसी स्थिति पर बेवजह इस मामले को तूल देना उचित नहीं है। अभय सिंह ने खास महल स्थित प्रभु जगन्नाथ मंदिर जाकर सारे वस्तु स्थिति की जानकारी ली मंदिर समिति के लोगों से मिले। प्रभु जगन्नाथ जी के दर्शन कर पूजन किया। साथ में प्रसाद भी खाया और हमने किया की किसी प्रकार भी जो हुआ और जो स्थिति बनी है, वह नहीं होगा और यह केवल एक मंदिर का मामला नहीं है, यह समूचे जमशेदपुर के मंदिरों का विश्वास का मामला है।
अभय सिंह ने मंदिर समिति के पदाधिकारी के समक्ष रेलवे के एरिया मैनेजर और उनके बड़े पदाधिकारीयो से वार्ता कर वस्तु स्थिति स्पष्ट की और मांग किया कि आप इस पर संवेदनशीलता के साथ काम करें और किसी प्रकार का संवेदनहीन पैदा ना करें, जिससे यह मामला बिगड़े। उन्होंने आशस्वत किया कि हम लोग जल्दी दौरा करके इस वस्तु स्थिति की जानकारी लेकर निर्णय करेंगे।
जमशेदपुर पूर्वी सीट के विधायक सरयू राय और उनके करीबी मारवाड़ी सम्मेलन के अध्यक्ष कृष्णा अग्रवाल को कुख्यात प्रिंस खान ने ऑडियो जारी कर धमकी दी है। ऑडियो में प्रिंस कह रहा है कि तुम लोग ढुलू महतो को प्रत्याशी बनाने का विरोध इसलिए कर रहे हो क्योंकि वह महतो है।
क्या सिर्फ ढुलू महतो अपराधी है…।
प्रिंस ने ऑडियो में कहा है कि चार नरसंहार कर जो जेल गया, उसने क्या पूजा की थी…। चुनाव के बहाने मेरा नाम लिया तो ठीक नहीं होगा।
वायरल ऑडियो प्रिंस खान का बताया जा रहा है। हालांकि हिन्दुस्तान ऑडियो में प्रिंस की आवाज की पुष्टि नहीं करता है। ऑडियो में विधायक सरयू राय और कृष्णा अग्रवाल को खरी-खोटी सुनाई गई है। कृष्णा अग्रवाल ने भी इस ऑडियो को एक व्हाट्सऐप ग्रुप में साझा किया है।
एसएसपी को जानकारी दे दी है:सरयू
विधायक सरयू राय ने बताया कि ऑडियो की जानकारी एसएसपी को दे दी गई है। इसका सत्यापन कर उचित कार्रवाई की मांग की गई है। बता दें कि कृष्णा अग्रवाल ने दो दिन पहले बाघमारा विधायक ढुलू महतो को प्रत्याशी बनाए जाने का विरोध करते हुए बाबूलाल मरांडी को पत्र भेजा था। सरयू ने भी ढुलू पर निशाना साधा था।
ढुलू महतो ने फोन पर कृष्णा अग्रवाल के पत्र पर आपत्ति जताते हुए इसे बिना नाम लिए सरयू राय की साजिश बताई थी। बातचीत में प्रिंस खान के नाम का भी जिक्र किया गया था। शुक्रवार को धनबाद पहुंच कर सरयू राय ने भी ढुलू महतो पर निशाना साधा था। अपने नाम के जिक्र पर प्रिंस ने कथित ऑडियो जारी किया।
लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर अब बीजेपी का चुनावी कैंपेन शुरू होने वाला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिमी उत्तर प्रदेश की क्रांतिधरा मेरठ से एक बार फिर 31 मार्च को चुनावी रैली का आगाज करेंगे।
इस बार प्रधानमंत्री के साथ पहली बार राष्ट्रीय लोकदल के प्रमुख जयंत चौधरी भी मंच सांझा करेंगे। PM मोदी और बीजेपी का सामने इस बार 2014 के प्रदर्शन को दोहराने की चुनौती होगी, क्योंकि उसका लक्ष्य 370 से ज्यादा सीटों का है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 मार्च को मोदीपुरम में केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान के पास रैली के माध्यम से जनता को संबोधित करेंगे। इससे पहले प्रधानमंत्री ने वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में शताब्दी नगर के माधवकुंज से चुनावी रैली का आगाज किया था। उसका पश्चिमी उत्तर प्रदेश में खासा असर दिखाई दिया था।
