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टाटा स्टील की ‘ग्रीन माइनिंग’ की ओर बड़ी छलांग: वेस्ट बोकारो में पहला इलेक्ट्रिक ट्रक लॉन्च, 3000 पेड़ों के बराबर देगा लाभ

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वेस्ट बोकारो/जमशेदपुर | 22 जनवरी, 2026

​पर्यावरण संरक्षण और वर्ष 2045 तक ‘नेट जीरो’ (Net Zero) कार्बन उत्सर्जन के अपने महात्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में टाटा स्टील ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। कंपनी ने अपने वेस्ट बोकारो डिवीजन के वाशरी-3 कॉम्प्लेक्स में रॉ मैटेरियल डिवीजन (RMD) के इतिहास के पहले इलेक्ट्रिक ट्रक को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

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​जीरो-एमिशन तकनीक: प्रदूषण पर प्रहार

​मोंट्रा इलेक्ट्रिक और टाइकून इंडस्ट्रीज के सहयोग से पेश किया गया यह ट्रक पूरी तरह से अत्याधुनिक ‘जीरो-एमिशन’ तकनीक पर आधारित है। यह पहल न केवल टाटा स्टील के लिए बल्कि भारतीय खनन (Mining) क्षेत्र के लिए भी एक मील का पत्थर मानी जा रही है।

पर्यावरण पर प्रभाव के आंकड़े:

  • कार्बन कटौती: एक अकेला इलेक्ट्रिक ट्रक प्रति वर्ष वातावरण से लगभग 64 टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO_2) कम करेगा।
  • पेड़ों से तुलना: यह प्रभाव इतना व्यापक है कि यह 3,000 पेड़ों द्वारा साल भर में किए जाने वाले पर्यावरण शुद्धिकरण के बराबर है।
  • ध्वनि प्रदूषण: इलेक्ट्रिक इंजन होने के कारण खदानों में होने वाले भारी शोर (Noise Pollution) में भी भारी कमी आएगी।

​भविष्य की योजना: डीजल मुक्त खदानें

​कोल बेनीफिकेशन के चीफ बीवी. सुधीर ने बताया कि यह कदम भारत के ‘लो-कार्बन इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम’ की दिशा में एक क्रांतिकारी बदलाव है। फिलहाल, इस ट्रक का गहन ट्रायल किया जाएगा।

आगामी रणनीति:

  1. क्षमता का आकलन: आने वाले महीनों में ट्रक की कार्यक्षमता और भारी लोड सहने की शक्ति का परीक्षण होगा।
  2. चरणबद्ध विस्तार: सफल ट्रायल के बाद, खदानों में उपयोग होने वाले पारंपरिक डीजल वाहनों को धीरे-धीरे हटाकर उनकी जगह इलेक्ट्रिक वाहनों की फ्लीट तैनात की जाएगी।