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बर्मामाइंस में प्रदूषण का कहर: जन सत्याग्रह ने मुख्य सचिव के नाम सौंपा मांग पत्र, TSUIL और टाटा स्टील के प्लांट बंद करने की मांग

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जमशेदपुर: लौहनगरी के बर्मामाइंस क्षेत्र में वायु प्रदूषण की विकराल स्थिति को देखते हुए सामाजिक संस्था ‘जन सत्याग्रह’ ने कड़ा रुख अपनाया है। संस्था ने आज उपायुक्त (DC) पूर्वी सिंहभूम के माध्यम से झारखंड के मुख्य सचिव को एक मांग पत्र सौंपा। इसमें क्षेत्र में प्रदूषण फैला रही बड़ी कंपनियों के प्लांटों पर कार्रवाई की मांग की गई है।

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बैचिंग प्लांट हटने के बाद भी स्थिति जस की तस

​संस्था ने प्रशासन का ध्यान इस ओर खींचा कि कुछ समय पहले जिला प्रशासन के आदेश पर कुछ छोटे बैचिंग प्लांट हटाए गए थे, लेकिन इसके बावजूद बर्मामाइंस में वायु प्रदूषण के स्तर में कोई सुधार नहीं हुआ है।

इन दो बड़े प्लांटों पर कार्रवाई की मांग

​मांग पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि वर्तमान में प्रदूषण के दो मुख्य कारक हैं:

  1. TSUIL (JUSCO): ट्यूब कंपनी के बगल में संचालित बैचिंग प्लांट।
  2. टाटा स्टील: संचालित WRP क्रशर प्लांट।

​संस्था का आरोप है कि ये दोनों प्लांट नियमों की अनदेखी कर रहे हैं और स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।

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‘नो एंट्री’ में स्लैग ढुलाई और धूल का संकट

​जन सत्याग्रह ने एक और गंभीर मुद्दा उठाया है। उन्होंने बताया कि बर्मामाइंस HSM गेट और ट्यूब कंपनी के बगल से निकलने वाली स्लैग लदी गाड़ियां ‘नो एंट्री’ (No Entry) के समय भी बेखौफ चलती हैं। इन वाहनों से उड़ने वाली धूल और स्लैग के कण सड़कों पर गिरते हैं, जिससे राहगीरों और स्थानीय लोगों का जीना मुहाल हो गया है।

संस्था की चेतावनी

​संस्था के प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रदूषण फैलाने वाले इन प्लांटों और अवैध ढुलाई पर जल्द ही नियमानुसार कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आंदोलन को और उग्र करेंगे। उन्होंने मांग की है कि पर्यावरण और जनस्वास्थ्य की रक्षा के लिए इन इकाइयों को तत्काल बंद किया जाए।