जमशेदपुर : जमशेदपुर स्थित काशीडीह हाई स्कूल के 70 विद्यार्थियों ने शैक्षणिक भ्रमण के तहत आईआईटी खड़गपुर का दौरा किया। कक्षा 11वीं और 12वीं के 70 छात्रों ने इस दौरा में शामिल हुए। उन्होंने विभिन्न विभागों का दौरा किया और बहुत सारे कौशल सीखें। उन्होंने नेहरू संग्रहालय का भी दौरा किया और शोध देखा। यह यात्रा अटल प्रभारी कमलेश ओझा एवं लक्ष्मी सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित की गई।
जमशेदपुर : विगत दिनों मानगो नगर निगम के कार्यपालक पदाधिकारी सुरेश यादव ने भाजपा नेता विकास सिंह के ऊपर सरकारी काम में बाधा डालने का आरोप लगाते हुए उलीडीह थाना में मुकदमा दर्ज कराया था। सप्ताह भर पहले भाजपा नेता विकास सिंह ने मानगो नगर निगम के कार्यालय में जाकर कार्यपालक पदाधिकारी सुरेश यादव को रिवाइटल की शक्ति वर्धक गोली देते हुए कानून एवं संविधान को जीवित रखने की बात कहते हुए ज्ञापन दिया था। (जारी…)
भाजपा नेता विकास सिंह ने कार्यपालक पदाधिकारी को दिए गए ज्ञापन में अपनी बात रखते हुए कहा था कि सैकड़ो पत्राचार करने के बावजूद भी स्वास्थ मंत्री बन्ना गुप्ता के द्वारा मानगो एन एच 33 आनंद विहार कॉलोनी के मुहाने में अपने आप्त सचिव को आगे करके अपना निजी छः मंजिला कार्यालय का अवैध निर्माण करवा रहे हैं। मंत्री के डर से कार्यपालक पदाधिकारी कानून को हाशिए में रखकर अवैध निर्माण को बंद करने का हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। ठीक दूसरी ओर आम लोगों के ऊपर कानून का डंडा चलाते हुए निर्माणाधीन मकान को नोटिस देकर मोटी रकम वसूलने का कार्य करते हैं। (जारी…)
कार्यपालक पदाधिकारी के डरने के कारण ही कार्यपालक पदाधिकारी सुरेश यादव के आवास के महज 50 मीटर की दूरी पर छः मंजिला भवन का निर्माण हो रहा है। सच का आईना दिखलाने पर कार्यपालक पदाधिकारी भड़क गए और विकास सिंह के ऊपर मुकदमा दर्ज करवा दिया। भाजपा नेता विकास सिंह के अधिवक्ता कृष्ण मुरारी सिंह ने ए डी जे 1 के सामने विकास सिंह का पक्ष रखते हुए कहा कि विकास सिंह ने किसी प्रकार का सरकारी काम में बाधा पहुंचाने का कार्य नहीं किया था, ना ही विकास सिंह ने किसी प्रकार का बल का प्रयोग किया था। (जारी…)
अधिवक्ता कृष्ण मुरारी सिंह ने जिला सत्र न्यायालय के सामने विकास सिंह के द्वारा अवैध निर्माण संबंधित जितनी भी लिखित शिकायतें की थी उसकी छायाप्रति देते हुए कहा कि कार्यपालक पदाधिकारी ने जनप्रतिनिधि के भय से विकास सिंह के आवेदन को रद्दी कागज समझ कर कूड़ेदान में फेंक दिया था, जिसके चलते अवैध निर्माण का कार्य पहली मंजिल से छठी मंजिल तक हो गया। बार-बार शिकायत करने पर भी कार्रवाई नहीं होने पर मजबूर होकर विकास सिंह ने कार्यपालक पदाधिकारी सुरेश यादव को कानून और संविधान की रक्षा हेतु ज्ञापन देते हुए रिवाइटल की गोली दिया था जिससे आक्रोशित हो गए और झूठा मुकदमा विकास सिंह के ऊपर उलीडीह थाना में किया। आज न्यायालय ने विकास सिंह गिरफ्तारी पर रोक लगा दिया है।
जमशेदपुर : मानगो के ज्वाहर नगर रोड नंबर 15 गैस गोदाम के समीप जल जमाव के कारण पूरे मोहल्ले को डेंगू ने अपने गिरफ्त में ले लिया है। मोहल्ले का कोई ऐसा घर नहीं जहां दो से तीन लोग डेंगू के मरीज नहीं है। बगल में खाली पड़े जमीन में कई दिनों से जल जमाव के कारण डेंगू का लारवा होने की आशंका स्थानीय लोगों ने जताई हैं। डेंगू से हो रहे मौत के डर से स्थानीय लोग पलायन को मजबूर हो गए हैं। (जारी…)
