झारखंड में शराब घोटाला सिर्फ प्लेसमेंट एजेंसियों के जरिए ही नहीं हुआ। थोक कारोबार का लाइसेंस लेने वाली कंपनी मेसर्स ओम साईं बिवरेजेज ने उत्पाद विभाग, जेएसीबीसीएल के अधिकारियों को प्रभाव में लेकर देशी और विदेशी ब्रांड की सप्लायी मेसर्स भाटिया वाइंस, छत्तीसगढ़ डिस्टिलरी लिमिटेड को दी थी।

इन कंपनियों के साथ थोक शराब बिक्री की 2022 की नीति का पालन नहीं किया गया। रोमियो व महुआ नाम जैसी खराब क्वालिटी की शराब की बिक्री कर 136 करोड़ का नुकसान कराया गया।
शराब घोटाले की जांच में यह बात सामने आयी है कि भाटिया वाइंस के मालिक भूपेंद्र पाल सिंह भाटिया, छत्तीसगढ़ डिस्टिलरी के निदेशक नवीन केडिया ने जेएसीबीएल के द्वारा किसी तरह का टेंडर निकाले जाने के पहले ही सिर्फ लिखित आवेदन देकर देशी व विदेशी शराब की सप्लायी का काम हासिल कर लिया। नियम के अनुसार, शराब की आपूर्ति के लिए जेएसबीसीएल को टेंडर करना चाहिए था, लेकिन ऐसा किए बगैर सिर्फ लिखित आवेदन लेकर तत्कालीन उत्पाद सचिव विनय कुमार चौबे के प्रभाव से शराब के तय ब्रांड की आपूर्ति का काम हासिल कर लिया गया।
साजिशन तय ब्रांड की सप्लाई की
जांच में यह बात भी सामने आयी है कि होलसेल टेंडर लेने वाले मेसर्स ओम साई बिवरेजेज व दिशिता वेंचर्स ने उन्हीं शराब निर्माताओं की शराब की बिक्री की, जिनके द्वारा कमीशन दिया जाता था। यही वजह है कि इस दौरान पॉपुलर ब्रांड की शराब दुकानों में उपलब्धता नहीं होती थी। इस तरह कुल 136 करोड़ के राजस्व का नुकसान राज्य सरकार को उठाना पड़ा था।
सिद्धार्थ सिंघानिया ने पूछताछ में क्या स्वीकारा
एसीबी ने शराब घोटाले की जांच में यह पाया है कि मेसर्स ओम साई बिवरेजेज के मालिक अतुल सिंह व मुकेश मनचंदा के जरिए अवैध उगाही शराब आपूर्ति करने वाली कंपनियों की करायी गई। विनय कुमार चौबे के करीबी रहे सिद्धार्थ सिंघानिया ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि नवीन केडिया व भूपेंद्रपाल सिंह की कंपनियों के देशी व विदेशी शराब के प्रति कार्टून पर 300 से 600 रुपये की अवैध उगाही की जाती थी। महुआ व रोमिया नाम के ब्रांड से ये वसूली मेसर्स ओम साई बिवेरेजेज व दिशित वेंचर्स के जरिए की जाती थी। वसूली गई अवैध राशि विनय कुमार चौबे व अरुणपति त्रिपाठी को भेजी जाती थी।










