आज गुरुद्वारा साहब गोरी शंकर रोड में लंगर घर की ढलाई का कार्य गुरु महाराज के समक्ष बाबा सोहन सिंह जी द्वारा अरदास कर प्रारंभ किया गया यह ढ़लाई का कार्य अर्जुन सिंह वालिया के सौजन्य से किया जा रहा है इस विशेष मौके पर सेंट्रल गुरुद्वारा कमेटी के प्रधान सरदार भगवान सिंह चेयरमैन सरदार शैलेंद्र सिंह मुख्य सलाहकार गुरचरण सिंह बिल्ला सतबीर सिंह सोमू सुखदेव सिंह बिट्टू जसवंत सिंह जसो सुजीत सिंह चंचल सिंह भाटिया जसपाल सिंह जस्सी समेत कई लोग शामिल थे
इस मौके पर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान अमरजीत सिंह गांधी कोषाध्यक्ष हरजीत सिंह लाडी द्वारा प्रधान भगवान सिंह चेयरमैन सरदार शैलेंद्र सिंह को शाल भेंट कर सम्मानित भी किया गया इस मौके पर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान अमरजीत सिंह गांधी कार्यवाहक प्रधान सुरेंद्र सिंह महासचिव हरदीप सिंह चनिया कोषाध्यक्ष हरजीत सिंह लाडी परमजीत सिंह पम्मा स्कूल के प्रमुख रतन सिंह स्वर्ण सिंह जुगनू सिंह समेत नौजवान सभा एवं सीख स्त्री सत्संग सभा के सक्रिय सहयोग से संपन्न हुआ
लंकापति रावण का नाम तो आपने सुना ही होगा। यह सच है कि रावण का नाम सामने आते ही उसका नकारात्मक पक्ष सबसे पहले सामने आता है, परंतु रावण में कई ऐसी अच्छाइयां थीं, जो उसके नकारात्मक पक्ष पर कहीं भारी थीं, जो उसके कठिन तपस्या का प्रतिफल था। अनीति, अनाचार, दंभ, काम, क्रोध, लोभ, अधर्म, राक्षसत्व से रावण को जोड़कर देखने वालों को यह भी पता होना चाहिए कि भगवान भोलेशंकर का अनन्य भक्त रावण तंत्र, मंत्र, सिद्धियों, ज्योतिष विद्या समेत कई गूढ़ विद्याओं में माहिर था। *एक रावण के जन्म के कई किस्से, आपभी जानें*
महाप्रतापी रावण के जन्म के एक-दो नहीं, कई किस्से हैं। वाल्मीकि रचित रामायण,पद्मपुराण तथा श्रीमद् भागवत पुराण के अनुसार हिरण्याक्ष एवं हिरण्यकशिपु दूसरे जन्म में रावण और कुम्भकर्ण जे रूप में पैदा हुए। वाल्मीकि रामायण के अनुसार रावण पुलस्त्य मुनि का पोता अर्थात उनके पुत्र विश्वश्रवा का पुत्र था।विश्वश्रवा की वरवर्णिनी और कैकसी नामक दो पत्नियां थीं। वरवर्णिनी ने कुबेर को जन्म दिया तो डाहवश कैकसी ने अशुभ समय मे गर्भ धारण किया,जिससे रावण और कुंभकर्ण जैसे क्रूर स्वभाव वाले भयंकर राक्षस उत्पन्न हुए।
*तुलसीदास के रामचरित मानस में रावण अवतार*
तुलसीदास की रामचरितमानस की बात करें तो रावण का जन्म एक शाप के कारण हुआ है। वे नारद एवं प्रतापभानु की कथाओं को रावण के जन्म का कारण बताते हैं। इसके अनुसार बात करें तो भगवान विष्णु के दर्शन हेतु सनक और सनंदन समेत कई ऋषि बैकुंठ पधारे, परंतु भगवान विष्णु के द्वारपाल जय और विजय ने दोनों को अंदर जाने से रोक दिया। इससे ऋषिगण नाराज हो गए और दोनों को शाप दिया कि तुम राक्षस हो जाओ। हालांकि, जैसे ही भगवान विष्णु को ऋषियों के आने की सूचना मिली वे तत्क्षण ऋषियों के समक्ष प्रकट हुए और उनके अनुरोध पर ऋषियों ने अपने शाप के प्रभाव को कम करते हुए कहा कि तीन जन्मों तक तुम दोनों को राक्षस योनि में रहना पड़ेगा। साथ ही यह शर्त भी रखी कि विष्णु अथवा किसी अवतारी पुरुष से मरने पर ही तुम्हें शाप से मुक्ति मिल सकेगी। यही शाप राक्षस राज लंकापति की जन्म की आदि गाथा है।
