चाकुलिया (जमशेदपुर): जब इरादे फौलादी हों और मन में कुछ कर गुजरने का जुनून हो, तो एक अकेली महिला भी पूरे तंत्र और माफियाओं के खिलाफ खड़ी हो सकती है। झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के मुटुरखाम गाँव की रहने वाली जमुना टुडू, जिन्हें दुनिया आज ‘लेडी टार्जन’ के नाम से जानती है, इसी जीवटता की मिसाल हैं।

संघर्ष से पद्मश्री तक का सफर
ओडिशा के एक छोटे से गाँव में जन्मी जमुना को बचपन से ही प्रकृति से प्रेम था। 1998 में चाकुलिया में शादी के बाद जब उन्होंने देखा कि लकड़ी माफिया बेरहमी से जंगल काट रहे हैं, तो उन्होंने इसे रोकने का संकल्प लिया। एक राजमिस्त्री की पत्नी और खुद हेल्पर के रूप में काम करने वाली जमुना ने घर की आर्थिक तंगी के बावजूद हार नहीं मानी।
जंगल बचाओ अभियान: जान की बाजी लगाकर सुरक्षा
जमुना टुडू ने केवल पेड़ों को ही नहीं बचाया, बल्कि लकड़ी माफियाओं के दांत खट्टे कर दिए। उन पर कई हमले हुए, धमकियां मिलीं, लेकिन उन्होंने कानून का सहारा लिया और कई अपराधियों को जेल भिजवाया।
- वन सुरक्षा समितियां: उन्होंने 500 से अधिक वन सुरक्षा समितियां बनाईं।
- विशाल नेटवर्क: आज उनकी टीम में 10,000 से अधिक सदस्य हैं, जिनमें महिलाओं की बड़ी भागीदारी है।
- अनोखी पहल: वह हर साल रक्षाबंधन पर पेड़ों को राखी बांधती हैं और गाँव में बच्चे के जन्म पर 18 पौधे उपहार में देती हैं।

राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान
जमुना टुडू की निस्वार्थ सेवा को देखते हुए भारत सरकार और कई प्रतिष्ठित संस्थाओं ने उन्हें सम्मानित किया है:
- 2019: तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा पद्मश्री से सम्मानित।
- मन की बात: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें ‘लेडी टार्जन’ की उपाधि दी।
- अन्य सम्मान: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा भी उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाजा गया है।
| वर्ष | पुरस्कार/सम्मान | प्रदानकर्ता |
|---|---|---|
| 2012 | Awakened India Agents of Change | जयराम रमेश (पूर्व केंद्रीय मंत्री) |
| 2014 | स्त्री शक्ति अवार्ड | सुभाष घई (फिल्म निर्देशक) |
| 2017 | Women Transforming India | नीति आयोग एवं स्मृति इरानी |
| 2019 | पद्मश्री अवार्ड | रामनाथ कोविंद (पूर्व राष्ट्रपति) |
| 2023 | राष्ट्रीय नेतृत्व पुरस्कार | द्रौपदी मुर्मू (माननीय राष्ट्रपति) |
एक मलाल: राज्य सरकार की बेरुखी
इतनी बड़ी उपलब्धियों के बावजूद, जमुना टुडू को इस बात का मलाल है कि उन्हें अब तक झारखंड सरकार से वह सम्मान या सहायता राशि नहीं मिली, जो अन्य राज्यों में ऐसे नायकों को दी जाती है। 50 की उम्र की ओर बढ़ रही जमुना आज भी अपनी पढ़ाई जारी रखे हुए हैं और इंटर की परीक्षा देने की तैयारी कर रही हैं।
तीसरी धारा न्यूज डेस्क











