एक नई सोच, एक नई धारा

झारखंड के मजदूरों की दर्दनाक दास्तां: तमिलनाडु में बंधक बने 60 मजदूर जान बचाकर भागे, चक्रधरपुर स्टेशन पर भी झेलनी पड़ी जिल्लत

n70994324217771277247211453e5a71ad1d7125e6ae72a0900d7ffc3203b7534e87bb0e2a16ca171f0375a

चक्रधरपुर: तमिलनाडु के नमक्कल अन्नागुर स्थित ‘आलिया मिल्स प्राइवेट लिमिटेड’ में बंधक बनाकर रखे गए झारखंड के करीब 60 मजदूर शनिवार को किसी तरह अपनी जान बचाकर चक्रधरपुर स्टेशन पहुंचे। एर्नाकुलम-टाटा एक्सप्रेस से पहुंचे इन मजदूरों की आपबीती सुनकर हर कोई दंग रह गया। मजदूरों ने न केवल मिल मालिकों पर शोषण का आरोप लगाया, बल्कि झारखंड सरकार के दावों की भी पोल खोल दी।n70994324217771277247211453e5a71ad1d7125e6ae72a0900d7ffc3203b7534e87bb0e2a16ca171f0375a

एजेंटों ने दिखाया था ‘सब्जबाग’, मिली मारपीट और कैद

​मजदूरों ने बताया कि ओडिशा के एजेंट चंदन और सुशील ने उन्हें बेहतर वेतन और सुविधाओं का लालच देकर तमिलनाडु भेजा था। वहां पहुंचने पर स्थिति बिल्कुल उलट थी। जब मजदूरों ने खराब खाने और कम वेतन का विरोध किया, तो उनके साथ मारपीट की गई और उन्हें मिल के अंदर बंधक बना लिया गया। बिना मजदूरी दिए ही उनसे जबरन काम कराया जा रहा था।

सरकार के दावों की निकली हवा: ‘मदद’ के नाम पर सिर्फ सोशल मीडिया पर आदेश

​हैरानी की बात यह है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया (X) पर पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त (DC) और माइग्रेशन सेल को इन मजदूरों की मदद करने का निर्देश दिया था। 23 अप्रैल को प्रशासन ने दावा किया था कि सभी को सुरक्षित और ससम्मान वापस लाया जा रहा है।WhatsApp Image 2026 03 07 at 17.22.01

  • जमीनी हकीकत: मजदूरों का कहना है कि उन्हें सरकार की ओर से कोई सहायता नहीं मिली। वे खुद मिल से भाग निकले और बचे-कुचे पैसों से TTE को जुर्माना भरकर किसी तरह ट्रेन में सवार हुए।

सफर में भी शोषण: रेलवे कर्मियों और TTE पर दुर्व्यवहार का आरोप

​मजदूरों ने बताया कि रास्ते भर रेलवे के पेंट्रीकार मैनेजर और TTE ने उनके साथ बुरा बर्ताव किया। हद तो तब हो गई जब वे चक्रधरपुर स्टेशन पहुंचे। वहां भी TTE ने उन्हें घेर लिया और पैसों की मांग करने लगे, जबकि मजदूर पहले ही जुर्माना दे चुके थे। घंटों तक उन्हें रोककर रखा गया, जिसे बाद में स्थानीय पत्रकारों के हस्तक्षेप के बाद छोड़ा गया।

भूखे-प्यासे पहुंचे अपने वतन

​मजदूरों की जेब में एक रुपया भी नहीं बचा था कि वे कुछ खा सकें। भूखे-प्यासे और डरे हुए इन मजदूरों ने बताया कि एजेंटों ने उन्हें चक्रधरपुर पहुंचने पर ‘अंजाम भुगतने’ की धमकी भी दी है।

​इस घटना ने एक बार फिर झारखंड सरकार के उन वादों पर सवालिया निशान लगा दिया है, जिसमें प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा और राज्य में ही रोजगार देने की बात कही जाती है। फिलहाल सभी मजदूर अपने घर जाने की कोशिश में जुटे हैं, लेकिन उनके चेहरे पर खौफ और सरकार के प्रति नाराजगी साफ झलक रही है।

रिपोर्ट: तीसरी धारा न्यूज

error: Content is protected !!