स्थानीय लोगों ने भाजपा नेता विकास सिंह को बुलाकर इस जानलेवा समस्या से अवगत कराते हुए कहा की कोई ऐसा घर नहीं जहां दो से तीन लोग डेंगू के मरीज नहीं है। शाम होते ही मच्छर का प्रकोप इतना बढ़ जाता है कि लोग अपने घर में ही कैद हो जाते हैं बाहर निकलने की हिम्मत लोग नहीं जुटा पाते हैं। मानगो नगर निगम के द्वारा किसी प्रकार की व्यवस्था डेंगू के रोकथाम के लिए नहीं की गई है। जमीन जहां जल जमाव है उसके मालिक को नोटिस नहीं दिया गया, ना ही एंटी लारवा, ब्लीचिंग का छिड़काव नगर निगम के द्वारा किया गया है। स्थानीय लोगों ने बताया कि अब हमलोगो के पास यहां से पलायन करने के सिवा कोई दुसरा उपाय नहीं सुझ रहा है। (जारी…)
मौके में पहुंचे भाजपा नेता विकास सिंह ने नगर निगम उदासीन रवैया पर क्षोभ प्रकट करते हुए मामले की जानकारी नगर निगम के अधिकारियों के साथ-साथ उपायुक्त पूर्वी सिंहभूम को देने का कार्य किया। विकास सिंह ने कहा कि पूरे झारखंड प्रदेश में सबसे अधिक डेंगू के मरीज मानगो के निवासी है मानगो नगर निगम के कार्यपालक पदाधिकारी साफ सफाई में बिल्कुल ध्यान नहीं देते, केवल भवन निर्माताओं के ऊपर गिद्ध दृष्टि रखने का कार्य करते हैं। जिसका दुष्परिणाम यह है कि पूरा मानगो डेंगू की आग में जल रहा है। विकास सिंह ने कहा उनकी जानकारी में तीन से चार लोगों का देहांत डेंगू के कारण हो गया है जो मानगो के रहने वाले थे, इसलिए मानगो नगर निगम के कार्यपालक पदाधिकारी सुरेश यादव के ऊपर गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज होना चाहिए। (जारी…)
मौके में मुख्य रूप से संदीप शर्मा, रेणु देवी, जगत यादव, खुशबू देवी, फातिमा बेगम, ऋषि सिंह, कुंदन कुमार, सोनू यादव, दीपक गोप, उपस्थित थे जिनके परिवार डेंगू से पीड़ित है।
सरायकेला: झारखंड के सरायकेला से एक शर्मनाक घटना सामने आई है। यहाँ एक सौतेले पिता ने अपनी नाबालिग बेटी के साथ बलात्कार किया। पीड़िता का कहना है कि उसने इस घटना का जिक्र मां से भी किया पर वो हर बार मुंह बंद करवा देती थी।
पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर तहकीकात आरम्भ कर दी है। कहा जा रहा है कि अपराधी पिता 4 वर्षों से बेटी को अपनी हवस का शिकार बना रहा था।
पीड़ित बच्ची की शिकायत पर पुलिस ने पॉस्को एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर अपराधी पिता को गिरफ्तार कर लिया है। कहा जा रहा है कि बहन की स्थिति खराब देख भाई को कुछ संदेह हुआ तो उसने बहन से पूछाताछ की। पीड़िता ने आपबीती भाई को बताई। तत्पश्चात, भाई अपनी बहन को लेकर स्थानीय थाने पहुंचा तथा अपराधी पिता के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया।
शिकायत प्राप्त होते ही पुलिस एक्शन में आई तथा अपराधी पिता दिनेश गिरी को गिरफ्तार कर लिया। साथ ही पीड़िता की मां को गिरफ्त में लेकर पुलिस पूछताछ कर रही है। पुलिस का कहना है कि अपराधी के खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा। इस मामले पर पुलिस ने बताया कि धाना 376 और पॉस्को एक्ट में मुकदमा दर्ज कर अपराधी को गिरफ्तार कर लिया है। अदालत में पेश करने के बाद अपराधी को जेल दिया। पीड़िता की पुलिस द्वारा काउंसलिंग भी कराई जा रही है।
इन दिनों देश में ‘एक देश एक चुनाव’ का मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है. दरअसल, 31 अगस्त को संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने 18 से 22 सितंबर को संसद के विशेष सत्र बुलाये जाने की जानकारी साझा की.
