नई दिल्ली/बिजनेस डेस्क: आज के दौर में क्रेडिट कार्ड हमारी जीवनशैली का एक अहम हिस्सा बन चुका है। जेब में कैश न होने पर भी यह इमरजेंसी और खरीदारी में मददगार साबित होता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यदि किसी क्रेडिट कार्ड धारक की मृत्यु हो जाए, तो उसके बकाया बिल का भुगतान कौन करेगा? क्या बैंक उसके परिवार को पैसे देने के लिए मजबूर कर सकता है?

इंटरनेट पर इस सवाल को लेकर कई भ्रामक जानकारियां मौजूद हैं। आइए जानते हैं इस पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के स्पष्ट नियम क्या कहते हैं।
क्रेडिट कार्ड: एक ‘अनसिक्योर लोन’
क्रेडिट कार्ड को ‘अनसिक्योर लोन’ (Unsecured Loan) की श्रेणी में रखा जाता है। इसका मतलब है कि बैंक कार्ड जारी करते समय आपसे कोई संपत्ति गिरवी नहीं रखवाता। यह पूरी तरह से आपकी सैलरी और आपके क्रेडिट स्कोर (CIBIL) पर आधारित होता है।
क्या परिवार बिल भरने के लिए उत्तरदायी है?
RBI के नियमों के अनुसार, क्रेडिट कार्ड बिल भुगतान की प्राथमिक जिम्मेदारी उसी व्यक्ति की होती है जिसके नाम पर कार्ड जारी किया गया है।
- मजबूर नहीं कर सकता बैंक: यदि कार्ड धारक की मृत्यु हो जाती है, तो बैंक उसके माता-पिता, पति/पत्नी या बच्चों को बिल का भुगतान करने के लिए कानूनी रूप से मजबूर नहीं कर सकता।
- उत्तराधिकारी की भूमिका: बैंक केवल तभी परिवार से संपर्क कर सकता है यदि वे मृतक की संपत्ति के कानूनी उत्तराधिकारी (Legal Heir) हैं।
संपत्ति और बकाया वसूली का गणित
नियम यह कहता है कि बैंक मृतक की निजी संपत्ति को बेचकर या उसके उत्तराधिकारी को मिली संपत्ति से बकाया वसूल सकता है। लेकिन इसकी भी एक सीमा तय है।
उदाहरण से समझें नियम:
मान लीजिए किसी व्यक्ति पर क्रेडिट कार्ड का 11 लाख रुपये बकाया है और उसकी मृत्यु के बाद उसके उत्तराधिकारी (बेटे या बेटी) को विरासत में केवल 4 लाख रुपये की संपत्ति मिली है। ऐसी स्थिति में:
- बैंक केवल 4 लाख रुपये की ही वसूली कर सकता है।
- बाकी के 7 लाख रुपये बैंक को ‘Bad Debt’ (डूबत कर्ज) मानकर राइट-ऑफ करने पड़ेंगे।
- उत्तराधिकारी को अपनी निजी कमाई से बचा हुआ पैसा देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
निष्कर्ष
साफ है कि क्रेडिट कार्ड का बकाया व्यक्तिगत होता है। यदि मृतक के पास कोई संपत्ति नहीं है, तो बैंक परिवार के अन्य सदस्यों से वसूली नहीं कर सकता। हालांकि, क्रेडिट कार्ड लेते समय नियमों और शर्तों को ध्यान से पढ़ना और समय पर भुगतान करना हमेशा समझदारी भरा कदम होता है।










