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टाटा पावर जोजोबेड़ा में मजदूरों का आक्रोश: आर्थिक शोषण और दमनात्मक स्थानांतरण के खिलाफ गेट पर जोरदार प्रदर्शन

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जमशेदपुर: टाटा पावर के जोजोबेड़ा प्लांट में कार्यरत ठेका मजदूरों के सब्र का बांध अब टूट गया है। वर्षों से सेवा दे रहे श्रमिकों के आर्थिक शोषण और प्रबंधन की कथित ‘दमनकारी नीतियों’ के खिलाफ सोमवार को प्लांट के मुख्य द्वार पर सैकड़ों मजदूरों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। मजदूर यूनियन ने प्रबंधन पर स्थानीय आदिवासियों और मूलवासियों के हक मारने का गंभीर आरोप लगाया है।

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प्रमुख मुद्दे और यूनियन के आरोप

मजदूर नेता अंबुज ठाकुर के नेतृत्व में यूनियन ने प्लांट के भीतर चल रही अव्यवस्थाओं को उजागर किया है। यूनियन के मुख्य आरोप निम्नलिखित हैं:
* स्थायी बनाम ठेका मजदूर: कंपनी में जहां मात्र 100 स्थायी कर्मचारी हैं, वहीं लगभग 600 ठेका मजदूर 15-20 वर्षों से महत्वपूर्ण विभागों (जैसे- ईएसपी, बॉयलर, टरबाइन, रेलवे ट्रैक, और सिक्योरिटी) में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
* सुविधाओं का अभाव: मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा, ग्रेड रिवीजन, उचित ओवरटाइम भुगतान, भुगतान पर्ची (Pay Slip) और हाजिरी कार्ड जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है।
* भ्रष्टाचार का आरोप: चर्चा है कि टेंडर प्रक्रिया के दौरान ठेकेदारों से कथित वसूली की जाती है, जिसका सीधा असर मजदूरों के वेतन और सुविधाओं पर पड़ता है।

‘बदले की कार्रवाई’ से भड़का गुस्सा


यूनियन का दावा है कि 15 दिसंबर 2025 को उप श्रमायुक्त (DLC) को ज्ञापन सौंपने के बाद प्रबंधन ने दमनकारी रुख अख्तियार किया है। आरोप है कि आईआर मैनेजर सुभोजित घोष के निर्देश पर ठेकेदार आर.के. इरेक्टर ने दो सक्रिय मजदूरों—पवन कुमार और संजीव प्रसाद—का जोजोबेड़ा से साकची (पावर हाउस-7) स्थानांतरण कर दिया।

> “इन दोनों मजदूरों ने पूर्व में 30 दिनों तक लगातार काम कराए जाने के खिलाफ आवाज उठाई थी। यह स्थानांतरण सीधे तौर पर उनकी आवाज दबाने की कोशिश है।” — अंबुज ठाकुर, मजदूर नेता

प्रशासनिक हस्तक्षेप और आगामी वार्ता

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन और श्रम विभाग रेस हो गया है।
* अगली सुनवाई: उप श्रमायुक्त कार्यालय ने 15 जनवरी 2026 को डीएलसी कार्यालय में त्रिपक्षीय वार्ता निर्धारित की है।
* यूनियन की चेतावनी: यूनियन ने स्पष्ट किया है कि जब तक पवन कुमार और संजीव प्रसाद की जोजोबेड़ा में वापसी नहीं होती और मांगें पूरी नहीं की जातीं, आंदोलन जारी रहेगा।

अशांति की आशंका

यूनियन ने शांति बनाए रखने की अपील की है, लेकिन साथ ही आगाह किया है कि यदि प्रबंधन की ओर से कोई उकसावा होता है या वार्ता विफल रहती है, तो होने वाली किसी भी हड़ताल या औद्योगिक अशांति की पूरी जिम्मेदारी टाटा पावर प्रबंधन और संबंधित ठेकेदारों की होगी।