विशेष सत्र बुलाये जाने के केंद्र सरकार के निर्णय के अगले ही दिन ‘एक देश एक चुनाव’ के लिए समिति बनाये जाने की जानकारी सामने आयी. तभी से लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराये जाने को लेकर चिंतन-मनन का दौर जारी है.
कयास लगाये जा रहे हैं कि विशेष सत्र में सरकार यह विधेयक पेश कर सकती है. भारतीय जनता पार्टी लंबे समय से एक देश एक चुनाव चाहती है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने के पक्षधर रहे हैं. वे इसका जिक्र भी कर चुके हैं और इसे भारत की जरूरत भी बता चुके हैं.
सरकार ने किया उच्च स्तरीय समिति का गठन
देशभर में लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ संपन्न हो सकते हैं या नहीं, इस बात का पता लगाने के लिए हाल ही में केंद्र सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है. यह समिति भारत की चुनावी प्रक्रिया का अध्ययन करेगी और उसी के आधार पर सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी. उसी िरपोर्ट के आधार पर सरकार अपन रुख तय करेगी.
रामनाथ कोविंद बने अध्यक्ष
केंद्र सरकार द्वारा गठित समिति की अध्यक्षता पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद करेंगे. गृह मंत्री अमित शाह, राज्यसभा में विपक्ष के पूर्व नेता गुलाम नबी आजाद, वित्त आयोग के पूर्व अध्यक्ष एनके सिंह, पूर्व लोकसभा महासचिव सुभाष सी कश्यप, वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे, पूर्व मुख्य सतर्कता आयुक्त संजय कोठारी समिति के सदस्य होंगे. कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी को भी समिति में शािमल किया गया है, पर उन्होंने इस समिति का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया है.
चुनाव आयोग ने भी दिया था सुझाव
वर्ष 1967 के बाद से एक साथ चुनाव का जो सिलसिला टूटा, उस कड़ी को फिर से जोड़ने की कवायद लगभग 16 वर्षों तक ठंडी पड़ी रही. वर्ष 1983 में चुनाव आयोग ने पहली बार अपनी वार्षिक रिपोर्ट में सुझाव दिया कि लोकसभा के साथ-साथ राज्यों के भी विधानसभा चुनाव कराये जाने चाहिए. पर तत्कालीन सरकार ने आयोग के सुझाव को तवज्जो नहीं दी. हालांकि, 1999 में यह मुद्दा एक बार फिर उभरा जब विधि आयोग ने एक साथ चुनाव कराने पर जोर दिया.
विधि आयोग की सिफारिश
न्यायमूर्ति बीपी जीवन रेड्डी की अध्यक्षता वाले विधि आयोग ने 1999 में चुनावी कानूनों में सुधार पर अपनी रिपोर्ट में एक साथ चुनाव कराये जाने की सिफारिश की थी. कहा था कि शासन में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए लोकसभा और सभी विधानसभाओं के चुनाव एक साथ ही होने चाहिए. रिपोर्ट के अनुसार, ‘हर वर्ष और बेमौसम चुनाव का सिलसिला समाप्त किया जाना चाहिए. हमें वापस उस स्थिति में लौट जाना चाहिए जहां लोकसभा और सभी विधानसभाओं के चुनाव एक साथ होते थे. आयोग ने यह भी कहा था कि वर्तमान परिस्थिति में प्रत्येक पांच वर्ष में एक साथ चुनाव कराने का लक्ष्य चरणबद्ध तरीके से प्राप्त करना होगा.
