राँची : झारखंड में सियासी संकट के बीच विधायक दल के नेता चंपई सोरेन को राज्यपाल ने शाम साढ़े 5 बजे राजभवन बुलाया है। चंपई ने मिलने के लिए 3 बजे का समय मांगा था। इस बीच, प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम 2.30 बजे हेमंत सोरेन को लेकर कोर्ट पहुंची है। ED ने 10 दिन की रिमांड मांगी है।
इससे पहले गिरफ्तारी को लेकर सोरेन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि मामले में अर्जेंसी नहीं दिखती। कपिल सिब्बल ने भी मामले पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिस पर कल सुनवाई हो सकती है।
वहीं, महागठबंधन (जेएमएम, आरजेडी, कांग्रेस) अपने विधायकों को हैदराबाद शिफ्ट कर सकता है। सर्किट हाउस में दो ट्रैवलर और एक बस खड़ी है। विधायक दल के नेता चंपई सोरेन सहित 5 MLA रांची में रहेंगे, जो हालात पर नजर रखेंगे। बीजेपी ने भी कल (2 फरवरी) अपने विधायक दल की बैठक बुलाई है।
राँची : हेमंत सोरेन के इस्तीफे के बाद झारखंड की प्रमुख विपक्षी पार्टी भाजपा में रांची से दिल्ली तक हलचल तेज हो गयी है. पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष रांची पहुंच गये हैं. इससे पहले बुधवार को भाजपा के प्रदेश प्रभारी सह लोकसभा प्रभारी लक्ष्मीकांत वाजपेयी भी रांची पहुंचे थे. आज 1 फरवरी की शाम 4 बजे बीएल संतोष प्रदेश कार्यालय में प्रदेश भाजपा के पदाधिकारियों के साथ बैठक करेंगे और प्रदेश की ताजा राजनीतिक हालात पर विपक्षी पार्टी की भूमिका पर चर्चा करेंगे. इस बैठक में आगे की रणनीति भी तैयार होगी. (जारी…)
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता रमाकांत महतो ने कहा कि दुर्भाग्यवश अगर चंपाई सोरेन झारखंड के मुख्यमंत्री बनते हैं तो झारखंड में भ्रष्टाचार और बढ़ेगा. पहले भ्रष्टाचार और लूट का हिस्सा हेमंत सोरेन तक जाता था, लेकिन अब भ्रष्टाचार कर जो लूट होगा, उसमें एक बड़ा हिस्सा चंपाई सोरेन से होते हुए हेमंत सोरेन तक पहुंचेगा. ऐसे में लूट का प्रतिशत भी बढ़ेगा.
बजट 2024 (Budget 2024) की घोषणा हो चुकी है. हालांकि, ये अंतरिम बजट था. माने बहुत बदलाव की उम्मीद नहीं थी.लेकिन कुछ तो थी ही. वित्त मंत्री निर्मला सीतरमण (Finance Minsiter Nirmala Sitharaman) ने बजट पेश करते हुए कुल 57 मिनट का भाषण दिया.
11:01 बजे भाषण शुरू हुआ, 11:58 पर ख़त्म. लगभग घंटे भर में वित्त मंत्री के भाषण से क्या मुख्य बातें निकल कर आईं, उस पर ग़ौर कर लेते हैं.
– अपने भाषण के शुरूआत में ही वित्त मंत्री ने मोदी सरकार की कई उपलब्धियां गिनाईं. कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था में कई सकारात्मक परिवर्तन देखे गए हैं. प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना, पीएम विश्वकर्मा योजना और किसान सम्मान योजना का ज़िक्र किया.
– नरेंद्र मोदी सरकार का इनफ़्रास्ट्रक्चर पर ख़ास फ़ोकस रहता है. वित्त मंत्री ने इसे लेकर एलान किया:
“पिछले 4 सालों में पूंजीगत ख़र्च में तीन गुना बढ़त देखी गई है. नतीजा ये कि आर्थिक विकास और रोज़गार बढ़ा है.”
