रांची/रामगढ़: राजधानी रांची के धुर्वा थाना क्षेत्र (मल्लार टोली मौसीबाड़ी) से लापता दो सगे भाई-बहनों, पांच वर्षीय अंश और चार वर्षीय अंशिका के मामले में बड़ी सफलता हाथ लगी है। घटना के 13वें दिन बुधवार को रजरप्पा पुलिस ने दोनों मासूमों को चितरपुर के पहाड़ी इलाके से सकुशल बरामद कर लिया। इस पूरे बचाव अभियान में स्थानीय युवाओं की सतर्कता और तत्परता ने मुख्य भूमिका निभाई।

स्थानीय युवाओं की मुस्तैदी लाई रंग
जानकारी के अनुसार, मंगलवार की रात बच्चों के चितरपुर क्षेत्र में होने की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही स्थानीय युवा—डब्लू साहू, सचिन कुमार, सुनील कुमार, सन्नी नायक और अंशु कुमार—ने सक्रियता दिखाई और पूरी रात इलाके में गश्त व खोजबीन जारी रखी।
बुधवार सुबह करीब 7:30 बजे चितरपुर लाइन पार स्थित एक पहाड़ी क्षेत्र के घर के बाहर दोनों मासूमों को बैठा देखा गया। युवाओं ने तत्काल इसकी जानकारी रजरप्पा पुलिस को दी, जिसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर बच्चों को अपने संरक्षण में लिया।
संदेही हिरासत में, जांच जारी
पुलिस ने मौके से बच्चों के साथ मौजूद एक महिला और एक पुरुष को हिरासत में लिया है। बरामद बच्चों और पकड़े गए संदिग्धों को आगे की पूछताछ और कानूनी कार्रवाई के लिए रामगढ़ एसपी कार्यालय ले जाया गया है। पुलिस अब इस अपहरण के पीछे के असली मकसद की गंभीरता से जांच कर रही है।
देशव्यापी बन गया था यह मामला
अंश और अंशिका की गुमशुदगी के बाद पुलिस प्रशासन पर भारी दबाव था। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए कई बड़े कदम उठाए गए थे:
- SIT का गठन: रांची पुलिस ने बच्चों की तलाश के लिए विशेष जांच दल (SIT) बनाया था, जिसने बिहार और बंगाल सहित 18 राज्यों में छापेमारी की।
- इनाम की घोषणा: रांची पुलिस ने बच्चों का सुराग देने वालों के लिए 4 लाख रुपए और पंचायत संघ ने 21 हजार रुपए के इनाम की घोषणा की थी।
- बचपन बचाओ आंदोलन: देशभर के 439 जिलों में संगठनों और लीगल वॉलेंटियर्स को सक्रिय किया गया था।
- राजनीतिक व प्रशासनिक दबाव: राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग ने डीजीपी को नोटिस जारी किया था, वहीं 13 जनवरी को भाजपा ने इस मामले को लेकर रांची एसएसपी कार्यालय का घेराव भी किया था।
परिजनों ने ली राहत की सांस
पिछले 13 दिनों से गहरे सदमे और डर में जी रहे परिजनों ने बच्चों के सकुशल मिलने पर ईश्वर और पुलिस-प्रशासन का आभार व्यक्त किया है। इलाके में उन युवाओं की जमकर प्रशंसा हो रही है जिन्होंने अपनी नींद त्याग कर रातभर बच्चों की सुरक्षा के लिए गश्त लगाई।