संसदीय स्थायी समिति ने क्या कहा
कार्मिक, लोक शिकायत, विधि एवं न्याय पर संसदीय स्थायी समिति ने एम सुदर्शना नचियप्पन की अगुवाई में एक साथ चुनाव कराये जाने की संभावना को लेकर 17 दिसंबर, 2015 को सदन में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी. इस रिपोर्ट में कहा गया था कि बार-बार चुनाव होने से बहुत अधिक पैसा खर्च होता है. सामान्य जीवन पर असर पड़ता है और जरूरी सेवाएं प्रभावित होती हैं. चुनाव आयोग की ओर से आदर्श आचार संहिता लागू होने के कारण विकास कार्य प्रभावित होते हैं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि चुनाव के लिए लंबे समय तक सुरक्षा बलों की तैनाती करनी पड़ती है, जिससे उन पर बोझ पड़ता है.
विधि आयोग की मसौदा रिपोर्ट
न्यायमूर्ति बीएस चौहान की अध्यक्षता में विधि आयोग ने 30 अगस्त, 2018 को अपनी मसौदा रिपोर्ट में कहा था कि संविधान के मौजूदा ढांचे के तहत एक साथ चुनाव नहीं कराये जा सकते. इसके लिए संविधान के लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 और लोकसभा और विधानसभाओं की प्रक्रिया के नियमों में संशोधन करना होगा. साथ ही कम से कम 50 प्रतिशत राज्यों को संशोधनों को स्वीकार करना होगा.
एक साथ चुनाव के लाभ
अगस्त, 2018 को सौंपी गयी मसौदा रिपोर्ट में विधि आयोग ने लोकसभा व सभी राज्य विधानसभाओं के एक साथ चुनाव कराने का लाभ भी बताया है. रिपोर्ट के अनुसार,
एक साथ चुनाव कराने से सार्वजनिक धन की बचत होगी.
प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा बलों पर पड़ने वाला बोझ कम होगा.
सरकारी नीतियों का समय पर कार्यान्वयन सुनिश्चित होगा.
प्रशासनिक मशीनरी चुनावी कार्यों में लगे रहने की बजाय विकास कार्यों में संलग्न रहेंगी
पहले भी हो चुके हैं एक साथ चुनाव
देश के स्वतंत्र होने के बाद पहली बार 1952 में चुनाव हुए. तब आम चुनाव (लोकसभा) के साथ-साथ सभी राज्यों की विधानसभाओं के लिए भी चुनाव हुए. इसके पांच वर्षों बाद, 1957 में भी ऐसा ही हुआ. हालांकि, तब राज्यों के पुनर्गठन, यानी नये राज्यों के बनने के कारण 76 प्रतिशत राज्यों के चुनाव लोकसभा के साथ ही हुए. परंतु एक साथ चुनाव का यह सिलसिला पहली बार तब टूटा जब 1959 में केंद्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने अनुच्छेद 356 का उपयोग करते हुए केरल की ईएमएस नंबूदरीपाद की कम्युनिस्ट सरकार को बर्खास्त कर दिया.
इसके बाद फरवरी 1960 में केरल में फिर से विधानसभा चुनाव हुआ. इस प्रकार, देश के किसी भी राज्य में मध्यावधि चुनाव का यह पहला मामला था. हालांकि, इसके बाद 1962 और 1967 में भी लोकसभा के साथ 67 प्रतिशत राज्यों के विधानसभाओं के चुनाव एक साथ ही हुए.
