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संविधान केवल कानून नहीं, नागरिकों के अधिकारों की ढाल है: अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू

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जमशेदपुर | 26 जनवरी, 2026

​देश के 77वें गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर जमशेदपुर के वरिष्ठ अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू ने अधिवक्ता साथियों और देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए संविधान की गरिमा और लोकतांत्रिक मूल्यों पर विशेष ज़ोर दिया। उन्होंने इस दिन को केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और संवैधानिक प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया।

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डॉ. अंबेडकर के विजन और संवैधानिक मूल्यों पर चर्चा

​अपने संबोधन में सुधीर कुमार पप्पू ने कहा कि 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ हमारा संविधान लगभग तीन वर्षों के गहन मंथन का परिणाम है। उन्होंने भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने देश को न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व जैसे मूलभूत सिद्धांत दिए, जो आज भी भारत की आत्मा के रूप में जीवित हैं।

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प्रमुख विचार: अधिकारों के साथ कर्तव्यों का समन्वय

​एक अधिवक्ता के रूप में अपनी बात रखते हुए उन्होंने कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डाला:

  • संविधान की महत्ता: संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक के अधिकारों की ढाल और कर्तव्यों की दिशा है।
  • लोकतंत्र की सुरक्षा: जब तक देश में संविधान और कानून का शासन सुरक्षित है, तभी तक हमारा लोकतंत्र अटूट रहेगा।
  • विश्वगुरु बनने का मार्ग: देश की प्रगति केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि जब प्रत्येक जागरूक नागरिक अपने अधिकारों के साथ कर्तव्यों को समझेगा, तभी भारत विश्वगुरु बनेगा।

राष्ट्रीय गौरव और संकल्प

​कर्तव्य पथ पर निकलने वाली 30 भव्य झाँकियों (17 राज्य/केंद्रशासित प्रदेश और 13 मंत्रालय) का उल्लेख करते हुए उन्होंने भारत की सांस्कृतिक विविधता और एकता को नमन किया। उन्होंने सभी अधिवक्ताओं और नागरिकों से अपील की कि वे:

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  1. ​संविधान का सदैव सम्मान करें।
  2. ​कानून के शासन को सुदृढ़ बनाने में सहयोग दें।
  3. ​ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें।

“आइए, हम सब मिलकर यह प्रण लें कि संविधान की गरिमा को अक्षुण्ण बनाए रखेंगे और भारत को प्रगति के शिखर पर पहुँचाएंगे।” — सुधीर कुमार पप्पू, अधिवक्ता (जमशेदपुर)