*शापित जय-विजय किस युग में क्या बने, यह जानना जरूरी है, क्योंकि इनसे ही जुड़ी है रावण और कुम्भकर्ण की कहानी*
भगवान विष्णु के ये दोनों द्वारपाल जय और विजय शाप के बाद अपने पहले जन्मदिन हिरण्याक्ष और हिरण्यकशिपु नाम के राक्षस हुए। हिरण्याक्ष बहुत शक्तिशाली था और उसने पृथ्वी उठाकर पाताल लोक में पहुंचा दिया था। अंततः भगवान विष्णु को वराह अवतार धारण करना पड़ा और उन्होंने उसका वध कर पृथ्वी को मुक्त कराया। इसी तरह हिरण्यकशिपु भी काफी ताकतवर था। भगवान विष्णु द्वारा अपने भाई हिरण्याक्ष का वध करने की वजह से वह घोर विष्णु विरोधी था। यही कारण था कि उसने अपने विष्णु भक्त प्रह्लाद तक को मरवाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी थी। तब उसका संहार करने के लिए भगवान विष्णु को नृसिंह अवतार लेना पड़ा। त्रेतायुग में दोनों रावण और कुंभकर्ण के रूप में पैदा हुए और द्वापर युग में जब भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में जन्म लिया, तब दोनों शिशुपाल और दंतवक्त्र के रूप में पैदा हुए।
पश्चिमी सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर रेलमंडल में रविवार को एक दर्दनाक हादसा हुआ। 12872 टिटलागढ़- हावड़ा इस्पात एक्सप्रेस का जनरल कोच कुछ देर के लिए रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। यात्रियों के बीच शुरू हुई हल्की बहस पहले मारपीट में तब्दील हुई, फिर देखते ही देखते यात्रियों ने दो यात्रियों को चलती ट्रेन से नीचे फेंक दिया। फिर क्या हुआ, आगे पढ़ें…।
मालगाड़ी की चपेट में आने से गई एक की जान, दूसरा जिंदगी और मौत से कर रहा संघर्ष
टोकलो थाना अंतर्गत भरनिया गांव निवासी घायल 21 वर्षीय यात्री दुल्लू सरदार के हवाले से पुलिस ने बताया कि दुल्लू इस्पात एक्सप्रेस के जनरल कोच के गेट के समीप वाश बेसिन के पास बैठ कर झारसुगड़ा से चक्रधरपुर आ रहा था। इसी बीच किसी बात को लेकर कुछ यात्रियों ने एक व्यक्ति को मारना-पीटना शुरू कर दिया। इससे पहले कि लोग कुछ समझते और बीच बचाव करते उसे कोच से बाहर फ़ेक दिया। चूंकि दुल्लू गेट पर ही बैठा था, ट्रेन से बाहर गिर रहे यात्री का हाथ उसने पकड़ लिया। यह देख यात्रियों ने उसपर भी लात-घुसे की बरसात शुरू कर दी। फिर धक्का दे दिया, इससे दोनों नीचे गिर पड़े। इस बीच वह यात्री अप लाइन पर आ रही एक मालगाडी की चपेट में आ गया, जिससे उसकी घटना स्थल पर ही मौत हो गई। इधर दुल्लू को चक्रधरपुर अनुमंडल अस्पताल में भर्ती कराया गया है, उसे 10 टांके लगे हैं, उसकी स्थिति गंभीर बनी हुई है।
मृतक कौन, नहीं हो सकी है पहचान
बताया जा रहा है कि घटना चक्रधरपुर और लोटापहाड़ रेलवे स्टेशन के बीच स्थित मुरहातु गांव के समीप घटी। इधर, जहां एक ओर मृतक की पहचान नहीं हो सकी है, वहीं घटना की सही जानकारी भी नहीं मिल सकी है। चक्रधरपुर पुलिस मामले की पड़ताल में जुटी है।