देश के स्वतंत्र होने के बाद पहली बार 1952 में चुनाव हुए. तब आम चुनाव (लोकसभा) के साथ-साथ सभी राज्यों की विधानसभाओं के लिए भी चुनाव हुए. इसके पांच वर्षों बाद, 1957 में भी ऐसा ही हुआ. हालांकि, तब राज्यों के पुनर्गठन, यानी नये राज्यों के बनने के कारण 76 प्रतिशत राज्यों के चुनाव लोकसभा के साथ ही हुए. परंतु एक साथ चुनाव का यह सिलसिला पहली बार तब टूटा जब 1959 में केंद्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने अनुच्छेद 356 का उपयोग करते हुए केरल की ईएमएस नंबूदरीपाद की कम्युनिस्ट सरकार को बर्खास्त कर दिया. इसके बाद फरवरी 1960 में केरल में फिर से विधानसभा चुनाव हुआ. इस प्रकार, देश के किसी भी राज्य में मध्यावधि चुनाव का यह पहला मामला था. हालांकि, इसके बाद 1962 और 1967 में भी लोकसभा के साथ 67 प्रतिशत राज्यों के विधानसभाओं के चुनाव एक साथ ही हुए.
ऐसे टूटा सिलसिला
वर्ष 1968 और 1969 में कुछ राज्य विधानसभा अपने निर्धारित कार्यकाल को पूरा नहीं कर सकीं और विधानसभा समय पूर्व ही भंग हो गयी. इसके चलते एक देश एक चुनाव का सिलसिला पूरी तरह टूट गया. वास्तव में, 1967 के चुनाव में कांग्रेस को उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, पंजाब, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और मद्रास आदि राज्यों में झटका लगा. कई जगह तो कांग्रेस के बागियों ने अन्य दलों के साथ मिलकर सरकार बनायी. पर ऐसी अनेक गठबंधन सरकारें अपने पांच वर्ष का निर्धारित कार्यकाल पूरा नहीं कर सकीं और गिर गयीं. वर्ष 1970 में तो लोकसभा भी समय से पहले भंग हो गयी और 1971 में फिर से आम चुनाव हुए. इसके बाद पांचवी लोकसभा का कार्यकाल बढ़ाकर 1977 तक कर दिया गया. छठी, सातवीं, नौवीं, 11वीं, 12वीं और 13वीं लोकसभा भी समय पूर्व भंग हो गयी. इस प्रकार, 1967 के बाद से लोकसभा और सभी विधानसभाओं के चुनाव एक साथ संपन्न नहीं हो सके.
ये हैं कुछ प्रमुख चुनौतियां
यदि देश में एक देश एक चुनाव लागू होता है तो इसके लिए संविधान के पांच अनुच्छेदों- 83, 85, 172, 174 और 356 में संशोधन करना होगा. अनुच्छेद 83 संसद के दोनों सदनों के कार्यकाल, 85 राष्ट्रपति द्वारा लोकसभा को भंग करने, 172 राज्य विधानसभाओं के कार्यकाल, 174 राज्य विधानसभाओं को भंग करने और अनुच्छेद 356 राज्यों में राष्ट्रपति शासन लागू करने से संबंधित है.
एक देश एक चुनाव को लागू करने के लिए सभी राजनीतिक दलों और सभी राज्य सरकारों की सहमति होना आवश्यक है.
इस कार्य के लिए अतिरिक्त ईवीएम/ वीवीपैट की आवश्यकता होगी. इस समय देश में दस लाख मतदान केंद्र हैं. यदि पूरे देश में वीवीपैट सिस्टम प्रयोग किया जाता है तो एक साथ चुनाव कराने के लिए दोगुने वीवीपैट की आवश्यकता होगी. इस प्रकार, एक साथ चुनाव कराने के लिए ईवीएम और वीवीपैट की खरीद पर नौ हजार दो सौ चौरासी करोड़ से अधिक रुपया खर्च करना पड़ेगा.
इवीएम को रखने के लिए भंडार गृह की जरूरत दोगुनी हो जायेगी, जो समस्या का कारण बन सकती है.
अतिरिक्त मतदान कर्मियों और सुरक्षा बलों की जरूरत होगी, जिससे राज्यों पर दबाव पड़ेगा.
