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खादगढ़ा बस स्टैंड पर परिवहन विभाग का छापा: स्लीपर बसों में ‘स्लाइडर’ और ‘पार्टीशन’ पर लगी रोक, सुरक्षा नियमों में बड़ा बदलाव

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रांची | शनिवार, 17 जनवरी 2026

रांची: झारखंड की राजधानी रांची के खादगढ़ा बस स्टैंड पर जिला परिवहन विभाग ने स्लीपर बसों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बड़ा अभियान चलाया। केंद्रीय सड़क परिवहन संस्थान (CIRT) के कड़े दिशा-निर्देशों के मद्देनजर, उप परिवहन आयुक्त हरविंश पंडित के नेतृत्व में अधिकारियों ने बसों की गहन जांच की और नियमों का उल्लंघन करने वाले संचालकों को सख्त चेतावनी दी।

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21 बसों की जांच, अवैध एक्सटेंशन पर एक्शन

​अभियान के दौरान कुल 21 स्लीपर बसों की जांच की गई। परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन बसों में चेसिस (Chassis) को अवैध रूप से बढ़ाकर बॉडी बनाई गई है, उन्हें तत्काल सड़क से हटाया जाएगा। अब किसी भी बस का पंजीकरण तभी होगा जब उसके पास अधिकृत एजेंसी का फॉर्म-22/22A और विस्तृत लेआउट ड्राइंग (Layout Drawing) होगी।

बसों के भीतर तुरंत हटाने होंगे ये बदलाव

​निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पाया कि कई बसों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई थी। मौके पर ही निम्नलिखित निर्देश जारी किए गए:

  • स्लाइडर और पार्टीशन: स्लीपर बर्थ में लगे स्लाइडर (पर्दे या दरवाजे) और चालक के केबिन के पार्टीशन को तुरंत हटाने का आदेश दिया गया। कुछ बसों से मौके पर ही इन्हें हटवाया भी गया।
  • आपातकालीन द्वार: इमरजेंसी एग्जिट और रूफ हैच की स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए और उनमें कोई रुकावट नहीं होनी चाहिए।

अग्नि सुरक्षा: 1 महीने का अल्टीमेटम

​सड़क हादसों और बसों में आग लगने की घटनाओं को रोकने के लिए विभाग ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है:

  1. FDSS अनिवार्य: सभी स्लीपर बसों में फायर डिटेक्शन एंड सप्रेशन सिस्टम (FDSS) लगाने के लिए बस ऑपरेटरों को एक महीने का समय दिया गया है।
  2. फायर एक्सटिंग्विशर: हर बस में कम से कम 10 किलोग्राम क्षमता का अग्निशमन यंत्र (ग्रीन जोन में) होना अनिवार्य है।

वाहन मालिकों के साथ बैठक

​जांच के बाद खादगढ़ा बस स्टैंड पर बस मालिकों के साथ एक बैठक भी आयोजित की गई। जिला परिवहन पदाधिकारी अखिलेश कुमार और मोटरयान निरीक्षक विमल किशोर सिंह ने स्पष्ट किया कि यात्रियों की जान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वाहन स्वामियों ने विभागीय निर्देशों का पालन करने और तय समय-सीमा में आवश्यक बदलाव करने का आश्वासन दिया है।

​”हमारा उद्देश्य सड़क सुरक्षा को मजबूत करना है। स्लीपर बसों में यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है, और जो ऑपरेटर नियमों का पालन नहीं करेंगे, उनके विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”

हरविंश पंडित, उप परिवहन आयुक्त

संवाददाता, सिटी डेस्क