जमशेदपुर : जमशेदपुर के बारीडीह में चल रहे भागवत कथा के तीसरे दिन पंडित नीरज मिश्रा के द्वारा बावन अवतार एवं नरसिंह अवतार का विस्तार रूप से वर्णन किया. उन्होंने बावन अवतार का वर्णन किया एवं साथ ही उसके साथ कथा का वर्णन किया गया. उन्होंने बताया कि अभी तक संसार में सबसे ज्यादा कष्ट कुंती ने पाया है. उनसे ज्यादा कष्ट किसी को नहीं हुआ है.

उन्होंने बताया कि जब परेशानी आती है तो हमें सब्र रखने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि जीवन में अनुराग एवं वैराग्य भी आता है. उस समय हमें सब्र रखने की जरूरत है. भजन से सराबोर पूरा माहौल भक्तिमय हुआ हुआ था एवं हमेशा कोई कार्य को धीरे धीरे करने की जरूरत है तो निश्चित रूप से हमेशा जीवन में सफल होंगे. जीवन में सबसे बड़ी विपत्ति है भगवान का भजन न होता हो तो, एवं अगर हो उसका महात्म्य भी बताया. कथा का वर्णन के उन्होंने भीष्मपितामह एवं द्रौपदी जी के बीच हुए संवाद का वर्णन किया एवं उन्होंने ये सब उस समय कहा जब भीष्म पितामह अपने अंतिम में शैय्या पर थे. उन्हें जो 54 दिनो से हो रहे.

कष्ट का वर्णन किया एवं सभी संत कहते है कभी गलत व्यक्ति के साथ नहीं रहना चाहिए एवं गलत तक अर्जित धन कभी ग्रहण नहीं करना चाहिए. उन्होंने 52 अवतार के जन्म होते ही साधारण तरीके से बैठे हुए और उन्होंने वर्णन किया कि भगवान का दर्शन पहले किया फिर उनका जन्म हुआ. द्वारिकाधीश जी ने आकर नाम परीक्षित दिया. युधिष्ठिर ने तीन बात परीक्षित को बताया कभी भी कोई दुश्मन भी तुम्हारे दरबार में आए तो उसे क्षमा करना, कभी किसी के साथ अन्याय होते मत देखना सृष्टि एवं सभी को एक समान इज्जत देना, परीक्षित जी उस समय खुश होकर नाचने लगे जब उन्हें मृत्युदंड देने की घोषणा दिया गया. उन्होंने बताया कि विधुर को साम्राज्य से बाहर कर दिया गया था. इस तरह उन्होंने कथा का वर्णन किया. श्रद्धालु पूरे झूमते नजर आ रहे थे. सभी मंत्रमुग्ध हमेशा हमें सम्मुख बैठकर कथा सुनना चाहिए. कथा के अंतिम में आरती एवं भोग लगाया गया और श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया. कार्यक्रम में मुख्य रूप से पश्चिम विधायक सरयू राय,जिला परिषद सदस्य डॉ कविता परमार , मंजू सिंह , सुधीर सिंह, पवन सिंह उपस्थित रहे. सफल बनाने में शत्रुघ्न प्रसाद, संजय गुप्ता,रूपा गुप्ता, स्वाति गुप्ता, अमर भूषण, देवाशीष झा आदि सक्रिय रहे