एक साथ चुनाव कराने के लिए पर्याप्त धन की आवश्यकता भी होगी
आगे की राह
देश में कुछ-कुछ महीनों के अंतराल पर अलग-अलग राज्यों में चुनाव होते हैं और आचार संहिता लागू होने के कारण विकास कार्य बाधित होता है. विकास कार्यों के निर्बाध चलते रहने के लिए एक देश एक चुनाव के मुद्दे पर गहन विचार-विमर्श और अध्ययन आवश्यक है. केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, सभी दलों और विशेषज्ञों के साथ मिलकर इस बात पर सर्वसहमति बनानी चाहिए कि राष्ट्र को एक देश एक चुनाव की आवश्यकता है या नहीं. यहां दल से ऊपर उठकर देशहित में विचार करने की जरूरत है.
आलोचकों की राय
लोकसभा ओर विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने को लेकर जहां कई दल समर्थन में हैं, वहीं कई इसके विरोध में. आलोचकों का कहना है कि एक साथ चुनाव कराने का विचार राजनीति से प्रेरित है. एक साथ चुनाव कराने से मतदाताओं का व्यवहार इस रूप में प्रभावित हो सकता है कि वे विधानसभा चुनाव के लिए भी राष्ट्रीय मुद्दों पर मतदान करने लगेंगे. इससे संभावना है कि बड़ी राष्ट्रीय पार्टियां लोकसभा और विधानसभा दोनों चुनावों में जीत हासिल करें. इस कारण क्षेत्रीय पार्टियों के हाशिये पर चले जाने की आशंका है. वहीं कुछ आलोचकों का मानना है कि प्रत्येक पांच वर्ष में एक से ज्यादा बार मतदाताओं का सामना करने से नेताओं की जवाबदेही बढ़ती है और वे सतर्क रहते हैं. विरोध करने वाले दलों में कांग्रेस, एनसीपी, सीपीआई, तृणमूल कांग्रेस, तेलुगू देशम, एआईएमआईएम आदि शामिल हैं.
ये दल हैं समर्थन में
एआइएडीएमके, असम गण परिषद, आईयूएमएल, बीजू जनता दल समेत अनेक दल एक देश एक चुनाव के समर्थन में हैं.
क्या कहना है चुनाव आयोग का
एक देश एक चुनाव को लेकर प्रश्न पूछे जाने पर मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने कहा है कि भारत का चुनाव संवैधानिक प्रावधानों और जनप्रतिनिधि अधिनियम (आरपी एक्ट) के अनुसार काम करने को तैयार है.
झारखण्ड : बाघमारा विधायक ढुल्लू महतो की मां रुकवा महताइन 87 वर्षीय का आज यानी मंगलवार की सुबह करीब सात बजे असर्फी हॉस्पिटल धनबाद में निधन हो गया है। पूरे कोयलांचल क्षेत्र में शोक की लहर है। निधन की खबर सुनकर काफी संख्या में कार्यकर्ता और उनके परिवार के लोग अस्पताल पहुंच गये हैं और कहा भगवान उनकी आत्मा को शांति दे। बताया जा रहा है कि ढुल्लू महतो की मां दो दिन पहले ही असर्फी हॉस्पिटल धनबाद में भर्ती किया गया था। लंबे समय से बीमार चल रही थी। पूर्व में भी इलाज के लिए दिल्ली एम्स ले जाया गया था। इलाज के दौरान उन्होंने असर्फी हॉस्पिटल में आखिरी सांस ली। (जारी…)
जानकारी के अनुसार लिलोरी स्थान घाट पर अंतिम संस्कार किया जायेगा। ढुल्लू महतो की माता रुकवा महताईन, महिला धर्म परायण थी। वे अपने पीछे भरा पूरा परिवार छोड़ गयी हैं। बताया जा रहा है कि पार्थीव शरीर विधायक आवास पहुंच गया है। अंतिम दर्शन को भारी संख्या में समर्थक और नेता पहुंच रहे हैं। विधायक के आलवे उनके चार भाई ओर है। सभी अपनी माता के निधन पर दुःखी है। विधायक ढुल्लू महतो को ढांढस बंधाने के लिए कई बड़े राज नेताओं एवं बीसीसीएल के बड़े अधिकारी उनके आवास पहुंच रहे हैं। उनका दाह संस्कार दामोदर नदी के तेलमोच्चो शमशान घाट में किया जाएगा।