टैक्स में कोई बदलाव नहीं
वित्त मंत्री ने कहा कि आयात शुल्क समेत डायरेक्ट और इन-डायरेक्ट टैक्सों की समान दरें बरक़रार रखी जाएंगी. मार्च की आख़िरी तारीख़ों में इनकम टैक्स की वेबसाइट खोेलने या अपने CA मित्रों को परेशान करने वालों को ये उम्मीद थी कि इनकम टैक्स के सेक्शन-80C के तहत मिलने वाली छूट बढ़ेगी. निवेश कर के जो डेढ़ लाख तक बचाया जा सकता है, वो ढाई लाख तक बच पाएगा. लेकिन ऐसा नहीं हुआ.
– हालांकि, वित्त मंत्री ने बताया कि टैक्स फ़ाइल करने वालों की संख्या 2.4 गुना बढ़ गई है. बीते दस सालों में – 2014 के बाद से – डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन तीन गुना हो गया है.
– ‘तकनीक-प्रेमी युवाओं के लिए ये एक स्वर्ण युग होगा’ – ऐसा वित्त मंत्री का कहना है. उन्होंने एलान किया कि 1 लाख करोड़ रुपये का कोष स्थापित किया जाएगा. यहां से कम या शून्य ब्याज दरों पर फ़ाइनैंस दिया जाएगा. इससे प्राइवेट सेक्टर में अनुसंधान और नवाचार को प्रोत्साहन मिलेगा.
– एलान किया गया है कि पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राज्यों को दीर्घकालिक ब्याज मुक्त क़र्ज़ दिया जाएगा.
रेलवे को लेकर घोषणाएं
‘मेट्रो’ और ‘नमो भारत’ समेत और परियोजनाओं को ज़्यादा से ज़्यादा शहरों तक फैलाया जाएगा. क़रीब 40,000 रेल बोगियों को ‘वंदे भारत’ कोच में बदला जाएगा. साथ में तीन नए रेल कॉरिडोर लाने की बात कही है –
ऊर्जा, खनिज और सीमेंट कॉरिडोर
पोर्ट कनेक्टिविटी कॉरिडोर
उच्च यातायात घनत्व कॉरिडोर.
– राजकोषीय घाटा, यानी देश के राजस्व और ख़र्च के बीच के अंतर को घटाना है. टार्गेट ये है कि मौजूदा 5.8% से घटाकर वित्त वर्ष 2025 तक 5.1% किया जाए. और, वित्त वर्ष 2026 में इसे 4.5% से कम करने का लक्ष्य रखा गया है.
बजट में इनकम टैक्स को लेकर वित्त मंत्री ने क्या ऐलान किया?
ग़रीबों, महिलाओं, युवाओं और किसानों के लिए क्या?
वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि ये वर्ग सरकार का फ़ोकस एरिया हैं. उनकी ज़रूरतें, उनकी आकांक्षाएं और उनका कल्याण प्राथमिकता है. हालांकि, उनके लिए कोई विशेष स्कीम या योजना लॉन्च नहीं की गई है.
– सरकार एक ऐसी योजना शुरू करने का दावा कर रही है, जिसका मक़सद मध्यम वर्ग को छत देना है. वो वर्ग, जो किराए के घरों, झुग्गियों, चॉल या अनधिकृत कॉलोनियों में रहते हैं. वहीं, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के तहत 2 करोड़ और घर बनाने की भी घोषणा की गई है.
– वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि ‘आयुष्मान भारत’ योजना के तहत स्वास्थ्य सेवा कवर सभी आशा कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं तक बढ़ाया जाएगा.