2014 के चुनावों में बीजेपी ने पश्चिम की सभी 14 लोकसभा सीटों पर विजय हासिल कर विपक्ष का सूपड़ा साफ कर दिया था। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में भी प्रधानमंत्री ने मेरठ से ही चुनाव प्रचार की शुरूआत की थी। इस बार चुनाव नतीजे बीजेपी के लिए बेहतर साबित नहीं रहे थे। बीजेपी लोकसभा की 14 में से केवल सात सीट पर ही जीत हासिल कर सकी थी।
2019 में सपा बसपा ने दिया था झटका
वर्ष 2019 के चुनाव में पश्चिम में मायावती व अखिलेश यादव मिलकर चुनाव लड़े थे। इसका नतीजा यह रहा कि पश्चिम की सहारनपुर, बिजनौर, नगीना व अमरोहा सीट पर बसपा के उम्मीदवारों ने भाजपा को शिकस्त दी। जबकि सपा ने मुरादाबाद, रामपुर व संभल में जीत हासिल की थी।
वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा व रालोद के बीच गठबंधन हुआ है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कई सीट पर जाट बिरादरी का खासा असर है। जयंत चौधरी का साथ भाजपा को क्या फायदा पहुंचाता है, यह चुनावी नतीजों के बाद ही पता चलेगा। गठबंधन के तहत रालोद प्रत्याशी बागपत व बिजनौर लोकसभा सीट पर अपना भाग्य आजमा रहे हैं। पश्चिम से चुनावी पिच पर भाजपा का नारा अबकी बार चार सौ पार कितना साकार रूप लेता है, यह यहां के चुनाव परिणाम ही बताएंगे।
प्रधानमंत्री की रविवार को होने वाली रैली के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। एसपीजी के प्रमुख आलोक शर्मा ने रैली स्थल पर सुरक्षा का जायजा लिया। उन्होंने आइजी नचिकेता झा को मंच की व्यवस्था को देखकर पुलिस तैनात करने के निर्देश दिए।उन्होंने डीएम दीपक मीणा व एसएसपी रोहित सजवाण के साथ बैठक कर सुरक्षा का खाका तैयार किया। उधर, भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष सतेंद्र सिसौदिया व जिलाध्यक्ष शिवकुमार राणा आदि ने भी रैली स्थल का निरीक्षण किया।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के विरोध में विपक्ष ने राजधानी में रैली बुलाई है. इसे इंडी गठबंधन के शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है.
इस रैली में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, लालू यादव, ममता बनर्जी, फारूक अब्दुल्ला, एमके स्टालिन, उद्धव ठाकरे, अखिलेश यादव समेत करीब 27-28 दलों के नेताओं के पहुंचने की संभावना है.
कांग्रेस ने शनिवार को कहा कि यहां रामलीला मैदान में आयोजित होने वाली विपक्षी गठबंधन ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस’ (इंडिया) की ‘लोकतंत्र बचाओ रैली’ का उद्देश्य किसी व्यक्ति की रक्षा करना नहीं, बल्कि संविधान और लोकतंत्र को बचाना है.
बीजेपी को कड़ा संदेश जाएगा- कांग्रेस
विपक्षी दल कांग्रेस ने कहा कि रविवार को आयोजित होने वाली रैली से लोक कल्याण मार्ग (जहां प्रधानमंत्री का आवास स्थित है) को एक ‘कड़ा संदेश’ दिया जाएगा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली सरकार का ‘समय पूरा हो गया है.’’
