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जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल में शव भी सुरक्षित नहीं, कुतर रहे चूहे

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जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल परिसर की पार्किंग में मंगलवार की देर रात एक भिखारी की मौत हो गयी. रात भर शव पार्किंग में पड़ी रही. उसके हाथ की एक उंगली को चूहे ने कुतर दिया था.

बुधवार की सुबह जब होमगार्ड के जवानों ने शव देखा, तो इसकी जानकारी अधीक्षक डॉ रवींद्र कुमार को दी. उसके बाद उन्होंने शव को शीतगृह में रखवा दिया.

शव के हाथ का नाखून नोचा हुआ था

अस्पताल उपाधीक्षक डॉ नकुल चौधरी ने बताया कि शव के हाथ का नाखून नोचा हुआ था.यह कैसे हुआ इस बारे में कहा नहीं जा सकता है. होमगार्ड के जवानों ने बताया कि मृतक भिखारी था. रात-दिन पार्किंग में पड़ा रहता था.

पहले भी हो चुकी है घटना

इससे पहले 30 नवंबर, 2015 को जुगसलाई के एक व्यक्ति के शव की हथेली को चूहों ने कुतर दिया था. वहीं 28 सितंबर, 2018 को एक मरीज की इमरजेंसी में मौत हो गयी थी. उसका शव अस्पताल के शौचालय के पास पड़ा मिला था. उस लाश के चहरे को चूहों ने कुतर दिया था. इस मामले में इमरजेंसी के दो नर्सों को शोकॉज भी हुआ था.

एमजीएम के शीतगृह से तीन अज्ञात शवों का हुआ अंतिम संस्कार

एमजीएम अस्पताल के शीतगृह में लगभग 15 दिनों से रखे तीन अज्ञात शव का बुधवार को पोस्टमार्टम कराकर साकची पुलिस व अस्पताल प्रबंधन ने अंतिम संस्कार कराया. अज्ञात होने के कारण उसका अंतिम संस्कार भी नहीं किया जा रहा था. शव से उठने वाली दुर्गंध से मरीज परेशान होते थे. उपायुक्त की पहल पर बुधवार को तीन शवों का अंतिम संस्कार कराया गया जबकि चार शवों का अंतिम संस्कार कराना बाकी है. नियम के अनुसार किसी भी अज्ञात शव को 72 घंटे रखने के बाद पुलिस की अनुमति से उस शव का अंतिम संस्कार कर दिया जाता था. जो पुलिस केस होता था जैसे सड़क दुर्घटना या अन्य किसी कारण से मौत होती है. तो पोस्टमार्टम के बाद शव का अंतिम संस्कार होता था. अब अज्ञात शव का भी पोस्टमार्टम के बाद संस्कार होता है.

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