यह हम सभी के लिए दुःखद खबर है – कुमार विश्वजीत
भाजपा किसान मोर्चा बारीडीह मंडल के महामंत्री कुमार विश्वजीत ने शोक प्रकट करते हुए कहा कि यह हम सभी के लिए एक दुःखद खबर है। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवगंत आत्मा को शांति प्रदान करें और सभी परिजनों को संबल दें।
जमशेदपुर : टाटा स्टील के कर्मचारियों के लिए सोमवार का दिन काफी अच्छा रहा। इसकी वजह है कि टाटा स्टील के सारे प्लांट के करीब 23445 कर्मचारियों के एकाउंट में बोनस की राशि पहुंच गयी। बैंक के एकाउंट पूरी तरह पैसे से लबालब देखकर कर्मचारियों और उनके परिवार के खुशियों का ठिकाना नहीं रहा। टाटा स्टील के सारे प्लांट के कर्मचारियों के बीच 314.70 करोड़ रुपये बोनस की राशि बांटी गयी। पैसे आने के बाद कर्मचारियों ने टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष संजीव चौधरी टुन्नु, महामंत्री सतीश सिंह, डिप्टी प्रेसिडेंट शैलेश सिंह समेत अन्य सारे पदाधिकारियों का स्वागत किया। (जारी…)
विभिन्न विभागों से कर्मचारियों का दल आकर उनका स्वागत किया। बोनस 20 फीसदी कराने पर खास तौर पर अध्यक्ष संजीव चौधरी टुन्नु का जोरदार स्वागत और अभिवादन किया गया। कर्मचारियों मे डीके वर्मा, शैलेश कुमार शर्मा, राहुल कुमार, अमन शर्मा, मनोज कुमार, मोहित कुमार ठाकुर और अरुण मुखी, गोपाल सागर, मनोज मुखी, बिनित, शैलेद्र शर्मा, शुभंकर नंदी, सुजीत कुमार, बिपिन सिंह इत्यादि कर्मचारियों ने स्वागत किया। (जारी…)
इसमें न्यू बाइ प्रोडक्ट और ए टू एफ ब्लास्ट फर्नेस के कर्मचारियों का भी एक दल शामिल था, जिन लोगों ने आकर उनका स्वागत किया। टाटा स्टील के कर्मचारियों को इस साल अधिकतम 4 लाख 61 हजार 19 रुपये तक बोनस एकाउंट में भेजा गया। इस साल तय फार्मूला के तहत 298.82 करोड़ रुपये ही मिल रहा था। लेकिन यूनियन के प्रयास से अतिरिक्त 15.88 करोड़ रुपये मैनेजमेंट ने दिया, जिसके बाद कर्मचारियों को इस साल भी 20 फीसदी बोनस मिल गया। (जारी…)
टाटा स्टील के जमशेदपुर प्लांट में 11676 कर्मचारियों को बोनस मिला, जिसके तहत जमशेदपुर में 186.51 करोड़ रुपये की राशि बांटी गयी। इस बार कर्मचारियों को औसत बोनस 1 लाख 59 हजार 738 रुपये मिला जबकि अधिकतम बोनस ओल्ड सीरीज के कर्मचारी को 4 लाख 61 हजार 19 रुपये मिला. एनएस ग्रेड के कर्मचारियों का अधिकतम बोनस 1 लाख 21 हजार 718 रुपये मिला जबकि न्यूनतम बोनस 42561 रुपये मिला।
जमशेदपुर : भालूबासा के जम्बू टावर में स्थित सेकेंड हैंड फोन एवं लैपटॉप की दुकान सेलविला ने वेस्ट बंगाल के कोलकाता में भी धूम मचा रखी है। सेलविला के कोलकाता ब्रांच में ग्राहकों का उत्साह देखने बन रहा है। सेकेंड हैंड फोन और लैपटॉप के उचित कीमत में मिलने और जीरो डाउन पेमेंट में फाइनांस हो जाने की सुविधा लोगों को यहाँ खींच ला रही है। (जारी…)