जमशेदपुर : सीतारामडेरा थाना अंतर्गत शहीद बाबा दीप सिंह जी गुरुद्वारा के मौजूदा प्रधान सरदार हरजिंदर सिंह जी की अध्यक्षता में बुधवार शाम एक बैठक बुलाई गई। जिसका मुख्य एजेंडा था सीतारामडेरा गुरुद्वारा का रजिस्ट्रेशन आवेदक संख्या 6413, निबंधन संख्या 710, 28 दिसम्बर 2016 को करवाया गया था। जिसकी ऑडिट रिपोर्ट को रजिस्ट्रार कार्यालय में जमा करवाना अनिवार्य था। (जारी…)
इस बाबत रजिस्टर्ड सदस्य सरदार परम जीत सिंह प्रधान से मांग की गयी कि 28 दिसंबर 2016 से 31 मार्च 2023 तक की ऑडिट रिपोर्ट रजिस्टर्ड सदस्यों को अविलंब देने की कृपा करें ताकि ऑडिट रिपोर्ट को रजिस्ट्रार कार्यालय में जमा किया जा सके। बैठक में यह भी कहा गया कि अगर दो दिन के अन्दर रजिस्टर्ड सदस्यों को ऑडिट रिपोर्ट नहीं मिलती है तो सदस्य कानूनी कार्रवाई करने में बाध्य होंगे। शहीद बाबा दीप सिंह जी गुरुद्वारा के रजिस्टर्ड सदस्य हैं – बलबीर सिंह, सुरजीत सिंह, अमरजीत सिंह, परमजीत सिंह, गुरपाल सिंह।
चार साल तक सरकार चलाने के बाद कथित जमीन घोटाले में घिरे हेमंत सोरेन को मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटना पड़ा। 6 घंटे से अधिक समय तक पूछताछ के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हेमंत सोरेन को गिरफ्तार कर लिया। 15 नवंबर 2000 को अस्तित्व में आए झारखंड में अब तक 6 नेता सीएम बने और इनमें से तीन की गिरफ्तारी हो चुकी है। ढाई दशक के इतिहास में झारखंड में अब तक तीन बार राष्ट्रपति शासन भी लग चुका है, जबकि एक ही सीएम रघुबर दास 5 साल का कार्यकाल पूरा कर पाए।
झारखंड में अब तक 6 छह मुख्यमंत्री बने हैं इनमें से तीन गिरफ्तार हुए। हेमंत सोरेन से पहले उनके पिता शिबू सोरेन और मधु कोड़ा गिरफ्तार हो चुके हैं। बाबूलाल मरांडी, अर्जुन मुंडा और रघुवर दास को ऐसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़ा। तीनों बीजेपी के ही मुख्यमंत्री रहे हैं।
मधु कोड़ा को क्यों जाना पड़ा था जेल? मुख्यमंत्री रहते हुए मधु कोड़ा भ्रष्टाचार के केस में फंस गए थे। 2006 से 2008 तक यूपीए के साथ गठबंधन सरकार चलाने वाले मधु कोड़ा को जेल जाना पड़ा था। उन पर मनी लॉन्ड्रिंग और आय से अधिक संपत्ति के आरोप लगे थे। कोड़ा कथित तौर पर माइनिंग घोटाले में शामिल थे। सीबीआई और ईडी ने आरोप लगाया कि कोयला खदानों के आवंटन के बदले कोड़ा ने सीएम रहते रिश्वत ली थी। एक रिपोर्ट के मुताबिक कोड़ा और उनके सहयोगियों ने इस तरह 4 हजार करोड़ रुपए कमाए। एक मनी लॉन्ड्रिंग केस में उनकी 144 करोड़ की संपत्ति जब्त की गई थी। 2009 में गिरफ्तारी के बाद कोड़ा को 2013 में जमानत मिली। 2017 में उन्हें दोषी करार दिया गया और 25 लाख जुर्माने के साथ 3 साल की सजा सुनाई गई। उन्हें हवाला लेनदेन के चार और केस और आय से अधिक संपत्ति वाले मामले में भी दोषी करार दिया गया।
शिबू सोरेन भी हो चुके गिरफ्तार हेमंत सोरेन के पिता और पूर्व सीएम शिबू सोरेन को भी गिरफ्तार हो चुके हैं। शिबू सोरेन को दिल्ली की एक अदालत ने 5 दिसंबर 2006 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। 1994 में उनके निजी सचिव शशि नाथ झा की हत्या के मामले में उन्हें दोषी बताया गया था। शिबू सोरेन उस वक्त मनमोहन सिंह सरकार में कोयला मंत्री थे। हालांकि, 2007 में दिल्ली हाई कोर्ट ने शिबू सोरेन को बरी कर दिया था और सबूतों के अभाव को लेकर सीबीआई की खिंचाई की थी। अप्रैल 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने भी दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा था
पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की याचिका पर आज गुरुवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. हालांकि एक्टिंग चीफ न्यायाधीश जस्टिस एस चंद्रशेखर और जस्टिस अनुभा रावत चौधरी की बेंच से आज उन्हें कोई राहत नहीं मिली है. ED की ओर से ASGI एस वी राजू ने अपना पक्ष रखा. दोनों पक्षों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत के समक्ष अपनी अपनी दलीलें पेश की.