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने रैली को लेकर संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि पार्टी प्रमुख मल्लिकार्जुन खरगे और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी सहित अन्य वरिष्ठ नेता रैली को संबोधित करेंगे.
‘ये लोकतंत्र बचाओ रैली’
रमेश ने कहा, ‘‘यह किसी व्यक्ति विशेष पर केंद्रित रैली नहीं है. इसीलिए इसे ‘लोकतंत्र बचाओ’ रैली कहा जा रहा है. यह किसी एक पार्टी की रैली नहीं है, इसमें करीब 27-28 दल शामिल हैं. ‘इंडिया’ गठबंधन के सभी घटक इस रैली में हिस्सा लेंगे.’
उनकी यह टिप्पणी इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है कि आम आदमी पार्टी (आप) के नेता इस रैली को प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार किए जाने के विरोध में आयोजित रैली के रूप में पेश कर रहे हैं.
यह पूछे जाने पर कि क्या सोनिया गांधी रैली में शामिल होंगी, रमेश ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष खरगे और पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी निश्चित रूप से शामिल होंगे जबकि सोनिया गांधी इसमें भाग ले सकती हैं.
मुंबई के बाद दूसरी बड़ी रैली
रमेश ने कहा कि ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस’ (इंडिया) ने 17 मार्च को मुंबई में लोकसभा चुनाव का अपना बिगुल फूंका था और चुनाव तारीख की घोषणा के बाद विपक्षी गठबंधन की यह दूसरी बड़ी रैली होगी.
उन्होंने कहा कि इससे गठबंधन के बीच एकजुटता और एकता का संदेश भी जाएगा. रमेश ने कहा कि रैली में विपक्षी नेता बढ़ती महंगाई, 45 साल में सर्वाधिक बेरोजगारी दर, आर्थिक असमानता, सामाजिक ध्रुवीकरण और किसानों के खिलाफ अन्याय के मुद्दे उठाएंगे. उन्होंने कहा कि एक और प्रमुख मुद्दा जो उठाया जाएगा, वह है ‘केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग’ के माध्यम से विपक्ष को निशाना बनाना.
रमेश ने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों को राजनीतिक रूप से निशाना बनाने के प्रयास में दो मुख्यमंत्रियों और कई मंत्रियों को गिरफ्तार किया गया है. उन्होंने कहा, ‘यह उस मानसिकता को दर्शाता है कि प्रधानमंत्री विपक्षी दलों को राजनीतिक और आर्थिक रूप से कमजोर करना चाहते हैं.’
ये रैली संविधान की रक्षा के लिए- जयराम रमेश
पूर्व केंद्रीय मंत्री रमेश ने कहा कि चुनावी बॉण्ड के माध्यम से ‘जबरन वसूली’ और कांग्रेस को ‘कर आतंकवाद’ (टैक्स टेररिज्म) से निशाना बनाए जाने के मुद्दे भी रैली में उठाए जाएंगे. उन्होंने ब्योरा दिए बिना कहा, ”हमें शुक्रवार को आयकर विभाग के दो और नोटिस मिले.”
रमेश ने कहा कि रैली का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य संविधान की रक्षा करना है. उन्होंने दावा किया कि संविधान खतरे में है, क्योंकि भाजपा नेता कह रहे हैं कि वे इसका पुनर्लेखन करना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि अगर संविधान बदला गया, तो इसमें निहित धर्मनिरपेक्षता, समाजवाद और सामाजिक न्याय खतरे में पड़ जाएगा.
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘रैली किसी एक व्यक्ति की रक्षा के लिए नहीं, बल्कि संविधान की रक्षा के लिए है.’ रमेश ने कहा कि झारखंड के मुख्यमंत्री चंपई सोरेन, राकांपा (एसपी) प्रमुख शरद पवार, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता तेजस्वी यादव, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव सीताराम येचुरी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के महासचिव डी राजा, नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता फारूक अब्दुल्ला, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की प्रमुख महबूबा मुफ्ती, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक) के तिरुचि शिवा, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के डेरेक ओ’ब्रायन समेत अन्य लोग रैली में हिस्सा लेंगे.