जमशेदपुर। भाजपा जमशेदपुर ने सांसद विद्युत वरण महतो के कार्यालय के बाहर कांग्रेसियों के प्रदर्शन को सस्ती लोकप्रियता हासिल करने का प्रयास बताया। भाजपा जमशेदपुर महानगर के अध्यक्ष गुंजन यादव ने कहा कि सांसद विद्युत वरण महतो के आवास पर केंद्रीय बजट के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हेतु प्रेस-वार्ता बुलाई गई थी। परंतु प्रेस-वार्ता के मध्य में चंद कांग्रेसी इसमें विघ्न डालने पहुंच गए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध करने का अधिकार सभी को है। परंतु रविवार को कांग्रेस के इस कथित प्रदर्शन की जानकारी ना सांसद कार्यालय, ना ही जिला प्रशासन एवं ना ही लोकतंत्र के सजग प्रहरी मीडिया को थी। गुंजन यादव ने कहा कि बिस्टुपुर स्थित सांसद कार्यालय में चल रहे प्रेस-वार्ता के मुद्दे को चंद कांग्रेसियों ने अपने प्रदर्शन की ओर मोड़कर सस्ती लोकप्रियता हासिल करने का कुत्सित प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस कार्यकर्ताओं को वास्तव में सांसद विद्युत महतो से मिलकर अपनी बातों को रखना था तो उन्हें इस प्रकार की अभद्रता नही करनी चाहिए थी। भाजपा जमशेदपुर महानगर अध्यक्ष गुंजन यादव ने कहा कि कांग्रेस ने विरोध में जिस प्रकार से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं सांसद विद्युत वरण महतो के लिए अपशब्दों एवं अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया उसे किसी भी सूरत में स्वीकार नही किया जा सकता है। गुंजन यादव ने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता का ऐसा आचरण कांग्रेस के ताबूत में अंतिम कील साबित होगी।
झारखंड स्टाफ सेलेक्शन कमीशन यानी झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की संशोधित नियमावली 2023 का संकल्प कार्मिक विभाग ने जारी कर दिया है। नए संकल्प में मैट्रिक, इंटर, स्नातक स्तरीय नियुक्ति परीक्षा नियमावली में बड़ा चेंज किया गया है। नयी नियमावली के तहत सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को नियोजन के लिए झारखंड से मान्यता प्राप्त शैक्षणिक संस्थानों से अब मैट्रिक-इंटर पास करने की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया गया है। मतलब अब राज्य के बाहर से भी अगर मैट्रिक-इंटर उत्तीर्ण किए हैं तो इस राज्य के निवासी को झारखंड में नौकरी का अवसर मिलेगा।
स्थानीय रीति रिवाज व परंपरा जानने की अनिवार्यता समाप्त
संशोधित नियमावली में अब स्थानीय रीति-रिवाज व परंपरा को जानने की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। नियुक्ति परीक्षा में जनजातीय,क्षेत्रीय भाषा में बदलाव किया गया है। अब हिंदी,अंग्रेजी और संस्कृत भाषा को शामिल कर लिया गया है। राज्यस्तरीय नियुक्तियों में पहले जहां 12 भाषाएं थीं। उसमें उक्त तीन भाषाओं को जोड़ाकर इसकी सीमा को 15 भाषाओं मैं बदल दिया गया है।
इन भाषाओं को किया गया बाहर
अब भोजपुरी, मगही व अंगिका,असुर, बिरहोर समेत सात भाषाओं को बाहर कर दिया गया है। हेमंत सरकार का मानना है कि जिन भाषाओं को सूची से बाहर किया गया है,उसकी पढ़ाई यहां नहीं हो रही है,पाठ्यक्रम भी नहीं है। नियुक्ति परीक्षाओं के लिए अब जिला से लेकर राज्य स्तर तक सूचीबद्ध 15 भाषाओं की ही परीक्षा होगी।
100 अंकों का होगा एग्जाम
नयी नियमावली मैं स्पष्ट किया गया है कि 15 भाषाएं राज्य के सभी 24 जिलों में स्वीकार्य होंगी। इन भाषाओं की परीक्षा 100 अंकों की होगी। परीक्षार्थी अपनी इच्छानुसार भाषा का चयन करेंगे। सारे 100 सवाल बहु वैकल्पिक होंगे।