ईडी के समन के खिलाफ सोरेन ने हाईकोर्ट में दायर की थी याचिका
बता दें कि हेमंत सोरेन ने ईडी के समन के खिलाफ हाइकोर्ट में याचिका दायर की थी. इस याचिका में सीएम ने ED द्वारा उनको सेक्शन 50 के तहत दिये गये समन को चुनौती दी. याचिका में कहा गया कि ईडी अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर बार-बार उन्हें समन कर रही है. दायर याचिका में ईडी की कार्यवाही को गलत बताया गया. सोरेन का कहना कि ईडी के अधिकारी उन पर जांच में सहयोग नहीं करने का आरोप लगा रहे हैं. इस आधार पर उन्हें गिरफ्तार करना चाहते हैं. याचिका में सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का हावाला दिया है, जिसमें कहा गया है कि जांच एजेंसी के अधिकारी जांच में सहयोग नहीं करने के आधार पर किसी को गिरफ्तार नहीं कर सकते हैं.
आदिवासी मूल संघ ने आज एक फरवरी को झारखंड बंद बुलाया है. इसको लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के महासचिव सह प्रवक्ता विनोद कुमार पांडे ने कहा कि आज के झारखंड बंद से पार्टी का कोई लेना-देना नहीं है.
गोलमुरी थाना अंतर्गत देबुन बगान में हनुमान मन्दिर के ठीक पिछले सरकारी चापाकल और भूमि पर दबंगों द्वारा अतिक्रमण कर के चारदिवारी निर्माण कर लेने का मामला सामने आया है. कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता दिबेश राज उर्फ़ राजा, दिव्यांशु उर्फ़ रौनक सहित उनके गुर्गों पर देबुन बगान में जमशेदपुर अक्षेस की अनुशंसा पर कुछ वर्षों पूर्व लगे सरकारी चापाकल को मिट्टी से दाबकर चारदीवारी निर्माण कर लेने का आरोप शिकायत में लगाया गया है।
लिखित शिकायत भाजपा कार्यकर्ता विक्रम पंडित ने किया है जिनपर एक सप्ताह पहले दिबेश राज और उनके नशेड़ी गुर्गों ने मारपीट और छिनतई किया था. भाजपा कार्यकर्ता विक्रम पंडित ने जिला उपायुक्त सहित अनुमंडल पदाधिकारी और जमशेदपुर अक्षेस के विशेष पदाधिकारी के समक्ष लिखित शिकायत करते हुए भू माफियाओं के कब्जे से सरकारी चापाकल और भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की माँग की है. विक्रम पंडित ने शिकायत में जिक्र किया है कि गोलमुरी के देबुन बगान बस्ती के लोग दिबेश राज उर्फ़ राजा, दिव्यांशु उर्फ़ रौनक और उनके नशेड़ी गुर्गों से भयक्रांत रहते हैं. सरकारी भूमि और परिसंपत्तियों पर अवैध कब्जा कर बेचना इनका पेशा है.
विरोध करने पर मारपीट करते हैं. सत्तारूढ़ राजनीतिक पार्टी के बड़े नेताओं द्वारा संरक्षण प्राप्त होने की वजह से थाना में इनके विरुद्ध शिकायत पर सुनवाई नहीं होती है. भाजपा कार्यकर्ता विक्रम पंडित ने उपायुक्त, एसडीओ सहित जमशेदपुर अक्षेस के विशेष पदाधिकारी से त्वरित संज्ञान लेकर कार्रवाई का आग्रह किया है. विक्रम ने बताया कि एक सप्ताह के अंदर यदि चापाकल और सरकारी भूमि से कब्जा नहीं हटाया जाता तो मामले को लेकर सक्षम न्यायालय में परिवाद दायर करेंगे।
निर्वतमान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी के विरोध में एक फरवरी को समस्त आदिवासी मूलवासी संगठन ने झारखंड बंद का एलान किया है. बंद को देखते हुए देवघर जिले में लॉ एंड आर्डर की समस्या की आशंका के मद्देनजर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये गये हैं.