रमेश ने कहा कि रैली ‘पिछले 75 वर्षों के सबसे बड़े घोटाले’ चुनावी बॉन्ड योजना पर भी ध्यान केंद्रित करेगी, जिसके माध्यम से भाजपा ने 8,200 करोड़ रुपये एकत्र किए. कांग्रेस की दिल्ली इकाई के प्रमुख अरविंदर सिंह लवली और कांग्रेस के दिल्ली प्रभारी दीपक बाबरिया ने कहा कि लोकतंत्र पर खतरे के विरोध में विशाल रैली आयोजित की जाएगी.
भारतीय नौसेना ने अरब सागर में एक बार अपने साहस का परिचय देते हुए समुद्री लुटेरों के छक्के छुड़ा दिए. दरअसल सोमालिया के समुद्री लुटेरों ने मछली पकड़ने वाले ईरानी जहाज को बीते दिनों हाईजैक कर लिया था.
इन जहाज के चालक दल में 23 पाकिस्तानी नागरिक थे. इंडियन नेवी को जैसे ही इस जहाज के अपहरण की खबर मिली तो वह तुरंत उसके पीछे रवाना हो गई. नौसेना के जवानों ने फिर अदम्य साहस का परिचय देते हुए 29 मार्च को सभी 23 पाकिस्तानियों को छुड़ाने के साथ-साथ 9 समुद्री लुटेरों को आत्मसमपर्ण के लिए मजबूर कर दिया. इंडियन नेवी के इस कारनामे से ये पाकिस्तानी नाविक भी कायल हो गए और उन्होंने ‘इंडिया जिंदाबाद’ के नारे लगाए.
नौसेना ने इस ऑपरेशन से जुड़ा वीडियो शेयर किया है, जिसमें ये पाकिस्तानी नाविक इंडियन नेवी का शुक्रिया अदा करते और ‘इंडिया जिंदाबाद’ के नारे लगाते दिख रहे हैं. घटना के समय मछली पकड़ने वाला जहाज सोकोट्रा के यमनी द्वीप से लगभग 90 एनएम दक्षिण पश्चिम में था, जो अदन की खाड़ी के पास उत्तर पश्चिम हिंद महासागर में है.
समुद्री लुटेरों को भारत लेकर आ रही नौसेना नौसेना के प्रवक्ता द्वारा साझा किए गए एक बयान के अनुसार, भारतीय नौसेना की विशेषज्ञ टीम मछली पकड़ने वाले जहाज ‘अल-कंबर’ की सभी जांच पूरी कर चुकी है. इसमें कहा गया, ‘मछली पकड़ने की गतिविधियों को जारी रखने के लिए पोत को मंजूरी देने से पहले चालक दल में शामिल 23 पाकिस्तानी नागरिकों की गहन चिकित्सा जांच की गई.’ नौसेना इसके साथ ही इन सभी 9 समुद्री लुटेरों को भारत लेकर आ रही. इनके खिलाफ समुद्री लूट रोधी अधिनियम, 2022 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
भारतीय नौसेना ने शुक्रवार को समुद्री लुटेरे रोधी अभियान के तहत 12 घंटे से अधिक के “गहन सामरिक उपायों” के बाद मछली पकड़ने वाले अपहृत ईरानी जहाज और इसके चालक दल को बचा लिया था. इसने कहा, ‘आईएनएस सुमेधा ने शुक्रवार तड़के एफवी ‘अल कंबर’ को रोका और बाद में गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट आईएनएस त्रिशूल भी अभियान से जुड़ गया.’