सामान्य रूप से मार्च-अप्रैल के महीने में बदलते मौसम का हमारी सेहत पर तो प्रभाव पड़ता ही है, कृषि क्षेत्र भी इससे प्रभावित होता है। झारखंड में मौसम का मिजाज कब बदले, यह कौन सी करवट ले ले, कुछ नहीं कहा जा सकता। मौसम विज्ञानी अनुमान लगाते हैं। रांची मौसम विभाग के ताजा अनुमान के अनुसार झारखंड में प्री मानसून ने दस्तक दे दी है। राज्य के कई जिलों में बारिश और वज्रपात को लेकर अलर्ट जारी किया गया है।
चलेंगी तेज हवाएं, रहिए सावधान
मौसम विभाग के अनुसार, एक से दो दिनों में बोकारो, देवघर, धनबाद, दुमका, जामताड़ा और गिरिडीह में तेज हवाओं (30-40 किलोमीटर प्रति घंटे) के साथ मेघ गर्जन, वज्रपात के साथ बारिश होने की संभावना है। खराब मौसम को देखते हुए मौसम विभाग ने इन छह जिलों के लोगों से सतर्क और सावधान रहने की अपील की है।
खेतों में किसानों को जाने से किया मना
किसानों को खेतों में नहीं जाने से मना किया गया है। राज्य के पूर्वी और निकटवर्ती मध्य भागों (रांची, बोकारो, गुमला, हजारीबाग , खूंटी, देवघर, धनबाद, जामताड़ा, पाकुड़, गिरीडीह, गोड्डा) में 12 मार्च को गर्जन के साथ हल्की बारिश हो सकती है। 12, 13 और 14 मार्च को राज्य में आसमान साफ रहेगा और मौसम शुष्क रहेगा। 15 मार्च को राज्य के उत्तर पश्चिमी, दक्षिणी पूर्वी तथा निकटवर्ती मध्य भागों में कहीं कहीं गर्जन के साथ हल्के दर्जे वर्षा की संभावना है।
चक्रधरपुर, बंदगाव: पश्चिम सिंहभूम के बंदगांव के करंजो प्रकल्प में विहिप की जिला पदाधिकारी की बैठक हुई. जिसमे मुख्य अतिथि विश्व हिंदू परिषद के प्रांत संघठन मंत्री देवी सिंह उपस्थित थे. बैठक में आगामी 21 मई से 31 मई तक पूरे झारखण्ड प्रांत की विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल की प्रांत कार्येकर्ता अभ्यास वर्ग करेंगे.
जिसमे पूरे झारखण्ड के विहिप, बजरंग दल कार्येकर्ता अभ्यास वर्ग में भाग लेंगे . श्री देवी रविवार को वर्ग स्थल का निरिक्षण किया और कार्येकर्ताओ के साथ वर्ग को लेकर आवश्यक दिशा निर्देश दिए. धर्म रक्षा निधि समर्पण अभियान की भी चर्चा की गई. उन्होंने संगठन विस्तार और हर गाँव में सत्संग करने का भी निर्देश दिया. आगामी कार्येकर्म श्री रामोत्सव , श्री हनुमान उत्सव भी हर गाँव में मनाने का निर्देश दिए. इस बैठक मे प्रांत धर्म प्रसार प्रमुख सच्चिदानंद, जिला मंत्री गोनू जायसवाल, जिला धर्म प्रसार प्रमुख कुंज बिहारी मिश्र, जिला प्रचार प्रमुख शशि गुप्ता, जिला गौ रक्षा प्रमुख सरवन ठाकुर, जिला बजरंग दल सह संयोजक रितेश शर्मा, जिला बजरंग दल सह सयोजक समीर पाल, जिला सामाजिक समरसता प्रमुख भास्कर, दिलीप मिश्रा, प्रमोद महापात्र, ग्रामीण प्रखंड सयोजक अंसु सिंहदेव, विशाल बर्मन उपस्थित थे.
जमशेदपुर : जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित सांसद विद्युत वरन महतो के कार्यालय के समक्ष कांग्रेस एवं भाजपा कार्यकर्ता आपस मे भिड़ गए. नौबत हाथापाई तक आ गई. जिसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मामले को शांत कराया. वैसे इसके बाद तमाम कांग्रेसी सांसद कार्यालय के समक्ष धरने बैठ गए.