इस संदर्भ में सीसीआर डीएसपी आलोक रंजन ने बताया कि सभी थानों को अलर्ट मोड पर रखा गया है. वहीं, एक्सट्रा फोर्सेस मुहैया कराये गये हैं. ताकि किसी भी विषम परिस्थिति से त्वरित गति से निबटा जा सके. वहीं कंट्रोल रूम में टीयर गैस व क्यूआरटी को तैयार मोड में रहने का निर्देश दिया गया है. साथ ही कंट्रोल रूम के समीप जवानों के साथ बस तैयार रखा गया है, ताकि किसी तरह की सूचना पर पुलिसकर्मी वहां तुरंत पहुंच सकें. नगर थाना क्षेत्र में विशेष फोर्स के साथ जवानों को चौक-चौराहों में तैनाती होगी. उल्लेखनीय है कि रांची स्थित केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष अजय तिर्की की ओर से विज्ञिप्ति जारी कर बंद का आह्वान करते हुए कई संगठनों के शामिल होने की सूचना दी गई है. हालांकि उनकी अोर से आवश्यक सेवाओं को बंद से मुक्त रखने की भी बात कही गयी है.
हजारों की संख्या में कार्यकर्ता जायेंगे दुमका
झारखंड मुक्ति मोर्चा का 45वां स्थापना दिवस दुमका के गांधी मैदान में 2 फरवरी को मनाया जायेगा. स्थापना दिवस को सफल बनाने को लेकर जेएमएम प्रखंड अध्यक्ष जूलेस मरांडी की अध्यक्षता में बुधवार को बैठक की गयी. बैठक में स्थापना दिवस समारोह में प्रखंड क्षेत्र के सभी पंचायतों से अधिक से अधिक संख्या में कार्यकर्ताओं को दुमका पहुंचने का निर्णय लिया. मौके पर किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष तेजनारायण वर्मा ने कहा कि दो फरवरी को हजारों की संख्या में कार्यकर्ता दुमका रवाना होंगे. कहा कि इस बार का स्थापना दिवस ऐतिहासिक होगा. मौके पर सलीम अंसारी, सहुद अंसारी, दिनेश दास, मोती यादव, गोपाल मंडल, सीताराम दास, मृत्युंजय मंडल, राधेश्याम वर्मा, नसीम मियां, राजा मुर्मू, रहमान अंसारी, अंसार अहमद आदि मौजूद थे.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस्तीफे तथा विधायक दल के नए नेता चंपाई सोरेन द्वारा सरकार बनाने का दावा पेश किए जाने के बाद अब गेंद राजभवन के पाले में है। सभी की निगाहें अब राजभवन पर टिकी हैं।
राज्यपाल सीपी राधाकृष्ण सारे संवैधानिक प्रविधानों का अध्ययन कर गुरुवार को इस पर निर्णय ले सकते हैं। वह इस पर विधिक राय भी ले सकते हैं। बुधवार को भी देर रात तक राजभवन में इसे लेकर मंथन होता रहा।
झारखंड में लागू हो सकता है राष्ट्रपति शासन
राज्यपाल के पास अब चम्पाई सोरेन को नई सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने का विकल्प है। हालांकि इससे पहले वे आइएनडीआइए के सभी विधायकों को राजभवन बुला सकते हैं।
चम्पाई सोरेन ने उन्हें 47 विधायकों का समर्थन पत्र सौंपा है। कयास यह भी लगाया जा रहा है कि राज्यपाल खराब विधि व्यवस्था का हवाला देते हुए राष्ट्रपति शासन की भी अनुशंसा कर सकते हैं।
आज कई आशंकाओं से उठेगा पर्दा
राज्यपाल पहले ही कह चुके हैं कि संविधान के संरक्षक के रूप में उनकी पूरी स्थिति पर नजर है। साथ ही वे लचर विधि व्यवस्था पर भी लगातार सवाल उठाते रहे हैं। ईडी के विरोध में झामुमो के प्रदर्शन का भी हवाला दे सकते हैं। गुरुवार को भविष्य में छिपे इन सभी आशंकाओं से पर्दा उठेगा।
लग सकता है समय भी
राज्यपाल निर्णय लेने में एक-दो दिनों का समय भी ले सकते हैं। फिलहाल वे गुरुवार को झारखंड हाईकोर्ट में मुख्यमंत्री की याचिका पर होने वाली सुनवाई का भी इंतजार कर सकते हैं। राज्यपाल कोई निर्णय नहीं ले पाते हैं तो वे केंद्रीय गृह मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट भेज सकते हैं।