इसमें कहा गया कि घटना के समय मछली पकड़ने वाला जहाज सोकोट्रा से लगभग 90 समुद्री मील दक्षिण पश्चिम में था और ‘बताया गया कि नौ हथियारबंद समुद्री लुटेरे उसमें सवार हो गए थे.’
समुद्र में नौसेना के साहस की कायल हुई दुनिया भारतीय नौसेना की इस हालिया समुद्री डकैती रोधी कार्रवाई ने प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता के रूप में इसकी भूमिका को और मजबूत किया है, जिसे नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में निभाना चाहती है.
इससे दो सप्ताह पहले नौसेना एक अन्य जहाज ‘रुएन’ और 17 बंधकों को बचाया था तथा लगभग 40 घंटे तक चले अभियान में 35 सशस्त्र समुद्री लुटेरों को पकड़ लिया था. नौसेना के अधिकारियों ने कहा था कि भारतीय नौसेना की कड़ी कार्रवाई के परिणामस्वरूप रुएन पर मौजूद समुद्री लुटेरों ने 16 मार्च को आत्मसमर्पण कर दिया था.
एक दौर में खौफ का प्रयाय रहा कुख्यात माफिया डॉन मुख्तार अंसारी शनिवार (30 मार्च) को सुपुर्द-ए-खाक हो चुका है. उसके दफन होते ही माफिया सरगनाओं की उस तिकड़ी का अंत हो गया जो कभी यूपी-बिहार में खौफ का दूसरा नाम हुआ करते थे.
इस तिकड़ी में दो अन्य डॉन थे अतीक अहमद और मोहम्मद शहाबुद्दीन.
मोहम्मद शहाबुद्दीन ने महज 53 साल की उम्र में 1 मई 2021 को दिल्ली के दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में कोरोना संक्रमण से दम तोड़ दिया था. 63 साल के मुख्तार अंसारी की मौत कॉर्डिएक अरेस्ट की वजह से हुई है. वहीं अतीक अहमद की प्रयागराज के मेडिकल कॉलेज में पुलिस हिरासत में बदमाशों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी. उस वक्त उसकी उम्र करीब 60 साल थी.
माफिया सरगनाओं ने गुनाहों की दुनिया बनाई, बसाई और हत्याओं से आबाद रखा!
यूं कहें तो यूपी और बिहार में गुनाहों की दुनिया बनाने, बसाने और कई हत्याओं के जरिए इसे आबाद रखने वाली इस तिकड़ी का अंजाम कमोबेश एक जैसा ही हुआ है. इन तीनों माफिया सरगनाओं की मौत विवादास्पद हालातों में अस्पताल परिसरों में ही हुई. जहां एक ओर कत्ल और खूनखराबा को खेल समझने वाले मुख्तार अंसारी और मोहम्मद शहाबुद्दीन ने बीमारी के कारण दम तोड़ा तो वहीं अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ को इस तरह मौत के घाट उतार दिया गया जैसा वे किया करते थे. एक तरह से यह उत्तर प्रदेश और बिहार में ‘बाहुबलियों’ के एक युग का अंत है.
एक जैसे थे तीनो डॉन के अपराध
मुख्तार अंसारी, अतीक अहमद और शहाबुद्दीन तीनों के अपराध एक जैसे रहे हैं. दर्जनों लोगों की हत्या के लिए जिम्मेदार माने जाने वाले इन तीनों ने उत्तर प्रदेश से बिहार तक गुनाहों की सीढ़ियां चढ़कर राजनीति में अपना एक युग कायम किया था. पूरा राज्य उन्हें माफिया के रूप में जानता था, जो जमीन पर कब्जा करते थे, भाड़े पर हत्याएं करते थे, अपहरण और जबरन वसूली ही उनके अस्तित्व का आधार था.