बता दें कि त्रिपुरा में कांग्रस के प्रभारी डॉ अजय कुमार के ऊपर हुए हमला एवं बढ़ती महंगाई के खिलाफ रविवार को कांग्रेसी कार्यकारी जिला अध्यक्ष धर्मेंद्र सोनकर के नेतृत्व में सांसद कार्यालय के समक्ष धरना- प्रदर्शन को लेकर जुटे थे. दूसरी तरफ भाजपा के कार्यकर्ता भी इस दौरान सामने आ गए. काफ़ी देर तक दोनों तरफ से नारेबाजी हुई. जिसके बाद भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जमकर झड़प हुई. काफ़ी देर तक यह झड़प चली. जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्ष को अलग कराया. वैसे इसके बाद तमाम कांग्रेसी सांसद कार्यालय के समक्ष धरने पर बैठ गए हैं.
किशनगंज के कोचाधामन प्रखंड में बगलबाड़ी पंचायत मस्तान चौक पर मां दुर्गा और हनुमान जी की मंदिर में आग लग गयी। लोगों ने किसी तरह आग पर काबू पाया। मगर घटना में मंदिर की प्रतिमा बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गयी है। बताया जा रहा है कि मंदिर के अंदर का शिवलिंग और अन्य प्रतिमा क्षत-विक्षत हो गया है। आग में मंदिर के आसपास की दो-तीन दुकानें भी जलकर खाक हो गयी है। हालांकि, आग कैसे लगी, इसके बारे में किसी के पास कोई पुख्ता जानकारी नहीं है। स्थानीय लोग शरारती तत्वों के द्वारा आग लगाने की बात कहकर जमकर बवाल काट रहे हैं।
सुबह तीन बजे लगी मंदिर में आग
आसपास के लोगों ने बताया कि सुबह करीब तीन बजे लोगों को मंदिर में आग लगने की सूचना मिली। मंदिर में आग लगने की सूचना मिलते ही लोगों में हड़कंप मच गया। पुलिस और प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर किसी तरह से आग को काबू करने की कोशिश की। मगर आग तेज होने के कारण दीवार गिर गयी। लोगों को आशंका है कि मंदिर में किसी ने जानबूझकर आग लगायी है। घटना के बाद आक्रोशित लोगों ने किशनगंज-बहादुरगंज पथ पर मस्तान चौक को जाम कर दिया। लोग आग लगाने वाले के विरूद्ध कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं।
सड़क पर लगी वाहनों की लंबी कतार
मंदिर में आग लगने के बाद लोगों ने किशनगंज-बहादुरगंज पथ को जाम कर दिया। इससे सड़क के दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतार लग गयी। मौके पर पहुंचे आला अधिकारियों ने जाम कर रहे लोगों को किसी तरह से समझाया। मगर लोग आरोपी की 24 घंटे में गिरफ्तारी और प्रशासन की देखरेख में सरकारी खर्च पर मंदिर के निर्माण और सीसीटीवी कैमरा एवं लाइट लगाने की मांग की करते रहे। बाद में किसी तरह लोगों को समझाकर 10 बजे तक जाम खत्म कराया गया।
कोरोना वायरस से अभी पूरी तरह पीछा भी नहीं छूटा है कि इसी बीच राज्य में नये वायरस एच3एन2 इंफ्लूएंजा का खतरा भी बढ़ गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ और लैब संचालकों की मानें, तो पिछले कुछ दिनों से इस वायरस से पीड़ित मरीज बढ़े हैं। हर दिन एक या दो मरीजों के सैंपल में एच3एन2 इंफ्लूएंजा की पुष्टि हो रही है। हालांकि यह वायरस बच्चों, किशोर और युवाओं के लिए उतना खतरनाक नहीं माना जा रहा है, लेकिन बीमार लोगों और बुजुर्गों के लिए यह घातक हो सकता है। चिंता की बात इसलिए भी बढ़ गयी है, क्योंकि देश में इस वायरस से दो लोगों की मौत हो गयी है। ऐसे में सावधानी और सतर्कता बरतना जरूरी है।