दीपेश नामक एक ग्राहक ने कहा कि हमारे यहाँ इस तरह का स्टोर का होना यूथ के लिए काफी फायदेमंद हैं। हमारे पसंद का फोन उचित कीमत पर यहाँ मिल जा रही है। जिस फोन के नए की कीमत को जानकर हम फोन लेने के बारे में नहीं सोच पाते वही फोन हमें यहाँ अच्छे कंडीशन में वारंटी के साथ मिल रहा है। (जारी…)
वहीं लैपटॉप ले रही रुपाली नामक ग्राहक ने बताया कि एकदम नए कंडीशन जैसे लैपटॉप जिस दाम पर हमें यहाँ मिल रही है वह सपने कभी सपने में भी नहीं सोचे थे। साथ ही नए लैपटॉप लेते समय जैसे गिफ्ट मिलते हैं वैसे यहाँ भो मिल रहा है जिससे मुझे बहुत खुशी हो रही है। मैं अपने अभी फ्रेंड और रिलेटिव को फोन और लैपटॉप लेने के लिए एक बार इस शॉप को विजिट करने जरूर बोलूँगी। (जारी…)
आपको बता दें कि सेकेंड हैंड मोबाइल और लैपटॉप खरीद बिक्री के लिए “सेलविला” ने जमशेदपुर में एक अलग पहचान बनाई हुई है और यही पहचान अब कोलकाता जैसे बड़े शहरों में भी बनाने की तैयारी है।
गम्हरिया : सरायकेला जिले के गम्हरिया प्रखंड क्षेत्र में भू माफियों ने वन विभाग की जमीन को कब्जा करने का नायाब तरीका इजाद किया है। आपको याद दिला दें कि पिछले दिनों वन विभाग ने शांतिनगर में हो रहे अतिक्रमण पर बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया था। उसके बाद अब भू-माफियों ने अपनी स्ट्रेटजी बदलते हुए राजनीतिक दल का कार्यालय बनाना शुरू कर दिया है। (जारी…)
सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि स्थानीय झामुमो नेता राजेश गोप के इशारे पर राजनीतिक सरपरस्ती में पार्टी कार्यालय का निर्माण कराया जा रहा है। इस पर वन विभाग मौन है। बता दें कि उक्त कार्यालय की आड़ में जमीन माफिया वन विभाग की जमीन की फिर से बंदरबांट करेंगे। समय रहते इस पर गंभीरता नहीं दिखाई गई तो आनेवाले दिनों में पार्टी कार्यालय की आड़ में वन भूमि का बड़ा हिस्सा भूमाफिया डकार चुके होंगे।
जमशेदपुर : भारतीय मानवाधिकार एशोसिएशन के नौजवान, कर्मठ कोल्हान के पुलिस प्रोटेक्शन पदाधिकारी उमेश नंदन का राँची के रिम्स में इलाज के दौरान रविवार को निधन हो गया था। जिसके बाद उनके शव को उनके जमशेदपुर स्थित निवास स्थान पर लाया गया और सोमवार को उनका अंतिम संस्कार किया गया। (जारी…)
भारतीय मानवाधिकार एशोसिएशन के कोल्हान उपाध्यक्ष सरबजीत सिंह ने बताया कि पिछले दिनों उन्हें डेंगू हो गया था, जिसका इलाज राँची स्थित रिम्स अस्पताल में चल रहा था किन्तु रविवार को उनकी निधन की खबर हमें मिली। जिसके बाद उनका पार्थिव शरीर को जमशेदपुर लाया गया और ब्रह्मानंद अस्पताल में रखा गया। (जारी…)
सरबजीत सिंह ने दुःख प्रकट करते हुए कहा कि उमेश नंदन का इस तरह हम सबको छोड़ जाना न सिर्फ उनके परिवार के लिए बल्कि हमारी संस्था के लिए भी एक बहुत बड़ी क्षति है। इस दुःखद परिस्थिति में संस्था उमेश जी के परिवार के साथ खड़ी है और ईश्वर से कामना है कि उनके परिवार जनों को इस विकट परिस्थिति को सहने के साहस प्रदान करें।