राजनीतिक परिवर्तन होते ही शुरू हो गई थी माफिया के अंत की शुरुआत
एक तरफ जहां उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने राजनीतिक लाभ के लिए अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी पर भरोसा किया, वहीं बिहार में यही काम राष्ट्रीय जनता दल ने शहाबुद्दीन के लिए किया. हालांकि दोनों राज्यों में राजनीतिक परिवर्तन होते ही माफिया लोगों के लिए अंत की शुरुआत हो गई थी. गाजीपुर में बीजेपी के विधायक कृष्णानंद राय और प्रयागराज में बसपा के विधायक राजू पाल की जिस तरह सरेआम दिनदहाड़े अंधाधुंध फायरिंग करके हत्या की गई, उसके बाद अतीक और मुख्तार के दुर्दिन की शुरुआत हो गई थी. योगी आदित्यनाथ के सीएम बनने के बाद ही इनके ताबूत में अंतिम कील ठोकी गई.
वहीं शहाबुद्दीन ने पत्रकार राजदेव रंजन की सरेआम हत्या करवाई और चंदा बाबू के बेटों को तेजाब से नहला कर मौत के घाट उतारा जिसके बाद प्रशासन ने उस पर नकेल कसना शुरू कर दिया था. बाद में लालु यादव को अपना नेता और नीतीश कुमार को परिस्थितियों का मुख्यमंत्री बताकर अपने लिए मुसीबत मोल ले ली. जिसके बाद उसे बिहार से तिहाड़ जेल भेज दिया गया और फिर वहां से लौटी तो उसकी लाश.
पलामू : जिले के सदर थाना क्षेत्र के चियांकी के राइस मील के पास एक किराये के मकान से 12 साइबर अपराधियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है. पुलिस ने गिरफ्तार अपराधियों के पास से 23 मोबाइल, आठ कंप्यूटर समेत कई इलेक्ट्रॉनिक सामान बरामद किये हैं. पुलिस गिरफ्तार अपराधियों से पूछताछ कर रही है. पुलिस जानकारी ले रही है कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया. पुलिस की शुरुआती जांच में पता चला है कि साइबर अपराधी गिरोह का विदेशी कनेक्शन है.
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पलामू पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि सदर थाना क्षेत्र के चियांकी इलाके में एक किराये के मकान में कुछ संदिग्ध लोग कई दिनों से रह रहे हैं. सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए सदर थाना की पुलिस ने छापेमारी की. पुलिस को देखते ही साइबर अपराधी भागने लगे. लेकिन पुलिस की टीम ने साइबर अपराधियों को घेर कर पकड़ लिया. पुलिस ने करीब 12 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार अपराधी झारखंड के रांची, हजारीबाग, धनबाद, बोकारो समेत अलग-अलग इलाके के रहने वाले हैं.
हजारीबाग : लोकसभा सीट से इंडिया गठबंधन ने जयप्रकाश भाई पटेल को अपना उम्मीदवार बनाया है. जेपी पटेल के मैदान में आने के बाद मुकाबला रोचक होने की संभावना है. भाजपा के मनीष जायसवाल और कांग्रेस के जेपी पटेल के बीच कड़ा मुकाबला होने के आसार हैं. कांग्रेस पार्टी ने टेकलाल महतो की राजनीतिक पृष्ठभूमि व जातीय समीकरण को साधते हुए जेपी पटेल को उम्मीदवार घोषित किया है. जेपी पटेल के आने के पहले इस सीट पर ऐसा लग रहा था कि भाजपा के मनीष जायसवाल के खिलाफ विपक्षी खेमे में कोई दमदार उम्मीदवार नहीं है. बड़कागांव विधायक अंबा प्रसाद व पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा का नाम इस सीट पर इंडिया गठबंधन से उछलता रहा, लेकिन कांग्रेस पार्टी भाजपा को मात देने के लिये उसके ही घर में सेंधमारी करने में कामयाब हो गयी और भाजपा को भनक तब तक नहीं लगी.