एच3एन2 इंफ्लूएंजा वायरस का लक्षण मौसमी बीमारी की तरह ही हैं। इसमें बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक से पानी गिरना, शरीर में दर्द, सिरदर्द, ठंड लगना और थकान जैसे ही लक्षण दिखायी देते है। रिम्स के फिजिशियन डॉ विद्यापति ने बताया कि एच3एन2 इंफ्लूएंजा वायरस की गंभीरता के बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं है, लेकिन कोमोरबिडिटी (गंभीर बीमारी से पीड़ित लोग) और बुजुर्गों को सावधान रहना चाहिए। मेडिसिन ओपीडी में 200 से 250 मरीज आ रहे हैं, जिसमें मौसमी बीमारी के 25 से 30 फीसदी मरीज है। एच3एन2 इंफ्लूएंजा की पुष्टि जांच के बाद ही की जा सकती है। इसकी चपेट में आनेवालों में खांसी ज्यादा दिनों तक रह रही है। वहीं, बुखार और अन्य समस्याएं कुछ दिन में ठीक हो जा रही हैं। सतर्कता बरतना इसलिए जरूरी है कि वायरस फेफड़ा तक नहीं पहुंचे, क्योंकि इसी के बाद यह घातक हो जाता है।
सदर अस्पताल में भी इंफ्लुएंजा के मरीज बढ़े
सदर अस्पताल में भी इंफ्लुएंजा के संक्रमण से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ गयी है। विगत 15 दिनों में मौसमी बीमारी से पीड़ित मरीजों की संख्या 200 से ज्यादा पहुंच गयी है। वरिष्ठ चिकित्सक डॉ अजय कुमार झा ने बताया कि संक्रमण से बचाव जरूरी है। बिना सलाह के एंटीबायोटिक का उपयोग नहीं करें। अस्पताल में डॉक्टर से संपर्क कर ही दवा लें। मास्क पहनने से खुद और अपने परिवार को सुरक्षित रख सकते हैं।
रिम्स में मशीन है, पर जांच किट नहीं
रिम्स में वायरस की जांच के लिए आरटीपीसीआर और जीनोम मशीन है, लेकिन वर्तमान समय में एच3एन2 इंफ्लूएंजा की जांच के लिए किट नहीं है। किट नहीं होने से गंभीर मरीजों में इंफ्लूएंजा का लक्षण होते हुए भी इसकी जांच नहीं की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग से कोई आदेश नहीं मिला है। किट उपलब्ध होने पर जांच की जायेगी। इधर, निजी अस्पताल में जांच का खर्च 1,400 से 4,500 रुपये तक है। 4,500 रुपये में एच3एन2 इंफ्लूएंजा के साथ-साथ स्वाइन फ्लू की जांच भी एक साथ होती है।
डब्ल्यूएचओ और स्वास्थ्य विभाग ने किया है आगाह
डब्ल्यूएचओ और स्वास्थ्य मंत्रालय ने एच3एन2 इंफ्लूएंजा को लेकर आगाह किया है। इससे संबंधित आदेश और गाइडलाइन जारी की गयी है। आइएमए ने भी सभी राज्य के डॉक्टरों को सतर्कता बरतने और अपने स्तर से व्यवस्था रखने का निर्देश दिया है। मंत्रालय द्वारा कहा गया है कि कोरोना संक्रमण अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, इसलिए कमजोर इम्युनिटी और बीमार लोगों पर विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। इससे संक्रमण के फैलाव का खतरा भी है।
इन गाइडलाइन का पालन आवश्यक
◆ कोरोना गाइडलाइन का पालन करें। ◆ मास्क का उपयोग करें और उसे पहनकर ही बाहर निकलें। ◆ सामान्य फ्लू होनेवाले व्यक्ति के संपर्क में आने से बचें। ◆ सर्दी और खांसी होने पर मास्क का उपयोग करें। ◆ जितना संभव हो, सामाजिक दूरी का पालन करें। ◆ ज्यादा जरूरत होने पर ही भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाये। ◆ लगातार हाथों की सफाई करें और सैनेटाइज करते रहें। ◆ शरीर में पानी की कमी नहीं होने दें। ◆ छींकते या खांसते समय मुंह और नाक को ढंक लेना चाहिए।
एच3एन2 इंफ्लूएंजा के लक्षण
◆ बुखार ◆ खांसी ◆ गले में खराश ◆ नाक से पानी गिरना ◆ शरीर और सिर में दर्द ◆ ठंड लगना और थकान ◆ सामान्य वायरस में भी आराम करें. ◆ पौष्टिक खाना को डायट में शामिल करें
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
मत घबरायें, नहीं है जानलेवा
लैब में प्रतिदिन एक से दो सैंपल में एच3एन2 इंफ्लूएंजा की पुष्टि हो रही है। दो महीना में 50 से 55 में इसकी पुष्टि हुई है। हालांकि इससे घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह उतना जानलेवा नहीं है। इसमें बीमारी ठीक होने में 12 से 15 दिनों का समय लग रहा है। बुजुर्ग और कोमोरबिडिटी वाले मरीजों का विशेष ख्याल रखना है।