2019 चुनाव की बात करें तो जेपी पटेल ने भाजपा के पक्ष में चुनाव प्रचार किया था. भाजपा के जयंत सिन्हा विजयी हुए थे. उन्हें कुल 728,798 वोट मिले थे. जबकि कांग्रेस के गोपाल साहू को 2,04950 वोट मिले थे. यहां पर भाकपा के भुवनेश्वर प्रसाद मेहता भी अपना भाग्य आजमा रहे थे. उन्हें 32,109 मतों से ही संतोष करना पड़ा था. इस तरह जयंत सिन्हा ने कांग्रेस के गोपाल साहू को पांच लाख से अधिक मतों के अंतर से पराजित किया था. उसकी एक वजह यह भी थी कि जेपी पटेल ने जयंत सिन्हा के पक्ष में प्रचार किया था. मगर अब परिस्थिति बदल गई है. भाजपा के जेपी पटेल अब कांग्रेस के हो गये हैं और मनीष जायसवाल के खिलाफ चुनाव भी लड़ रहे हैं.
हजारीबाग लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में पांच विधानसभा क्षेत्र शामिल है. हजारीबाग सदर सीट पर भाजपा के मनीष जायसवाल, मांडू सीट पर जेपी पटेल जो अब कांग्रेस के हो गये हैं. बरही में उमा शंकर अकेला और बड़कागांव में अंबा प्रसाद कांग्रेस की विधायक हैं. जबकि रामगढ़ में आजसू की सुनीता देवी विधायक है.
2014 के चुनाव परिणाम की बात करें तो भाजपा के जयंत सिन्हा को कुल 4,06931 मत मिले थे, जबकि कांग्रेस के सौरभ नारायण सिंह को 2,47,803 वोट मिले थे. वहीं आजसू ने भाजपा से नाता तोड़कर पूर्व विधायक लोकनाथ महतो को अपना उम्मीदवार बनाया. उन्हें 1,56,186 वोट मिले थे. इस तरह भाजपा के जयंत सिन्हा 1,59,128 मतों के अंदर से कांग्रेस के सौरभ नारायण सिंह को पराजित किया था.
हालांकि 2024 की राह भाजपा के लिए आसान नहीं है. जेपी पटेल को उनके पिता टेकलाल महतो की राजनीतिक पृष्ठभूमि का फायदा मिल सकता है. टेकलाल महतो आंदोलनकारी थे. मांडू विधानसभा में पांच बार विधायक रहे थे. 2004 के लोकसभा चुनाव में टेकलाल महतो झामुमो की टिकट पर गिरिडीह से लोकसभा सीट से चुनाव लड़े थे. टेकलाल महतो ने उस वक्त भाजपा के रवींद्र पांडेय को करीब डेढ़ लाख वोटों के अंतर से हराकर संसद पहुंचे थे. टेकलाल महतो झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक सदस्यों में एक थे. अलग राज्य के आंदोलन में शिबू सोरेन, एके विनोद बिहारी महतो के साथ टेकलाल शामिल थे.
27 सितंबर 2011 को टेकलाल महतो के निधन होने के उपरांत मांडू में हुए उपचुनाव में उनके बेटे जेपी पटेल ने महेश सिंह को हराकर पहली विधायक बने थे. इसके बाद वे लगातार इस सीट पर विधायक हैं. जेपी पटेल हेमंत सोरेन मंत्रिमंडल में पेयजलापूर्ति एवं मद्य निषेध मंत्री भी रह चुके हैं. जबकि मनीष जायसवाल 2014 से लगातार सदर विधानसभा सीट से विधायक हैं. 2014 के विधानसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार प्रदीप प्रसाद को 27129 मतों के अंतर से पराजित कर विधायक बने थे. 2019 के चुनाव में इस सीट पर मनीष जायसवाल 51 हजार से अधिक मतों से जीते थे. उन्होंने कांग्रेस के डॉ. आरसी प्रसाद मेहता को पराजित किया था. इस बार हजारीबाग संसदीय सीट पर मनीष जायसवाल और जेपी पटेल के बीच सीधा मुकाबला होगा.